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  • जबलपुर में छेड़खानी के विवाद ने लिया हिंसक रूप, बुजुर्ग पर लाठियों से हमला, इलाज के दौरान तोड़ा दम

    जबलपुर में छेड़खानी के विवाद ने लिया हिंसक रूप, बुजुर्ग पर लाठियों से हमला, इलाज के दौरान तोड़ा दम

    जबलपुर । जबलपुर के पनागर थाना क्षेत्र में महिला के साथ कथित छेड़खानी का विरोध करना उसके बुजुर्ग ससुर को भारी पड़ गया। महिला की शिकायत के बाद आरोपी को समझाने पहुंचे 75 वर्षीय प्यारेलाल चक्रवर्ती पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया गया। इस मारपीट में उन्हें गंभीर चोटें आईं और कई दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद 30 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले में हत्या की धाराएं बढ़ाते हुए पिता और उसके दो बेटों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल की गई लाठियां भी जब्त की हैं।

    पुलिस के मुताबिक घटना 22 अक्टूबर की सुबह की है। पनागर थाना क्षेत्र में रहने वाली 25 वर्षीय महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वह सुबह करीब 5 बजे किसी काम से घर से बाहर गई थी। काम पूरा करने के बाद जब वह वापस लौट रही थी तभी गांव के रहने वाले राजेश चक्रवर्ती ने कथित तौर पर गलत नीयत से उसका हाथ पकड़ लिया। महिला ने विरोध करते हुए अपना हाथ छुड़ाया। आरोप है कि इस दौरान राजेश ने उसका मंगलसूत्र भी तोड़ दिया। घटना से परेशान महिला घर पहुंची और अपने पति के साथ सास और ससुर को पूरी बात बताई।

    महिला की शिकायत सुनने के बाद उसके ससुर प्यारेलाल चक्रवर्ती आरोपी राजेश को समझाने के लिए पहुंचे थे। परिवार को उम्मीद थी कि बातचीत के जरिए विवाद सुलझ जाएगा लेकिन मामला शांत होने के बजाय बढ़ गया। पुलिस के अनुसार इस दौरान राजेश के साथ उसका भाई भागचंद चक्रवर्ती और पिता कालीचरण चक्रवर्ती भी मौजूद थे। तीनों ने पहले प्यारेलाल के साथ गाली-गलौज की और फिर कथित तौर पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया।

    हमले में प्यारेलाल के सिर के अलावा हाथ-पैर और पीठ पर गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। चोटों की गंभीरता को देखते हुए उनका इलाज लगातार जारी था। परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द स्वस्थ होकर घर लौटेंगे लेकिन 30 अक्टूबर की शाम करीब 6:30 बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना से परिवार में शोक का माहौल है।

    पुलिस को 31 अक्टूबर को अस्पताल से उनकी मौत की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। शुरुआत में मारपीट और चोटों से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था लेकिन घायल बुजुर्ग की मौत होने के बाद पुलिस ने प्रकरण में हत्या की धाराएं बढ़ा दीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।

    पुलिस ने पूछताछ के लिए कालीचरण चक्रवर्ती उम्र 75 वर्ष उसके बेटे भागचंद चक्रवर्ती उम्र 42 वर्ष और राजेश चक्रवर्ती उम्र 32 वर्ष को हिरासत में लिया था। पूछताछ के बाद शनिवार और रविवार की दरमियानी रात तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई लाठियां भी जब्त कर ली हैं। फिलहाल मामले में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है।

  • घर के सामने खेलते-खेलते लापता हुआ 3 साल का रितेश, 365 दिन बाद भी नहीं मिला सुराग, मां की टूटने लगी उम्मीद

    घर के सामने खेलते-खेलते लापता हुआ 3 साल का रितेश, 365 दिन बाद भी नहीं मिला सुराग, मां की टूटने लगी उम्मीद


    ग्वालियर। ग्वालियर के मोहनपुर गांव से एक साल पहले रहस्यमय तरीके से लापता हुआ मासूम रितेश पाल आज भी पुलिस और परिवार के लिए अनसुलझी पहेली बना हुआ है। 1 नवंबर 2025 को घर के सामने दूसरे बच्चों के साथ खेलते समय गायब हुए रितेश की तलाश में पुलिस ने कई स्तर पर जांच की। जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई और परिवार के कई सदस्यों से पूछताछ भी हुई। इसके बावजूद एक साल बीतने के बाद भी बच्चे का कोई पता नहीं चल सका है। बेटे की राह देख रही मां सपना पाल की उम्मीद अब धीरे-धीरे टूटने लगी है। उनका कहना है कि हर दिन इस इंतजार में गुजरता है कि कहीं बेटा वापस लौट आए और मां कहकर उन्हें पुकारे।

    सपना पाल ने अपने दर्द को बयां करते हुए कहा कि बेटे के बिना बीता यह एक साल उनके लिए जिंदगी का सबसे मुश्किल समय रहा है। एक मां के लिए अपने छोटे बच्चे से दूर रहना कितना तकलीफदेह होता है इसे वही महसूस कर सकती है। सपना का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत से ही परिवार के लोगों पर शक किया और उनसे लगातार पूछताछ करती रही। उनका कहना है कि परिवार का शायद ही कोई सदस्य बचा हो जिससे पुलिस ने सवाल जवाब न किए हों। सपना ने यह भी आरोप लगाया कि यदि किसी बड़े परिवार या कारोबारी का बच्चा लापता होता तो उसकी तलाश में ज्यादा गंभीरता दिखाई जाती। हालांकि ये उनके व्यक्तिगत आरोप हैं।

    रितेश के लापता होने की घटना 1 नवंबर 2025 की दोपहर की है। उस समय उसकी उम्र करीब तीन साल थी। वह मुरार क्षेत्र के मोहनपुर में काली माता मंदिर के पास स्थित झोपड़ी के बाहर अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। दोपहर करीब 12:30 बजे तक वह वहीं मौजूद था। लगभग एक बजे जब उसकी मां सपना उसे दूध पिलाने के लिए बाहर पहुंचीं तो वह वहां नहीं मिला। परिवार ने आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद देर शाम मुरार थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने तलाश शुरू की लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया।

    बच्चे के गायब होने के बाद शुरुआती आशंका जताई गई थी कि वह खेलते हुए आसपास के जंगल में चला गया होगा। इसके बाद पुलिस ने बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया। दस से अधिक टीमें बनाई गईं और सौ से ज्यादा जवानों ने इलाके में तलाश की। जंगल के रास्तों और आसपास के स्थानों को खंगाला गया। ड्रोन कैमरों की मदद से भी निगरानी की गई। जमीन से लेकर आसमान तक तलाश की गई लेकिन रितेश का कोई पता नहीं चला।

    जांच के दौरान पुलिस ने परिवार के हालात और आपसी संबंधों को भी ध्यान में रखा। सपना और रितेश के पिता दलबीर सिंह के बीच मनमुटाव चल रहा था और दोनों करीब आठ महीने से अलग रह रहे थे। उनके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा पिता के साथ जबकि छोटा बेटा रितेश मां के पास रह रहा था। पुलिस ने मां और पिता के अलावा मामा मामी ताऊ और बाबा सहित परिवार के कई लोगों से पूछताछ की। इसके बावजूद जांच किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी।

    पुलिस ने धार्मिक और पारिवारिक पहलुओं से भी जानकारी जुटाने की कोशिश की। दोनों परिवारों को गिरगांव महादेव मंदिर में शपथ लेने के लिए कहा गया था। 2 दिसंबर 2025 को दोनों पक्ष वहां पहुंचे और बच्चे के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही। इसके बाद भी कोई नया सुराग नहीं मिला। पति पत्नी के बीच विवाद को देखते हुए पुलिस ने किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका की आशंका पर भी जांच की लेकिन यह पहलू भी बेनतीजा रहा।

    इस मामले में रितेश के पिता दलबीर सिंह ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दावा किया था कि बच्चा मां के पास है। हालांकि अदालत ने याचिका खारिज कर दी। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि मामले में कई पहलुओं पर जांच की जा चुकी है और तलाश अब भी जारी है। प्रभारी एसपी जयराज कुबेर के मुताबिक फिलहाल कोई नया इनपुट नहीं मिला है लेकिन पुराने इनपुट के आधार पर छानबीन की जा रही है। पुलिस की एक टीम मामले से जुड़े लोगों पर नजर रखे हुए है। एक साल बाद भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर रितेश कहां है और वह अपनी मां के पास कब लौटेगा।

  • चेकिंग से बचने की कोशिश पड़ी भारी, नशे में कार दौड़ा रहे युवक की गाड़ी पेड़ से भिड़ी, पुलिस ने हिरासत में लिया

    चेकिंग से बचने की कोशिश पड़ी भारी, नशे में कार दौड़ा रहे युवक की गाड़ी पेड़ से भिड़ी, पुलिस ने हिरासत में लिया


    इंदौर । इंदौर में पुलिस की चेकिंग से बचने की कोशिश एक कार चालक को भारी पड़ गई। कनाडिया थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात पुलिस की नाकेबंदी देखकर नशे में धुत कार चालक ने अचानक यू-टर्न ले लिया। वह चेकिंग पॉइंट से करीब 300 मीटर पहले तेज रफ्तार में गाड़ी मोड़ने लगा। इसी दौरान कार अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे लगे पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और दोनों एयरबैग खुल गए। गनीमत रही कि एयरबैग खुलने से चालक को गंभीर चोट नहीं आई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे कार से बाहर निकाला और हिरासत में ले लिया। पुलिस ने उसके खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और शराब के नशे में ड्राइविंग करने के मामले दर्ज किए हैं।

    पुलिस के मुताबिक शनिवार देर रात बायपास पर केटू होटल के पास ब्रिज के नीचे वाहनों की जांच के लिए चेकिंग पॉइंट बनाया गया था। यहां पुलिसकर्मी बैरिकेड्स लगाकर आने जाने वाले वाहनों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान राऊ निवासी हुजैफा पिता अब्दुल कय्यूब अपनी कार लेकर वहां पहुंचा। सामने पुलिस की चेकिंग और बैरिकेड्स देखकर वह घबरा गया। पुलिस के मुताबिक पकड़े जाने से बचने के लिए उसने चेकिंग स्थल तक पहुंचने के बजाय करीब 300 मीटर पहले ही कार को अचानक मोड़ दिया।

    तेज रफ्तार में अचानक यू-टर्न लेने के कारण चालक कार पर नियंत्रण नहीं रख सका। गाड़ी सड़क किनारे लगे पेड़ से जा टकराई। टक्कर के बाद कार के एयरबैग खुल गए। इससे चालक को गंभीर चोट लगने से बचाव हुआ। दुर्घटना की आवाज सुनकर और कार को टकराते देखकर मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने चालक को बाहर निकाला और उससे पूछताछ की। पुलिस के अनुसार जांच के दौरान चालक के शराब के नशे में होने की बात सामने आई। इसके बाद उसके परिजनों को भी घटना की सूचना दी गई।

    पुलिस ने हुजैफा के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और शराब के नशे में गाड़ी चलाने से संबंधित बीएनएस की विभिन्न धाराओं में दो अलग-अलग अपराध दर्ज किए हैं। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस की चेकिंग से बचने के लिए अचानक दिशा बदलना न केवल चालक के लिए खतरनाक साबित हो सकता है बल्कि सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों की जान भी जोखिम में डाल सकता है। इस घटना में एयरबैग खुलने से चालक की जान बच गई लेकिन कार की हालत देखकर टक्कर की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    इधर शहर के विजयनगर थाना क्षेत्र में भी रविवार अलसुबह सड़क हादसा हुआ। रेडिसन चौराहे पर दो कारों के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों कारें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। हालांकि पुलिस के मुताबिक इस दुर्घटना में किसी को गंभीर चोट नहीं आई। हादसे के बाद एक कार में सवार युवक और युवती अपनी गाड़ी मौके पर छोड़कर चले गए। पुलिस अब इस मामले में भी जानकारी जुटा रही है और दोनों घटनाओं में आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।

    लगातार हो रहे ऐसे हादसे एक बार फिर तेज रफ्तार और नशे में वाहन चलाने के खतरों को सामने लाते हैं। यातायात नियमों का पालन करना और शराब पीने के बाद वाहन न चलाना सड़क पर अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

  • इंदौर के 4 बड़े चौराहों पर बदलेगा ट्रैफिक का पूरा सिस्टम, लेफ्ट टर्न रहेगा फ्री और रॉन्ग साइड चलने वालों पर लगेगी रोक

    इंदौर के 4 बड़े चौराहों पर बदलेगा ट्रैफिक का पूरा सिस्टम, लेफ्ट टर्न रहेगा फ्री और रॉन्ग साइड चलने वालों पर लगेगी रोक


    इंदौर । इंदौर शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अब चार प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक का नया पैटर्न लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। हाईकोर्ट की ओर से गठित समिति ने शहर के रसोमा चौराहा एलआईजी चौराहा लेंटर्न चौराहा और हुकुमचंद घंटाघर चौराहे को टेस्ट प्रोजेक्ट के लिए चुना है। इन स्थानों पर लेफ्ट टर्न को पूरी तरह फ्री रखने और रॉन्ग साइड से आने वाले वाहनों पर रोक लगाने की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही यातायात की रफ्तार में बाधा बनने वाले स्पीड ब्रेकर भी हटाए जा रहे हैं। समिति का मानना है कि इन बदलावों से चौराहों पर वाहनों की आवाजाही आसान होगी और बार बार लगने वाले जाम से लोगों को राहत मिल सकती है।

    शनिवार को हाईकोर्ट के अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय समिति की पहली बैठक आयोजित की गई। इसमें प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था और प्रमुख चौराहों पर लगने वाले जाम की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने माना कि कई चौराहों पर लेफ्ट टर्न की ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। इसकी वजह से दूसरे रास्तों से निकलने वाले वाहन भी फंस जाते हैं और पूरे चौराहे पर यातायात प्रभावित होता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए चार स्थानों पर नई व्यवस्था का परीक्षण करने का निर्णय लिया गया।

    अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी के मुताबिक इन चारों चौराहों पर लेफ्ट टर्न की ओर सबसे ज्यादा जाम की स्थिति बनती है। इसलिए इस रास्ते को बाधा मुक्त रखने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए रॉन्ग साइड से आने वाले वाहनों को रोकना जरूरी माना गया है। कई बार वाहन चालक कम दूरी तय करने या जल्दी निकलने के चक्कर में गलत दिशा से वाहन ले आते हैं। इससे सामने से आने वाले वाहनों का रास्ता बाधित होता है और दुर्घटना की आशंका भी बढ़ जाती है। नई व्यवस्था के तहत ऐसे वाहनों पर नियंत्रण किया जाएगा ताकि चौराहों पर यातायात व्यवस्थित तरीके से चल सके।

    समिति ने चौराहों पर लगे स्पीड ब्रेकर को भी जाम की एक वजह माना है। इनके कारण वाहनों की गति अचानक कम होती है और पीछे चल रहे वाहनों की कतार बढ़ने लगती है। ऐसे में चयनित स्थानों पर स्पीड ब्रेकर हटाने का काम भी किया जा रहा है। हालांकि यह पूरा प्रयोग फिलहाल परीक्षण के तौर पर शुरू किया गया है। समिति इसके परिणामों पर नजर रखेगी और यह आकलन करेगी कि नई व्यवस्था से वास्तव में जाम कम हो रहा है या नहीं। यदि चारों चौराहों पर इसका सकारात्मक असर दिखाई देता है तो शहर के दूसरे प्रमुख चौराहों पर भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा सकती है।

    बैठक में यातायात सुधार के पुराने प्रयासों की समीक्षा करने पर भी सहमति बनी। इसके लिए हाईकोर्ट की ओर से पहले गठित समिति की रिपोर्ट मंगाई गई है। वर्तमान समिति उस रिपोर्ट में दिए गए सुझावों और उन पर हुई कार्रवाई का आकलन करेगी। इसके अलावा शहर में हर महीने यातायात जागरूकता अभियान चलाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना और गलत दिशा में वाहन चलाने जैसी आदतों पर रोक लगाना है।

    समिति में अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी के साथ शासकीय अधिवक्ता डॉ. अमित भाटिया कलेक्टर शिवम वर्मा नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल इंदौर स्मार्ट सिटी के सीईओ डीसीपी ट्रैफिक और आईआईटी दिल्ली के सिविल इंजीनियर अंशुल अग्रवाल शामिल हैं। समिति की अगली बैठक 10 नवंबर को होगी। वहीं इंदौर की यातायात व्यवस्था से जुड़ी याचिकाओं पर हाईकोर्ट में 30 नवंबर को सुनवाई प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस दौरान समिति शहर में किए जा रहे सुधारों और चार चौराहों पर शुरू किए गए टेस्ट प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट पेश कर सकती है। अब इन बदलावों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वाहन चालक नियमों का कितना पालन करते हैं और प्रशासन नई व्यवस्था को कितनी प्रभावी तरीके से लागू कर पाता है।

  • इंदौर में वॉर्मअप करते समय अचानक गिरा 15 साल का छात्र, बड़े भाई ने CPR देकर बचाने की कोशिश की लेकिन नहीं बची जान

    इंदौर में वॉर्मअप करते समय अचानक गिरा 15 साल का छात्र, बड़े भाई ने CPR देकर बचाने की कोशिश की लेकिन नहीं बची जान


    इंदौर । इंदौर में खेल परिसर में व्यायाम करने पहुंचे दसवीं कक्षा के 15 वर्षीय छात्र की अचानक गिरने से मौत हो गई। शनिवार शाम अटल खेल परिसर में वॉर्मअप करते समय कनिष्क बोयक अचानक जमीन पर गिर पड़ा। उसके साथ मौजूद 17 वर्षीय बड़े भाई दिव्यांश ने तुरंत CPR देकर उसे होश में लाने की कोशिश की। काफी प्रयास के बाद भी कनिष्क की हालत में सुधार नहीं हुआ। परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। इस घटना से परिवार और परिचितों में शोक का माहौल है।

    जानकारी के मुताबिक कनिष्क अपने परिवार के साथ इंदौर की स्कीम नंबर 78 में रहता था। वह पिछले दो से तीन वर्षों से नियमित रूप से अटल खेल परिसर में व्यायाम करने जाता था। शनिवार को भी वह अपने बड़े भाई दिव्यांश के साथ परिसर पहुंचा था। शाम करीब पांच से छह बजे के बीच वह वॉर्मअप कर रहा था। इसी दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और वह गिर पड़ा। भाई ने उसे संभालने के साथ तत्काल CPR देने की कोशिश की। इसके बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टर उसकी जान नहीं बचा सके।

    परिवार के रिश्तेदार हरीश बोयक के अनुसार कनिष्क पहले भी दौड़ते समय गिर चुका था। परिचितों ने बताया कि कुछ साल पहले हुई उस घटना के बाद डॉक्टरों ने हार्ट संबंधी परेशानी की आशंका जताई थी। हालांकि इसके बाद उसकी तबीयत सामान्य बताई जा रही थी और वह नियमित रूप से व्यायाम करने जाता रहा। शनिवार को हुई घटना के बाद परिवार के सामने एक बार फिर स्वास्थ्य संबंधी पुरानी आशंका का सवाल खड़ा हो गया है। फिलहाल मौत के सटीक कारणों की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।

    कनिष्क के परिवार पर पहले भी दुखों का पहाड़ टूट चुका है। करीब 12 साल पहले एक सड़क हादसे में उसके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद से वह अपनी मां और बड़े भाई दिव्यांश के साथ रह रहा था। परिवार के लिए कनिष्क की मौत एक बड़ा सदमा है। जिस बेटे को परिवार ने बड़े होते और अपने सपने संजोते देखा था उसकी अचानक मौत ने सभी को गहरे दुख में डाल दिया है।

    घटना के समय बड़े भाई ने अपने स्तर पर भाई को बचाने की पूरी कोशिश की। CPR देकर उसे होश में लाने का प्रयास किया गया और फिर अस्पताल पहुंचाया गया। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। इस हादसे के बाद खेल परिसर और आसपास के लोगों में भी शोक है। कनिष्क के अंतिम संस्कार की तैयारी की गई है। परिजनों के मुताबिक रविवार दोपहर दो बजे उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

    कनिष्क की असमय मौत ने परिवार को गहरे सदमे में छोड़ दिया है। कम उम्र में अचानक हुई इस घटना से उसके परिचित और रिश्तेदार भी स्तब्ध हैं। परिवार के लिए यह ऐसा दुख है जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

  • भोपाल में पहली बार सजेगी सेना दिवस परेड, आसमान में गरजेंगे लड़ाकू विमान और टैंकों से दिखेगी ताकत

    भोपाल में पहली बार सजेगी सेना दिवस परेड, आसमान में गरजेंगे लड़ाकू विमान और टैंकों से दिखेगी ताकत


    भोपाल । मध्यप्रदेश के 71वें स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल में सेना दिवस 2027 के आयोजनों का शुभारंभ एक खास पहल के साथ किया गया। शौर्य स्मारक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सुदर्शन चक्र कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल अरविंद चौहान ने संकल्प वृक्ष का रोपण किया। इस पौधे को खास बनाने के लिए इसमें प्रदेश के सभी 55 जिलों से लाई गई मिट्टी मिलाई गई। एनसीसी कैडेट्स ने अपने-अपने जिलों से मिट्टी एकत्रित की और उसे कलशों में भरकर भोपाल पहुंचाया। इसके बाद सभी जिलों की मिट्टी को एक साथ मिलाकर संकल्प वृक्ष लगाया गया। इस पहल के माध्यम से प्रदेश की एकता और अखंडता का संदेश दिया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सेना और एनसीसी ने संकल्प वृक्ष के जरिए एक अनूठा प्रयोग किया है। प्रदेश के सभी 55 जिलों की मिट्टी को एक स्थान पर मिलाकर पौधे का रोपण करना मध्यप्रदेश की सामूहिक पहचान और एकजुटता को दर्शाता है। उन्होंने इस पहल के लिए सेना और एनसीसी के अधिकारियों तथा कैडेट्स को बधाई दी। मुख्यमंत्री के मुताबिक यह वृक्ष केवल एक पौधा नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की एकता और साझा संकल्प का प्रतीक है।

    भोपाल में अगले साल 15 जनवरी को 79वां सेना दिवस मनाया जाएगा। यह राजधानी के लिए एक ऐतिहासिक अवसर होगा क्योंकि पहली बार यहां सेना दिवस परेड का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान भारतीय सेना की ताकत और आधुनिक युद्ध क्षमता का प्रदर्शन होगा। सेना की ओर से दिखाई गई लघु फिल्म में आयोजन की झलक प्रस्तुत की गई। इसमें आसमान में लड़ाकू विमानों की गर्जना से लेकर जमीन पर टैंकों की रफ्तार तक सेना के शौर्य को प्रदर्शित करने की तैयारी दिखाई गई।

    सेना दिवस परेड में सुदर्शन चक्र कोर के जवान कॉम्बैट ड्रिल्स और युद्ध कौशल का प्रदर्शन करेंगे। भारतीय टैंकों की ताकत के साथ आधुनिक सैन्य तकनीक और उपकरणों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इस आयोजन के जरिए आम लोगों को सेना के अनुशासन वीरता और राष्ट्रसेवा की भावना को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। सेना की आधुनिक तैयारियों और युद्ध क्षमता की झलक युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक होगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 1 नवंबर से 15 जनवरी तक सेना दिवस से जुड़ी अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है जबकि वर्ष 2027 युवा वर्ष होगा। ऐसे में युवा वर्ष की शुरुआत सेना के शौर्य और पराक्रम से होना मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि सैनिकों का अनुशासन और देश के प्रति समर्पण युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि स्थापना दिवस के अवसर पर शाम को प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए मंत्रियों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। किसान कल्याण वर्ष के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं और विभिन्न कार्यक्रमों के विजेताओं को पुरस्कार भी वितरित किए जाएंगे। कार्यक्रम में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल विधायक भगवान सबनानी और महापौर मालती राय सहित सेना तथा प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।

    सुदर्शन चक्र कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल अरविंद चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश सांस्कृतिक ऐतिहासिक और सामरिक दृष्टि से देश का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सेना दिवस परेड और इससे जुड़े कार्यक्रमों के सफल आयोजन के लिए राज्य सरकार और प्रशासन हरसंभव सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी 55 जिलों से एनसीसी कैडेट्स द्वारा मिट्टी लाकर संकल्प वृक्ष का रोपण करना इस आयोजन को विशेष पहचान देता है।

    गौरतलब है कि भारत में हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1949 में फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने भारतीय सेना की कमान संभाली थी। इस ऐतिहासिक घटना की याद में सेना दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2027 में इसकी 79वीं वर्षगांठ होगी। भोपाल में होने वाली परेड प्रदेशवासियों को भारतीय सेना की वीरता और आधुनिक सैन्य क्षमता से रूबरू कराने का महत्वपूर्ण अवसर बनेगी।

  • दीपावली से पहले वेतन-बोनस के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की हुंकार, 55 जिलों में 2 नवंबर को सौंपेंगे ज्ञापन

    दीपावली से पहले वेतन-बोनस के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की हुंकार, 55 जिलों में 2 नवंबर को सौंपेंगे ज्ञापन


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के शासकीय विभागों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों ने दीपावली से पहले वेतन और बोनस के भुगतान की मांग तेज कर दी है। त्योहार के मद्देनजर कर्मचारियों को आर्थिक राहत दिलाने के लिए मध्य प्रदेश राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संगठन ने प्रदेशव्यापी अभियान चलाने का फैसला किया है। इसके तहत 2 नवंबर को प्रदेश के सभी 55 जिलों में श्रम आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे। संगठन की प्रमुख मांग है कि सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को 5 नवंबर तक वेतन और दीपावली बोनस का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

    संगठन के जिला अध्यक्ष एवं संभाग प्रभारी रविंद्र जायसवाल और जिला महामंत्री अनुपम वर्मा ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न शासकीय विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को लंबे समय से आर्थिक और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। त्योहार के समय भी कई विभागों में वेतन और बोनस के भुगतान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में कर्मचारियों के सामने घर का खर्च चलाने और दीपावली की तैयारियां करने में परेशानी आ रही है। संगठन का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों से लगातार संपर्क किया जा रहा है ताकि कर्मचारियों को समय पर भुगतान मिल सके।

    22 अक्टूबर को भी दिया गया था ज्ञापन

    संगठन के पदाधिकारियों के मुताबिक इससे पहले 22 अक्टूबर को भी सहायक श्रमायुक्त को ज्ञापन सौंपकर वेतन और बोनस का भुगतान कराने की मांग की गई थी। इसके बाद जबलपुर शहर के कई विभागों में कर्मचारियों को नियमित वेतन और बोनस मिला है। संगठन ने बताया कि प्रशासन के सहयोग से कुछ विभागों में भुगतान की स्थिति में सुधार हुआ है। हालांकि प्रदेश के कई अन्य जिलों और विभागों में अब भी कर्मचारियों का भुगतान बाकी है। इसी वजह से संगठन ने दोबारा प्रदेशव्यापी स्तर पर अपनी मांग उठाने का निर्णय लिया है।

    5100 रुपए बोनस का मुद्दा भी उठाया

    आउटसोर्स कर्मचारी संगठन ने 5100 रुपए बोनस राशि को लेकर भी प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और विभिन्न दिशा-निर्देशों के तहत कुछ विभागों में इस राशि का उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद कई विभागों में बोनस को लेकर अब तक लिखित आदेश या स्पष्ट निर्देश जारी नहीं हुए हैं। संगठन चाहता है कि संबंधित विभाग इस मामले में स्पष्ट निर्णय लें और पात्र कर्मचारियों को समय पर बोनस का भुगतान किया जाए।

    ट्रेड यूनियन के रूप में पंजीकृत हुआ संगठन

    संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि मध्य प्रदेश राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संगठन अब ट्रेड यूनियन के रूप में पंजीकृत हो चुका है और उसे पंजीकरण क्रमांक भी मिल गया है। संगठन का कहना है कि पंजीकरण मिलने से आउटसोर्स कर्मचारियों को अपनी समस्याएं संगठित तरीके से शासन और प्रशासन के सामने रखने में मदद मिलेगी। कर्मचारी वेतन में देरी बोनस भुगतान और अन्य कार्य संबंधी समस्याओं को लेकर एक मंच से आवाज उठा सकेंगे।

    अब 2 नवंबर को प्रदेश के सभी 55 जिलों में ज्ञापन सौंपकर संगठन प्रशासन का ध्यान कर्मचारियों की मांगों की ओर आकर्षित करेगा। कर्मचारियों की नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित विभाग दीपावली से पहले भुगतान को लेकर क्या कदम उठाते हैं और 5 नवंबर तक वेतन तथा बोनस देने की मांग पर कितना अमल हो पाता है।

  • बेटी को परेशान करने से रोका तो पिता पर चाकू से हमला, घायल पिता को लेकर आधी रात थाने पहुंची बेटी

    बेटी को परेशान करने से रोका तो पिता पर चाकू से हमला, घायल पिता को लेकर आधी रात थाने पहुंची बेटी


    जबलपुर । जबलपुर में बेटी को कथित रूप से परेशान करने का विरोध करना एक पिता को भारी पड़ गया। आरोप है कि दो युवकों ने रास्ते में रोककर उन पर चाकू से हमला कर दिया। घायल पिता को लेकर उनकी 22 वर्षीय छोटी बेटी शुक्रवार देर रात करीब एक बजे सिविल लाइन थाने पहुंची और पुलिस के सामने अपनी शिकायत रखी। युवती ने आरोप लगाया कि वह इससे पहले भी आरोपियों के खिलाफ चार बार एफआईआर दर्ज करवा चुकी है लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से आरोपियों के हौसले बढ़ते गए और अब उन्होंने उसके पिता पर हमला कर दिया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

    जानकारी के मुताबिक हाउसिंग बोर्ड निवासी हीरालाल साहनी शुक्रवार रात मुकादमगंज से अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। रात करीब 12 बजे रास्ते में हेमंत सिंह राजपूत और अभिनव यादव ने उन्हें रोक लिया। युवती का आरोप है कि दोनों ने उनके पिता पर चाकू से हमला किया और उन्हें घायल कर दिया। घटना के बाद परिवार में अफरा-तफरी मच गई। छोटी बेटी अपने घायल पिता को लेकर सीधे सिविल लाइन थाने पहुंची और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    युवती ने पुलिस को बताया कि करीब पांच साल पहले उसकी बड़ी बहन की हेमंत सिंह राजपूत से दोस्ती थी। बाद में जब उसकी बहन ने उससे बातचीत बंद कर दी तो हेमंत कथित तौर पर उसे परेशान करने और धमकाने लगा। युवती का आरोप है कि बहन के इनकार करने के बाद उसके साथ मारपीट भी की गई। इतना ही नहीं परिवार को डराने के लिए घर के सामने बम फेंकने की घटना भी हुई थी।

    पीड़ित परिवार का कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों और परेशानियों के कारण घर के लोग भय के माहौल में रहने को मजबूर हैं। युवती ने यह भी आरोप लगाया कि हेमंत की प्रताड़ना से परेशान होकर उसकी बड़ी बहन ने आत्महत्या की कोशिश की थी और फांसी लगाने तक की नौबत आ गई थी। परिवार के मुताबिक करीब एक सप्ताह पहले उसके भाई मोहित साहनी पर भी हेमंत और उसके साथियों ने हमला कर उसे घायल कर दिया था।

    युवती ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि वह पहले चार बार शिकायत और एफआईआर दर्ज करवा चुकी है लेकिन आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। युवती ने दावा किया कि आरोपी हेमंत की बहन कंचन सिंह राजपूत पुलिस विभाग में टीआई हैं। इसी वजह से सिविल लाइन पुलिस पर दबाव होने और शिकायतों पर कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि ये सभी आरोप युवती की शिकायत पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मामले में सीएसपी सोनू कुर्मी ने बताया कि युवती की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। हमला करने वाले आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीम भेजी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि युवती ने पहले भी शिकायतें की थीं और उन पर कार्रवाई नहीं हुई तो इस पहलू की भी जांच कराई जाएगी।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अब यह पता लगाया जाएगा कि पिता पर हमला किन परिस्थितियों में हुआ और पहले दी गई शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई थी। पीड़ित परिवार ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • इंदौर आ रहे दो ब्रांच मैनेजरों की दर्दनाक मौत, साथियों का इंतजार करते समय तेज रफ्तार क्रेन ने मारी टक्कर

    इंदौर आ रहे दो ब्रांच मैनेजरों की दर्दनाक मौत, साथियों का इंतजार करते समय तेज रफ्तार क्रेन ने मारी टक्कर


    इंदौर । इंदौर में शुक्रवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में बाइक सवार दो युवकों की मौत हो गई। दोनों युवक एक फाइनेंस कंपनी में ब्रांच मैनेजर के पद पर कार्यरत थे और झाबुआ से इंदौर में आयोजित मीटिंग में शामिल होने के लिए निकले थे। एयरपोर्ट रोड पर नावदापंथ ब्रिज के पास रात करीब 9 बजे तेज रफ्तार क्रेन वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टर उनकी जान नहीं बचा सके। घटना की खबर मिलते ही कंपनी के कर्मचारियों और साथियों में शोक छा गया।

    जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को फाइनेंस कंपनी के चार कर्मचारी दो बाइकों पर सवार होकर झाबुआ से इंदौर आ रहे थे। सभी को कंपनी की मीटिंग में शामिल होना था। रास्ते में दूसरी बाइक पर सवार उनके दो साथी कुछ पीछे रह गए। इसके बाद आगे चल रहे दोनों युवकों ने अपनी बाइक रोक दी और साथियों का इंतजार करने लगे। इसी दौरान तेज रफ्तार से आ रहे क्रेन वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी गंभीर थी कि दोनों युवक सड़क पर गिरकर बुरी तरह घायल हो गए।

    हादसे के वक्त पीछे आ रहे दोनों साथियों ने घटना को अपनी आंखों से देखा। वे तुरंत मौके पर पहुंचे और घायलों की मदद करने में जुट गए। उन्होंने पुलिस को सूचना दी और दोनों को जिला अस्पताल पहुंचाया। हालांकि गंभीर चोटों के चलते दोनों की जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना ने साथ आए कर्मचारियों को गहरे सदमे में डाल दिया।

    मृतकों की पहचान रोहित मीणा निवासी सुगांव और नौशाद निवासी शाजापुर जिले के करई के पास स्थित एक गांव के रूप में हुई है। दोनों फाइनेंस कंपनी में ब्रांच मैनेजर के पद पर काम कर रहे थे। शनिवार दोपहर दोनों के शवों का अलग-अलग अस्पतालों में पोस्टमार्टम कराया गया। रोहित का शव एमवाय अस्पताल भेजा गया था जबकि नौशाद का शव जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए रखा गया।

    कंपनी में उनके साथ काम करने वाले राहुल ने बताया कि हादसे की जानकारी मिलने के बाद वे चंदन नगर थाने पहुंचे। इसके बाद अस्पताल जाकर साथियों के बारे में जानकारी ली। घटना की खबर फैलने पर कंपनी के अन्य कर्मचारी भी अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल में अपने साथियों को खोने का दुख कर्मचारियों के चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा था।

    दोनों युवक काम के सिलसिले में इंदौर आ रहे थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि रास्ते में साथियों का इंतजार करने के दौरान यह हादसा हो जाएगा। एक ही कंपनी में काम करने वाले चार कर्मचारी साथ निकले थे लेकिन इस सफर का अंत दो परिवारों के लिए बेहद दुखद साबित हुआ।

    फिलहाल पुलिस हादसे से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्रेन वाहन किस गति से आ रहा था और टक्कर किन परिस्थितियों में हुई। इस हादसे ने एक बार फिर सड़क पर तेज रफ्तार और लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं के गंभीर परिणामों को सामने ला दिया है।

  • रात में ट्रांसफार्मर से छेड़छाड़ और केबल काटने का आरोप, ग्रामीणों ने पुलिस से लगाई कार्रवाई की गुहार

    रात में ट्रांसफार्मर से छेड़छाड़ और केबल काटने का आरोप, ग्रामीणों ने पुलिस से लगाई कार्रवाई की गुहार


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के इंदार थाना क्षेत्र के श्रीपुर चक्क गांव में बिजली ट्रांसफार्मर में तोड़फोड़ और केबल काटने का मामला सामने आया है। गांव के दो भाइयों पर इस घटना को अंजाम देने का आरोप लगाया गया है। बताया जा रहा है कि ट्रांसफार्मर और बिजली केबल को नुकसान पहुंचने के बाद पूरे गांव की बिजली सप्लाई बंद हो गई। इसके चलते ग्रामीणों को पूरी रात अंधेरे में गुजारनी पड़ी। मामले को लेकर गांव के सरपंच विनोद कुमार सहित कई ग्रामीण वीडियो लेकर इंदार थाने पहुंचे और पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने शिकायत और वीडियो के आधार पर जांच शुरू कर दी है।

    ग्रामीणों की शिकायत के मुताबिक मोहर सिंह लोधी और सपेंद्र सिंह लोधी पर रात के समय गांव के बिजली ट्रांसफार्मर यानी डीपी में तोड़फोड़ करने का आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि दोनों भाइयों ने बिजली लाइन में तार डालकर फॉल्ट पैदा किया। इसके बाद बस्ती की ओर जाने वाली बिजली की केबल भी काट दी गई। इस घटना के कारण गांव की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई और घरों में बिजली पहुंचना बंद हो गई।

    सरपंच विनोद कुमार का आरोप है कि दोनों भाई आए दिन गांव में विवाद करते हैं और उत्पात मचाते रहते हैं। इस बार उन्होंने बिजली व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जिससे पूरे गांव के लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली सप्लाई बंद होने से रातभर लोगों को अंधेरे में रहना पड़ा। अचानक बिजली गुल होने से गांव के परिवारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

    घटना के बाद ग्रामीणों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस तक पहुंचने का फैसला किया। सरपंच विनोद कुमार अन्य ग्रामीणों के साथ इंदार थाने पहुंचे। उनके पास घटना से संबंधित वीडियो भी था जिसे शिकायत के साथ पुलिस को सौंपा गया है। ग्रामीणों ने आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि गांव की बिजली व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने से सभी लोगों को परेशानी होती है और इस तरह की घटनाओं पर रोक लगनी चाहिए।

    इंदार थाना पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस वीडियो और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। फिलहाल दोनों भाइयों पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ट्रांसफार्मर और केबल को किस तरह नुकसान पहुंचाया गया और घटना में कौन-कौन शामिल था।

    इस घटना ने गांव की बिजली व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रांसफार्मर और बिजली केबल जैसी सुविधाएं पूरे गांव के लिए जरूरी होती हैं। इन्हें नुकसान पहुंचने का असर केवल किसी एक परिवार पर नहीं बल्कि पूरी बस्ती पर पड़ता है। अब ग्रामीणों को पुलिस जांच के नतीजे और बिजली व्यवस्था सामान्य होने का इंतजार है।