2 महीने की साजिश, नकली लाश का डर: IAS एकेडमी डायरेक्टर किडनैप केस का चौंकाने वाला खुलासा


नई दिल्ली। भोपाल में IAS कोचिंग डायरेक्टर के अपहरण और फिरौती मामले ने सनसनी फैला दी है। दिल्ली की प्रतिष्ठित कोचिंग से जुड़ी डायरेक्टर को 29 अप्रैल को 9 बदमाशों ने किडनैप कर लिया और करीब 4 घंटे तक बंधक बनाकर रखा। इस दौरान पिस्टल के दम पर उनसे करीब 1 करोड़ 87 लाख रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कराए गए।

इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड प्रियंक शर्मा निकला, जो खुद यूपीएससी की तैयारी कर चुका था। तीन बार असफल रहने के बाद उसने भोपाल में कोचिंग शुरू की, लेकिन कोविड के दौरान उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसी नुकसान की भरपाई के लिए उसने खौफनाक प्लान तैयार किया।

 2 महीने तक रची गई साजिश

प्रियंक ने करीब दो महीने तक अपहरण की पूरी स्क्रिप्ट तैयार की। उसने अपने भरोसेमंद साथियों को अलग-अलग भूमिकाएं दीं और बाकायदा रिहर्सल करवाई। यहां तक कि एक आरोपी दीपक को “मरा हुआ दिखने” की एक्टिंग भी सिखाई गई, ताकि पीड़ित को मानसिक रूप से डराया जा सके।

नकली लाश से बनाया खौफ

जब डायरेक्टर को फ्लैट में बंधक बनाया गया, तब एक आरोपी पहले से “मृत” होने का नाटक कर रहा था। उसे बॉक्स में डालते हुए बाकी आरोपी आपस में बात करते रहे कि जिसने उनकी बात नहीं मानी, उसका यही हाल हुआ। इस ड्रामे का मकसद साफ था बिना ज्यादा हिंसा के पीड़ित को इतना डरा देना कि वह तुरंत पैसे ट्रांसफर कर दे।

डर के माहौल में डायरेक्टर ने तीन किस्तों में बड़ी रकम आरोपियों के खातों में भेज दी।

भोपाल बुलाकर दिया वारदात को अंजाम

मास्टरमाइंड ने पहले ही प्लान के तहत डायरेक्टर को भोपाल बुलाया। उनके ठहरने की व्यवस्था एक होटल में की गई और फिर बहाने से उन्हें बागसेवनिया स्थित फ्लैट पर ले जाया गया। फ्लैट को घटना से दो दिन पहले ही किराए पर लिया गया था, जिससे किसी को शक न हो।

 ICU से गिरफ्तारी

वारदात के बाद प्रियंक विदेश भागने की फिराक में था, लेकिन पुलिस की सख्ती से बच नहीं सका। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह अस्पताल के ICU में भर्ती हो गया। लेकिन पुलिस ने वहां से भी उसे गिरफ्तार कर लिया।

अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 3 अभी फरार हैं। पुलिस उनसे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और पैसे की रिकवरी की कोशिश कर रही है।

यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित मानसिक दबाव और धोखे का उदाहरण है। आर्थिक नुकसान और असफलता से उपजी हताशा किस तरह अपराध में बदल सकती है, यह इस केस से साफ झलकता है।