बीजेपी-कांग्रेस का अप्रत्याशित गठबंधन महाराष्ट्र में सत्ता के समीकरणों का हुआ बड़ा उलटफेर


नई दिल्ली । महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में एक अजीबोगरीब और अप्रत्याशित गठबंधन ने सभी को चौंका दिया है। भारतीय जनता पार्टी BJP और कांग्रेस जो आम तौर पर एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंदी माने जाते हैं ने यहां एक साथ हाथ मिलाया है। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य शिवसेना शिंदे गुट को सत्ता से बाहर करना था। इस नए गठबंधन को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है और इससे कई पुराने समीकरण भी बदलते नजर आ रहे हैं।

शिवसेना का विरोध और आरोप

बीजेपी और कांग्रेस के इस गठबंधन के खिलाफ शिवसेना शिंदे गुट ने तीव्र विरोध दर्ज किया है। शिवसेना ने इस गठबंधन को विश्वासघात और अवसरवादी करार दिया है। पार्टी के विधायक बालाजी किनिकर ने कहा कि बीजेपी को कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता के लिए कोई भी समझौता करने में कोई झिझक नहीं है। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन केवल राजनीतिक नहीं बल्कि विचारधारा का भी था और इसे हमेशा के लिए मजबूत और अडिग रहना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि तुर्कमान गेट के पास शिवसेना ने हमेशा विकास की राजनीति की है और आगे भी वही रास्ता अपनाया जाएगा।

बीजेपी का पलटवार

वहीं बीजेपी ने शिवसेना शिंदे गुट के आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है। बीजेपी उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने कहा कि यदि बीजेपी शिंदे गुट के साथ अंबरनाथ नगर परिषद की सत्ता में बैठती तो यह असल में एक अभद्र गठबंधन होता। उन्होंने यह भी कहा कि अंबरनाथ नगर परिषद में महायुति गठबंधन से कई बार बातचीत करने की कोशिश की गई लेकिन शिंदे गुट ने सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी। बीजेपी ने आरोप लगाया कि शिंदे गुट पिछले 25 वर्षों से भ्रष्टाचार में लिप्त है और उस गुट के साथ गठबंधन करना बीजेपी के लिए सही नहीं था।

महायुति गठबंधन में दरार

बीजेपी और कांग्रेस के बीच हुए इस गठबंधन ने महायुति के भीतर की दरारों को भी उजागर किया है। महायुति जो महाराष्ट्र की सत्ताधारी गठबंधन है अब एकजुट नहीं दिखाई दे रही है। 29 म्युनिसिपल कॉर्पोरेशनों में से महायुति के सहयोगी 24 कॉर्पोरेशनों में एक साथ चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। हालांकि बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट मुंबई ठाणे और कोल्हापुर में एकजुट होकर चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

अंबरनाथ नगर परिषद का समीकरण

अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी की तेजश्री करंजुले ने नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव में जीत हासिल की है। इस नगर परिषद में बीजेपी के 16 कांग्रेस के 12 और अजित पवार गुट के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 4 पार्षदों का समर्थन है। इस प्रकार सत्तापक्ष के पास कुल 32 पार्षदों का समर्थन है। हालांकि कांग्रेस के 12 पार्षदों को अलग कर देने के बाद बीजेपी के पास 20 पार्षदों का समर्थन था जो बहुमत के आंकड़े से बहुत कम था। अब बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत हो गया है जिससे नगर परिषद का कार्य संचालन सुचारू रूप से होने में मदद मिलेगी।

यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ है जहां बीजेपी और कांग्रेस ने एक साथ आकर सत्ता की बागडोर संभालने की कोशिश की है। यह गठबंधन ना केवल अंबरनाथ नगर परिषद के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी इसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। शिवसेना शिंदे गुट द्वारा इस गठबंधन को विश्वासघात करार दिए जाने के बाद राज्य के सत्ताधारी गठबंधन के अंदर की दरारें और गहरी होती नजर आ रही हैं। अब यह देखना होगा कि आगामी नगर निगम चुनावों में इन नए समीकरणों का क्या असर पड़ता है और महाराष्ट्र की राजनीतिक जमीन में कितना बड़ा बदलाव आता है।