कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के लिए सात सीटों पर उम्मीदवार बदले।


नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारी अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है और सियासी गतिविधियाँ तेज हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस ने दूसरे चरण के चुनाव के लिए अपनी उम्मीदवार सूची में फेरबदल किया है। महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी नई सूची में कुल आठ उम्मीदवारों के नाम शामिल किए गए हैं, जिनमें से सात पुराने उम्मीदवारों की जगह ले रहे हैं। हावड़ा सीट पर पार्टी ने प्रणब भट्टाचार्य को नया उम्मीदवार घोषित किया है।

कांग्रेस ने नाकाशिपारा से गोलाम किबरिया मंडल की जगह ताहिर एसके को, छपरा से रहीदुल मंडल की जगह आसिफ खान को और मिनाखां (एससी) से बरनाली नस्कर की जगह आसिफ खान को टिकट दिया है। मंदिर बाजार (एससी) से कौशिक बैद्य के स्थान पर चांद सरदार, रैना (एससी) से अनिक साहा के स्थान पर पम्पा मलिक, केतुग्राम से मोफिरुल कासिम के स्थान पर एसके अबू बक्कर और औसग्राम (एससी) से निशा बराल के स्थान पर तापस बराल को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने इस बदलाव को चुनावी रणनीति के तहत किया है और सभी नए उम्मीदवारों को विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए मैदान में उतारा गया है।

इस बीच, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे। पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर वोटिंग होगी। चुनाव नतीजों की घोषणा 4 मई को की जाएगी। चुनाव के मद्देनजर राज्य सरकार ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। इस बार अब तक की सबसे बड़ी अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। लगभग 2,400 अर्धसैनिक कंपनियों के 2,40,000 जवानों को तैनात किया गया है।

महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी इस चुनाव में रिकॉर्ड स्तर पर की गई है। करीब 20,000 महिला अर्धसैनिक जवानों को चुनाव ड्यूटी में लगाया गया है, ताकि मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सके। चुनाव के दौरान संवेदनशील और संवेदनशील जिलों में विशेष निगरानी रखी जाएगी, और सभी दलों की निष्पक्ष भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 की यह स्थिति दर्शाती है कि राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने के साथ-साथ सुरक्षा और निर्वाचन प्रक्रिया की तैयारी में भी पूरी गंभीरता दिखा रहे हैं। कांग्रेस का यह उम्मीदवार फेरबदल उसके चुनावी अभियान को तेज करने और राज्य के मतदाताओं तक प्रभावी संदेश पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।