नई दिल्ली। भारतीय फिल्म जगत में बाहुबली 2: द कॉन्क्लूजन एक ऐसी ऐतिहासिक फिल्म के रूप में जानी जाती है, जिसने अपने शानदार निर्माण और विशालता से एक नया मानक स्थापित किया। इस फिल्म की सफलता के पीछे केवल कहानी या अभिनय ही नहीं, बल्कि इसकी भव्य प्रस्तुति और विशाल सेट भी बड़ी वजह रहे।
फिल्म में दिखाया गया महिष्मती साम्राज्य वास्तव में एक कल्पनात्मक दुनिया था, जिसे बेहद वास्तविक रूप देने के लिए विशाल स्तर पर निर्माण कार्य किया गया। हैदराबाद के प्रसिद्ध रामोजी फिल्म सिटी में करीब 100 एकड़ क्षेत्र में इस सेट को तैयार किया गया। इस भव्य सेट को खड़ा करने में लगभग 60 करोड़ रुपये खर्च हुए और 500 से अधिक लोगों ने मिलकर इसे तैयार किया।
इस विशाल प्रोजेक्ट के पीछे कला निर्देशक साबू सिरिल और उनकी टीम की अहम भूमिका रही। उन्होंने हर एक संरचना, महल और युद्धस्थल को इस तरह डिजाइन किया कि वह पर्दे पर पूरी तरह जीवंत नजर आए। सेट की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे दर्शकों को एक वास्तविक साम्राज्य का अनुभव मिल सके।
फिल्म की शूटिंग केवल स्टूडियो तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई महत्वपूर्ण दृश्यों को प्राकृतिक लोकेशनों पर भी फिल्माया गया। केरल के प्रसिद्ध अथिरप्पिल्ली जलप्रपात जैसे स्थानों पर शूट किए गए दृश्य फिल्म की खूबसूरती और भव्यता को और बढ़ाते हैं। खासकर झरनों के आसपास फिल्माए गए सीन दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने।
एक रोचक तथ्य यह भी है कि फिल्म के पहले भाग की शूटिंग के दौरान ही दूसरे भाग के कुछ हिस्सों को पहले ही शूट कर लिया गया था। इससे फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित किया गया और समय की बचत भी हुई। बाद में शेष हिस्सों को पूरी सावधानी और सुरक्षा के साथ पूरा किया गया।
फिल्म की लोकप्रियता इतनी अधिक रही कि इससे जुड़ी चीजों को संरक्षित रखने के लिए एक विशेष संग्रहालय भी बनाया गया, जहां फिल्म में इस्तेमाल किए गए हथियार, कवच और सेट के हिस्से आज भी सुरक्षित रखे गए हैं। यहां आने वाले लोग उस भव्य दुनिया को करीब से महसूस कर सकते हैं, जिसे उन्होंने पर्दे पर देखा था।
इस तरह बाहुबली 2: द कॉन्क्लूजन ने यह साबित कर दिया कि अगर कल्पना, तकनीक और मेहनत का सही तालमेल हो, तो सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक भव्य अनुभव भी बन सकता है।
