Breaking News: सुरों का सतरंगी सफर थमा: नहीं रहीं संगीत की सबसे 'वर्सेटाइल' आवाज़ आशा भोसले


नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की दिग्गज पार्श्व गायिका Asha Bhosle का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें 11 अप्रैल को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां चेस्ट इंफेक्शन और अत्यधिक थकान के कारण उनकी हालत बिगड़ गई थी। डॉक्टरों की निगरानी में इलाज चल रहा था, लेकिन आखिरकार उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन से पूरे संगीत और फिल्म जगत में शोक की लहर है।
 40 के दशक से शुरू हुआ सुनहरा सफर

Asha Bhosle ने अपने करियर की शुरुआत 1940 के दशक में की थी। शुरुआती दौर में उन्होंने छोटे बजट की फिल्मों में गाने गाकर पहचान बनाई। 1952 में आई फिल्म ‘संगदिल’ से उन्हें पहचान मिली, जिसके संगीतकार Sajjad Hussain थे। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बना ली।

दिग्गजों के साथ किया यादगार काम

अपने लंबे करियर में आशा भोसले ने Bimal Roy, Raj Kapoor जैसे महान फिल्मकारों और O. P. Nayyar, R. D. Burman, A. R. Rahman जैसे संगीतकारों के साथ काम किया। उनकी बड़ी बहन Lata Mangeshkar भी अपने समय की महान गायिका थीं, और दोनों बहनों ने मिलकर संगीत जगत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

हर दौर में हिट रहीं उनकी आवाज

1957 में आई फिल्म ‘नया दौर’ से आशा भोसले को बड़ी सफलता मिली। इसके बाद उन्होंने Mohammed Rafi के साथ कई सुपरहिट गाने दिए, जैसे “उड़े जब-जब जुल्फें तेरी” और “साथी हाथ बढ़ाना”।1966 में फिल्म ‘तीसरी मंजिल’ के गानों ने उन्हें नई पहचान दी। “पिया तू अब तो आजा”, “ये मेरा दिल” जैसे गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं।

गजल से लेकर पॉप तक, हर अंदाज में बेमिसाल

1981 में फिल्म ‘उमराव जान’ के लिए गाई गई गजलों—“दिल चीज क्या है”, “इन आंखों की मस्ती”—ने उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया। इसके बाद फिल्म ‘इजाजत’ के गाने “मेरा कुछ सामान” के लिए भी उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला। 1990 और 2000 के दशक में भी उन्होंने ‘रंगीला’, ‘लगान’ जैसी फिल्मों में अपनी आवाज देकर साबित किया कि उनकी लोकप्रियता समय के साथ और बढ़ती गई।

रिकॉर्ड और उपलब्धियां

Asha Bhosle ने 20 से अधिक भाषाओं में हजारों गाने गाए। इसी वजह से उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ। 79 साल की उम्र में उन्होंने फिल्म ‘माई’ से एक्टिंग में भी कदम रखा और दर्शकों को प्रभावित किया।

अंतिम समय तक रहीं सक्रिय

जनवरी 2025 में दुबई में हुए कॉन्सर्ट में 91 साल की उम्र में भी उन्होंने शानदार परफॉर्मेंस दी थी। उनकी ऊर्जा और संगीत के प्रति समर्पण आखिरी समय तक बरकरार रहा।

 हमेशा जिंदा रहेंगी उनकी आवाज

आशा भोसले का जाना सिर्फ एक कलाकार का नहीं, बल्कि एक युग का अंत है। उनकी आवाज, उनके गीत और उनका योगदान हमेशा संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेगा।