इस पूरे प्रकरण की पटकथा मार्च के महीने में शुरू हुई थी, जब किशोरी की मां ने एक युवक पर अपनी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का गंभीर आरोप लगाया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई की और लड़की को बरामद कर युवक को जेल की कालकोठरी में डाल दिया था। किशोरी को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया था, लेकिन उसके मन में उपजा विद्रोह शांत नहीं हुआ। गुरुवार की सुबह वह घर से निकली और सीधे बिजली के टावर पर चढ़ गई। उसकी केवल एक ही मांग थी कि उसे उसके प्रेमी के घर जाने दिया जाए। इस जिद्दी रवैये ने पुलिस प्रशासन को भी मुश्किल में डाल दिया क्योंकि बिजली की लाइन चालू होने की स्थिति में कोई भी बड़ी अनहोनी घट सकती थी।
लगभग ढाई घंटे तक चले इस ‘हाई-वोल्टेज’ ड्रामे के दौरान पुलिस की टीम ने सूझबूझ का परिचय दिया। जमीन पर खड़े अधिकारी लगातार फोन के जरिए किशोरी से बातचीत करते रहे और उसे यह यकीन दिलाने की कोशिश की गई कि उसकी हर बात सुनी जाएगी। जब पुलिस ने उसे भविष्य में मदद का आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर उसके तेवर नरम पड़े और वह धीरे-धीरे पोल से नीचे उतरी। इस दौरान पूरे गांव में सन्नाटा पसरा रहा और लोग अपनी सांसें थामे रहे। नीचे उतरते ही पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और थाने ले जाकर आवश्यक पूछताछ की, जिसके बाद उसे दोबारा उसकी मां के सुपुर्द कर दिया गया।
दूसरी ओर, इसी क्षेत्र में महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस का एक सख्त चेहरा भी देखने को मिला। एक अन्य आपराधिक मामले में जहाँ एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा था, पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए आरोपी को न केवल गिरफ्तार किया बल्कि महज 24 घंटे के भीतर न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दी। अधिकारियों का कहना है कि वे महिला अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहे हैं और इस मामले में कड़ी सजा दिलाने के लिए न्यायालय में मजबूत पैरवी करेंगे। इन दोनों घटनाओं ने एक तरफ जहाँ युवाओं में बढ़ते आवेश को उजागर किया है, वहीं दूसरी ओर पुलिस की मुस्तैदी को भी रेखांकित किया है।
