प्रदूषण मुक्त राजधानी के लिए 2027 से केवल ई-ऑटो का होगा पंजीकरण, चार्जिंग स्टेशनों का बिछेगा डिजिटल नेटवर्क।


नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में दमघोंटू हवा और जहरीले स्मॉग से मुक्ति दिलाने की दिशा में दिल्ली सरकार ने एक ऐतिहासिक और साहसी कदम उठाया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार ने अपनी बहुप्रतीक्षित दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2026-2030 का खाका पेश कर दिया है। यह चार वर्षीय योजना न केवल सड़क पर दौड़ने वाले वाहनों की सूरत बदलेगी बल्कि दिल्ली के आसमान को फिर से नीला बनाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित होगी। सरकार का यह विजन दस्तावेज सीधे तौर पर उन लाखों लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा है जो हर साल सर्दियों में वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण फेफड़ों की बीमारियों का शिकार होते हैं। इस नीति का मुख्य आधार भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 है जो हर नागरिक को स्वच्छ हवा में सांस लेने का मौलिक अधिकार देता है।

प्रदूषण के मुख्य कारकों पर सर्जिकल स्ट्राइक
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली के कुल प्रदूषण में वाहनों का योगदान लगभग 23 प्रतिशत है। इनमें सबसे ज्यादा खतरनाक दोपहिया वाहन साबित होते हैं जो कुल वाहनों का 67 प्रतिशत हिस्सा होने के कारण सबसे अधिक उत्सर्जन करते हैं। सरकार ने इस समस्या की जड़ पर प्रहार करते हुए तय किया है कि 1 अप्रैल 2028 के बाद दिल्ली में किसी भी नए पेट्रोल या डीजल वाले दोपहिया वाहन का पंजीकरण नहीं होगा। इसी तरह 1 जनवरी 2027 से ई-ऑटो के अलावा अन्य किसी तीन पहिया वाहन को रजिस्टर नहीं किया जाएगा। यह नीति स्पष्ट संदेश देती है कि भविष्य केवल बिजली से चलने वाली गाड़ियों का है और पुरानी तकनीक को अब विदाई देने का समय आ गया है।

जेब पर नहीं पड़ेगा बोझ, सब्सिडी की सौगात
आम आदमी को इस बदलाव से जोड़ने के लिए सरकार ने खजाने का दरवाजा खोल दिया है। नई नीति के तहत सब्सिडी को सीधे बैंक खातों में पहुंचाने यानी डीबीटी की व्यवस्था की गई है। दोपहिया वाहन खरीदने वालों को पहले साल में 30,000 रुपये तक की भारी छूट मिलेगी जो धीरे-धीरे कम होती जाएगी। वहीं छोटे इलेक्ट्रिक ट्रकों के खरीदारों को एक लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सबसे बड़ी राहत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में दी गई है जिसे शत-प्रतिशत माफ कर दिया गया है। यानी ई-गाड़ी खरीदना न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है बल्कि यह आम आदमी की बचत के लिए भी एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है। 30 लाख रुपये तक की इलेक्ट्रिक कारों पर सरकार ने पूर्ण टैक्स छूट की घोषणा की है।

कबाड़ हटाओ और इनाम पाओ योजना
पुराने वाहनों की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने ‘स्क्रैपिंग इंसेंटिव’ को इस नीति का अहम हिस्सा बनाया है। यदि कोई नागरिक अपनी पुरानी बीएस-4 या उससे नीचे की श्रेणी वाली गाड़ी को कबाड़ में देता है तो उसे नए इलेक्ट्रिक वाहन की खरीद पर भारी अतिरिक्त छूट दी जाएगी। दोपहिया वाहनों पर 10,000 रुपये और कारों पर एक लाख रुपये तक का बोनस मिलेगा। यह व्यवस्था न केवल सड़कों से पुरानी और धुआं उगलने वाली गाड़ियों को हटाएगी बल्कि रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री को भी बढ़ावा देगी। सरकार का लक्ष्य है कि दिल्ली की सड़कों पर अगले कुछ वर्षों में केवल धुआं रहित और आधुनिक वाहन ही नजर आएं।

चार्जिंग का बिछेगा जाल और बैटरी का समाधान

ईवी अपनाने में सबसे बड़ी बाधा चार्जिंग की चिंता को दूर करने के लिए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड को नोडल एजेंसी बनाया गया है। अब हर गाड़ी बेचने वाली डीलरशिप पर कम से कम एक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन होना अनिवार्य होगा। सरकार एक सिंगल विंडो डिजिटल पोर्टल भी ला रही है जिससे घर या दफ्तर में चार्जिंग पॉइंट लगाना बेहद आसान हो जाएगा। इसके साथ ही बैटरी के सुरक्षित निपटान के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति यह सुनिश्चित करेगी कि पुरानी बैटरियां पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं बल्कि उन्हें सही तरीके से रीसायकल किया जा सके। पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाकर भ्रष्टाचार की गुंजाइश को भी खत्म करने का प्रयास किया गया है।