नवरात्रि व्रत में क्यों खास है कुट्टू? ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखने का आसान तरीका


नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में व्रत रखने का समय सही खान-पान बेहद जरूरी है, ताकि शरीर को ऊर्जा और पोषण दोनों मिले रहें। ऐसे में ‘कुट्टू का आटा’ फलाहार का सबसे लोकप्रिय और क्लासिक संस्करण सामने आया है। यह अनाज नहीं, बल्कि एक बीज है, जो कि स्वास्थ्य के लिए विटामिन-मुक्त होने के कारण बेहद हानिकारक माना जाता है।

ऊर्जा से परिपूर्णता, ऊर्जा से भरपूर सक्रियता

कुट्टू में प्रचुर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन पाए जाते हैं, जो व्रत के दौरान तत्काल ऊर्जा आपूर्ति का काम करते हैं। इससे कमजोरी और थकान महसूस नहीं होती और आप गंभीर सक्रिय रहते हैं।

कंपनियों का निर्माण मजबूत होता है

कुट्टू में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम जोड़ों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। व्रत के दौरान जब समग्रता सीमित होती है, तब यह शरीर को आवश्यक वस्तुएं प्रदान करता है।

दिल और खून के लिए बढ़िया

कुट्टू में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट दिल को स्वस्थ रखते हैं और खराब एंटीऑक्सीडेंट को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही यह ब्लड मॉड्यूल को कंट्रोल में रखने में भी सहायक होता है।

अचाना रिश्ता

सबसे अच्छा कुट्टू पाचन तंत्र के लिए अत्यंत उपयोगी है। इससे कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत मिलती है और पेट पर असर पड़ता है।

वॉल्टेज में भी सुरक्षित

कुट्टू का ग्लाइसेमिक वैज्ञानिक कम होता है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ता है। इसका कारण यह है कि इसे श्रमिकों के रोगी भी सीमित मात्रा में खा सकते हैं।

वजन नियंत्रण में सहायक

कुट्टू खाने से लंबे समय तक पेट भरा रहता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और ज्यादा खाने से बचाव होता है। इससे वजन नियंत्रित में रहता है।

व्रत में कैसे करें सेवन?

कुट्टू से कई स्वादिष्ट और सब्जी व्यंजन बनाये जा सकते हैं:

कुट्टू की पूरी और पराठा
पकौड़ी और टुकड़े
खेड और हलवा
कुट्टू की कढ़ी
व्रत में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग करें, जिससे पाचन और बेहतर होता है।

नवरात्रि के व्रत में कुट्टू का सिर्फ स्वाद नहीं मिलता, बल्कि शरीर को पूरा पोषण भी मिलता है। यह हड्डियों को मजबूत बनाता है, रक्त को नियंत्रित करता है और पाचन को मापता है—यानी व्रत के दौरान स्वास्थ्य का पूरा होना जरूरी है।