इस बीच ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने साफ कहा है कि उन्हें इस योजना में किसी भी तरह की भागीदारी या सहायता के लिए अमेरिका की ओर से कोई औपचारिक संदेश नहीं मिला है।
ऑस्ट्रेलिया का स्पष्ट रुख
प्रधानमंत्री अल्बनीज ने चैनल नाइन से बातचीत में कहा कि अमेरिका ने यह कार्रवाई एकतरफा रूप से की है और ऑस्ट्रेलिया से इसमें शामिल होने के लिए कोई अनुरोध नहीं किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक कोई आधिकारिक अपील नहीं आती, तब तक ऑस्ट्रेलिया इस तरह की किसी भी सैन्य या रणनीतिक कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेगा।
अमेरिका का दावा और कार्रवाई की घोषणा
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ परमाणु समझौते को लेकर बातचीत विफल होने के बाद यह कदम उठाया गया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना सोमवार से होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी पोर्ट्स से जुड़े जहाजों को रोकने की कार्रवाई शुरू करेगी।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान पर दबाव बनाने के उद्देश्य से की जा रही है और इसमें सभी देशों के जहाजों पर समान रूप से नजर रखी जाएगी, हालांकि गैर-ईरानी पोर्ट्स के जहाजों को रोका नहीं जाएगा।
वैश्विक व्यापार के लिए अहम समुद्री मार्ग
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की नाकाबंदी से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
ईरान-अमेरिका तनाव फिर बढ़ा
ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही परमाणु वार्ता पहले ही कई बार असफल हो चुकी है। हालिया घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता की आशंका भी तेज हो गई है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका की कथित नाकाबंदी योजना और ऑस्ट्रेलिया की दूरी ने इस मुद्दे को और जटिल बना दिया है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
