प्रशासन ने इस वर्ष जिले में चार स्थानों पर सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। प्रत्येक आयोजन में अधिकतम 200 जोड़ों को ही शामिल किए जाने की अनुमति दी गई है। इस प्रकार पूरे जिले में केवल 800 जोड़ों का ही विवाह इस योजना के तहत संपन्न हो सकेगा। जबकि पिछले वर्षों में यह संख्या कई गुना अधिक रही है और बड़ी संख्या में जरूरतमंद परिवारों को इसका लाभ मिलता रहा है।
योजना में इस कटौती के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष का माहौल बन गया है। कई परिवारों ने पहले से ही अपनी बेटियों के विवाह के लिए इस योजना पर भरोसा किया था, लेकिन सीमित संख्या के कारण वे अब खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। आवेदकों का कहना है कि वे सभी जरूरी पात्रता पूरी करते हैं, इसके बावजूद उन्हें केवल संख्या सीमा के कारण योजना से बाहर कर दिया गया है, जो उनके लिए बेहद निराशाजनक है।
मौके पर पहुंचे कई लोगों ने प्रशासन के इस फैसले पर सवाल उठाए और संख्या बढ़ाने की मांग की। उनका कहना है कि सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद करना है, लेकिन संख्या सीमित कर देने से इसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है। कुछ स्थानों पर स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि प्रशासन को लोगों को समझाइश देकर शांत करना पड़ा।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय शासन स्तर पर तय दिशा-निर्देशों के अनुसार लिया गया है और उन्हें उसी के तहत कार्यक्रम आयोजित करना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री कन्यादान योजना लंबे समय से गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा रही है, जिसके तहत सामूहिक विवाह के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। लेकिन इस वर्ष संख्या में की गई कटौती ने इस योजना की पहुंच को सीमित कर दिया है, जिससे इसकी प्रभावशीलता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
फिलहाल बैतूल में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है और ग्रामीणों की मांग है कि सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार करे, ताकि अधिक से अधिक पात्र जोड़ों को इस योजना का लाभ मिल सके और किसी को भी निराश होकर लौटना न पड़े।
