स्पाइस बोर्ड में रिसर्च ट्रेनी पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू, 30 अप्रैल को वॉक इन टेस्ट से होगा चयन, कृषि शोध में युवाओं के लिए सुनहरा अवसर

नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम:केरल स्थित मसाला बोर्ड ने भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान में रिसर्च ट्रेनी पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह अवसर विशेष रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के योग्य उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध कराया गया है। कुल पांच पदों पर नियुक्ति की जाएगी, जिनमें कृषि विज्ञान और मृदा विज्ञान से जुड़े दो पद तथा पादप रोग विज्ञान से जुड़े तीन पद शामिल हैं।

इन पदों के लिए चयन प्रक्रिया वॉक इन टेस्ट के माध्यम से पूरी की जाएगी। इस प्रक्रिया में उम्मीदवारों की प्रारंभिक स्क्रीनिंग के साथ लिखित परीक्षा, दक्षता परीक्षण और दस्तावेजों का सत्यापन शामिल रहेगा। चयनित अभ्यर्थियों को प्रति माह 21 हजार रुपये का स्टाइपेंड प्रदान किया जाएगा।

वॉक इन टेस्ट का आयोजन 30 अप्रैल को सुबह 10 बजे निर्धारित स्थान पर किया जाएगा। उम्मीदवारों को निर्देश दिया गया है कि वे परीक्षा स्थल पर समय से कम से कम एक घंटा पहले उपस्थित हों ताकि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी की जा सके।

योग्यता मानदंड के अनुसार कृषि विज्ञान और मृदा विज्ञान पद के लिए उम्मीदवार के पास कृषि विज्ञान, मृदा विज्ञान, जैव रसायन, रसायन विज्ञान, बागवानी या पर्यावरण विज्ञान में स्नातकोत्तर डिग्री होना आवश्यक है और न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक अनिवार्य रखे गए हैं। वहीं पादप रोग विज्ञान पद के लिए कृषि विषय में पादप रोग विज्ञान, सूक्ष्म जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान या बागवानी में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री जरूरी है।

इसके साथ ही कंप्यूटर का कार्यसाधक ज्ञान रखने वाले और संबंधित क्षेत्र में अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी। इस भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना 12 मार्च के आधार पर की जाएगी।

चयन प्रक्रिया पूरी तरह वॉक इन टेस्ट आधारित होगी, जिसमें उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और व्यावहारिक क्षमता का मूल्यांकन किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को मसाला फसलों और विशेष रूप से इलायची से जुड़े अनुसंधान कार्यों में योगदान देना होगा।

यह भर्ती कृषि और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। इससे न केवल शोध कार्यों को मजबूती मिलेगी बल्कि कृषि विज्ञान के क्षेत्र में नई तकनीकों के विकास को भी गति मिलेगी।