ग्लोबल तनाव का असर: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स लुढ़का और निवेशकों को बड़ा झटका


नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सीधे भारतीय शेयर बाजार पर दिखाई देने लगा है। लगातार तीन दिनों की तेजी के बाद गुरुवार को बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे भारतीयों को तगड़ा झटका लगा। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक बाजारों में कमजोरी ने घरेलू बाजार की धार कमजोर कर दी। इसके अलावा अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा नीतिगत नीतियों में कोई बदलाव न करने से भी भारतीयों की धारणा प्रभावित हुई।

सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट, भारतीयों के डूबे लाखों करोड़

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 3.26 प्रतिशत यानी 2,496.89 अंक की भारी गिरावट के साथ 74,207.24 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी 775.65 अंक यानी 3.26 प्रतिशत टूटकर 23,002.15 के स्तर पर आ गया। दिन के दौरान बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहां सेंसेक्स 73,950 के निचले स्तर तक फिसल गया।

इस गिरावट का सबसे बड़ा असर इक्विटी की कैपिटल पर पड़ा। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 12 लाख करोड़ रुपये रहा। 438 लाख करोड़ से गिरकर लगभग 426 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह गिरावट इक्विटी के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई।

हर सेक्टर लाल निशान में, ऑटो और रियल्टी सबसे ज्यादा प्रभावित

गुरुवार का कारोबार लगभग सभी सेक्टर के लिए नुकसानदायक रहा। निफ्टी ऑटो इंडेक्स में सबसे ज्यादा 4.25% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा रियल्टी, फाइनेंस सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, आईटी और मेटल सेक्टर में भी 3% से ज्यादा की गिरावट देखी गई। एफएमसीजी सेक्टर भी दबाव में रहा।

निफ्टी 50 के लगभग सभी शेयर लाल निशान में बंद हुए। सिर्फ ONGC ने 1.55% की बढ़त के साथ बाजार में बढ़त दिखाई, जिसका कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रहा।

क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? समझिए कारण

बाजार में इस भारी गिरावट के पीछे कई बड़े कारण रहे

मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष से वैश्विक अनिश्चितता

कच्चे तेल की हालत में तेज उछाल

फेडरल रिजर्व की नीतिगत सख्ती की धमकी

विदेशी इंजीनियरों की बिकवाली

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि जब तक वैश्विक परिस्थितियां स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

आगे क्या? इंजीनियरों के लिए संकेत

विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में सावधानी गन्ने की जरूरत है। लंबी अवधि के इंजीनियरों के लिए यह गिरावट अवसर भी बन सकती है, लेकिन शॉर्ट टर्म में अस्थिरता बनी रह सकती है। कच्चे तेल की हालत और वैश्विक घटनाओं पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा