विदेश मंत्रालय के अनुसार सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद विरोधी कार्यालय यूएनओसीटी के कार्यवाहक अवर महासचिव एलेक्जेंडर जौएव से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने आतंकवाद के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर विचार साझा किए। बैठक का मुख्य फोकस वैश्विक स्तर पर आतंकवाद विरोधी रणनीतियों को मजबूत करना और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना रहा।
यूएनओसीटी के अधिकारी जौएव ने इस अवसर पर आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक प्रयासों में भारत के लंबे समय से चले आ रहे योगदान की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से भारत द्वारा यूएनओसीटी और विभिन्न क्षमता निर्माण पहलों को दिए जा रहे समर्थन की प्रशंसा की। यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और विश्वसनीयता को दर्शाता है।
दोनों पक्षों ने आगामी काउंटर टेररिज्म वीक की तैयारियों पर भी चर्चा की जो 26 जून से 2 जुलाई 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन को लेकर सहयोग और समन्वय को और मजबूत करने पर सहमति बनी ताकि वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति को प्रभावी बनाया जा सके। यूएनओसीटी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर भी इस बैठक की जानकारी साझा करते हुए भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
इसके अलावा सिबी जॉर्ज ने उरुग्वे की स्थायी प्रतिनिधि और जी 77 की अध्यक्ष लॉरा डुपुई लासेरे से भी मुलाकात की। इस बैठक में दक्षिण दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देने और विकासशील देशों की एक साझा आवाज को संयुक्त राष्ट्र में और मजबूत बनाने पर चर्चा की गई। भारत ने इस दौरान भारत यूएन विकास साझेदारी फंड के माध्यम से वैश्विक दक्षिण के विकास में अपनी भूमिका को भी रेखांकित किया।
इस पूरे दौरे के दौरान सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र के कई वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न देशों के राजनयिकों से मुलाकात की। उन्होंने यूएन मुख्यालय में महात्मा गांधी की प्रतिमा को श्रद्धांजलि देकर अपने कार्यक्रम की शुरुआत की जो भारत की शांति और अहिंसा की वैश्विक छवि को दर्शाता है।भारत ऐतिहासिक रूप से संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक रहा है। इस यात्रा के दौरान भी भारत ने शांति स्थापना और वैश्विक सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
कुल मिलाकर न्यूयॉर्क में हुई यह बैठकें न केवल आतंकवाद विरोधी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि भारत वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा के क्षेत्र में लगातार अपनी भूमिका को और प्रभावी बना रहा है।
