चल पड़ीं वंदे भारत ट्रेनें….. अब तक 9.1 करोड़ लोग कर चुके हैं सफर…


नई दिल्ली।
वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों (Vande Bharat Express Trains) से साल 2025-26 में लगभग 4 करोड़ यात्रियों ने आवाजाही की। यह पिछले वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है। इस बढ़ोत्तरी के साथ कुल यात्रियों की संख्या अब 9.1 करोड़ हो चुकी है, जो लगभग 1 लाख ट्रिप्स में पूरी हुई है। शुरू से अब तक वंदे भारत ने भारतीय रेलवे (Indian Railways) की छवि को आधुनिक और तेज गति वाली यात्रा का प्रतीक बना दिया है। ये ट्रेनें सेमी-हाई स्पीड (Semi-High Speed Trains) वाली हैं, जो प्रमुख शहरों को जोड़ती हैं और यात्री अनुभव को बेहतर बनाती हैं।

भारतीय रेलवे ने वंदे भारत सेवाओं का विस्तार तेजी से किया है। दिसंबर 2025 तक 164 वंदे भारत ट्रेनें 274 जिलों में चल रही थीं। इन ट्रेनों ने यात्री पसंद को बदल दिया है, क्योंकि ये साफ, आरामदायक और समय से चलने वाली हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इनकी औसत ऑक्यूपेंसी 105 प्रतिशत से अधिक रही, जो दर्शाता है कि यात्री इन आधुनिक ट्रेनों को प्राथमिकता दे रहे हैं। रेल मंत्रालय के अनुसार, ये ट्रेनें न केवल छोटी दूरी बल्कि मध्यम दूरी की यात्राओं को भी आसान बना रही हैं। इससे रेलवे की पैसेंजर आय में भी वृद्धि हुई है।


बढ़ती लोकप्रियता की क्या है वजह

वंदे भारत स्लीपर सेवा ने लंबी दूरी की रात की यात्राओं में नया आयाम जोड़ा है। सर्विस शुरू होने के पहले तीन महीनों में ही इसने 1.21 लाख यात्रियों को लेते हुए 100 प्रतिशत से अधिक ऑक्यूपेंसी हासिल की। ये ट्रेनें 16 कोच वाली हैं, जिनमें एसी फर्स्ट क्लास, टू-टियर और थ्री-टियर की व्यवस्था है। कुल क्षमता 823 यात्रियों की है। आधुनिक सुविधाएं जैसे बायो-वैक्यूम टॉयलेट, पर्सनल रोशनी, चार्जिंग पॉइंट और बेहतर बर्थ डिजाइन यात्री अनुभव को यादगार बनाते हैं।

वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की पहली सर्विस गुवाहाटी-हावड़ा रूट पर शुरू हुई, जो 960 किलोमीटर की दूरी 14 घंटे में तय करती है। रेलवे भविष्य में और अधिक वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें शुरू करने की योजना बना रहा है। कुल मिलाकर वंदे भारत प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण का अहम हिस्सा है। इससे न केवल यात्री सुविधा बढ़ी है बल्कि रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को भी बढ़ावा मिला है। तेज गति, सुरक्षा और आराम के कारण ये ट्रेनें पारंपरिक सेवाओं से आगे निकल चुकी हैं।