ग्वालियर JAH में स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर: 700 आउटसोर्स कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल गंदगी और अव्यवस्था के बीच सिसक रहे मरीज


ग्वालियर। ग्वालियर-चंबल अंचल के सबसे बड़े जीवनदायिनी संस्थान जयारोग्य अस्पताल JAH में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह पटरी से उतर गई हैं। अस्पताल की सुरक्षा सफाई और वार्ड व्यवस्था संभालने वाले लगभग 700 आउटसोर्स कर्मचारी मंगलवार से अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल पर चले गए हैं। ‘एजाइल सिक्युरिटी फोर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के अधीन काम करने वाले इन कर्मचारियों के अचानक मोर्चे पर उतरने से अस्पताल परिसर में कचरे के ढेर लग गए हैं वहीं स्ट्रेचर और वार्ड बॉय न मिलने के कारण मरीजों के परिजन उन्हें हाथों में उठाकर ले जाने को मजबूर हैं।

वादाखिलाफी से फूटा कर्मचारियों का गुस्सा हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का आरोप है कि एजाइल कंपनी उनके हकों का शोषण कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि उन्हें समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा है और पिछले 2 साल का एरियर भी बकाया है। कंपनी द्वारा बोनस का भुगतान भी नहीं किया गया है। कर्मचारियों के अनुसार नवंबर 2025 में भी उन्होंने इन्हीं मांगों को लेकर आंदोलन किया था तब कंपनी प्रबंधन ने लिखित आश्वासन देकर हड़ताल खत्म करवाई थी। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी जब वादा पूरा नहीं हुआ तो कर्मचारियों ने एक बार फिर ‘आर-पार’ की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

अस्पताल की लाइफलाइन ठप मरीजों का बुरा हाल जयारोग्य अस्पताल में रोजाना हजारों की संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुँचते हैं। हड़ताल के कारण सफाईकर्मी सुरक्षा गार्ड वार्ड बॉय स्ट्रेचर बॉय और फार्मेसी कर्मचारियों ने काम छोड़ दिया है। इसका सीधा असर अस्पताल की सफाई व्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ा है। ओटी OT और वार्डों में स्ट्रेचर न मिलने से गंभीर मरीजों को शिफ्ट करने में भारी परेशानी आ रही है। सुरक्षा गार्डों की अनुपस्थिति से अस्पताल की व्यवस्थाएं अनियंत्रित हो रही हैं और फार्मेसी काउंटर पर दवाओं के वितरण में भी बाधा आ रही है।

मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन हड़ताली कर्मचारियों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि इस बार वे केवल आश्वासन से नहीं मानेंगे। जब तक वेतन विसंगतियां दूर नहीं होतीं एरियर का भुगतान नहीं किया जाता और बोनस की राशि खाते में नहीं आती तब तक काम बंद रहेगा। दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन वैकल्पिक व्यवस्थाएं जुटाने की कोशिश कर रहा है लेकिन इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की कमी को पूरा करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। यदि यह गतिरोध जल्द समाप्त नहीं हुआ तो अंचल की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है।