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  • WTC अंकतालिका में न्यूजीलैंड का दबदबा, ऑस्ट्रेलिया टॉप-2 से बाहर, भारत के सामने फाइनल में पहुंचने की बड़ी चुनौती..

    WTC अंकतालिका में न्यूजीलैंड का दबदबा, ऑस्ट्रेलिया टॉप-2 से बाहर, भारत के सामने फाइनल में पहुंचने की बड़ी चुनौती..


    नई दिल्ली ।
    वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) 2025-27 की अंकतालिका में साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज के नतीजे के बाद बड़ा बदलाव देखने को मिला है। साउथ अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया को घरेलू टेस्ट सीरीज में 2-1 से हराकर अंकतालिका का समीकरण बदल दिया है। इस परिणाम का सीधा फायदा न्यूजीलैंड को मिला है, जिसने ऑस्ट्रेलिया को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया है। वहीं, साउथ अफ्रीका दूसरे और ऑस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। भारतीय टीम भी चौथे स्थान पर बनी हुई है।

    ताजा स्थिति के अनुसार, न्यूजीलैंड का अंक प्रतिशत 72.22 है, जबकि साउथ अफ्रीका 71.43 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया का अंक प्रतिशत 69.23 है। भारत 51.52 प्रतिशत के साथ चौथे नंबर पर है। बांग्लादेश 47.62 प्रतिशत के साथ पांचवें स्थान पर मौजूद है। इसके बाद इंग्लैंड 38.54 प्रतिशत, श्रीलंका 33.33 प्रतिशत और वेस्टइंडीज 26.92 प्रतिशत के साथ क्रमशः छठे, सातवें और आठवें स्थान पर हैं। पाकिस्तान 4.63 प्रतिशत के साथ नौवें नंबर पर है।

    मौजूदा चक्र में अभी 10 टेस्ट सीरीज खेली जानी बाकी हैं। किसी भी टीम ने फाइनल में अपनी जगह पक्की नहीं की है। अंकतालिका में टीमों की स्थिति का फैसला उनके अंक प्रतिशत के आधार पर होता है। टेस्ट मैच जीतने पर टीम को 12 अंक मिलते हैं, जबकि मुकाबला ड्रॉ होने पर चार अंक दिए जाते हैं। वहीं, टाई होने की स्थिति में दोनों टीमों को छह-छह अंक मिलते हैं। इसी व्यवस्था के आधार पर फाइनल में पहुंचने वाली शीर्ष दो टीमों का चयन किया जाएगा।

    न्यूजीलैंड के पास अपनी स्थिति मजबूत करने का अच्छा अवसर है। उसे भारत और श्रीलंका के खिलाफ घरेलू मैदान पर दो-दो टेस्ट खेलने हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर चार और पाकिस्तान के खिलाफ दो टेस्ट मुकाबले खेलने हैं। इस तरह कीवी टीम के सामने अभी आठ टेस्ट मैच बाकी हैं। मौजूदा समीकरण के अनुसार, इन मुकाबलों में सात जीत दर्ज करना उसे शीर्ष दो में जगह बनाने की दौड़ में मजबूत स्थिति में पहुंचा सकता है।

    दूसरी ओर, साउथ अफ्रीका के सात टेस्ट मुकाबले बाकी हैं। इनमें पांच मैच घरेलू मैदान पर खेले जाएंगे। टीम को बांग्लादेश के खिलाफ दो और इंग्लैंड के खिलाफ तीन टेस्ट खेलने हैं, जबकि श्रीलंका के दौरे पर भी दो मुकाबले खेलने हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली सीरीज जीत से टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब बाकी मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन उसे फाइनल की दौड़ में बनाए रख सकता है।

    ऑस्ट्रेलिया के लिए भी आगे की राह महत्वपूर्ण होगी। साउथ अफ्रीका दौरे से पहले अंकतालिका में शीर्ष पर रही कंगारू टीम अब तीसरे स्थान पर है। उसके नौ टेस्ट मुकाबले बाकी हैं। इनमें न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू मैदान पर चार और भारत के खिलाफ भारतीय जमीन पर पांच टेस्ट शामिल हैं। इन मुकाबलों के परिणाम से उसकी फाइनल की संभावनाएं तय होंगी।

    भारतीय टीम के सामने भी फाइनल तक पहुंचने के लिए कड़ी चुनौती है। उसे न्यूजीलैंड में दो टेस्ट खेलने हैं, जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने घरेलू मैदान पर पांच मुकाबलों की सीरीज खेलनी है। भारत यदि अपने बाकी सभी सात टेस्ट जीत लेता है तो उसका अंक प्रतिशत 70.37 तक पहुंच सकता है। छह जीत की स्थिति में यह 65 प्रतिशत रहेगा। वहीं, पांच जीत और एक ड्रॉ मिलने पर टीम को अन्य मुकाबलों के परिणामों पर भी निर्भर रहना पड़ सकता है। यदि भारत न्यूजीलैंड में 0-2 से सीरीज हार जाता है और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांचों टेस्ट जीत भी लेता है, तब उसका अंक प्रतिशत 59.26 ही रहेगा।

    बांग्लादेश के पांच और श्रीलंका के छह टेस्ट मुकाबले बाकी हैं। बांग्लादेश की एक और हार उसकी फाइनल की संभावनाओं को कमजोर कर सकती है। वहीं, श्रीलंका यदि अपने सभी छह मुकाबले जीतता है तो उसका अंक प्रतिशत 66.67 तक पहुंच सकता है। ऐसे में WTC फाइनल की दौड़ अभी खुली हुई है और आने वाली टेस्ट सीरीज अंकतालिका की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती हैं।

  • टी20 अंतरराष्ट्रीय में राशिद खान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, 200 विकेट लेकर बने दुनिया के नंबर-1 गेंदबाज, अर्शदीप भी शीर्ष 10 में शामिल..

    टी20 अंतरराष्ट्रीय में राशिद खान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, 200 विकेट लेकर बने दुनिया के नंबर-1 गेंदबाज, अर्शदीप भी शीर्ष 10 में शामिल..

    नई दिल्ली । टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बल्लेबाजों के आक्रामक अंदाज और चौके-छक्कों की भरमार के बीच गेंदबाजों ने भी अपनी अलग पहचान बनाई है। इस प्रारूप में लगातार विकेट हासिल करना किसी भी गेंदबाज के लिए बड़ी चुनौती होती है। इसके बावजूद कई खिलाड़ियों ने अपनी सटीक गेंदबाजी, गति और स्पिन के दम पर शानदार रिकॉर्ड कायम किए हैं। टी20 अंतरराष्ट्रीय में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में अफगानिस्तान के राशिद खान पहले स्थान पर हैं। उन्होंने 200 विकेट हासिल करके इतिहास रच दिया है। वहीं भारतीय गेंदबाजों में अर्शदीप सिंह ने सबसे ज्यादा विकेट लेकर शीर्ष स्थान हासिल किया है।

    राशिद खान के नाम ऐतिहासिक उपलब्धि

    अफगानिस्तान के लेग स्पिनर राशिद खान टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 200 विकेट लेने वाले दुनिया के पहले गेंदबाज बन गए हैं। उन्होंने 29 अक्टूबर 2026 को जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले में अपना 200वां विकेट हासिल किया। राशिद ने यह उपलब्धि 120 मैचों में दर्ज की है। उनकी गेंदबाजी में गति, टर्न और गुगली का खास मेल देखने को मिलता है, जिसके कारण बल्लेबाजों के लिए उन्हें समझना आसान नहीं होता।

    सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में इंग्लैंड के आदिल राशिद दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने 153 मैचों में 171 विकेट हासिल किए हैं। इस तरह राशिद खान और आदिल राशिद के बीच 29 विकेट का अंतर है। हांगकांग के एहसान खान और न्यूजीलैंड के ईश सोढ़ी 165-165 विकेट के साथ अगले स्थानों पर हैं।

    टी20 अंतरराष्ट्रीय में सर्वाधिक विकेट लेने वाले टॉप-10 गेंदबाज
    गेंदबाज देश मैच विकेट
    राशिद खान अफगानिस्तान 120 200
    आदिल राशिद इंग्लैंड 153 171
    एहसान खान हांगकांग 119 165
    ईश सोढ़ी न्यूजीलैंड 142 165
    टिम साउदी न्यूजीलैंड 126 164
    वानिंदु हसरंगा श्रीलंका 101 163
    मुस्तफिजुर रहमान बांग्लादेश 130 163
    एडम जम्पा ऑस्ट्रेलिया 118 153
    अर्शदीप सिंह भारत 103 150
    शाकिब अल हसन बांग्लादेश 129 149

    भारतीय गेंदबाजों में अर्शदीप सिंह सबसे आगे

    भारतीय खिलाड़ियों की बात करें तो बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने इस प्रारूप में सबसे ज्यादा विकेट हासिल किए हैं। उन्होंने 31 अक्टूबर 2026 को न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में अपना 150वां विकेट पूरा किया। इस उपलब्धि के साथ वह टी20 अंतरराष्ट्रीय में 150 विकेट लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बन गए। अर्शदीप ने 103 मैचों में यह आंकड़ा हासिल किया है।

    भारत की सूची में दूसरे स्थान पर जसप्रीत बुमराह हैं। उन्होंने 100 मैचों में 126 विकेट लिए हैं। वहीं अक्षर पटेल 116 मैचों में 116 विकेट के साथ तीसरे और हार्दिक पांड्या 138 मैचों में 114 विकेट के साथ चौथे स्थान पर हैं।

    भारत के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय में सर्वाधिक विकेट
    गेंदबाज मैच विकेट
    अर्शदीप सिंह 103 150
    जसप्रीत बुमराह 100 126
    अक्षर पटेल 116 116
    हार्दिक पांड्या 138 114

    लगातार अच्छा प्रदर्शन करना बड़ी चुनौती

    टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में गेंदबाजों के सामने बल्लेबाजों के आक्रामक रवैये से निपटने की चुनौती रहती है। कम ओवरों के इस प्रारूप में बल्लेबाज तेजी से रन बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में गेंदबाजों को अपनी रणनीति और गेंदबाजी में लगातार बदलाव करना पड़ता है। राशिद खान ने लेग स्पिन के दम पर लंबे समय तक अपनी प्रभावशाली मौजूदगी बनाए रखी है। आदिल राशिद और ईश सोढ़ी ने भी निरंतर विकेट हासिल किए हैं।

    तेज गेंदबाजों में टिम साउदी, मुस्तफिजुर रहमान और अर्शदीप सिंह ने अपनी उपयोगिता साबित की है। वहीं भारतीय टीम में जसप्रीत बुमराह का अनुभव और निरंतरता महत्वपूर्ण रही है। अक्षर पटेल और हार्दिक पांड्या जैसे ऑलराउंडर भी गेंदबाजी में टीम को अतिरिक्त विकल्प देते हैं।

    क्या टूट सकता है राशिद खान का रिकॉर्ड?

    राशिद खान के 200 विकेट का आंकड़ा फिलहाल इस प्रारूप में सबसे आगे है। दूसरे स्थान पर मौजूद आदिल राशिद उनसे 29 विकेट पीछे हैं। इस अंतर को कम करने के लिए उन्हें लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा। भारतीय गेंदबाजों में अर्शदीप सिंह ने 150 विकेट पूरे कर अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके करियर में अभी आगे और मुकाबले खेलने के अवसर हैं, जिनमें वह अपने विकेटों की संख्या बढ़ा सकते हैं।

  • अमेरिकी पहलवान को आखिरी पलों में दी मात, मनीषा भानवाला ने गोल्ड जीतकर दुनिया में लहराया तिरंगा

    अमेरिकी पहलवान को आखिरी पलों में दी मात, मनीषा भानवाला ने गोल्ड जीतकर दुनिया में लहराया तिरंगा


    नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती के इतिहास में 30 अक्टूबर 2026 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। देश की महिला पहलवान मनीषा भानवाला ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। उन्होंने न केवल अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया बल्कि ऐसी उपलब्धि हासिल की जिसका इंतजार भारतीय महिला कुश्ती को लंबे समय से था। मनीषा विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं। उनकी इस जीत की सबसे खास बात फाइनल मुकाबले में की गई जबरदस्त वापसी रही। एक समय मुकाबले में 0-6 से पिछड़ने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार अमेरिकी पहलवान को 8-6 से हराकर इतिहास रच दिया।

    वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के महिला 59 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में मनीषा भानवाला का सामना अमेरिका की एबिगेल नेटे से हुआ। मुकाबले की शुरुआत भारतीय पहलवान के लिए अच्छी नहीं रही। अमेरिकी खिलाड़ी ने आक्रामक खेल दिखाते हुए लगातार अंक हासिल किए और मनीषा को छह अंकों से पीछे कर दिया। स्कोर 0-6 होने के बाद मुकाबला एकतरफा दिखाई देने लगा था। लेकिन मनीषा ने दबाव में आने के बजाय अपनी रणनीति पर भरोसा बनाए रखा। उन्होंने धीरे धीरे वापसी शुरू की और लगातार अंक जुटाकर मुकाबले का रुख बदल दिया। भारतीय पहलवान के शानदार दांव और मजबूत इरादों के सामने अमेरिकी खिलाड़ी टिक नहीं सकीं। आखिरकार मनीषा ने 8-6 की बढ़त हासिल करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया।

    इस जीत के साथ मनीषा ने भारतीय महिला कुश्ती के लिए एक नया इतिहास बना दिया। इससे पहले विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारत की ओर से पुरुष पहलवान सुशील कुमार ही स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे थे। सुशील कुमार ने साल 2010 में 66 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड मेडल हासिल किया था। अब मनीषा भानवाला का नाम भी इस खास सूची में शामिल हो गया है। उनकी उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने दुनिया के शीर्ष पहलवानों के बीच अपनी प्रतिभा और संघर्ष का शानदार प्रदर्शन किया।

    मनीषा ने फाइनल तक पहुंचने के लिए भी कड़ी चुनौती का सामना किया। सेमीफाइनल मुकाबले में उन्होंने कजाकिस्तान की पहलवान अल्टिन शागायेवा को हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई थी। इसके बाद फाइनल में भी उन्होंने विपरीत परिस्थितियों से उबरकर जीत हासिल की। उनका यह प्रदर्शन बताता है कि बड़े मुकाबलों में आत्मविश्वास और आखिरी क्षण तक संघर्ष करने की क्षमता कितनी अहम होती है।

    इस चैंपियनशिप में भारतीय महिला पहलवानों का सामूहिक प्रदर्शन भी खास रहा। पहली बार एक ही विश्व चैंपियनशिप संस्करण में भारत की तीन महिला पहलवानों ने स्वर्ण पदक के मुकाबले तक जगह बनाई। मनीषा ने गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन किया जबकि नीलम सिरोही ने 50 किलोग्राम और काजल ढोचक ने 76 किलोग्राम वर्ग में फाइनल तक पहुंचकर रजत पदक हासिल किया। वहीं तनु शर्मा ने कांस्य पदक जीतकर भारत की पदक तालिका में योगदान दिया।

    मनीषा भानवाला की यह जीत केवल एक स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं है बल्कि भारतीय महिला कुश्ती के लिए नई संभावनाओं का संकेत भी है। छह अंकों से पिछड़ने के बाद जिस तरह उन्होंने मुकाबला अपने पक्ष में किया उसने खेल प्रेमियों को रोमांचित कर दिया। उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि आने वाली पीढ़ी की महिला पहलवानों के लिए प्रेरणा बनेगी।

  • न्यूजीलैंड में टीम इंडिया का विजय रथ थमा… T-20 क्रिकेट में 6 साल में 10 जीत के बाद हारा भारत

    न्यूजीलैंड में टीम इंडिया का विजय रथ थमा… T-20 क्रिकेट में 6 साल में 10 जीत के बाद हारा भारत


    ऑकलैंड।
    न्यूजीलैंड (New Zealand) ने टी20 सीरीज के चौथे मुकाबले (Fourth Match T20 series) में भारत (India) को 87 रनों से हराया. यह पांच मैचों की टी20 सीरीज में कीवी टीम की पहली जीत रही. शुक्रवार (30 अक्टूबर) को ऑकलैंड (Auckland) के ईडन पार्क में मिली इस हार के साथ ही भारतीय टीम का न्यूजीलैंड की धरती पर लगातार 10 टी20 मैचों से चला आ रहा अजेय अभियान भी थम गया. ग्लेन फिलिप्स (Glenn Phillips) के तूफानी शतक और जैकब डफी (Jacob Duffy) की घातक गेंदबाजी ने मेजबान टीम की जीत की कहानी लिखी।

    भारतीय टीम ने 2020 से 2026 के बीच न्यूजीलैंड में लगातार 10 टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों में हार नहीं झेली थी. शुक्रवार को यह सिलसिला टूट गया. रनों के लिहाज से यह टी20 इंटरनेशनल में भारत की दूसरी सबसे बड़ी हार भी रही. हालांकि, शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर टीम इंडिया टी20 सीरीज पहले ही अपने नाम कर चुकी है।

    एक देश में किसी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ लगातार जीत (फुल मेम्बर)
    11 भारत बनाम श्रीलंका (भारत में, 2016-23)
    10 भारत बनाम न्यूजीलैंड (न्यूजीलैंड में, 2020-26)
    9 न्यूजीलैंड बनाम बांग्लादेश (न्यूजीलैंड में, 2010-22)
    9 पाकिस्तान बनाम जिम्बाब्वे (जिम्बाब्वे में, 2011-21)

    T20I में भारत की सबसे बड़ी हार (रनों के हिसाब से)
    125 रन बनाम इंग्लैंड, नॉटिंघम 2026
    87 रन बनाम न्यूजीलैंड, ऑकलैंड 2026
    80 रन बनाम न्यूजीलैंड, वेलिंगटन 2019
    76 रन बनाम साउथ अफ्रीका, अहमदाबाद 2026

    टॉस जीतकर भारत ने पहले गेंदबाजी चुनी, लेकिन न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने 20 ओवर में सात विकेट पर 259 रन ठोक दिए. यह टी20 इंटरनेशनल में न्यूजीलैंड का अब तक का सबसे बड़ा स्कोर है. ग्लेन फिलिप्स ने भारतीय गेंदबाजों पर हमला बोलते हुए 49 गेंदों पर 107 रन बनाए. उनकी पारी में छह चौके और 10 छक्के शामिल रहे. यह उनके टी20 इंटरनेशनल करियर का तीसरा शतक था. माइकल ब्रेसवेल ने भी महज 25 गेंदों पर 65 रनों की पारी खेली।

    दोनों ने पांचवें विकेट के लिए सिर्फ 41 गेंदों पर 115 रन जोड़कर मैच का रुख बदल दिया. ग्लेन फिलिप्स ने नितीश कुमार रेड्डी के 16वें ओवर में लगातार चार छक्के लगाए और इस ओवर में कुल 32 रन आए. माइकल ब्रेसवेल ने भी आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखी. न्यूजीलैंड ने आखिरी पांच ओवर में 85 रन बटोरकर स्कोर 259 तक पहुंचा दिया. फिन एलन ने 17 गेंदों पर 31 और डेरिल मिचेल ने नौ गेंदों पर 24 रन बनाए. भारत के लिए मयंक यादव ने तीन विकेट हासिल किए. अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव और नितीश कुमार रेड्डी को एक-एक सफलता मिली।

    डफी ने झटके चार विकेट
    260 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को जैकब डफी ने शुरुआती ओवर में ही दो बड़े झटके दिए. उन्होंने संजू सैमसन को चार रनों पर और ईशान किशन को बिना खाता खोले आउट कर दिया. इसके बाद अभिषेक शर्मा और श्रेयस अय्यर ने तेजी से रन जुटाने की कोशिश की. अभिषेक ने 15 गेंदों पर 27 रन बनाए, जबकि श्रेयस के बल्ले से 11 गेंदों पर 22 रन निकले. दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 46 रन जोड़े, लेकिन मैथ्यू फिशर ने अभिषेक को आउट कर साझेदारी तोड़ दी. इसके बाद एडम मिल्ने ने 143 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डालकर भारतीय कप्तान श्रेयस को बोल्ड कर दिया।

    लगातार विकेट गिरने के कारण भारतीय टीम बड़े लक्ष्य के दबाव से उबर नहीं सकी और 87 रनों से मुकाबला गंवा दिया. हार के बावजूद अर्शदीप सिंह के लिए यह मुकाबला खास रहा. उन्होंने मिचेल सेंटनर को आउट कर मेन्स टी20 इंटरनेशनल में 150 विकेट पूरे किए. वह इस उपलब्धि तक पहुंचने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने।

  • रिकल्टन के शतक और मुल्डर की पारी ने पलटा मैच, आखिरी दिन सीरीज जीतने के लिए दोनों टीमें आमने-सामने

    रिकल्टन के शतक और मुल्डर की पारी ने पलटा मैच, आखिरी दिन सीरीज जीतने के लिए दोनों टीमें आमने-सामने


    नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच केपटाउन में खेला जा रहा तीसरा टेस्ट रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार को मुकाबले का आखिरी दिन है और दोनों टीमों के सामने सीरीज जीतने की चुनौती होगी। दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज रयान रिकल्टन को उम्मीद है कि मैच का नतीजा जरूर निकलेगा। उनका मानना है कि मुकाबला जीत या हार के साथ समाप्त होगा और ड्रॉ की संभावना बेहद कम है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि पिच की धीमी रफ्तार और गेंद की स्थिति को देखते हुए आखिरी दिन तीनों तरह के नतीजे संभव हैं।

    चौथे दिन का खेल समाप्त होने के बाद रिकल्टन ने कहा कि पिच बल्लेबाजी के लिए बहुत खराब नहीं हुई है लेकिन इसकी धीमी गति के कारण रन बनाना आसान नहीं है। गेंद भी नरम हो चुकी है जिससे बल्लेबाजों के लिए फील्डरों को चकमा देकर रन निकालना मुश्किल हो रहा है। उनके मुताबिक नई गेंद से बल्लेबाजों को रन बनाने के मौके मिल सकते हैं और गेंदबाजों को विकेट हासिल करने में भी मदद मिल सकती है। ऑस्ट्रेलिया के सामने लक्ष्य हासिल करने की चुनौती होगी क्योंकि उसे पूरे दिन एक ऐसे विकेट पर बल्लेबाजी करनी पड़ सकती है जो लगातार धीमा होता जा रहा है।

    रिकल्टन ने दक्षिण अफ्रीका के मुख्य कोच शुकरी कॉनराड और कप्तान टेम्बा बावुमा की सोच की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि कोच हमेशा सकारात्मक रुख अपनाते हैं और टीम को भरोसा दिलाते हैं कि उसके पास उपलब्ध संसाधन मुकाबला जीतने के लिए पर्याप्त हैं। कप्तान बावुमा भी खिलाड़ियों को हर दिन कुछ खास करने का अवसर मिलने की बात कहते हैं। रिकल्टन के अनुसार आखिरी दिन किसी खिलाड़ी के पास टीम के लिए यादगार प्रदर्शन करने का मौका होगा।

    मैच की स्थिति पर नजर डालें तो दक्षिण अफ्रीका ने पहली पारी में 329 रन बनाए थे। इसके जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 429 रन बनाए और पहली पारी के आधार पर 100 रन की बढ़त हासिल कर ली। दूसरी पारी में दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने 181 रन पर 5 विकेट गंवा दिए थे। ऐसे मुश्किल समय में रयान रिकल्टन और वियान मुल्डर ने मोर्चा संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 154 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की और टीम को 335 रन तक पहुंचाया।

    इस साझेदारी के दौरान रिकल्टन ने शानदार शतक लगाया। वह 101 रन बनाकर दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट हो गए। उनके आउट होने के बाद मुल्डर ने अकेले संघर्ष जारी रखा और आखिरी विकेट के रूप में आउट होने से पहले 115 रन की शतकीय पारी खेली। दक्षिण अफ्रीका की दूसरी पारी 387 रन पर समाप्त हुई। टीम अगर रिकल्टन के रन आउट होने के बाद भी कुछ देर टिक पाती और निचले क्रम से सहयोग मिलता तो स्कोर और बड़ा हो सकता था।

    पहली पारी में मिली 100 रन की बढ़त के बाद दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया के सामने जीत के लिए 288 रन का लक्ष्य रखा है। आखिरी दिन दक्षिण अफ्रीका की कोशिश ऑस्ट्रेलिया के सभी 10 विकेट हासिल करने की होगी जबकि कंगारू टीम लक्ष्य तक पहुंचने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। तीन टेस्ट मैचों की सीरीज फिलहाल 1-1 से बराबर है। ऐसे में केपटाउन टेस्ट जीतने वाली टीम सीरीज अपने नाम कर लेगी। यही वजह है कि मुकाबले का आखिरी दिन दोनों टीमों के लिए बेहद अहम और रोमांचक रहने वाला है।

  • टीम इंडिया के गेंदबाजी मैनेजमेंट पर कैफ का बड़ा बयान, अय्यर की कप्तानी में बार-बार दोहराई जा रही गलतियां

    टीम इंडिया के गेंदबाजी मैनेजमेंट पर कैफ का बड़ा बयान, अय्यर की कप्तानी में बार-बार दोहराई जा रही गलतियां


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ ऑकलैंड के ईडन पार्क में खेले गए चौथे टी20 मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद टीम इंडिया की कप्तानी और गेंदबाजी रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने कप्तान श्रेयस अय्यर के फैसलों पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि उन्हें गेंदबाजों को बेहतर तरीके से मैनेज करना सीखना होगा। कैफ के मुताबिक भारतीय टीम के खिलाफ बड़े स्कोर बनना अब एक बार की घटना नहीं रह गई है बल्कि यह लगातार दोहराया जा रहा पैटर्न बन गया है।

    मोहम्मद कैफ ने अय्यर की कप्तानी में गेंदबाजी में बदलाव करने के तरीके पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि कप्तान को यह समझना जरूरी है कि किस गेंदबाज से किस समय गेंदबाजी करानी चाहिए। खासतौर पर टी20 क्रिकेट में डेथ ओवरों के लिए विशेषज्ञ गेंदबाजों को बचाकर रखना बेहद अहम होता है। कैफ ने अर्शदीप सिंह और भुवनेश्वर कुमार जैसे अनुभवी गेंदबाजों के इस्तेमाल पर भी अपनी राय रखी। उनके अनुसार अर्शदीप डेथ ओवरों में भारत के प्रमुख बाएं हाथ के गेंदबाज हैं जबकि भुवनेश्वर के पास नई गेंद और आखिरी ओवरों में गेंदबाजी करने का अनुभव है। ऐसे में कप्तान को इन गेंदबाजों के ओवर सही समय के लिए बचाकर रखने चाहिए।

    कैफ ने भारतीय टीम के खिलाफ बन रहे बड़े स्कोर का आंकड़ा भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि साल 2026 से पहले भारतीय पुरुष टी20 टीम ने कभी भी 250 या उससे ज्यादा रन नहीं दिए थे। लेकिन अय्यर की कप्तानी में महज चार महीनों के भीतर भारत को तीन बार इस स्थिति का सामना करना पड़ा है। इंग्लैंड ने साउथैम्प्टन में 3 विकेट पर 257 रन बनाए थे। वेस्टइंडीज ने रांची में 4 विकेट पर 252 रन का स्कोर खड़ा किया जबकि न्यूजीलैंड ने ऑकलैंड में 7 विकेट पर 259 रन बना दिए। कैफ के मुताबिक लगातार इतने बड़े स्कोर बनना गेंदबाजी रणनीति की समीक्षा की जरूरत बताता है।

    हालांकि कैफ ने यह भी स्पष्ट किया कि हर महंगे गेंदबाजी प्रदर्शन के लिए कप्तान को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। ऑकलैंड में नीतीश कुमार रेड्डी ने चार ओवर में 64 रन खर्च किए। वहीं न्यूजीलैंड के ग्लेन फिलिप्स और माइकल ब्रेसवेल ने 41 गेंदों में 115 रन जोड़कर भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। न्यूजीलैंड ने आखिरी नौ ओवरों में 146 रन बनाए। इस दौरान भारतीय गेंदबाज रन रोकने में नाकाम रहे। कैफ ने अर्शदीप सिंह को भारतीय आक्रमण का ऐसा गेंदबाज बताया जिसने कुछ हद तक नियंत्रण बनाए रखा।

    नीतीश कुमार रेड्डी की भूमिका को लेकर भी कैफ ने अपनी राय रखी। उनका मानना है कि नीतीश को पांचवें या छठे गेंदबाजी विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करना चाहिए। उनसे मुख्य तेज गेंदबाज जैसी जिम्मेदारी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उनके ओवर मध्यक्रम के दौरान पूरे कराए जाने चाहिए ताकि विशेषज्ञ गेंदबाजों पर दबाव कम रहे।

    श्रेयस अय्यर के लिए चिंता सिर्फ कप्तानी तक सीमित नहीं है। उनका बल्ला भी पिछले कुछ मुकाबलों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाया है। 6 अक्टूबर को लखनऊ में वेस्टइंडीज के खिलाफ 43 गेंदों पर नाबाद 102 रन बनाने के बाद अय्यर की पिछली आठ पारियों में 40 1 16 22 42 7 5 और 22 रन की पारियां शामिल हैं। ऐसे में न्यूजीलैंड के खिलाफ हार के बाद उनकी कप्तानी के साथ बल्लेबाजी पर भी चर्चा तेज हो गई है।

  • हांगकांग सिक्सेस में भारत की लगातार दूसरी हार, UAE ने 4.2 ओवर में ही 95 रन का लक्ष्य किया हासिल

    हांगकांग सिक्सेस में भारत की लगातार दूसरी हार, UAE ने 4.2 ओवर में ही 95 रन का लक्ष्य किया हासिल


    नई दिल्ली। हांगकांग सिक्सेस टूर्नामेंट में भारतीय क्रिकेट टीम का निराशाजनक प्रदर्शन जारी है। टूर्नामेंट में भारत को लगातार दूसरी हार का सामना करना पड़ा है। शनिवार को खेले गए मुकाबले में संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने भारतीय टीम को 6 विकेट से शिकस्त दी। इससे पहले भारत को अपने शुरुआती मुकाबले में पाकिस्तान के खिलाफ 4 विकेट से हार मिली थी। लगातार दो हार के बाद भारतीय टीम के प्रदर्शन पर सवाल उठने लगे हैं।

    कॉव्लून के टिन क्वॉंग रोड रिक्रिएशन ग्राउंड में खेले गए मुकाबले में UAE ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। शीर्ष क्रम के बल्लेबाज बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। हालांकि आखिरी क्रम में बल्लेबाजी करने आए टी. नटराजन ने शानदार आक्रामक अंदाज दिखाते हुए टीम का स्कोर 94 रन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

    नटराजन ने महज 14 गेंदों पर नाबाद अंदाज में 38 रन की तेजतर्रार पारी खेली। उनकी इस पारी में 4 छक्के और 3 चौके शामिल रहे। राहुल त्रिपाठी ने भी शुरुआत से ही बड़े शॉट खेलने की कोशिश की। उन्होंने केवल 7 गेंदों पर 3 छक्कों और एक चौके की मदद से 24 रन बनाए। कप्तान क्रुणाल पंड्या ने 8 गेंदों पर 15 रन का योगदान दिया। इसके अलावा नितीश राणा 6 रन और राहुल तेवतिया तथा शशांक सिंह एक-एक रन बनाकर आउट हुए। भारतीय टीम ने 6 ओवर में अपने सभी 6 विकेट गंवाकर 94 रन बनाए।

    95 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी UAE की टीम ने भारतीय गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया। टीम ने बेहद आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए महज 4.2 ओवर में बिना कोई विकेट गंवाए 97 रन बना लिए और मुकाबला अपने नाम कर लिया। UAE के कप्तान और विकेटकीपर खालिद शाह ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर खबर ली। उन्होंने सिर्फ 14 गेंदों पर 6 छक्कों और 3 चौकों की मदद से नाबाद 52 रन बनाए। उनके साथ अंश टंडन ने भी विस्फोटक बल्लेबाजी की। अंश ने 12 गेंदों पर 5 छक्के और 2 चौके लगाते हुए नाबाद 39 रन बनाए।

    भारतीय गेंदबाज इस मुकाबले में पूरी तरह बेअसर नजर आए। बल्लेबाजी में 38 रन बनाने वाले टी. नटराजन गेंदबाजी के दौरान काफी महंगे साबित हुए। उन्होंने अपने 2 ओवर में 43 रन खर्च कर दिए। शशांक सिंह ने एक ओवर में 17 रन दिए जबकि नितीश राणा ने एक ओवर में 24 रन लुटाए। कप्तान क्रुणाल पंड्या ने भी केवल 2 गेंदों में 12 रन दे दिए। UAE के जाहिद अली को शानदार गेंदबाजी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने 2 ओवर में 32 रन देकर 2 विकेट हासिल किए।

    भारतीय टीम के लिए यह हार इसलिए भी चिंता बढ़ाने वाली है क्योंकि उसे लगातार दूसरे मुकाबले में शिकस्त मिली है। पहले पाकिस्तान और फिर UAE के खिलाफ मिली हार ने टूर्नामेंट में भारत की स्थिति मुश्किल कर दी है। अब भारतीय टीम को आगे के मुकाबलों में बेहतर बल्लेबाजी और अनुशासित गेंदबाजी के साथ उतरना होगा।

  • न्यूजीलैंड ने चौथे टी20 में भारत को 87 रन से हराया, फिलिप्स का शतक और डफी की घातक गेंदबाजी

    न्यूजीलैंड ने चौथे टी20 में भारत को 87 रन से हराया, फिलिप्स का शतक और डफी की घातक गेंदबाजी

    नई दिल्ली ।न्यूजीलैंड ने चौथे टी20 मुकाबले में भारतीय टीम को 87 रन से हराकर सीरीज में पहली जीत दर्ज की। ऑकलैंड के ईडन पार्क स्टेडियम में खेले गए मैच में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 259 रन बनाए। इसके जवाब में भारतीय टीम निर्धारित 20 ओवर में 9 विकेट गंवाकर 172 रन ही बना सकी। इस जीत के साथ न्यूजीलैंड ने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में भारत के खिलाफ अपनी सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड भी बना दिया।

    इससे पहले न्यूजीलैंड ने 2019 में वेलिंग्टन में खेले गए टी20 मुकाबले में भारत को 80 रन से हराया था। चौथे मैच में 87 रन की जीत ने उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। हालांकि, इस मुकाबले के नतीजे से सीरीज में भारतीय टीम की स्थिति पर असर नहीं पड़ा, क्योंकि इससे पहले खेले गए तीनों मैचों में भारत ने जीत हासिल की थी और सीरीज अपने नाम कर ली थी।

    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम ने आक्रामक अंदाज में रन बनाए। टीम ने टी20 इंटरनेशनल में अपना अब तक का सबसे बड़ा स्कोर खड़ा किया। ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 49 गेंदों पर 107 रन बनाए। उनकी पारी ने न्यूजीलैंड को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। फिलिप्स ने भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा और तेजी से रन जुटाए।

    माइकल ब्रेसवेल ने भी विस्फोटक बल्लेबाजी की। उन्होंने केवल 25 गेंदों पर 65 रन बनाकर न्यूजीलैंड की पारी को मजबूती दी। दोनों बल्लेबाजों की पारियों की बदौलत न्यूजीलैंड ने 259 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। भारत की ओर से मयंक यादव सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने तीन विकेट हासिल किए। अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव, नीतीश कुमार रेड्डी और अक्षर पटेल को एक-एक विकेट मिला।

    260 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने महज चार रन के स्कोर पर अपने दोनों शुरुआती विकेट गंवा दिए। संजू सैमसन चार रन बनाकर आउट हुए, जबकि ईशान किशन खाता भी नहीं खोल सके। शुरुआती झटकों के कारण भारतीय टीम दबाव में आ गई।

    इसके बाद अभिषेक शर्मा और श्रेयस अय्यर ने पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन दोनों बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं कर सके। दोनों के आउट होने से भारत की मुश्किलें बढ़ गईं। टीम ने अपने शुरुआती चार विकेट केवल 56 रन पर गंवा दिए। बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाजी पूरी तरह दबाव में नजर आई और कोई भी बल्लेबाज अर्धशतक तक नहीं पहुंच सका।

    भारत की ओर से तिलक वर्मा ने सबसे अधिक 35 रन बनाए। उन्होंने 35 गेंदों का सामना किया। नमन धीर ने 28 रन और अभिषेक शर्मा ने 27 रन का योगदान दिया। अन्य बल्लेबाज बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। परिणामस्वरूप भारतीय टीम 20 ओवर में 172 रन तक ही पहुंच सकी।

    न्यूजीलैंड की गेंदबाजी में जैकब डफी सबसे प्रभावशाली रहे। उन्होंने चार विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। मैथ्यू फिशर और मिचेल सैंटनर ने दो-दो विकेट हासिल किए, जबकि एडम मिल्ने को एक सफलता मिली। फिलिप्स की शतकीय पारी और डफी की शानदार गेंदबाजी न्यूजीलैंड की जीत के प्रमुख कारण रहे।

  • नंबर-3 से नंबर-5 पर आते ही बदला तिलक वर्मा का अंदाज, अब पहली गेंद से बाउंड्री लगाने की रहती है कोशिश

    नंबर-3 से नंबर-5 पर आते ही बदला तिलक वर्मा का अंदाज, अब पहली गेंद से बाउंड्री लगाने की रहती है कोशिश

    नई दिल्ली । भारतीय टी20 टीम के उपकप्तान तिलक वर्मा ने बल्लेबाजी क्रम में बदलाव के साथ अपनी रणनीति में भी बदलाव किया है। पहले तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले तिलक अब पांचवें या छठे नंबर पर उतर रहे हैं। इस नई भूमिका में उनका लक्ष्य शुरुआत से ही तेजी से रन बनाना है। हालांकि, वह परिस्थितियों को समझकर ही आक्रामक शॉट खेलने का फैसला करते हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे टी20 मुकाबले से पहले उन्होंने अपने बदले हुए बल्लेबाजी अंदाज और रन चेज के दौरान अपनाई जाने वाली रणनीति के बारे में बताया।

    तिलक के मुताबिक, उनके पास पहले से ही बड़े शॉट खेलने की क्षमता थी और उन्होंने तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए भी खूब रन बनाए हैं। लेकिन अब पांचवें या छठे नंबर पर आने के बाद उनकी सोच में थोड़ा बदलाव आया है। इस क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए वह पहली ही गेंद से बाउंड्री लगाने का मौका तलाशते हैं। हालांकि, इसके लिए गेंद का उनके अनुकूल होना जरूरी है। यदि पहली गेंद पर बड़ा शॉट खेलने का सही अवसर नहीं मिलता, तो वह जल्दबाजी करने के बजाय पारी को आगे बढ़ाने पर ध्यान देते हैं।

    तिलक ने बताया कि ऐसी स्थिति में वह शुरुआत में सिंगल और डबल लेकर स्कोर आगे बढ़ाते हैं। साथ ही मैदान में खाली जगह तलाशकर चौके लगाने की कोशिश करते हैं। उनका मानना है कि मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते समय केवल आक्रामक होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मैच की परिस्थिति के अनुसार जोखिम लेना भी जरूरी है। जरूरत पड़ने पर वह क्रीज पर समय बिताते हैं और मुकाबले को अंतिम ओवरों तक ले जाने की कोशिश करते हैं।
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    तिलक की यह रणनीति न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में देखने को मिली थी। क्राइस्टचर्च में खेले गए इस मैच में भारतीय टीम 181 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए मुश्किल स्थिति में पहुंच गई थी। ऐसे समय में तिलक ने नीतीश रेड्डी के साथ मिलकर पारी को संभाला। उन्होंने 26 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाए और टीम को चार विकेट से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। दोनों बल्लेबाजों के बीच सातवें विकेट के लिए 69 रन की नाबाद साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को उस मुकाबले में जीत तक पहुंचाया।

    तिलक ने बताया कि उस समय उन्होंने नीतीश रेड्डी से कहा था कि अगर दोनों बल्लेबाज मिलकर यहां से मैच जिता देते हैं तो यह बेहद खास होगा। उन्होंने साथी खिलाड़ी को क्रीज पर टिके रहने, मुकाबले को आगे तक ले जाने और फिर परिस्थितियों के अनुसार खेलने की सलाह दी थी। तिलक के अनुसार, रन चेज में धैर्य बनाए रखना और सही समय पर तेजी से रन बनाना काफी महत्वपूर्ण होता है।

    आखिरी ओवरों में गेंदबाजों पर दबाव बनाने को लेकर भी तिलक की सोच स्पष्ट है। उनका मानना है कि डेथ ओवर्स में बल्लेबाज के मुकाबले गेंदबाज अधिक दबाव में होता है। वह इसी सकारात्मक सोच के साथ बल्लेबाजी करते हैं कि गेंदबाज पर दबाव होने के कारण उससे रन देने की गलती हो सकती है। इस मानसिकता से उन्हें मुश्किल लक्ष्य का पीछा करते समय आत्मविश्वास बनाए रखने में मदद मिलती है।

    न्यूजीलैंड दौरे पर पहुंचने से पहले भारतीय टीम ने घरेलू मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज खेली थी। लगातार व्यस्त कार्यक्रम के कारण नए माहौल और समय क्षेत्र के अनुसार खुद को ढालना आसान नहीं था। तिलक ने माना कि परिस्थितियों से तालमेल बैठाना चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाली टीम इस वजह से बहाने नहीं बना सकती। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन से युवा क्रिकेटरों के लिए उदाहरण पेश करना चाहिए। मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी टीम बैठकों में स्पष्ट किया है कि टी20 टीम का प्रदर्शन पूरे दौरे के लिए अच्छा माहौल तैयार कर सकता है।

    भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में शुरुआती तीनों मुकाबले जीतकर 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है। अब टीम की नजर बाकी दोनों मैच जीतकर सीरीज में 5-0 से क्लीन स्वीप करने पर है। तिलक ने इसे भारतीय टीम और दर्शकों के लिए अच्छा अवसर बताया। चौथा टी20 मुकाबला 30 अक्टूबर को ऑकलैंड में खेला जाना है।

  • IPL 2027 से पहले मुंबई इंडियंस में बड़ा फेरबदल, लसिथ मलिंगा समेत तीन दिग्गज कोचों की हुई विदाई

    IPL 2027 से पहले मुंबई इंडियंस में बड़ा फेरबदल, लसिथ मलिंगा समेत तीन दिग्गज कोचों की हुई विदाई

    नई दिल्ली । इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2027 से पहले पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस ने अपने कोचिंग स्टाफ में बड़ा बदलाव किया है। फ्रेंचाइजी ने श्रीलंका के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज लसिथ मलिंगा, पारस म्हाम्ब्रे और फील्डिंग कोच कार्ल हॉपकिंसन के साथ अपना नाता खत्म कर लिया है। इन तीनों कोचों की विदाई के साथ टीम के सपोर्ट स्टाफ में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल रहा है। मुंबई इंडियंस ने तीनों के योगदान और लंबे समय तक टीम के साथ उनके जुड़ाव की सराहना करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

    इस फैसले को आईपीएल के आगामी सीजन की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुंबई इंडियंस पिछले कुछ समय से अपने कोचिंग ढांचे में बदलाव कर रही है। इससे पहले टीम ने मुख्य कोच महेला जयवर्धने की जगह वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान कीरोन पोलार्ड को यह जिम्मेदारी सौंपी थी। अब गेंदबाजी और फील्डिंग विभाग से जुड़े तीन अनुभवी कोचों के जाने से टीम के कोचिंग सेटअप में नए चेहरों के लिए रास्ता खुल गया है।

    लसिथ मलिंगा का मुंबई इंडियंस के साथ काफी पुराना और सफल रिश्ता रहा है। वह फ्रेंचाइजी के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। खिलाड़ी के रूप में उन्होंने मुंबई की गेंदबाजी को मजबूती देने के साथ कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में अहम भूमिका निभाई थी। उनकी तेज गति, सटीक यॉर्कर और डेथ ओवरों में गेंदबाजी करने की क्षमता टीम की सबसे बड़ी ताकतों में गिनी जाती रही है। मलिंगा मुंबई इंडियंस की चार आईपीएल खिताबी जीत का हिस्सा रहे। इसके अलावा 2011 में चैंपियंस लीग टी20 का खिताब जीतने वाली टीम में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान था।

    खिलाड़ी के रूप में अपना सफर समाप्त करने के बाद मलिंगा ने मुंबई इंडियंस के साथ मेंटर और कोच की भूमिका में भी काम किया। वर्ष 2018 में वह टीम के मेंटर बने और बाद में गेंदबाजी कोच की जिम्मेदारी संभाली। उनके अनुभव का फायदा टीम के गेंदबाजों को मिलता रहा। फ्रेंचाइजी के साथ उनका जुड़ाव एक दशक से अधिक समय तक बना रहा।

    पारस म्हाम्ब्रे का भी मुंबई इंडियंस के साथ लंबा जुड़ाव रहा है। उन्होंने पहली बार 2010 से 2017 तक टीम के कोचिंग सेटअप में काम किया था। इसके बाद वर्ष 2024 में वह दोबारा फ्रेंचाइजी से जुड़े। गेंदबाजी प्रतिभाओं को निखारने और युवा खिलाड़ियों को बेहतर बनाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। भारतीय क्रिकेट में भी वह कोच के रूप में काम कर चुके हैं। उनके अनुभव और टीम की कार्यप्रणाली की समझ को मुंबई इंडियंस के लिए उपयोगी माना जाता रहा है।

    वहीं, कार्ल हॉपकिंसन आईपीएल 2025 से पहले मुंबई इंडियंस के कोचिंग स्टाफ में शामिल हुए थे। उन्हें टीम के फील्डिंग विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। इससे पहले वह इंग्लैंड की पुरुष क्रिकेट टीम के साथ भी काम कर चुके थे। उनके पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों की फील्डिंग सुधारने का अनुभव था। मुंबई इंडियंस ने उनके पेशेवर रवैये और फील्डिंग के स्तर को बेहतर बनाने में दिए गए योगदान की सराहना की है।

    तीनों कोचों की विदाई के बाद अब मुंबई इंडियंस का ध्यान आईपीएल 2027 के लिए नई रणनीति और मजबूत कोचिंग टीम तैयार करने पर होगा। आगामी सीजन में टीम का प्रदर्शन कैसा रहता है, यह काफी हद तक नए कोचिंग ढांचे और खिलाड़ियों के तालमेल पर निर्भर करेगा।

    इसके बाद 30 अक्टूबर को मुंबई इंडियंस ने नए कोचिंग स्टाफ की भी घोषणा की। कीरोन पोलार्ड मुख्य कोच की भूमिका में बने रहेंगे। रॉबिन उथप्पा को बल्लेबाजी कोच, मिचेल मैक्लेनाघन को गेंदबाजी कोच, टी. दिलीप को फील्डिंग कोच और धवल कुलकर्णी को डेवलपमेंट बॉलिंग कोच नियुक्त किया गया है। नई टीम के साथ फ्रेंचाइजी आगामी आईपीएल सीजन में बेहतर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है।