Tag: Madhya Pradesh News

  • भोपाल में सीलिंग ने बढ़ाया सियासी और कारोबारी पारा: सड़क पर व्यापारी, पुलिस से भिड़ंत, शहरव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    भोपाल में सीलिंग ने बढ़ाया सियासी और कारोबारी पारा: सड़क पर व्यापारी, पुलिस से भिड़ंत, शहरव्यापी आंदोलन की चेतावनी


    भोपाल । भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई ने मंगलवार को एक बार फिर व्यापारियों के गुस्से को भड़का दिया। शहर में सुबह से शुरू हुई कार्रवाई के बाद भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के बैनर तले बड़ी संख्या में व्यापारी सड़कों पर उतर आए और सीलिंग अभियान को तुरंत बंद करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए जब व्यापारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने के लिए सीएम हाउस की ओर बढ़ने लगे और पुलिस ने उन्हें रोशनपुरा चौराहे के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।

    नगर निगम की टीम ने मंगलवार सुबह करीब 9 बजे से रहवासी क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। कोहेफिजा क्षेत्र में चाय लीला कैफे सहित होटल बुक शॉप और बेकरी जैसे प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। कार्रवाई की सूचना मिलते ही कई व्यापारियों और प्रतिष्ठान संचालकों में नाराजगी फैल गई। कुछ संचालकों ने निगम की कार्रवाई से पहले ही अपने प्रतिष्ठान स्वेच्छा से बंद कर दिए लेकिन व्यापारिक संगठनों ने इसे कारोबारियों के लिए बड़ी परेशानी बताते हुए विरोध का फैसला किया।

    सुबह करीब 11 बजे बड़ी संख्या में व्यापारी न्यू मार्केट स्थित नानके पेट्रोल पंप के पास एकत्र हुए और वहां से मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च शुरू किया। व्यापारियों का कहना था कि वे सरकार तक अपनी मांग पहुंचाना चाहते हैं और सीलिंग की कार्रवाई बंद करने के साथ शहर में मास्टर प्लान लागू करने की मांग कर रहे हैं। जैसे ही प्रदर्शनकारी रोशनपुरा चौराहे के पास पहुंचे पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उनका रास्ता रोक दिया। इसके बाद कुछ व्यापारियों ने बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्कामुक्की की स्थिति बन गई। इस दौरान कुछ व्यापारी नीचे गिर गए हालांकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली।

    प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने तानाशाही बंद करो के नारे लगाकर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। कई व्यापारी सशक्त आवाज व्यापारियों की आवाज लिखे बैनर पहनकर प्रदर्शन में पहुंचे। विरोध को अलग तरीके से दर्ज कराने के लिए व्यापारियों ने सरकार की सद्बुद्धि के लिए थाली शंख और डमरू भी बजाए। मौके पर मौजूद ACP अखिल पटेल ई रिक्शा पर चढ़कर व्यापारियों को समझाने और स्थिति को शांत करने की कोशिश करते नजर आए लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।

    भोपाल व्यापारी महासंघ संघर्ष समिति के अध्यक्ष नवीन सोनी ने कहा कि व्यापारी सरकार तक अपना ज्ञापन पहुंचाने आए हैं और उनकी सबसे बड़ी मांग सीलिंग की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों को राहत देते हुए शहर में मास्टर प्लान लागू किया जाना चाहिए ताकि वर्षों से संचालित कारोबारियों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा न हो। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि अभी प्रदर्शन में भोपाल के केवल 10 प्रतिशत व्यापारी ही शामिल हुए हैं। यदि सीलिंग की कार्रवाई जारी रही तो शहर के सभी व्यापारी एकजुट होकर बड़ा आंदोलन करेंगे और पूरे भोपाल में विरोध तेज किया जाएगा।

    सीलिंग कार्रवाई को लेकर बढ़ता विरोध अब नगर निगम और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। एक ओर निगम नियमों के तहत कार्रवाई जारी रखे हुए है तो दूसरी ओर व्यापारी इसे अपने कारोबार और भविष्य पर संकट बता रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार और प्रशासन इस विवाद का क्या समाधान निकालते हैं इस पर अब पूरे शहर की नजर बनी हुई है।

  • 3 हजार से 4-5 हजार रुपए तक ही अटका वेतन: 23 साल बाद भी नियमितीकरण नहीं, 7 सितंबर को BJP ऑफिस पहुंचकर कर्मचारी मांगेंगे हक

    3 हजार से 4-5 हजार रुपए तक ही अटका वेतन: 23 साल बाद भी नियमितीकरण नहीं, 7 सितंबर को BJP ऑफिस पहुंचकर कर्मचारी मांगेंगे हक


    भोपाल । मध्य प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में वर्षों से काम कर रहे अस्थायी और अंशकालीन कर्मचारियों ने अब अपनी मांगों को लेकर सरकार और भाजपा संगठन के सामने मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। स्कूलों छात्रावासों पंचायतों अस्पतालों और नगरीय निकायों समेत अलग अलग विभागों में सेवाएं दे रहे सैकड़ों कर्मचारी 7 सितंबर को भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचेंगे। कर्मचारी संगठन का कहना है कि वे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को वर्ष 2003 में किए गए उस वादे की याद दिलाएंगे जिसमें अस्थायी कर्मचारियों को नियमित कर शासकीय सेवक का दर्जा देने की बात कही गई थी। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के सामने धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को अनिश्चितकालीन धरना अनशन में बदला जा सकता है।

    अस्थायी आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा की ओर से भाजपा संगठन को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2003 का विधानसभा चुनाव अस्थायी कर्मचारियों के मुद्दे पर लड़ा गया था। संगठन के मुताबिक उस समय तत्कालीन भाजपा नेता उमा भारती ने कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में वल्लभ भवन के सामने अनिश्चितकालीन धरना दिया था। प्रदेशभर में यात्राएं कर अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने और उन्हें शासकीय सेवक का दर्जा देने का वादा भी किया गया था। कर्मचारियों का कहना है कि उस समय से अब तक करीब 23 साल बीत चुके हैं लेकिन उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

    कर्मचारी नेताओं के मुताबिक सरकारी विभागों के नियमित कर्मचारियों की तरह ही अस्थायी और अंशकालीन कर्मचारी भी लंबे समय से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। स्कूलों और छात्रावासों में सफाई खाना बनाने और भृत्य के काम से लेकर पंचायतों में चौकीदारी नल जल व्यवस्था अस्पतालों में विभिन्न सेवाओं नगरीय निकायों में सफाई और टैक्स वसूली जैसे काम भी इन कर्मचारियों से कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय या वेतन मिलने का आरोप संगठन ने लगाया है।

    मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा का कहना है कि 2003 में अंशकालीन कर्मचारियों को करीब 3 हजार रुपए मिलते थे जबकि आज भी कई कर्मचारियों को महज 4 से 5 हजार रुपए ही मिल रहे हैं। इसी तरह पंचायतों के चौकीदार और नल जल कर्मचारी उस समय करीब 2 हजार रुपए पाते थे और वर्तमान में भी कई कर्मचारियों का भुगतान 2 से 3 हजार रुपए के आसपास होने का दावा किया गया है। संगठन का कहना है कि 23 साल में महंगाई कई गुना बढ़ गई लेकिन हजारों कर्मचारियों की आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई।

    कर्मचारी नेताओं ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से अस्थायी कर्मचारियों का वेतन दोगुना करने की घोषणा का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि यह घोषणा भी पूरी तरह लागू नहीं हो सकी। अब संगठन सरकार द्वारा निर्धारित 12,425 रुपए न्यूनतम वेतन दिए जाने की मांग कर रहा है।

    कर्मचारी संगठन ने आंदोलन को दो चरणों में रखने की जानकारी दी है। स्कूलों छात्रावासों और विभिन्न विभागों में काम करने वाले अंशकालीन कर्मचारी 7 सितंबर को भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचकर अपनी मांग रखेंगे जबकि ग्राम पंचायतों के चौकीदार नल जल चालक और अन्य कर्मचारी 8 सितंबर को संगठन के सामने अपनी बात रखेंगे। कर्मचारियों ने सरकार के 1.62 लाख रुपए प्रति व्यक्ति वार्षिक आय के दावे पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि जब बड़ी संख्या में कर्मचारी बेहद कम मासिक आय में काम कर रहे हैं तो उनके जीवन यापन और आर्थिक सुरक्षा पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    अब कर्मचारियों की नजर 7 और 8 सितंबर को होने वाले प्रदर्शन पर है। संगठन का कहना है कि वह सरकार से केवल आश्वासन नहीं बल्कि न्यूनतम वेतन और स्थायीकरण को लेकर स्पष्ट निर्णय चाहता है। मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो भाजपा कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना अनशन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

  • आतंकवादियों की बहन बयान पर विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: अभियोजन मंजूरी का फैसला राज्यपाल के पास, कोर्ट ने कहा रिपोर्ट पेश करें

    आतंकवादियों की बहन बयान पर विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: अभियोजन मंजूरी का फैसला राज्यपाल के पास, कोर्ट ने कहा रिपोर्ट पेश करें


    भोपाल । मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह से जुड़े विवादित बयान के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए बयान के बाद दर्ज FIR को चुनौती देने वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच और अभियोजन मंजूरी की स्थिति पर जानकारी ली। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने सरकार की ओर से बताया गया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और जांच रिपोर्ट फिलहाल सीलबंद है। अब चार्जशीट या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से अभियोजन की मंजूरी लेना जरूरी है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में कैबिनेट स्तर पर विचार हो चुका है और फाइल अंतिम निर्णय के लिए राज्यपाल के पास भेजी गई है।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच की स्थिति को लेकर स्पष्ट सवाल किया कि जब जांच रिपोर्ट पूरी तरह तैयार है तो क्या अब केवल सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। सरकार की ओर से इसकी पुष्टि की गई। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने बताया कि कैबिनेट इस विषय पर विचार कर चुकी है और फाइल राज्यपाल के पास भेजी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय हो जाएगा। सरकार की ओर से मंत्री के माफीनामे का भी हवाला दिया गया। अदालत से अनुरोध किया गया कि सक्षम प्राधिकारी जब मामले पर विचार करे तो विजय शाह की ओर से घटना के अगले दिन सार्वजनिक रूप से मांगी गई माफी को भी ध्यान में रखा जाए।

    विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने भी अदालत के सामने यही बात रखी कि मंत्री ने बयान के बाद माफी मांग ली थी और इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लिया जाना चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले के गुण दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की। अदालत ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट सीलबंद है। अभियोजन मंजूरी का विषय फिलहाल सक्षम प्राधिकारी के सामने लंबित है। मंजूरी मिलने के बाद सीलबंद रिपोर्ट को संबंधित सक्षम अदालत के सामने पेश किया जाएगा।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच अधिकारी और DIG इंटेलिजेंस डी कल्याण चक्रवर्ती की भूमिका को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी अपना काम पूरा कर चुके हैं इसलिए उन्हें बार बार व्यक्तिगत रूप से अदालत में आने की जरूरत नहीं है। अब सक्षम प्राधिकारी के फैसले के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलती है तो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने की बात भी अदालत के सामने रखी गई।

    मामला मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह की उस टिप्पणी से जुड़ा है जो उन्होंने 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में हलमा कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की थी। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में दिए गए बयान में उन्होंने कर्नल सोफिया को आतंकवादियों की बहन कहकर टिप्पणी की थी। बयान सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले का स्वत संज्ञान लिया था और बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया।

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी मध्य प्रदेश सरकार के रुख पर नाराजगी जता चुका है। अभियोजन की मंजूरी में देरी को लेकर अदालत ने सरकार को सख्त चेतावनी दी थी और कहा था कि उसके निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। पिछली सुनवाई में मंत्री की ओर से कई बार माफी मांगे जाने की दलील भी दी गई थी लेकिन अदालत ने इसे पर्याप्त नहीं माना था।

    अब पूरा मामला अभियोजन की मंजूरी पर टिक गया है। मध्य प्रदेश कैबिनेट ने मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं देने का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा है। राज्यपाल के निर्णय के बाद ही यह तय होगा कि सीलबंद जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे अभियोजन की कार्रवाई होगी या मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।

  • स्कूल ऑडिट की बैठक में घुसे युवाओं ने किया विरोध, CJP से तीखे सवाल और नारेबाजी, माइक छीनने की कोशिश के आरोप पर पहुंची पुलिस

    स्कूल ऑडिट की बैठक में घुसे युवाओं ने किया विरोध, CJP से तीखे सवाल और नारेबाजी, माइक छीनने की कोशिश के आरोप पर पहुंची पुलिस


    भोपाल । भोपाल में सरकारी स्कूलों के ऑडिट को लेकर रविवार शाम गांधी भवन में आयोजित CJP की बैठक उस समय हंगामे में बदल गई जब कुछ छात्र और युवा बैठक के दौरान पहुंच गए। अभियान से जुड़े लोगों की बात सुनने के बाद युवाओं ने स्कूल ऑडिट और CJP की गतिविधियों को लेकर सवाल उठाने शुरू किए। बातचीत के दौरान मामला इतना बढ़ गया कि नारेबाजी होने लगी और बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया। छात्रों ने यह दिल्ली नहीं भोपाल है कॉकरोच पार्टी मुर्दाबाद और तानाशाही नहीं चलेगी जैसे नारे लगाए। हंगामे की सूचना मिलने के बाद पुलिस बल गांधी भवन पहुंचा और युवाओं को समझाइश देकर वहां से रवाना किया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बैठक के दौरान छात्रों का एक समूह अंदर पहुंचा था। इनमें कुछ युवक काली टीशर्ट पहने हुए थे। उन्होंने CJP के प्रतिनिधियों से सरकारी स्कूलों के ऑडिट को लेकर सवाल किए। युवाओं ने दिल्ली में हुए पिछले प्रदर्शनों और संगठन की गतिविधियों को लेकर भी जवाब मांगा। छात्र अंश पुरोहित ने कहा कि उनका किसी समुदाय या राजनीतिक दल के खिलाफ विरोध नहीं है। उन्होंने पुलिस और सेना के सम्मान की बात कहते हुए किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करने की बात कही।

    छात्रों का कहना था कि वे बैठक में विरोध करने के इरादे से नहीं पहुंचे थे बल्कि चर्चा सुनना और अपने सवालों के जवाब लेना चाहते थे। उनका सवाल था कि दिल्ली में हुए विवादों के बाद भोपाल में अभियान चलाते समय ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। छात्रों ने कुछ गतिविधियों को एंटीनेशनल बताते हुए CJP से अभियान के उद्देश्य और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल किए।

    विवाद उस समय और बढ़ गया जब छात्रों ने आरोप लगाया कि उनके हाथ से माइक लेने की कोशिश की गई। अंश पुरोहित के मुताबिक माइक लेने की कोशिश कई बार हुई। इसके बाद वहां मौजूद कुछ छात्र भावुक हो गए और नारेबाजी शुरू हो गई। हंगामे के बीच CJP की एक महिला प्रतिनिधि ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया और पहले पूरी बात सुनने की बात कही। इस पर छात्रों ने सवाल किया कि अगर उनकी पूरी बात नहीं सुनी जाएगी तो वे अपने सवाल कैसे पूछ पाएंगे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रही। हालांकि माइक छीनने के आरोपों पर CJP की ओर से कोई अलग आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    CJP की अभियान कोऑर्डिनेटर माया विश्वकर्मा ने बैठक को लेकर बताया कि स्कूल ठीक करो अभियान के तहत मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति का नागरिक स्तर पर ऑडिट किया जाना है। उनके मुताबिक ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई बार अधिकारी नियमित रूप से नहीं पहुंच पाते। ऐसे में नागरिकों की भागीदारी के जरिए स्कूलों की वास्तविक स्थिति का डेटा तैयार करने की योजना है।

    इस ऑडिट में स्कूलों में पानी शौचालय बिजली कक्षाओं की स्थिति शिक्षक और विद्यार्थियों का अनुपात विद्यार्थियों की उपस्थिति पाठ्यपुस्तक यूनिफॉर्म छात्रवृत्ति और मिडडे मील जैसी सुविधाओं को देखा जाएगा। इसके अलावा स्कूल भवन की सुरक्षा फर्स्टएड अग्निशामक यंत्र दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं पुस्तकालय और कंप्यूटर की उपलब्धता की भी जानकारी जुटाई जाएगी।

    माया विश्वकर्मा के अनुसार अभियान की शुरुआत 15 अगस्त से की गई थी। भोपाल की बैठक के बाद नरसिंहपुर जिले के साईंखेड़ा ब्लॉक में एक स्कूल का ऑडिट किया जाना है। इसके बाद भोपाल सहित प्रदेश के अन्य इलाकों में भी सर्वे किया जाएगा। अभियान की शुरुआत फिलहाल स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं से की जा रही है और आगे बच्चों के पाठ्यक्रम शिक्षकों तथा अन्य शैक्षणिक समस्याओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा। बैठक में हुआ हंगामा भले ही खत्म हो गया हो लेकिन इस घटनाक्रम ने CJP के अभियान और उसके उद्देश्य को लेकर अलग अलग पक्षों के सवालों को जरूर सामने ला दिया है।

  • MP में शिक्षक भर्ती को लेकर दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलान, 5 सितंबर से भूख हड़ताल की चेतावनी; पदवृद्धि की मांग पर अड़े अभ्यर्थी

    MP में शिक्षक भर्ती को लेकर दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलान, 5 सितंबर से भूख हड़ताल की चेतावनी; पदवृद्धि की मांग पर अड़े अभ्यर्थी


    भोपालमध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती 2025 को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। भोपाल के नीलम पार्क में पदवृद्धि की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे अभ्यर्थियों के बीच बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात की और उनकी मांगों को जायज बताते हुए सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की। दिग्विजय सिंह ने इस दौरान सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अभ्यर्थियों की मांगों पर शिक्षक दिवस तक कोई निर्णय नहीं लिया गया तो वे खुद 24 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

    दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन में शिक्षा और स्वास्थ्य हमेशा महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का विस्तार करने के लिए बड़ी संख्या में स्कूल खोले गए थे। उनके मुताबिक करीब 45 हजार नए स्कूल खोले गए और शिक्षकों की भर्ती का अधिकार भोपाल से स्थानीय स्तर पर दिया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और स्थानीय स्तर पर शिक्षकों की कमी को पूरा करना था।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने मौजूदा शिक्षक भर्ती व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था और सिलेबस में बदलाव का सीधा असर उन शिक्षकों पर पड़ रहा है जिन्होंने वर्षों तक पुराने पाठ्यक्रम के आधार पर विद्यार्थियों को पढ़ाया है। अब उन्हें नए सिलेबस के अनुसार परीक्षा देने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब शिक्षकों के पद खाली हैं तो उन रिक्त पदों पर भर्ती क्यों नहीं की जा रही है।

    दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता शिक्षा और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के बजाय दूसरे राजनीतिक और धार्मिक मुद्दों पर ज्यादा है। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर भी निशाना साधा और कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने अपनी उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि 80 वर्ष की उम्र में भी वे खुद को नौजवान मानते हैं और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ खड़े रहेंगे।

    इस दौरान पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी उनके साथ मौजूद रहे। प्रदर्शन स्थल पर महिला अभ्यर्थियों ने दिग्विजय सिंह को राखी भी बांधी। अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों और आंदोलन की स्थिति से पूर्व मुख्यमंत्री को अवगत कराया। दिग्विजय सिंह ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए वे प्रयास करेंगे।

    नीलम पार्क में वर्ग 2 माध्यमिक और वर्ग 3 प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में पदवृद्धि की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। एक दिन पहले आंदोलनकारी अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद आंदोलन और तेज हो गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर अलग अलग स्तर पर आंदोलन कर रहे हैं लेकिन अब तक सरकार की ओर से ठोस समाधान नहीं निकला है।

    अभ्यर्थी 21 अगस्त को भी भोपाल में बड़ा प्रदर्शन कर चुके हैं। प्रदेशभर से आए अभ्यर्थियों ने डीपीआई कार्यालय के सामने प्रदर्शन और ज्ञापन देने के बाद रैली निकाली और नीलम पार्क पहुंचकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। बुधवार को इस आंदोलन का छठवां दिन रहा।

    अभ्यर्थियों का कहना है कि नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच कई चरणों में आंदोलन किए गए लेकिन पदवृद्धि की मांग पर सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब वे तत्काल निर्णय की मांग कर रहे हैं। वहीं दिग्विजय सिंह की 24 घंटे की भूख हड़ताल की चेतावनी के बाद शिक्षक भर्ती का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश की सियासत में गरमाता नजर आ रहा है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह अभ्यर्थियों की मांगों पर क्या फैसला लेती है।

  • आधी रात गायब हुआ 4 लाख का बैग, CCTV देखा तो पुलिस भी रह गई हैरान; कुत्ता निकला 'चोर'

    आधी रात गायब हुआ 4 लाख का बैग, CCTV देखा तो पुलिस भी रह गई हैरान; कुत्ता निकला 'चोर'


    मंदसौर  मध्य प्रदेश के मंदसौर जिला अस्पताल में आधी रात को हुई बैग चोरी की घटना ने सभी को हैरान कर दिया। अस्पताल में अपने बेटे का इलाज कराने पहुंची महिला के पास रखा करीब 4 लाख रुपये कीमत के सोने और चांदी के आभूषणों से भरा बैग अचानक गायब हो गया। परिवार को पहले आशंका हुई कि अस्पताल परिसर में किसी ने बैग पर हाथ साफ कर दिया है लेकिन जब पुलिस ने अस्पताल और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली तो जो सच सामने आया उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। बैग किसी इंसान ने नहीं बल्कि एक कुत्ते ने मुंह में दबाकर अस्पताल से बाहर पहुंचाया था।

    मामला 23 और 24 अगस्त की दरमियानी रात का बताया जा रहा है। कयामपुर निवासी लताबाई अपने बीमार बेटे के इलाज के लिए मंदसौर जिला अस्पताल आई थीं। महिला ने घर में रखे कीमती जेवर सुरक्षा की दृष्टि से अपने साथ अस्पताल लाए थे। बैग में करीब 4 लाख रुपये कीमत के सोने और चांदी के आभूषण के अलावा लगभग 2 हजार रुपये नकद और खाने पीने का सामान भी रखा था। रात करीब 1 बजे से सुबह 6 बजे के बीच महिला को बैग गायब होने का पता चला। लाखों रुपये के जेवरात गायब होने से परिवार के होश उड़ गए और उन्होंने तत्काल पुलिस से मदद मांगी।

    लताबाई ने कोतवाली पुलिस को मामले की जानकारी दी। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद बिना देर किए अस्पताल परिसर और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू किया। पुलिस को उम्मीद थी कि फुटेज से किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान हो सकेगी लेकिन कैमरे में जो दृश्य सामने आया उसने पूरे मामले को ही अलग मोड़ दे दिया। CCTV फुटेज में एक कुत्ता अस्पताल के सर्जिकल वार्ड के आसपास घूमता दिखाई दिया। कुछ देर बाद वही कुत्ता बैग को मुंह में दबाकर अस्पताल के दरवाजे से बाहर निकलता नजर आया।

    पुलिस ने इसके बाद कुत्ते की गतिविधियों और उसके जाने की दिशा का पता लगाने के लिए आसपास लगे दूसरे CCTV कैमरों की भी मदद ली। अलग अलग स्थानों की फुटेज को जोड़कर पुलिस टीम ने कुत्ते के रास्ते को ट्रेस किया और लगातार तलाश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद पुलिस को ज्वेलरी से भरा बैग मिल गया। बैग में रखे सोने चांदी के आभूषण और अन्य सामान सुरक्षित पाए गए। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद पूरा सामान महिला को वापस सौंप दिया।

    कीमती सामान वापस मिलने के बाद लताबाई और उनके परिवार ने राहत की सांस ली। महिला ने पुलिस की तत्परता के लिए आभार जताया। अगर पुलिस समय रहते CCTV फुटेज खंगालकर कुत्ते की दिशा का पता नहीं लगाती तो लाखों रुपये के जेवरात बरामद करना मुश्किल हो सकता था। इस पूरे मामले में पुलिस की जांच का तरीका भी चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि आमतौर पर चोरी के मामलों में संदिग्ध इंसान की तलाश की जाती है लेकिन यहां जांच का रास्ता एक कुत्ते तक पहुंचा।

    हालांकि घटना ने जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों की मौजूदगी को लेकर भी चिंता सामने आई है। सवाल यह है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर आवारा कुत्ते रात के समय वार्ड तक कैसे पहुंच रहे हैं। इस घटना में महिला का कीमती सामान वापस मिल गया लेकिन अगर बैग किसी दूसरी जगह चला जाता या कुत्ता उसे कहीं छोड़ देता तो लाखों रुपये के आभूषणों का पता लगाना काफी मुश्किल हो सकता था।

    फिलहाल इस अजीबोगरीब घटना की चर्चा पूरे मंदसौर में है। जिस मामले की शुरुआत लाखों रुपये की चोरी की आशंका से हुई थी उसका अंत एक ऐसे CCTV खुलासे के साथ हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। पुलिस की तत्परता और CCTV की मदद से महिला का कीमती सामान सुरक्षित वापस मिल गया और यह मामला मंदसौर जिला अस्पताल की उन घटनाओं में शामिल हो गया जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।

  • आरसी में सिर्फ गणेश और आधार में पूरा नाम तो ट्रांसफर अटक सकता है, भोपाल RTO में नाम मिसमैच से परेशान वाहन मालिक

    आरसी में सिर्फ गणेश और आधार में पूरा नाम तो ट्रांसफर अटक सकता है, भोपाल RTO में नाम मिसमैच से परेशान वाहन मालिक


    भोपाल ।
    भोपाल में वाहन मालिकों के लिए आरसी और आधार कार्ड में दर्ज नाम का मामूली अंतर भी बड़ी परेशानी का कारण बनता जा रहा है। खासकर ऐसे लोगों की दिक्कत बढ़ गई है जो अपनी पुरानी गाड़ी बेचने या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया में हैं। भोपाल आरटीओ में आधार आधारित प्रक्रिया के दौरान नाम का मिलान नहीं होने से वाहन ट्रांसफर के आवेदन अटकने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई वाहन मालिकों का कहना है कि वर्षों पहले वाहन खरीदते समय जिन दस्तावेजों के आधार पर आरसी तैयार हुई थी उनमें नाम अलग तरीके से दर्ज था। बाद में आधार कार्ड बनवाते समय पूरा नाम और सरनेम जुड़ गया। अब दोनों दस्तावेजों में यही अंतर वाहन ट्रांसफर के समय समस्या खड़ी कर रहा है।

    होशंगाबाद रोड निवासी गणेश बडाले का मामला इसका उदाहरण है। उनकी स्कूटी की आरसी में केवल गणेश नाम दर्ज है जबकि आधार कार्ड में पूरा नाम गणेश बडाले लिखा हुआ है। जब उन्होंने स्कूटी ट्रांसफर कराने के लिए आवेदन किया तो आधार और आरसी में नाम का मिलान नहीं होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। गणेश के मुताबिक वह करीब पांच दिन से आरटीओ के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अभी तक उन्हें यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि समस्या का समाधान किस दस्तावेज में सुधार कराने से होगा। उनका कहना है कि उन्होंने सामान्य तरीके से वाहन ट्रांसफर के लिए आवेदन किया था लेकिन नाम में अंतर सामने आने के बाद पूरी प्रक्रिया रुक गई।

    ऐसी समस्या केवल एक वाहन मालिक तक सीमित नहीं है। आरटीओ में पहुंच रहे लोगों के मुताबिक पुराने वाहनों के दस्तावेजों में दर्ज नाम और आधार कार्ड के नाम में अंतर होने के कारण कई मामलों में आवेदन अटक रहे हैं। किसी आरसी में सिर्फ पहला नाम दर्ज है तो कहीं सरनेम जुड़ा हुआ है जबकि आधार कार्ड में नाम का प्रारूप अलग है। उदाहरण के तौर पर किसी वाहन की आरसी में केवल यासिर दर्ज है जबकि आधार कार्ड में यासिर खान लिखा है। इसी तरह किसी आरसी में सतेंद्र मिश्रा दर्ज है जबकि दूसरे दस्तावेज में केवल सतेंद्र नाम हो सकता है। ऐसे मामलों में दस्तावेज वास्तविक रूप से एक ही व्यक्ति के होने के बावजूद सिस्टम में नाम का मिलान नहीं होने से परेशानी पैदा हो सकती है।

    यह समस्या खास तौर पर 10 से 15 साल पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है। उस समय वाहन रजिस्ट्रेशन के लिए अलग-अलग दस्तावेजों का इस्तेमाल होता था और नाम दर्ज करने का तरीका भी आज की डिजिटल प्रक्रिया से अलग था। बाद में आधार कार्ड में पूरा नाम दर्ज होने के कारण पुराने आरसी रिकॉर्ड और मौजूदा पहचान दस्तावेज के बीच अंतर पैदा हो गया। वाहन मालिकों को अक्सर तब तक इस अंतर का पता नहीं चलता जब तक उन्हें गाड़ी ट्रांसफर कराने की जरूरत नहीं पड़ती।

    ऐसे में यदि आपके पास पुराना वाहन है तो उसे बेचने या ट्रांसफर कराने से पहले आरसी में दर्ज नाम और आधार कार्ड के नाम की जांच कर लेना बेहतर होगा। नाम के साथ सरनेम जुड़ा है या नहीं और दोनों दस्तावेजों में नाम की स्पेलिंग एक जैसी है या नहीं यह भी देखना जरूरी है। छोटी सी गलती समय रहते पकड़ में आ जाए तो आगे की प्रक्रिया में होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है। खासकर पुरानी गाड़ियों के मालिकों को अपने दस्तावेजों की जानकारी पहले से दुरुस्त रखनी चाहिए ताकि वाहन बेचते या ट्रांसफर करते समय फाइल नाम मिसमैच के कारण अटक न जाए।

  • दुकानों पर सीलिंग के बीच व्यापारियों का अनोखा विरोध, मिंटो हॉल में प्रार्थना सभा कर मांगेंगे रहवासी इलाकों के कारोबार का स्थायी समाधान

    दुकानों पर सीलिंग के बीच व्यापारियों का अनोखा विरोध, मिंटो हॉल में प्रार्थना सभा कर मांगेंगे रहवासी इलाकों के कारोबार का स्थायी समाधान

    भोपाल । भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई के बाद व्यापारियों और रहवासी संगठनों के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कार्रवाई और सर्वे से परेशान व्यापारियों ने अब विरोध का अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के नेतृत्व में व्यापारी बुधवार सुबह कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर यानी मिंटो हॉल परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रार्थना सभा करेंगे। इस दौरान व्यापारी सामूहिक रूप से रामधुन का गायन करेंगे और कारोबारियों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रार्थना करेंगे। चैंबर के अध्यक्ष गोविंद गोयल के नेतृत्व में होने वाली इस सभा को व्यापारियों की ओर से शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी विरोध के तौर पर देखा जा रहा है।

    दरअसल राजधानी में रहवासी क्षेत्रों में संचालित दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नगर निगम ने कार्रवाई तेज कर दी है। कई इलाकों में सर्वे के साथ भवनों में किए गए अन्य निर्माण संबंधी उल्लंघनों की भी जांच की जा रही है। निगम की सख्ती के बाद ऐसे व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है जो लंबे समय से रहवासी भवनों में दुकान या अन्य कारोबार संचालित कर रहे हैं। अवधपुरी अयोध्या बायपास गौतम नगर अशोका गार्डन और लालघाटी समेत कई क्षेत्रों में दुकानदारों के बीच नोटिस मिलने के बाद वैकल्पिक कमर्शियल स्थान तलाशने की चर्चा तेज हो गई है।

    व्यापारियों का कहना है कि अचानक सख्ती से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। उनका तर्क है कि यदि शहर का मास्टर प्लान समय पर स्पष्ट तरीके से लागू होता और रहवासी तथा व्यावसायिक क्षेत्रों का पहले से व्यवस्थित निर्धारण किया जाता तो आज ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। वहीं दूसरी ओर रहवासी संगठनों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है और किसी भी स्थिति में रहवासी इलाकों का व्यावसायीकरण नहीं होना चाहिए।

    इसी मुद्दे को लेकर पिछले दिनों विरोध प्रदर्शन भी तेज हुए हैं। रोशनपुरा चौराहे पर व्यापारियों ने चक्काजाम किया था। इसके बाद बाग सेवनिया अवधपुरी 10 नंबर और आनंद नगर में भी प्रदर्शन हुए। दूसरी ओर रहवासी संघ की ओर से गुलमोहर कॉलोनी में टॉर्च लाइट रैली निकाली गई थी। इससे पहले सात नंबर मार्केट में भी रहवासी संगठनों ने रैली के जरिए अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।

    नगर निगम ने अब मुख्य मार्गों के दोनों ओर के क्षेत्रों के साथ उनसे जुड़ी गलियों में भी सर्वे शुरू कर दिया है। नदी और तालाब के किनारे बने भवनों के अलावा ग्रीन बेल्ट बफर जोन और कैचमेंट एरिया में निर्माण की भी प्राथमिकता से जांच की जा रही है। अवैध मैरिज गार्डन को भी नोटिस दिए जाने की तैयारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह कार्रवाई और तेज होने के संकेत हैं।

    व्यापारियों की प्रार्थना सभा के जरिए अब इस पूरे विवाद का स्थायी समाधान निकालने की मांग सामने रखी जाएगी। सवाल यह है कि प्रशासन व्यापारियों की चिंता और रहवासियों की आपत्तियों के बीच ऐसा रास्ता कैसे निकालेगा जिससे नियमों का पालन भी हो और वर्षों से कारोबार कर रहे लोगों की रोजी-रोटी पर भी अचानक संकट न आए। भोपाल में कमर्शियल एक्टिविटी को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब शहर की बड़ी प्रशासनिक और कारोबारी चुनौती बनता जा रहा है।

  • इंदौर होटल कांड में नया मोड़, युवक ने बदली पहचान; मोबाइल और कमरे की तलाशी में मिला संदिग्ध सामान, पुलिस जांच में जुटी

    इंदौर होटल कांड में नया मोड़, युवक ने बदली पहचान; मोबाइल और कमरे की तलाशी में मिला संदिग्ध सामान, पुलिस जांच में जुटी


    इंदौर । इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में स्थित एक होटल में युवती के साथ दो युवकों के मिलने के बाद रविवार रात हंगामा हो गया। स्कीम नंबर 114 पार्ट-1 स्थित होटल सिल्वर पैलेस में कुछ लोगों ने युवती के साथ गलत गतिविधि होने का आरोप लगाते हुए पुलिस को सूचना दी। इसके बाद राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और होटल के कमरे से एक युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। दूसरा युवक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने फिलहाल पकड़े गए युवक के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

    मिली जानकारी के मुताबिक करणी सेना के कार्यकर्ताओं को होटल में एक हिंदू युवती के साथ दो युवकों के मौजूद होने की सूचना मिली थी। संगठन के पदाधिकारी होटल पहुंचे और कमरे में मौजूद युवकों से पूछताछ की। आरोप है कि दोनों युवक युवती को नशा करा रहे थे। पूछताछ के दौरान पकड़े गए युवक ने पहले अपनी पहचान छिपाते हुए अपना नाम लक्की बताया। बाद में पूछताछ में उसकी पहचान खजराना निवासी फैजान खान के रूप में हुई। उसके साथ मौजूद अमन खान मौके से निकल गया।

    मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने अमन पर फर्जी पुलिसकर्मी बनकर लोगों को डराने और ब्लैकमेल करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। संगठन का दावा है कि दोनों युवक खजराना और आसपास के क्षेत्रों में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही इन दावों की वास्तविकता स्पष्ट होगी।

    घटना के दौरान फैजान के मोबाइल फोन की जांच किए जाने का भी दावा किया गया। संगठन के मुताबिक मोबाइल में कई युवतियों के साथ आपत्तिजनक फोटो वीडियो और चैट मिले। इसके अलावा गांजा एमडी और चाकू की तस्वीरें भी मोबाइल में होने की बात सामने आई। होटल के कमरे की तलाशी के दौरान शराब की बोतलें कंडोम और कथित तौर पर सेक्स वर्धक गोलियां मिलने का भी दावा किया गया है। पुलिस इन सभी बरामद वस्तुओं और डिजिटल सामग्री की जांच कर रही है।

    मामले में सबसे अहम पहलू युवती की स्थिति और उसके बयान को माना जा रहा है। लसूड़िया थाना प्रभारी राजकुमार यादव के मुताबिक पुलिस के पास करणी सेना के कार्यकर्ता फैजान नाम के युवक को लेकर आए थे। पुलिस का कहना है कि युवक काफी नशे की हालत में था। उसके मोबाइल में आपत्तिजनक वीडियो चाकू और गांजे से संबंधित तस्वीरें मिलने की बात भी सामने आई है। पुलिस अधिकारी के अनुसार युवक का नशा उतरने के बाद उससे विस्तार से पूछताछ की जाएगी और युवती से भी घटना के संबंध में जानकारी ली जाएगी।

    फिलहाल पुलिस ने युवक को हिरासत में लेकर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। फरार बताए जा रहे अमन खान की तलाश और मामले में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। करणी सेना के पदाधिकारियों ने फरार युवक की गिरफ्तारी और पूरे मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि होटल के कमरे में वास्तव में क्या हुआ था और युवती के साथ किसी तरह की जबरदस्ती या नशीला पदार्थ देने की बात सही है या नहीं। फिलहाल मामले में लगाए गए सभी गंभीर आरोप जांच के अधीन हैं।

  • कोच के दस्तावेजों पर IDA का स्विमिंग पूल टेंडर? बिना अनुमति इस्तेमाल का आरोप, संस्था ने कहा- आरोप बेबुनियाद

    कोच के दस्तावेजों पर IDA का स्विमिंग पूल टेंडर? बिना अनुमति इस्तेमाल का आरोप, संस्था ने कहा- आरोप बेबुनियाद


    इंदौर  इंदौर में स्विमिंग पूल संचालन के एक टेंडर को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। दिल्ली के रिटायर्ड इंटरनेशनल स्विमिंग कोच मुकुंद मोहन शर्मा ने आरोप लगाया है कि उनके शैक्षणिक और पेशेवर दस्तावेजों का कथित रूप से बिना अनुमति इस्तेमाल कर इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी IDA का स्विमिंग पूल संचालन का ठेका हासिल किया गया। कोच का दावा है कि उन्होंने ये दस्तावेज केवल दिल्ली के तालकटोरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के टेंडर में भाग लेने के लिए एक संस्था को दिए थे लेकिन बाद में उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल इंदौर के टेंडर में कर लिया गया। मामला सामने आने के बाद उन्होंने इंदौर पुलिस कमिश्नर से शिकायत की है और अब क्राइम ब्रांच मामले में FIR दर्ज करने की तैयारी कर रही है।

    मुकुंद मोहन शर्मा के अनुसार वह वर्ष 2022 में अपने छात्र संदीप तोकस के माध्यम से देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट से जुड़े थे। इसके बाद 21 फरवरी 2023 को उन्होंने संस्था के डायरेक्टर देवेंद्र लांबा और उनकी पत्नी मधुलिका को अपने शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता से जुड़े दस्तावेज दिए थे। उनका कहना है कि ये दस्तावेज केवल नई दिल्ली के तालकटोरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के स्विमिंग पूल संचालन के टेंडर में इस्तेमाल करने के लिए दिए गए थे। बाद में वह टेंडर निरस्त हो गया।

    कोच का आरोप है कि टेंडर निरस्त होने के बाद उन्होंने अपने दस्तावेजों को किसी अन्य सरकारी अर्धसरकारी या निजी संस्था की टेंडर प्रक्रिया में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल इंदौर में IDA के स्विमिंग पूल संचालन का ठेका हासिल करने में किया गया। शर्मा के मुताबिक 8 सितंबर 2023 को IDA का अनुबंध हासिल किया गया था। उनका दावा है कि पूरी प्रक्रिया में उनसे किसी तरह की लिखित अनुमति या सहमति नहीं ली गई।

    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शर्मा को कथित दस्तावेज दुरुपयोग की जानकारी करीब तीन साल बाद जनवरी 2026 में मिली। एक परिचित के माध्यम से उन्हें पता चला कि उनके दस्तावेज इंदौर के IDA टेंडर में लगाए गए हैं। इसके बाद उन्होंने IDA के CEO को ईमेल के जरिए शिकायत की। 25 फरवरी को उन्होंने मामले की जानकारी देते हुए ईमेल भेजा और 7 मार्च को रिमाइंडर भी भेजा। कई महीने तक स्पष्ट कार्रवाई या जांच की जानकारी नहीं मिलने के बाद उन्होंने लिखित शिकायत के साथ शपथपत्र भी दिया।

    शर्मा ने यह भी आशंका जताई है कि उनके शैक्षणिक और पेशेवर दस्तावेजों का इस्तेमाल अन्य शहरों में स्विमिंग पूल के टेंडर लाइसेंस या परमिट हासिल करने के लिए भी किया गया हो सकता है। उन्होंने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के लखनऊ स्थित रीजनल सेंटर के स्विमिंग पूल से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में भी अपने दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच कराने की मांग की है।

    हालांकि देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट के संचालक देवेंद्र लांबा ने शर्मा के आरोपों को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है। उनका कहना है कि शर्मा पहले उनके संस्थान से जुड़े थे और उनकी शैक्षणिक योग्यता तथा उपलब्धियों से संबंधित दस्तावेज संस्था के रिकॉर्ड में उपलब्ध थे। लांबा के मुताबिक किसी कोच या कर्मचारी के संस्थान से जुड़ने पर उसकी योग्यता और उपलब्धियों के दस्तावेज रिकॉर्ड में रखना सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि क्राइम ब्रांच की शिकायत के बाद संस्था अपना जवाब दे चुकी है और जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेज और अंडरटेकिंग भी जांच एजेंसी को उपलब्ध कराई जाएगी।

    लांबा ने यह भी कहा कि देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट का हेड ऑफिस गुरुग्राम में है और देश के अलग-अलग हिस्सों में उसके कई सेंटर संचालित होते हैं। उनके मुताबिक टेंडर प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि हेड ऑफिस के माध्यम से की जाती है।

    वहीं IDA के CEO डॉ. परीक्षित झाडे ने बताया कि मुकुंद मोहन शर्मा की ओर से शिकायत प्राप्त हुई है और विभागीय स्तर पर इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला आरोप और जांच के स्तर पर है और क्राइम ब्रांच की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दस्तावेजों का वास्तव में किस तरह इस्तेमाल हुआ और टेंडर प्रक्रिया में किसी नियम का उल्लंघन हुआ या नहीं।