यह बदलाव हर ट्रेडर पर लागू नहीं होगा। कंपनी के अनुसार, यह बढ़ा हुआ शुल्क केवल उन निवेशकों पर लगेगा जो Securities and Exchange Board of India के नियमों का पालन नहीं करते। सेबी के नियम के मुताबिक, किसी भी ट्रेड के लिए कुल मार्जिन का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा कैश या कैश इक्विवेलेंट के रूप में होना जरूरी है
अब तक Zerodha ऐसे मामलों में ग्राहकों की कमी को अपने फंड से पूरा कर देता था और इसके लिए अलग से कोई चार्ज नहीं लेता था। लेकिन अब कंपनी इस सुविधा की लागत वसूल करेगी। यानी अगर कोई ट्रेडर पर्याप्त कैश मार्जिन नहीं रखता और ब्रोकर के फंड का इस्तेमाल करता है, तो उसे ₹40 प्रति ऑर्डर देना होगा
हालांकि कंपनी ने यह भी साफ किया है कि इस फैसले का असर इंट्राडे इक्विटी ट्रेडिंग पर नहीं पड़ेगा। यह बदलाव केवल F&O यानी डेरिवेटिव ट्रेडिंग तक सीमित रहेगा
इस फैसले के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। एक तरफ बाजार में पहले से ही डेरिवेटिव ट्रेडिंग वॉल्यूम पर दबाव है, वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT बढ़ाने का प्रस्ताव भी लागत बढ़ाने वाला है। बजट 2026 में फ्यूचर्स पर STT को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस पर 0.10 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने की बात कही गई है
कंपनी के सह संस्थापक और सीईओ Nithin Kamath ने भी इस फैसले को जरूरी बताया है। उनका कहना है कि ग्राहकों के कोलेटरल में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है और कंपनी को मार्जिन फंडिंग के लिए उधार लेना पड़ सकता है जिसकी लागत होती है। ऐसे में यह कदम कंपनी के लिए जरूरी हो गया था
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Zerodha का यह फैसला पूरे ब्रोकरेज इंडस्ट्री पर असर डाल सकता है। अगर दूसरे ब्रोकर भी इसी राह पर चलते हैं तो आने वाले समय में ट्रेडिंग और महंगी हो सकती है
यह बदलाव उन ट्रेडर्स के लिए चेतावनी है जो ज्यादा लीवरेज लेकर ट्रेड करते हैं। अब उन्हें अपनी रणनीति बदलनी होगी और पर्याप्त कैश मार्जिन रखना होगा वरना ट्रेडिंग की लागत सीधे दोगुनी हो जाएगी
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