क्रिकेट इतिहास का अनोखा रिकॉर्ड, वीनू मांकड़ ने हर बल्लेबाजी क्रम पर खेलकर रचा इतिहास


नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट इतिहास में Vinoo Mankad का नाम महान ऑलराउंडर्स में शुमार किया जाता है। उनका करियर सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। खास बात यह है कि वह भारत के इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 1 से लेकर 11 नंबर तक हर क्रम पर बल्लेबाजी की।

जन्म और शुरुआती सफर

वीनू मांकड़ का जन्म 12 अप्रैल 1917 को Jamnagar में हुआ था। उनका पूरा नाम मुलवंतराय हिम्मतलाल मांकड़ था। दाएं हाथ के बल्लेबाज और बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज के रूप में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने जून 1946 में England national cricket team के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया और धीरे-धीरे भारतीय टीम के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल हो गए।

भारत की पहली टेस्ट जीत के नायक

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में India first Test win 1952 एक ऐतिहासिक पल रहा, जिसमें वीनू मांकड़ हीरो बनकर उभरे। चेन्नई में खेले गए इस मुकाबले में इंग्लैंड ने पहली पारी में 266 रन बनाए, लेकिन मांकड़ ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 8 विकेट झटके। भारत ने जवाब में 457/9 रन बनाकर बड़ी बढ़त हासिल की। दूसरी पारी में भी मांकड़ का जादू चला और उन्होंने 4 विकेट लेकर इंग्लैंड को 183 रन पर समेट दिया। भारत ने यह मैच पारी और 8 रन से जीता। मांकड़ ने मैच में कुल 12 विकेट लेकर इतिहास रच दिया।

शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन

1946 से 1959 के बीच मांकड़ ने भारत के लिए 44 टेस्ट मैच खेले। इस दौरान उन्होंने 2,109 रन बनाए, जिसमें 5 शतक और 6 अर्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 231 रन रहा। गेंदबाजी में भी उन्होंने कमाल किया और 162 विकेट अपने नाम किए। एक पारी में 5 विकेट लेने का कारनामा उन्होंने 8 बार किया।

घरेलू क्रिकेट में भी दबदबा

वीनू मांकड़ ने Maharashtra, Gujarat, Bengal, Saurashtra, Mumbai और Rajasthan के लिए घरेलू क्रिकेट खेला। 233 प्रथम श्रेणी मैचों में उन्होंने 11,591 रन बनाए और 782 विकेट झटके, जो उनकी ऑलराउंड क्षमता का बेहतरीन उदाहरण है।

‘मांकड़िंग’ की कहानी

क्रिकेट में ‘मांकड़िंग’ शब्द की शुरुआत भी वीनू मांकड़ से ही हुई। 1947 में उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज Bill Brown को नॉन-स्ट्राइकर एंड पर क्रीज छोड़ने पर रनआउट किया था। हालांकि, उन्होंने पहले चेतावनी भी दी थी। लंबे समय तक इस तरह के रनआउट को ‘मांकड़िंग’ कहा जाता रहा। आज भी यह नियम चर्चा का विषय बना रहता है।

सम्मान और विरासत

भारत सरकार ने 1973 में उन्हें Padma Bhushan से सम्मानित किया। उनके सम्मान में Board of Control for Cricket in India अंडर-19 स्तर पर ‘वीनू मांकड़ ट्रॉफी’ का आयोजन करती है। 21 अगस्त 1978 को 61 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान हमेशा अमर रहेगा।

भारतीय क्रिकेट का अनमोल सितारा

वीनू मांकड़ सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की नींव रखने वाले महान हस्तियों में से एक थे। उनकी ऑलराउंड प्रतिभा, समर्पण और रिकॉर्ड उन्हें हमेशा खास बनाते हैं।

वीनू मांकड़ भारत के इकलौते खिलाड़ी हैं जिन्होंने 1 से 11 तक हर क्रम पर बल्लेबाजी की और देश की पहली टेस्ट जीत में अहम भूमिका निभाई।