खंडवा में फ्लोराइड पानी से स्वास्थ्य संकट,बच्चों के दांत और हड्डियां कमजोर, कांग्रेस ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन


खंडवा। जिले के किल्लौद विकासखंड के कई गांवों में पेयजल में अत्यधिक फ्लोराइड मिलने से स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीण और बच्चों में दांत पीले और कमजोर हो रहे हैं, वहीं हड्डियों से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर मंगलवार को कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्कूली बच्चे कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर ऋषव गुप्ता को ज्ञापन सौंपा।

बच्चों का शारीरिक विकास प्रभावित
ज्ञापन में बताया गया कि फ्लोराइड युक्त पानी का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है। कम उम्र में ही उनके दांत खराब और पीले हो रहे हैं, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है। साथ ही कई ग्रामीण हड्डियों की समस्याओं से जूझ रहे हैं। पूरे क्षेत्र में जनस्वास्थ्य की स्थिति गंभीर होने लगी है और स्थानीय प्रशासन की अनदेखी से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

विधायक की चुप्पी पर कांग्रेस का हमला
कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तमपाल सिंह पुरनी ने क्षेत्रीय विधायक नारायण पटेल की चुप्पी को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा, जिम्मेदार विधायक के मौन से यह स्पष्ट होता है कि वह अपने कार्यों के प्रति कितने उत्तरदायी हैं। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख मांगें
जनसुनवाई में कांग्रेस जिला अध्यक्ष उत्तमपाल सिंह पुरनी और शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं:

किल्लौद ब्लॉक के सभी गांवों के पेयजल स्रोतों की तत्काल गुणवत्ता जांच कराई जाए।

प्रभावित लोगों के लिए फ्लोराइड मुक्त और सुरक्षित पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था शीघ्र की जाए।

बच्चों और नागरिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाएं।

समस्या के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालीन ठोस कार्ययोजना बनाई जाए और उसे लागू किया जाए।

स्थानीय स्थिति और प्रशासनिक कदम
ग्रामीणों का कहना है कि फ्लोराइड युक्त पानी पीने से न केवल स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि यह बच्चों और युवाओं के भविष्य को भी खतरे में डाल रहा है। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई करने और स्वास्थ्य, शिक्षा और जल सुरक्षा के लिए विशेष पहल करने की मांग की।

सभी गांवों में नियमित जल परीक्षण और निगरानी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई है। स्थानीय प्रशासन को चेतावनी दी गई कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो कांग्रेस और ग्रामीण बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

खंडवा के किल्लौद में इस पहल से यह संदेश गया कि स्वास्थ्य और सुरक्षित पेयजल को प्राथमिकता देना सरकार की जिम्मेदारी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन जनता की इन मांगों पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।