Category: Sports

  • एंटीगुआ टेस्ट के पहले दिन श्रीलंका का दबदबा लाहिरू उदारा की शानदार बल्लेबाजी से वेस्टइंडीज बैकफुट पर

    एंटीगुआ टेस्ट के पहले दिन श्रीलंका का दबदबा लाहिरू उदारा की शानदार बल्लेबाजी से वेस्टइंडीज बैकफुट पर


    नई दिल्ली । वेस्टइंडीज और श्रीलंका के बीच एंटीगुआ के सर विवियन रिचर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन श्रीलंका ने दमदार बल्लेबाजी करते हुए मुकाबले पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली। शुरुआती झटकों के बावजूद लाहिरू उदारा और कामिंदु मेंडिस ने शानदार साझेदारी कर मेहमान टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। दिन का खेल पूरी तरह श्रीलंका के नाम रहा और वेस्टइंडीज के गेंदबाज लंबे समय तक विकेट के लिए संघर्ष करते नजर आए।

    टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका की शुरुआत अच्छी नहीं रही। सलामी बल्लेबाज निशान मदुष्का केवल 6 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद अनुभवी बल्लेबाज दिनेश चांदीमल भी महज एक रन बनाकर शेमार जोसेफ का शिकार बने। शुरुआती दो विकेट जल्दी गिरने के बाद ऐसा लगा कि वेस्टइंडीज मैच पर पकड़ बना लेगा लेकिन लाहिरू उदारा और कामिंदु मेंडिस ने शानदार संयम और आक्रामकता का परिचय देते हुए पारी को संभाल लिया।

    दोनों बल्लेबाजों ने तीसरे विकेट के लिए 252 गेंदों में 215 रन की बेहतरीन साझेदारी की और वेस्टइंडीज के गेंदबाजों को लंबे समय तक कोई सफलता नहीं मिलने दी। कामिंदु मेंडिस ने 120 गेंदों में 84 रन की शानदार पारी खेली जिसमें 11 चौके शामिल रहे। हालांकि वह अपने शतक से चूक गए लेकिन टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में उनकी भूमिका बेहद अहम रही।

    दिन के सबसे बड़े नायक लाहिरू उदारा रहे जिन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 248 गेंदों में 188 रन बनाए। अपनी यादगार पारी में उन्होंने 21 चौके और 5 छक्के लगाए। वह दोहरे शतक के बेहद करीब पहुंच गए थे लेकिन 188 रन पर आउट होकर बड़ी उपलब्धि से चूक गए। इसके बावजूद उनकी यह पारी श्रीलंका के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई और उन्होंने वेस्टइंडीज के गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह बेअसर कर दिया।

    कप्तान धनंजय डी सिल्वा अच्छी शुरुआत मिलने के बावजूद बड़ी पारी नहीं खेल सके और 90 गेंदों में 33 रन बनाकर आउट हो गए। पहले दिन का खेल समाप्त होने तक कुशल मेंडिस बिना खाता खोले और सोनल दिनुशा 5 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे। श्रीलंका मजबूत स्थिति में पहुंच चुका है और दूसरे दिन टीम बड़ी बढ़त हासिल करने की कोशिश करेगी।

    वेस्टइंडीज की ओर से शेमार जोसेफ ने सबसे प्रभावी गेंदबाजी करते हुए दो विकेट हासिल किए जबकि जस्टिन ग्रीव्स और जायडेन सील्स को एक-एक सफलता मिली। हालांकि मेजबान टीम के गेंदबाज पूरे दिन श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में सफल नहीं हो सके।

    पहले टेस्ट में हार और कुछ खिलाड़ियों की चोट के बाद श्रीलंका ने दूसरे टेस्ट के लिए अपनी प्लेइंग इलेवन में तीन बदलाव किए। प्रभात जयसूर्या लाहिरू उदारा और इसिथा विजेसुंडेरा को अंतिम एकादश में शामिल किया गया। इसिथा ने इस मुकाबले से टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया जबकि पथुम निसांका और लाहिरू कुमारा चोट के कारण टीम से बाहर रहे। खराब प्रदर्शन के चलते कसुन रजिथा को भी अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली।

  • बांग्लादेश से वनडे जंग के लिए तैयार जिम्बाब्वे नगारवा को कप्तानी इनोसेंट काइया और सिकंदर रजा पर बड़ी जिम्मेदारी

    बांग्लादेश से वनडे जंग के लिए तैयार जिम्बाब्वे नगारवा को कप्तानी इनोसेंट काइया और सिकंदर रजा पर बड़ी जिम्मेदारी


    नई दिल्ली । बांग्लादेश के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए जिम्बाब्वे क्रिकेट बोर्ड ने 15 सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है। इस बार टीम की कमान पहली बार तेज गेंदबाज रिचर्ड नगारवा को सौंपी गई है। यह उनके करियर का बड़ा पड़ाव माना जा रहा है और अब उनकी अगुआई में जिम्बाब्वे मजबूत शुरुआत करने के इरादे से मैदान में उतरेगा।

    दोनों टीमों के बीच वनडे सीरीज की शुरुआत 6 जुलाई से होगी जबकि दूसरा मुकाबला 9 जुलाई और तीसरा व अंतिम मैच 11 जुलाई को खेला जाएगा। तीनों मुकाबले हरारे स्पोर्ट्स क्लब में आयोजित होंगे जहां घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश जिम्बाब्वे करेगा।

    टीम में हाल ही में बांग्लादेश के खिलाफ खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच में शानदार शतक लगाने वाले इनोसेंट काइया की वापसी हुई है। काइया ने उस मुकाबले में 140 रन की बेहतरीन पारी खेलकर चयनकर्ताओं का भरोसा फिर से जीत लिया। उनके अलावा बेन कुरेन और ब्रायन बेनेट को भी वनडे टीम में शामिल किया गया है जिससे बल्लेबाजी क्रम और मजबूत नजर आ रहा है।

    जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी की जिम्मेदारी अनुभवी क्रेग एर्विन और हरफनमौला खिलाड़ी सिकंदर रजा पर भी रहेगी। दोनों खिलाड़ी लंबे समय से टीम की रीढ़ बने हुए हैं और उनसे एक बार फिर बड़ी पारियों की उम्मीद होगी।

    गेंदबाजी विभाग में ब्लेसिंग मुजारबानी टीम के सबसे अहम हथियार होंगे। उनके साथ ब्रैड इवांस न्यूमैन न्यामहुरी और अर्नेस्ट मसुकु तेज गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती देंगे। वहीं स्पिन विभाग की जिम्मेदारी रयान बर्ल वेस्ली मधेवेरे और वेलिंगटन मसाकाद्जा संभालेंगे। विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी तदिवानाशे मारुमानी और क्लाइव मडांडे को सौंपी गई है।

    हाल ही में बांग्लादेश के खिलाफ खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच में जिम्बाब्वे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक पारी और 85 रन से जीत दर्ज की थी। उस मुकाबले में इनोसेंट काइया के शतक के अलावा क्रेग एर्विन ने 60 रन ब्रायन बेनेट ने 59 रन और वेस्ली मधेवेरे ने नाबाद 77 रन बनाए थे। गेंदबाजी में ब्लेसिंग मुजारबानी ने दोनों पारियों में कुल छह विकेट लेकर जीत में अहम भूमिका निभाई थी।

    यह सीरीज जिम्बाब्वे के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले वर्ष अगस्त में श्रीलंका के खिलाफ वनडे सीरीज खेलने के बाद टीम पहली बार इस प्रारूप में मैदान पर उतरेगी। नई कप्तानी और संतुलित टीम के साथ जिम्बाब्वे की नजर घरेलू मैदान पर शानदार प्रदर्शन करते हुए सीरीज अपने नाम करने पर होगी।

    जिम्बाब्वे की वनडे टीम
    रिचर्ड नगारवा कप्तान ब्रायन बेनेट रयान बर्ल बेन कुरेन क्रेग एर्विन ब्रैड इवांस इनोसेंट काइया क्लाइव मडांडे वेस्ली मधेवेरे तदिवानाशे मारुमानी वेलिंगटन मसाकाद्जा अर्नेस्ट मसुकु ब्लेसिंग मुजारबानी न्यूमैन न्यामहुरी और सिकंदर रजा।

  • फीफा वर्ल्ड कप में कोलंबिया का अजेय अभियान जारी घाना को हराकर अब स्विट्जरलैंड से होगी टक्कर

    फीफा वर्ल्ड कप में कोलंबिया का अजेय अभियान जारी घाना को हराकर अब स्विट्जरलैंड से होगी टक्कर


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में कोलंबिया का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। टीम ने राउंड ऑफ 32 मुकाबले में घाना को 1-0 से हराकर न केवल अपनी अजेय लय बरकरार रखी बल्कि अंतिम 16 में भी जगह पक्की कर ली। कैनसस सिटी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में कोलंबिया ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और पूरे मैच के दौरान घाना पर दबाव बनाए रखा।

    मैच की शुरुआत से ही कोलंबियाई खिलाड़ियों ने गेंद पर नियंत्रण रखते हुए लगातार आक्रमण किए। इसका फायदा टीम को 14वें मिनट में मिला जब लुइस जेवियर सुआरेज के शानदार पास पर जॉन एरियास ने बेहतरीन गोल दागकर टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। यह गोल अंत तक निर्णायक साबित हुआ और कोलंबिया की जीत की मजबूत नींव बन गया।

    पहले हाफ में कोलंबिया के पास बढ़त को दोगुना करने के कई अवसर आए। स्टार खिलाड़ी लुइस डियाज ने बॉक्स के भीतर से शानदार शॉट लगाया लेकिन गेंद लक्ष्य से बाहर निकल गई। इसके बाद जोहान मोजिका के हेडर को घाना के गोलकीपर लॉरेंस अती जिगी ने शानदार बचाव करते हुए गोल में जाने से रोक दिया। दूसरी ओर घाना ने भी कुछ जवाबी हमले किए लेकिन कोलंबिया की मजबूत रक्षापंक्ति के सामने उसके प्रयास सफल नहीं हो सके।

    दूसरे हाफ में भी कोलंबिया का दबदबा कायम रहा। 56वें मिनट में लुइस डियाज ने गेंद को गोलपोस्ट के भीतर पहुंचाया लेकिन वीडियो समीक्षा के बाद उन्हें ऑफसाइड करार दिया गया और गोल रद्द कर दिया गया। इसके बावजूद कोलंबियाई टीम ने लगातार आक्रमण जारी रखे और घाना को वापसी का कोई बड़ा मौका नहीं दिया।

    घाना की टीम पूरे मुकाबले में संघर्ष करती नजर आई। कोलंबिया के सशक्त डिफेंस और मिडफील्ड ने उसे खुलकर खेलने का अवसर ही नहीं दिया। यही वजह रही कि पूरे मैच के दौरान घाना का एक भी शॉट गोलपोस्ट के निशाने पर नहीं लग सका। अंतिम मिनटों में कोलंबिया ने संतुलित रणनीति अपनाते हुए अपनी बढ़त को सुरक्षित रखा और घाना की हर कोशिश को नाकाम कर दिया।

    इस जीत के साथ कोलंबिया ने अंतिम 16 में जगह बना ली है जहां उसका मुकाबला 8 जुलाई को वैंकूवर में स्विट्जरलैंड से होगा। स्विट्जरलैंड ने अपने पिछले मुकाबले में अल्जीरिया को 2-0 से हराकर अगले दौर में प्रवेश किया था। अब दोनों मजबूत टीमों के बीच होने वाला मुकाबला विश्व कप के सबसे रोमांचक मैचों में से एक माना जा रहा है।

  • रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे लियोनेल मेसी वर्ल्ड कप में माराडोना का बड़ा रिकॉर्ड तोड़ फिर चमके अर्जेंटीना के कप्तान

    रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे लियोनेल मेसी वर्ल्ड कप में माराडोना का बड़ा रिकॉर्ड तोड़ फिर चमके अर्जेंटीना के कप्तान


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी लगातार नए इतिहास रच रहे हैं। काबो वर्डे के खिलाफ खेले गए राउंड ऑफ 32 मुकाबले में मेसी ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम करते हुए विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा असिस्ट करने वाले खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर डिएगो माराडोना का वर्षों पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया।

    इस मुकाबले में मेसी ने अपना नौवां विश्व कप असिस्ट दर्ज किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड डिएगो माराडोना के नाम था जिन्होंने अपने विश्व कप करियर में आठ असिस्ट किए थे। मेसी अब नौ असिस्ट के साथ इस सूची में शीर्ष स्थान पर पहुंच गए हैं और एक बार फिर साबित कर दिया कि वह सिर्फ गोल करने वाले खिलाड़ी ही नहीं बल्कि अपनी टीम के लिए मौके तैयार करने में भी सबसे आगे हैं।

    मेसी ने काबो वर्डे के खिलाफ मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 29वें मिनट में अर्जेंटीना के लिए पहला गोल भी दागा। लिसेंड्रो मार्टिनेज के बेहतरीन पास को उन्होंने शानदार तरीके से गोल में बदलकर अपनी टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई। यह विश्व कप में उनके करियर का 20वां गोल भी रहा। इस उपलब्धि के साथ वह पहले ही विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी के रूप में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं।

    मेसी ने इस टूर्नामेंट में एक और खास उपलब्धि भी हासिल की। वह फीफा विश्व कप इतिहास के पहले खिलाड़ी बन गए जिन्होंने लगातार आठ मुकाबलों में गोल करने का रिकॉर्ड बनाया। इसके अलावा वह दो अलग अलग विश्व कप संस्करणों में सात सात गोल करने वाले पहले फुटबॉलर भी बन चुके हैं। विश्व कप 2026 में भी वह सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं जबकि फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एम्बाप्पे छह गोल के साथ उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी हैं।

    काबो वर्डे के खिलाफ मुकाबला अर्जेंटीना के लिए आसान नहीं रहा। निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें 2-2 की बराबरी पर थीं और मैच अतिरिक्त समय में पहुंच गया। अतिरिक्त समय में मेसी के एक आक्रमण को रोकने की कोशिश में काबो वर्डे के खिलाड़ी डिने बोर्गस से आत्मघाती गोल हो गया जिसने मुकाबले का रुख बदल दिया। इसी गोल की बदौलत अर्जेंटीना ने रोमांचक मुकाबला 3-2 से जीतकर अगले दौर में जगह बनाई।

    विश्व फुटबॉल में लियोनेल मेसी का यह शानदार प्रदर्शन एक बार फिर उनकी महानता की पुष्टि करता है। लगातार रिकॉर्ड तोड़ते हुए वह न केवल अर्जेंटीना बल्कि विश्व फुटबॉल के इतिहास में अपने नाम को और अधिक सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा रहे हैं।

  • दूसरे टी20 में भी बारिश बन सकती है विलेन भारत इंग्लैंड मुकाबले पर मौसम की टेढ़ी नजर

    दूसरे टी20 में भी बारिश बन सकती है विलेन भारत इंग्लैंड मुकाबले पर मौसम की टेढ़ी नजर


    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला शनिवार को मैनचेस्टर के ऐतिहासिक ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेला जाएगा लेकिन मुकाबले से पहले सबसे बड़ी चिंता मौसम को लेकर बनी हुई है। पहले टी20 मैच में बारिश के कारण इंग्लैंड की पारी शुरू ही नहीं हो सकी थी और मुकाबला रद्द करना पड़ा था। अब दूसरे मैच पर भी बारिश का खतरा मंडरा रहा है जिससे क्रिकेट प्रेमियों की चिंता बढ़ गई है।

    मौसम पूर्वानुमान के अनुसार शनिवार को मैनचेस्टर में पूरे दिन बादल छाए रहने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक दिन में बारिश की संभावना करीब 57 प्रतिशत है जबकि मैच के दौरान भी वर्षा होने के करीब 55 प्रतिशत आसार बताए गए हैं। शाम के समय लगभग दो घंटे तक बारिश होने का अनुमान है। ऐसे में यदि मौसम ने साथ नहीं दिया तो लगातार दूसरा मुकाबला भी प्रभावित हो सकता है।

    हालांकि भारतीय टीम चाहेगी कि इस बार पूरा मैच खेला जाए ताकि पहले मुकाबले में दिखाई गई शानदार बल्लेबाजी का फायदा उठाया जा सके। पहले टी20 में भारतीय बल्लेबाजों ने दमदार प्रदर्शन करते हुए 20 ओवर में सात विकेट पर 189 रन बनाए थे। युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने विस्फोटक अंदाज में सिर्फ 24 गेंदों पर 59 रन की शानदार पारी खेली थी। कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी जिम्मेदारी निभाते हुए 47 गेंदों में 68 रन बनाए और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।

    मध्यक्रम में शिवम दुबे ने भी शानदार फिनिशिंग करते हुए 21 गेंदों में नाबाद 42 रन बनाए। हालांकि संजू सैमसन सिर्फ एक रन बनाकर आउट हो गए जबकि ईशान किशन खाता भी नहीं खोल सके। तिलक वर्मा भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। इसके बावजूद भारतीय बल्लेबाजों ने बड़ा स्कोर खड़ा किया था लेकिन लगातार बारिश के कारण इंग्लैंड की पारी शुरू नहीं हो सकी और मैच बेनतीजा समाप्त हुआ।

    ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर भारत का रिकॉर्ड संतुलित रहा है। टीम इंडिया ने यहां अब तक दो टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं जिनमें एक में जीत और एक में हार मिली है। इस मैदान पर भारत ने अपना आखिरी टी20 मुकाबला वर्ष 2018 में खेला था जहां टीम ने इंग्लैंड को आठ विकेट से हराया था। उस मैच में केएल राहुल ने नाबाद शतक लगाकर टीम को शानदार जीत दिलाई थी।

    अब भारतीय टीम की कोशिश होगी कि मौसम साफ रहे और सीरीज में बढ़त हासिल करने का मौका मिले। दूसरी ओर इंग्लैंड भी घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर वापसी करना चाहेगा। ऐसे में यदि बारिश बीच में बाधा नहीं बनी तो क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक मुकाबला देखने को मिल सकता है।

  • वैभव सूर्यवंशी पर दबाव न बनाएं भारत के लिए करेगा कमाल श्रीलंका के दिग्गज चमिंडा वास का बड़ा बयान

    वैभव सूर्यवंशी पर दबाव न बनाएं भारत के लिए करेगा कमाल श्रीलंका के दिग्गज चमिंडा वास का बड़ा बयान


    नई दिल्ली । श्रीलंका के महान तेज गेंदबाज चमिंडा वास ने भारत के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को भविष्य का बड़ा सितारा बताते हुए क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों से अपील की है कि उन पर अनावश्यक दबाव न बनाया जाए। वास का मानना है कि महज 15 वर्ष की उम्र में वैभव ने जिस तरह की प्रतिभा और आत्मविश्वास दिखाया है वह उन्हें आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट का अहम खिलाड़ी बना सकता है।

    तेलंगाना टी20 लीग के दौरान हैदराबाद में बातचीत करते हुए चमिंडा वास ने कहा कि भारत लगातार विश्व स्तर के युवा क्रिकेटर तैयार कर रहा है और वैभव सूर्यवंशी भी उसी कड़ी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी युवा खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने और खुद को साबित करने के लिए समय की जरूरत होती है। इसलिए वैभव को भी बिना किसी अतिरिक्त अपेक्षा के अपने खेल पर ध्यान देने का अवसर मिलना चाहिए।

    वास ने विश्वास जताया कि वैभव सूर्यवंशी भविष्य में भारतीय टीम के लिए जरूर खेलेंगे और अपनी प्रतिभा से देश को कई यादगार जीत दिलाएंगे। उन्होंने कहा कि इस युवा बल्लेबाज में सफल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बनने के सभी गुण मौजूद हैं। जरूरत सिर्फ धैर्य और सही मार्गदर्शन की है।

    वैभव सूर्यवंशी पिछले दो वर्षों में भारतीय क्रिकेट का सबसे चर्चित युवा चेहरा बनकर उभरे हैं। आईपीएल 2025 में धमाकेदार शतक लगाने के बाद उन्होंने लगातार शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद इंडिया ए और भारत की अंडर 19 टीम के लिए भी उन्होंने अलग अलग प्रारूपों में बेहतरीन बल्लेबाजी की। उनके प्रदर्शन का सिलसिला आईपीएल 2026 में भी जारी रहा जहां राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए उन्होंने 776 रन बनाए और ऑरेंज कैप अपने नाम की। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्हें भारतीय टी20 टीम में भी जगह मिली।

    चमिंडा वास ने तेलंगाना टी20 लीग की भी सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के घरेलू टूर्नामेंट युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच देते हैं। उनके अनुसार राज्य स्तर पर नियमित टी20 प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों को निखारने के साथ उन्हें आईपीएल और राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने का रास्ता भी तैयार करती हैं।

    उन्होंने कहा कि हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन की यह पहल सराहनीय है क्योंकि इससे कई युवा खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिला है। वास ने अपनी टीम पलामुरु स्ट्राइकर्स के युवा खिलाड़ियों की भी तारीफ करते हुए कहा कि टीम भले उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी लेकिन कई खिलाड़ियों ने अपनी बल्लेबाजी और खेल से प्रभावित किया है।

    भारतीय क्रिकेट व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए वास ने कहा कि देश के लगभग हर राज्य में टी20 प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इससे खिलाड़ियों को लगातार प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलने का मौका मिलता है और यही अनुभव उन्हें बड़े मंच पर सफल बनने में मदद करता है। उनका मानना है कि भारत की मजबूत घरेलू क्रिकेट संरचना ही लगातार नई प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का सबसे बड़ा कारण है।

  • दिल्ली में ट्रायल में हुए रिजेक्ट, पिता ने तीन दिन में बदल दी किस्मत: संजू सैमसन ने सुनाया संघर्ष का प्रेरक किस्सा

    दिल्ली में ट्रायल में हुए रिजेक्ट, पिता ने तीन दिन में बदल दी किस्मत: संजू सैमसन ने सुनाया संघर्ष का प्रेरक किस्सा


    नई दिल्ली । टी20 विश्व कप 2026 में भारत की खिताबी जीत के अहम नायकों में शामिल विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने अपने क्रिकेट करियर के शुरुआती संघर्षों का भावुक किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली की टीम में बार-बार जगह नहीं मिलने के बाद उनके पिता ने ऐसा फैसला लिया जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।

    जियोस्टार के शो ‘सुपरस्टार्स’ में बातचीत के दौरान संजू ने कहा कि बचपन में वह अपने दोस्तों को डीडीसीए की जैकेट पहनकर दिल्ली की टीम के लिए खेलते देखते थे। इससे उनके मन में भी दिल्ली का प्रतिनिधित्व करने का सपना जगा। उन्होंने कई बार ट्रायल दिए, स्टेट कैंप तक पहुंचे और अच्छे रन भी बनाए, लेकिन अंतिम टीम में कभी जगह नहीं मिली।

    संजू ने बताया कि एक ट्रायल के बाद जब चयनित खिलाड़ियों की सूची जारी हुई तो उसमें उनका नाम नहीं था। वह और उनके पिता चुपचाप घर लौट आए। घर पहुंचते ही उनके पिता विश्वनाथन ने मां से कहा कि अब परिवार को केरल जाना होगा। मां ने बच्चों की पढ़ाई का हवाला देते हुए कुछ साल रुकने की सलाह दी, लेकिन पिता अपने फैसले पर अडिग रहे।

    उन्होंने कहा कि पिता ने साफ शब्दों में कहा कि अब और इंतजार नहीं होगा। तीन दिन के भीतर टिकट बुक हुई और पूरा परिवार ट्रेन से केरल रवाना हो गया। वहीं से उनके क्रिकेट करियर का नया अध्याय शुरू हुआ और उन्होंने केरल की ओर से खेलना शुरू किया।

    संजू ने दिल्ली में अपने बचपन की यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनके पिता दिल्ली पुलिस की फुटबॉल टीम से जुड़े थे और रोज अभ्यास के लिए जाते थे। खेल का माहौल देखकर बचपन से ही उन्हें भी खिलाड़ी बनने की प्रेरणा मिली। पुलिस कॉलोनी की सड़कों पर टेनिस बॉल से गली क्रिकेट खेलते-खेलते उनका क्रिकेट के प्रति जुनून बढ़ता गया।

    उन्होंने बताया कि उनके पिता ने कभी फुटबॉल खेलने के लिए मजबूर नहीं किया। हालांकि वे फुटबॉल भी खेलते थे, लेकिन पिता ने उनकी बल्लेबाजी देखकर महसूस किया कि क्रिकेट में उनका भविष्य बेहतर हो सकता है। इसके बाद उन्होंने संजू और उनके भाई दोनों को क्रिकेट पर पूरा ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।

    संजू ने दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम (तत्कालीन फिरोज शाह कोटला) से जुड़ी एक खास याद भी साझा की। उन्होंने बताया कि एक बार उनके पिता की वहां ड्यूटी थी। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध कर उन्हें नेट्स में अभ्यास करने का मौका दिलाया। संजू, उनके भाई और पिता ने करीब एक घंटे तक नेट्स में अभ्यास किया। संजू ने कहा कि उन्हें आज भी समझ नहीं आता कि उस समय उनके पिता ने यह कैसे संभव किया, लेकिन वही पल उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा।

    संजू सैमसन की यह कहानी बताती है कि प्रतिभा के साथ सही समय पर लिया गया साहसी फैसला और परिवार का अटूट विश्वास किसी भी खिलाड़ी की सफलता की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।

  • फीफा वर्ल्ड कप में केप वर्डे के ऐतिहासिक संघर्ष के आगे पस्त होने से बची अर्जेंटीना, एक्स्ट्रा टाइम के रोमांचक मुकाबले में लियोनेल मेसी के रिकॉर्ड गोल से नॉकआउट में बनाई जगह

    फीफा वर्ल्ड कप में केप वर्डे के ऐतिहासिक संघर्ष के आगे पस्त होने से बची अर्जेंटीना, एक्स्ट्रा टाइम के रोमांचक मुकाबले में लियोनेल मेसी के रिकॉर्ड गोल से नॉकआउट में बनाई जगह

    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना और पहली बार इस वैश्विक मंच पर खेल रही केप वर्डे की टीम के बीच मियामी गार्डन्स में खेला गया मुकाबला फुटबॉल इतिहास के सबसे रोमांचक मैचों में शुमार हो गया है। इस बेहद चुनौतीपूर्ण मुकाबले में अर्जेंटीना ने अंततः केप वर्डे को 3-2 से पराजित कर राउंड ऑफ-16 में अपनी जगह पक्की कर ली है। पश्चिमी अफ्रीका के तट पर स्थित एक बेहद छोटे से द्वीपीय देश केप वर्डे ने विश्व विजेता टीम को आखिरी पलों तक कड़ी टक्कर दी, जिससे चैंपियन टीम टूर्नामेंट से बाहर होते-होते बची।

    मैच का फैसला निर्धारित 90 मिनटों में नहीं हो सका और मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में खींचा गया। अर्जेंटीना की जीत का निर्णायक मोड़ एक्स्ट्रा टाइम के 111वें मिनट में आया, जब क्रिस्टियन रोमेरो के एक दमदार हेडर को रोकने के प्रयास में गेंद केप वर्डे के डिफेंडर डाइनी बोर्जेस से टकराकर सीधे नेट में चली गई। बोर्जेस का यह ओन गोल अर्जेंटीना के लिए जीवनदान साबित हुआ, जिसने टीम को 3-2 की निर्णायक बढ़त दिला दी, जो मैच के अंतिम समय तक बरकरार रही।

    इससे पहले, मुकाबले की शुरुआत में अर्जेंटीना के स्टार खिलाड़ी और कप्तान लियोनेल मेसी ने मैच के 29वें मिनट में लिसांद्रो मार्टिनेज के एक बेहतरीन लॉन्ग पास को नियंत्रित करते हुए गोलकीपर वोजिन्हा के ऊपर से शानदार शॉट लगाकर टीम को 1-0 की शुरुआती बढ़त दिलाई थी। इसके बाद एक्स्ट्रा टाइम के 103वें मिनट में लिसांद्रो मार्टिनेज ने खुद गोल दागकर टीम का स्कोर 2-1 कर दिया था। हालांकि, केप वर्डे की जुझारू टीम ने मैच में दो बार शानदार वापसी की। सिडनी लोपेस कैब्राल और डेरॉय डुआर्टे ने अर्जेंटीना की रक्षापंक्ति को भेदते हुए दो बार बराबरी के गोल दागे, जिसने स्टेडियम में मौजूद अर्जेंटीना के प्रशंसकों को हैरान कर दिया था।

    हार का सामना करने के बावजूद केप वर्डे की टीम ने अपने पहले ही वर्ल्ड कप अभियान से दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों का दिल जीत लिया है। इस छोटे से देश ने ग्रुप चरण में स्पेन, उरुग्वे और सऊदी अरब जैसी दिग्गज टीमों के खिलाफ ड्रॉ खेलकर नॉकआउट चरण का टिकट कटाया था। अर्जेंटीना के खिलाफ मुकाबले में भी केप वर्डे के 40 वर्षीय अनुभवी गोलकीपर वोजिन्हा ने अद्भुत खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने मैच के दौरान मेसी के पांच तीखे प्रहारों सहित कुल 10 शानदार गोल होने से रोके, जिसने अर्जेंटीना को लंबे समय तक बैकफुट पर रखा।

    इस मैच में किए गए गोल के साथ ही कप्तान लियोनेल मेसी ने अपने नाम कई बड़े कीर्तिमान भी दर्ज कर लिए हैं। यह मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर का 20वां वर्ल्ड कप गोल था, जिसके साथ ही वह मौजूदा टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे से आगे निकल गए हैं। मेसी का वर्ल्ड कप के लगातार आठ मैचों में स्कोर करने का रिकॉर्ड भी अब और मजबूत हो गया है, जिसमें वे अब तक कुल 12 गोल कर चुके हैं। इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब राउंड ऑफ-16 में अर्जेंटीना का सामना मिस्र की टीम से आगामी मंगलवार को अटलांटा में होगा।

  • सीनियर खिलाड़ियों के समर्थन में उतरा भारतीय क्रिकेट टीम प्रशासन, गेंदबाजी कोच ने कहा- सिर्फ एक युवा प्रतिभा के आने से रातों-रात नहीं बदला जाएगा शीर्ष क्रम का बल्लेबाजी संतुलन

    सीनियर खिलाड़ियों के समर्थन में उतरा भारतीय क्रिकेट टीम प्रशासन, गेंदबाजी कोच ने कहा- सिर्फ एक युवा प्रतिभा के आने से रातों-रात नहीं बदला जाएगा शीर्ष क्रम का बल्लेबाजी संतुलन

    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले दूसरे टी20 मुकाबले से पहले मैनचेस्टर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मॉर्कल ने टीम के शीर्ष क्रम को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक रुख स्पष्ट किया है। पिछले कुछ समय से 15 वर्षीय युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय पदार्पण को लेकर क्रिकेट जगत में भारी उत्सुकता देखी जा रही थी, लेकिन टीम प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि किसी एक नई प्रतिभा के आने मात्र से मौजूदा स्थापित ओपनिंग जोड़ी को तुरंत टीम से बाहर नहीं किया जाएगा। टीम प्रशासन का मानना है कि बड़े मंच पर देश को जीत दिलाने वाले खिलाड़ियों को कुछ खराब पारियों के आधार पर टीम से ड्रॉप करना सही रणनीति नहीं है।

    वर्तमान दौरे पर भारतीय सलामी जोड़ी के दोनों बल्लेबाजों का प्रदर्शन काफी भिन्न रहा है। जहां एक ओर अभिषेक शर्मा ने अपनी पिछली तीन पारियों में एक अर्धशतक और 49 रनों की उपयोगी पारी खेलकर अपनी फॉर्म का परिचय दिया है, वहीं दूसरी ओर विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन लगातार संघर्ष करते नजर आए हैं। सैमसन के बल्ले से पिछली तीन पारियों में क्रमशः पांच, शून्य और एक रन की बेहद संक्षिप्त पारियां निकली हैं। इस असंतुलित फॉर्म के बावजूद कोचिंग स्टाफ ने स्पष्ट किया है कि प्रबंधन किसी भी खिलाड़ी की योग्यता का आकलन महज तीन मैचों के प्रदर्शन के आधार पर नहीं करता है, बल्कि उनके पिछले योगदान को पूरा महत्व दिया जाता है।

    गेंदबाजी कोच ने अनुभवी खिलाड़ियों का बचाव करते हुए कहा कि अभिषेक शर्मा पूर्व में टी20 क्रिकेट के शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों में शुमार रह चुके हैं और संजू सैमसन विश्व कप विजेता टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य रहे हैं। इसके साथ ही सैमसन का पिछला आईपीएल सीजन भी बेहद शानदार रहा था। ऐसी स्थिति में कोचिंग स्टाफ और प्रबंधन की यह सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने खिलाड़ियों के मुश्किल दौर में उनके साथ खड़े रहें और टीम के भीतर एक सुरक्षित तथा सकारात्मक सांस्कृतिक माहौल का निर्माण करें। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एक अत्यंत युवा खिलाड़ी लगातार टीम का दरवाजा खटखटा रहा है, जो भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिहाज से काफी सुखद पहलू है।

    टीम प्रबंधन ने रणनीतिक तौर पर यह भी साफ कर दिया है कि केवल वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में जगह देने के उद्देश्य से अन्य बल्लेबाजों की बल्लेबाजी पोजीशन में कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा। कोच के अनुसार, किसी भी खिलाड़ी को उसकी स्वाभाविक भूमिका और पसंदीदा पोजीशन से हटाना पूरी टीम के रणनीतिक संतुलन को बिगाड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कठिन परिस्थितियों में मैच जिताने वाले अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखना पहली प्राथमिकता है, जिसके बाद ही परिस्थितियों के अनुरूप सर्वश्रेष्ठ शीर्ष क्रम का निर्धारण किया जाएगा।

    भले ही मोर्ने मॉर्कल ने वैभव सूर्यवंशी के आधिकारिक डेब्यू की किसी निश्चित तारीख या मैच का खुलासा नहीं किया, लेकिन उन्होंने इस 15 वर्षीय खिलाड़ी की तकनीकी क्षमता और परिपक्वता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय ड्रेसिंग रूम के दबाव को झेलना और वहां सहज रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। वैभव ने अपने आत्मविश्वास और बेहतरीन व्यवहार से बेहद कम समय में सीनियर खिलाड़ियों के साथ तालमेल बिठा लिया है। अंतरराष्ट्रीय नेट सेशन्स के दौरान इस युवा खिलाड़ी ने अपनी बल्लेबाजी तकनीक से पूरे कोचिंग स्टाफ को बेहद प्रभावित किया है।

    शीर्ष क्रम के अलावा गेंदबाजी कोच ने भारतीय टीम के युवा गेंदबाजी संसाधनों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव की प्रतिभा को रेखांकित करते हुए कहा कि घरेलू क्रिकेट और नेट गेंदबाज के रूप में उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव की परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की प्रिंस की क्षमता टीम के लिए उपयोगी साबित हो रही है। इसके साथ ही चोट के बाद टीम में वापसी करने वाले तेज गेंदबाज हर्षित राणा की रफ्तार और आक्रामकता को भी भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के लिए एक बेहद सकारात्मक और राहत देने वाला संकेत बताया गया है।

  • विंबलडन पहुंचीं दीप्ति शर्मा, धोनी और जोकोविच की मानसिक मजबूती को बताया एक जैसा

    विंबलडन पहुंचीं दीप्ति शर्मा, धोनी और जोकोविच की मानसिक मजबूती को बताया एक जैसा


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा इन दिनों विंबलडन का रोमांच करीब से देख रही हैं। इस दौरान उन्होंने टेनिस के महान खिलाड़ी नोवाक जोकोविच और भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की तुलना करते हुए कहा कि दोनों खिलाड़ियों की सबसे बड़ी ताकत कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर मुकाबले का रुख बदलने की क्षमता है।

    जियो हॉटस्टार से बातचीत में दीप्ति ने कहा कि जब भी नोवाक जोकोविच का नाम आता है तो सबसे पहले उनकी मानसिक मजबूती की चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि जोकोविच कभी हार नहीं मानते और चाहे हालात कितने भी चुनौतीपूर्ण हों, उनका आत्मविश्वास और संयम हमेशा कायम रहता है। यही गुण उन्हें दुनिया के महानतम खिलाड़ियों में शामिल करता है।

    दीप्ति ने कहा कि क्रिकेट में अगर किसी खिलाड़ी की तुलना जोकोविच से की जा सकती है तो वह महेंद्र सिंह धोनी हैं। उनके अनुसार धोनी मैदान पर हमेशा बेहद शांत दिखाई देते हैं और दबाव की स्थिति में भी उनके चेहरे पर घबराहट नहीं दिखती। यही कारण है कि उन्होंने अपने करियर में कई मुश्किल मुकाबलों में टीम इंडिया को जीत दिलाई। उन्होंने कहा कि दोनों दिग्गज खिलाड़ियों से यह सीख मिलती है कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और मानसिक संतुलन बनाए रखना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।

    भारतीय ऑलराउंडर ने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा समय में नोवाक जोकोविच उनके पसंदीदा टेनिस खिलाड़ी हैं। उन्होंने कहा कि वह बचपन से रोजर फेडरर और राफेल नडाल जैसे दिग्गजों को खेलते हुए देखती आई हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जोकोविच की जुझारू मानसिकता और कभी हार न मानने वाले रवैये ने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया है। अब वह उनके लगभग हर मुकाबले को फॉलो करती हैं।

    दीप्ति ने विंबलडन का अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह उनका लंबे समय से देखा गया सपना था। उन्होंने कहा कि वर्षों तक टीवी पर इस प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम को देखने के बाद पहली बार यहां लाइव मुकाबले देखने का अनुभव बेहद खास है। स्टेडियम का माहौल, दर्शकों का उत्साह और प्रतियोगिता का वातावरण उन्हें बेहद रोमांचित कर रहा है।

    जब उनसे पूछा गया कि यदि उन्हें विंबलडन में किसी तीन भारतीय खेल हस्तियों के साथ मैच देखने का मौका मिले तो वह किन्हें चुनेंगी, तो उन्होंने सचिन तेंदुलकर, रवि शास्त्री और सुनील गावस्कर का नाम लिया। दीप्ति का मानना है कि इन तीनों दिग्गजों के साथ बैठकर मैच देखने और खेल पर उनकी राय सुनना अपने आप में यादगार अनुभव होगा।

    दीप्ति शर्मा का यह बयान खेल जगत के दो महान खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती और नेतृत्व क्षमता को लेकर उनकी गहरी समझ को भी दर्शाता है। उन्होंने यह संदेश दिया कि किसी भी खेल में प्रतिभा के साथ मानसिक दृढ़ता और दबाव में सही फैसले लेने की क्षमता ही महान खिलाड़ियों की पहचान होती है।