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  • माइक न मिलने पर जनपद अध्यक्ष का छलका दर्द, सिंधिया के कार्यक्रम में सियासी तकरार ने पकड़ा जोर

    माइक न मिलने पर जनपद अध्यक्ष का छलका दर्द, सिंधिया के कार्यक्रम में सियासी तकरार ने पकड़ा जोर


    शिवपुरी  शिवपुरी के बदरवास में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कार्यक्रम के दौरान माइक को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार शाम बिजरौनी बायपास और दौलतपुर से खाइखेड़ा मार्ग निर्माण के भूमि पूजन कार्यक्रम में बदरवास जनपद अध्यक्ष मीरा बाई परिहार को मंच से बोलने का अवसर नहीं मिला। कार्यक्रम के बाद जनपद अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वह अपनी बात रखने वाली थीं लेकिन उनका माइक हटा दिया गया। इसके बाद स्थानीय राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    कार्यक्रम के दौरान जनपद अध्यक्ष मीरा बाई परिहार केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने क्षेत्र से जुड़ी अपनी बात रखना चाहती थीं। उनका कहना है कि उन्होंने कोलारस विधायक महेंद्र यादव से भी उन्हें बोलने का अवसर देने की बात कही थी। जनपद अध्यक्ष के मुताबिक विधायक ने उन्हें अपनी बात वहीं से कहने के लिए कहा था लेकिन वह माइक के जरिए मंच से अपनी बात रखना चाहती थीं। उनका आरोप है कि उन्हें ऐसा करने का मौका नहीं दिया गया।

    कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मीरा बाई परिहार ने विधायक महेंद्र यादव पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले करीब एक साल से जनपद क्षेत्र के विकास कार्यों में अड़चनें आ रही हैं। जनपद अध्यक्ष ने दावा किया कि विकास कार्यों से जुड़े मामलों को लेकर वह चार बार दिल्ली तक जा चुकी हैं लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।

    मीरा बाई ने कहा कि जनपद अध्यक्ष के तौर पर जनता के लिए विकास कार्य कराना उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन यदि विकास कार्यों के लिए जरूरी प्रक्रिया और फंड से जुड़े काम ही आगे नहीं बढ़ेंगे तो सरपंचों की मांगों को पूरा करना मुश्किल होगा। उन्होंने अधिकारियों और बिचौलियों पर भी काम में बाधा डालने के आरोप लगाए। उनका कहना है कि कई मामलों में ऑनलाइन एंट्री तक नहीं होने दी जा रही है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से विकास फंड जल्द जारी करने की मांग की और संकेत दिया कि सुनवाई नहीं होने पर वह इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठा सकती हैं।

    वहीं कोलारस विधायक महेंद्र यादव ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मीरा बाई परिहार ने उनसे केंद्रीय मंत्री से कुछ कहने की इच्छा जताई थी। विधायक के मुताबिक उन्होंने जनपद अध्यक्ष से अपनी बात कागज पर लिखकर देने के लिए कहा था ताकि उनकी बात केंद्रीय मंत्री तक स्पष्ट रूप से पहुंचाई जा सके।

    विधायक ने कहा कि यदि जनपद अध्यक्ष ने माइक के जरिए केंद्रीय मंत्री और जनता के सामने अपनी बात रखने की इच्छा जताई होती तो उन्हें बोलने का अवसर जरूर दिया जाता। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री कोलारस रेलवे स्टेशन पर उज्जैनी एक्सप्रेस के नियमित ठहराव को हरी झंडी दिखाने वाले थे। इसी कारण मंच से बोलने का समय सीमित था और मंडल अध्यक्ष विधायक तथा सांसद को ही वक्तव्य का अवसर दिया गया।

    महेंद्र यादव ने मीरा बाई परिहार को पार्टी की वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री अभी शिवपुरी में ही हैं और जनपद अध्यक्ष उनसे मुलाकात कर अपनी बात सीधे रख सकती हैं। विधायक ने यह भी कहा कि वह स्वयं मीरा बाई से इस मामले में चर्चा करेंगे।

    इस कार्यक्रम में क्षेत्र को रेल सुविधा की सौगात भी मिली। ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयासों से कोलारस रेलवे स्टेशन पर उज्जैनी एक्सप्रेस के नियमित ठहराव को मंजूरी मिली है। इसके अलावा अशोकनगर रेलवे स्टेशन पर सोगरिया दानापुर एक्सप्रेस के ठहराव को भी स्वीकृति दी गई है। विकास कार्यों और रेल सुविधाओं के बीच मंच पर बोलने को लेकर उठा यह विवाद अब स्थानीय सियासत में चर्चा का विषय बन गया है।

  • भगवा रोबोट का VIP स्वागत और मंत्री की सुरीली तान, CM मोहन यादव बोले- मोदी ने देश को उसकी ताकत का एहसास कराया

    भगवा रोबोट का VIP स्वागत और मंत्री की सुरीली तान, CM मोहन यादव बोले- मोदी ने देश को उसकी ताकत का एहसास कराया

    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में मंगलवार को ऐसे कई रंग देखने को मिले जो आम सियासी गतिविधियों से बिल्कुल अलग रहे। कहीं भगवा गमछा पहने रोबोट ने नेता की तरह एंट्री लेकर लोगों का मनोरंजन किया तो कहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल के मंच पर अपनी गायकी का हुनर दिखाया। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना रामायण के जामवंत से कर दी। इन घटनाओं ने प्रदेश की सियासत और सार्वजनिक कार्यक्रमों में एक अलग ही रंग भर दिया।

    उज्जैन में एक रेस्टोरेंट के उद्घाटन के दौरान रोबोट को मुख्य अतिथि की तरह पेश किया गया। रोबोट की एंट्री भी बेहद खास अंदाज में हुई। उसके आसपास हथियार लिए कमांडो नजर आए और कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही उसे भगवा दुपट्टा पहनाया गया। तिलक लगाकर उसका स्वागत किया गया। इसके बाद रोबोट को नाश्ता और पानी भी ऑफर किया गया। उद्घाटन के इस पूरे कार्यक्रम में रोबोट आकर्षण का केंद्र बना रहा। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए सबसे दिलचस्प पल तब आया जब भगवा दुपट्टा पहने रोबोट ने डांस करना शुरू कर दिया। उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    रोबोट की इस अंदाज में मेहमाननवाजी को लेकर लोग तरह-तरह के मजाकिया कमेंट भी कर रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मशीन बनाने वालों ने शायद कल्पना भी नहीं की होगी कि उनका रोबोट एक दिन किसी नेता की तरह VIP स्वागत पाएगा और उद्घाटन के साथ डांस भी करेगा। अब तो मजाक में यह तक कहा जा रहा है कि अगर यही सिलसिला चलता रहा तो आने वाले समय में फीता काटने से लेकर भाषण देने तक की जिम्मेदारी भी रोबोट को मिल सकती है।

    इधर भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना जामवंत से करते हुए कहा कि जिस तरह रामायण में जामवंत ने हनुमान जी को उनकी शक्ति का अहसास कराया था उसी तरह प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को उसकी क्षमता और सामर्थ्य का एहसास कराया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश लगातार मजबूत हो रहा है और भारत अपने सामर्थ्य के दम पर हर तरह की चुनौती का सामना करने में सक्षम है। मुख्यमंत्री की इस तुलना के बाद राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई है।

    उधर बड़वानी जिले के खेतिया में आयोजित कानबाई उत्सव में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी अपनी अलग छाप छोड़ी। मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल के मंच पर पहुंचकर उन्होंने गाना गाया। उन्होंने हमें तुमसे प्यार कितना गीत की पंक्तियां गाकर अपनी आवाज का हुनर दिखाया। इतना ही नहीं उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से भी अपने साथ गाने की अपील की। अनुराधा पौडवाल के सामने उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें बताना है कि वे भी सुरीले हैं। मंत्री का यह अंदाज देखकर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने जमकर तालियां बजाईं।

    इन घटनाओं के बीच एक और मामला चर्चा में है जिसमें एक फूड प्रोडक्ट को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हुआ था। जांच के बाद कंपनी के उत्पाद सही पाए गए और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले व्यक्ति को कानूनी नोटिस दिए जाने की बात सामने आई। हालांकि अब वह अपनी बात से पीछे हटता नजर आ रहा है। इस पूरे मामले में कंपनी के भोपाल स्थित मुख्यालय के बाहर लगी नेमप्लेट हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

    कुल मिलाकर मंगलवार को मध्य प्रदेश की सियासत में बयानबाजी के साथ मनोरंजन और दिलचस्प घटनाओं का भी तड़का देखने को मिला। भगवा रोबोट की नेता जैसी एंट्री से लेकर मंत्री की गायकी और मुख्यमंत्री की जामवंत वाली तुलना तक कई घटनाएं दिनभर चर्चा में बनी रहीं।

  • निगम परिषद की बैठक में गरमाएगा भोपाल का मुद्दा! सड़कें खुदी पड़ीं और सफाई व्यवस्था बदहाल फिर भी चर्चा से बाहर

    निगम परिषद की बैठक में गरमाएगा भोपाल का मुद्दा! सड़कें खुदी पड़ीं और सफाई व्यवस्था बदहाल फिर भी चर्चा से बाहर


    भोपाल  भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक बुधवार 19 अगस्त को ISBT स्थित मीटिंग हॉल में आयोजित होने जा रही है। साल के पहले नियमित परिषद सम्मेलन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। बैठक के एजेंडे में शहर की मौजूदा समस्याओं से जुड़े जनहित के मुद्दे शामिल नहीं होने पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का कहना है कि राजधानी की सड़कें बारिश के बाद बदहाल हो चुकी हैं कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आ रही है और सफाई व्यवस्था को लेकर भी लोगों की शिकायतें लगातार बनी हुई हैं। इसके बावजूद इन अहम मुद्दों को परिषद की बैठक के एजेंडे में जगह नहीं दी गई है। ऐसे में बैठक के हंगामेदार रहने के आसार जताए जा रहे हैं।

    नगर निगम परिषद की बैठक की शुरुआत पार्षदों के सवाल जवाब से होगी। इसके बाद एजेंडे में शामिल प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। बैठक सुबह 11 बजे शुरू होगी। बताया गया है कि सम्मेलन में नगर निगम की खाली हुई एक बिल्डिंग को किराए पर दिए जाने से जुड़े प्रस्ताव पर भी चर्चा होनी है। विपक्ष का कहना है कि जब शहर के सामने बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई सवाल खड़े हैं तो परिषद की बैठक में इन विषयों पर प्राथमिकता से चर्चा होनी चाहिए।

    बारिश के बाद भोपाल की सड़कों की स्थिति विपक्ष के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। राजधानी में कई स्थानों पर सड़कें उखड़ी हुई हैं और कुछ इलाकों में सड़क निर्माण या दूसरे कामों के कारण रास्ते प्रभावित हैं। तेज बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने की समस्या भी सामने आती है। ऐसे में आम लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष का सवाल है कि शहर की ऐसी स्थिति के बीच सड़क और जलभराव जैसे मुद्दे परिषद की बैठक में चर्चा का हिस्सा क्यों नहीं बनाए गए।

    सफाई व्यवस्था को लेकर भी विपक्ष नगर निगम को घेरने की तैयारी में है। कई इलाकों में बारिश के बाद कचरा जमा होने और जल निकासी से जुड़ी शिकायतों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि शहर की सफाई और बुनियादी सुविधाएं सीधे तौर पर आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी हैं। ऐसे में परिषद की बैठक में इन विषयों पर पार्षदों को सवाल पूछने और अधिकारियों से जवाब लेने का मौका मिलना चाहिए।

    नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने एजेंडे को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हर बैठक में शहर सरकार की ओर से जनहित के मुद्दों को पर्याप्त जगह नहीं दी जाती। उन्होंने दावा किया कि पिछली बैठक में भी जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा की मांग की गई थी लेकिन विपक्ष की बात नहीं सुनी गई। अब एक बार फिर शहर की प्रमुख समस्याओं को एजेंडे से बाहर रखने को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।

    सीनियर पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान ने भी भोपाल की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उनके मुताबिक शहर की कई सड़कें जर्जर हो चुकी हैं और तेज बारिश के बाद राजधानी के बड़े हिस्से में पानी भरने की स्थिति बनी। उनका कहना है कि सफाई व्यवस्था भी कई स्थानों पर ठीक नहीं है। विपक्ष इन सभी मुद्दों को परिषद की बैठक में उठाने की तैयारी में है।

    यह सम्मेलन इस साल का पहला ऐसा परिषद सम्मेलन बताया जा रहा है जिसमें पार्षदों को सवाल जवाब के जरिए शहर से जुड़े मुद्दे उठाने का अवसर मिलेगा। इससे पहले इस साल दो सम्मेलन हुए हैं लेकिन उनमें एक महिला सशक्तिकरण और दूसरा कचरे के नए नियमों से संबंधित था। इन बैठकों में पार्षदों के सवाल जवाब का सामान्य प्रारूप नहीं था।

    अब बुधवार की बैठक में विपक्ष के तेवर और सत्ता पक्ष के जवाब पर सबकी नजर रहेगी। एजेंडे में जनहित के मुद्दों की कमी को लेकर विपक्ष पहले ही अपनी रणनीति स्पष्ट कर चुका है। ऐसे में सड़क जलभराव सफाई और शहर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल बैठक में जोरदार तरीके से उठने की संभावना है। अगर इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होती है तो निगम परिषद का यह सम्मेलन हंगामेदार हो सकता है।

  • भोपाल में सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ व्यापारियों का बड़ा प्रदर्शन! चक्काजाम के बीच आत्मदाह की चेतावनी से गरमाया माहौल

    भोपाल में सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ व्यापारियों का बड़ा प्रदर्शन! चक्काजाम के बीच आत्मदाह की चेतावनी से गरमाया माहौल


    भोपाल। भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई को लेकर व्यापारियों का गुस्सा मंगलवार को सड़क पर दिखाई दिया। दुकानों और प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में व्यापारी और महिलाएं रोशनपुरा चौराहे पर पहुंचीं और करीब पौने दो घंटे तक चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर नारेबाजी की और सरकार से कार्रवाई रोककर समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में महिला कारोबारी भी शामिल रहीं।

    व्यापारियों का कहना है कि भोपाल के कई इलाकों में वर्षों से छोटे और बड़े कारोबार संचालित हो रहे हैं। इन कारोबारों से सिर्फ दुकान मालिक ही नहीं बल्कि कर्मचारी और उनके परिवार भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में अचानक सीलिंग की कार्रवाई होने से बड़ी संख्या में लोगों की रोजी रोटी प्रभावित होने की आशंका है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार ऐसा रास्ता निकाले जिससे नियमों का पालन भी हो सके और लंबे समय से चल रहे कारोबार भी पूरी तरह बंद न हों।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ व्यापारी मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने की कोशिश करने लगे। हालांकि पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाली सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस बल भी तैनात किया गया था। प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने सड़क पर बैठकर नारेबाजी की। बाद में प्रदर्शनकारियों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान भी गाया।

    इस आंदोलन में महिला कारोबारियों की मौजूदगी भी खास रही। ब्यूटी पार्लर और छोटे व्यवसाय चलाने वाली महिलाओं ने सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ अलग अंदाज में विरोध जताया। एक ब्यूटिशियन ने सड़क पर ही मेकअप करके अपना विरोध दर्ज कराया। महिला व्यापारियों का कहना था कि ब्यूटी पार्लर और इस तरह के छोटे कारोबार बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देते हैं। अगर इन प्रतिष्ठानों को बंद किया जाता है तो इसका सीधा असर कारोबारियों के साथ काम करने वाले कर्मचारियों पर भी पड़ेगा।

    प्रदर्शन में शामिल व्यापारियों ने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की। उनका कहना था कि यदि उनकी समस्याओं पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और बड़ा किया जा सकता है। प्रदर्शनकारियों की ओर से आंदोलन उग्र करने और आत्मदाह जैसे कदम उठाने की चेतावनी दिए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसी चेतावनियों को लेकर प्रशासन और पुलिस के सामने स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है।

    व्यापारियों ने भोपाल के मास्टर प्लान को जल्द लागू करने की मांग भी उठाई है। थोक बाजार व्यापारी संघ के अभिषेक रब्बू के मुताबिक शहर में मिक्स्ड लैंड यूज का प्रावधान किया जाना चाहिए ताकि जिन इलाकों में लंबे समय से कारोबार चल रहे हैं वहां व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके। व्यापारियों ने गुजरात की तर्ज पर अनधिकृत विकास नियमितीकरण कानून 2022 जैसे प्रावधान लागू करने की मांग भी रखी है।

    व्यापारियों का तर्क है कि कई संपत्तियों की बाकायदा रजिस्ट्री हुई है और नगर निगम की ओर से इन संपत्तियों से संपत्ति कर भी लिया जाता है। ऐसे में वर्षों से संचालित कारोबारी गतिविधियों पर अचानक नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई से व्यापारियों में नाराजगी बढ़ी है। उनका कहना है कि यदि नियमों से जुड़ी कोई समस्या है तो सरकार को पहले समाधान और नियमितीकरण का रास्ता तलाशना चाहिए।

    फिलहाल रोशनपुरा चौराहे पर हुए प्रदर्शन के बाद व्यापारियों ने आंदोलन खत्म कर दिया है लेकिन उन्होंने साफ संकेत दिया है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में विरोध और तेज हो सकता है। अब निगाहें प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर हैं। एक तरफ नगर निगम की कार्रवाई और दूसरी तरफ कारोबारियों की रोजी रोटी से जुड़ी चिंता के बीच भोपाल में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमाने की संभावना है।

  • कहीं कीचड़ में बच्चों की प्रस्तुति तो कहीं भाजपा नेता की पार्टी में SI का गाना, MP में आजादी के जश्न पर उठे सवाल

    कहीं कीचड़ में बच्चों की प्रस्तुति तो कहीं भाजपा नेता की पार्टी में SI का गाना, MP में आजादी के जश्न पर उठे सवाल


    भोपाल । मध्य प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जहां देशभक्ति और तिरंगे के रंग में पूरा प्रदेश रंगा नजर आया वहीं अलग अलग जिलों से कुछ ऐसी तस्वीरें भी सामने आईं जिन्होंने व्यवस्थाओं और प्रशासनिक तौर तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए। रतलाम में कलेक्टर के भाषण के दौरान स्वतंत्रता दिवस समारोह के मैदान में कुत्तों के पहुंचने का मामला चर्चा में रहा तो नर्मदापुरम में बारिश के बाद कीचड़ से भरे मैदान में स्कूली बच्चों को प्रस्तुति देनी पड़ी। मंदसौर के गरोठ में महिला सरपंच का घूंघट में तिरंगा फहराने का वीडियो भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। वहीं मंदसौर में भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में एक सब इंस्पेक्टर के गाना गाने का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भी मामला सुर्खियों में रहा।

    रतलाम में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान उस समय अजीब स्थिति बन गई जब आयोजन स्थल पर कुत्ते खुलेआम घूमते दिखाई दिए। बताया गया कि यह घटना उस समय हुई जब कलेक्टर का भाषण चल रहा था। कुत्ते काफी देर तक मैदान में घूमते रहे और बाद में एक पुलिसकर्मी ने उन्हें बाहर निकाला। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग व्यवस्थाओं को लेकर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देते नजर आए। लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा है तो कुत्ते भी आजादी के जश्न में शामिल होने पहुंच गए। हालांकि इस घटना ने नगर निगम और आयोजन स्थल की सुरक्षा तथा साफ सफाई व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए।

    नर्मदापुरम से आई तस्वीर भी कम चौंकाने वाली नहीं रही। बारिश के कारण स्वतंत्रता दिवस समारोह का मैदान कीचड़ से भर गया था। इसके बावजूद स्कूली बच्चों को उसी मैदान में अपनी प्रस्तुति देनी पड़ी। दूसरी ओर मैदान के एक हिस्से में गिट्टी की चूरी डालकर उसे पुलिस परेड के लिए तैयार किया गया था। इसी अंतर को लेकर लोगों ने सवाल उठाया कि जब पुलिसकर्मियों की परेड के लिए मैदान को व्यवस्थित किया जा सकता था तो बच्चों के कार्यक्रम के लिए ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई। बच्चों को कीचड़ में खड़े होकर प्रस्तुति देने की स्थिति को लेकर व्यवस्थापकों पर सवाल उठे।

    मंदसौर के गरोठ क्षेत्र से सामने आया घूंघट वाला मामला भी चर्चा में रहा। मेलखेड़ा पंचायत में महिला सरपंच ने घूंघट में तिरंगा फहराया। वीडियो में उनका चेहरा पूरी तरह घूंघट से ढका दिखाई दिया। समारोह में स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के साथ पंचायत के अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस तस्वीर को लेकर महिला सशक्तिकरण और स्थानीय स्तर पर महिलाओं की वास्तविक भागीदारी को लेकर सवाल उठाए गए। हालांकि किसी महिला का घूंघट करना अपने आप में किसी नियम का उल्लंघन नहीं है लेकिन सार्वजनिक पद पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधि की सार्वजनिक भूमिका और सामाजिक परंपराओं के बीच संतुलन को लेकर बहस जरूर छिड़ गई।

    मंदसौर में ही भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में कचनारा पुलिस चौकी प्रभारी सब इंस्पेक्टर भीम सिंह के पहुंचने और उनके लिए गाना गाने का वीडियो चर्चा में आया। वीडियो में एसआई भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में गाना गाते नजर आए। गाने के बोल भी दोस्ती को लेकर थे जिसके बाद सोशल मीडिया पर पुलिस और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच नजदीकी को लेकर सवाल उठने लगे। मामले की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचने के बाद एसआई को कारण बताओ नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि केवल किसी कार्यक्रम में शामिल होने या गाना गाने से किसी राजनीतिक पक्षधरता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन पुलिसकर्मी और राजनीतिक दलों के नेताओं के सार्वजनिक मेलजोल को लेकर उठने वाले सवालों के कारण यह मामला चर्चा में जरूर आ गया।

    अंदर की बात पर भी सियासी नजर

    दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे के बाद भाजपा संगठन में समीक्षा और संभावित कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज रही। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने परिणामों की समीक्षा की बात कही थी। बाद में मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई और हार के कारणों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति को चुनाव से जुड़े पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई। इससे साफ है कि दतिया के नतीजे को पार्टी ने गंभीरता से लिया है।

    कुल मिलाकर स्वतंत्रता दिवस के उत्सव के बीच सामने आई ये तस्वीरें मध्य प्रदेश में व्यवस्था प्रशासन राजनीति और सामाजिक परंपराओं से जुड़े अलग अलग सवालों को सामने लाती हैं। कहीं लापरवाही पर सवाल है तो कहीं समान व्यवस्था की मांग उठ रही है और कहीं सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के आचरण को लेकर बहस छिड़ी है। यही वजह है कि आजादी के जश्न के साथ इन घटनाओं ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

  • मध्य प्रदेश में पुलिस महकमे को बड़ी मजबूती, 3 नई SISF बटालियन बनेंगी; हजारों पुलिसकर्मियों को प्रमोशन और भर्ती का ऐलान

    मध्य प्रदेश में पुलिस महकमे को बड़ी मजबूती, 3 नई SISF बटालियन बनेंगी; हजारों पुलिसकर्मियों को प्रमोशन और भर्ती का ऐलान


    भोपाल । मध्यप्रदेश में औद्योगिक संस्थानों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित पुलिस विभाग की नवीन भर्ती और पदोन्नति आभार प्रदर्शन समारोह में राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल यानी एसआईएसएफ की तीन नई बटालियन गठित करने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन तीन बटालियनों में से एक का गठन खंडवा में किया जाएगा, जबकि बाकी दो बटालियन कहां स्थापित होंगी इसका फैसला बाद में किया जाएगा। सरकार के इस कदम को औद्योगिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसी कार्यक्रम में राज्य के अति पिछड़े जनजातीय समूहों के युवाओं को सुरक्षा बल में अवसर देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि बैगा, भारिया और सहरिया समुदायों की अलग-अलग कंपनियां गठित की जाएंगी। इन कंपनियों में संबंधित जनजातीय समुदायों के युवाओं को शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इन समुदायों के युवाओं को रोजगार और सुरक्षा बल में प्रतिनिधित्व देने के साथ उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना भी है। इस फैसले से आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं के लिए सरकारी सेवा में नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग में पदोन्नति को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने बताया कि जुलाई 2026 में प्रदेश के विभिन्न विभागों में पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई और पुलिस विभाग में 58 संवर्गों के कुल 27,534 अफसरों और कर्मचारियों को पदोन्नति मिली। इनमें 30 रक्षित निरीक्षक पदोन्नत होकर उप पुलिस अधीक्षक बने हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे पुलिसकर्मियों के लिए यह फैसला उनके मनोबल को बढ़ाने वाला है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के कंधों पर लगे सितारे सिर्फ पदोन्नति का प्रतीक नहीं बल्कि बढ़ी हुई जिम्मेदारी और क्षमता का भी संकेत हैं।

    मुख्यमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि पदोन्नति में लंबे समय तक आई रुकावट के कारण 20 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो गए और उन्हें अपने सेवाकाल में पदोन्नति का लाभ नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि इस बात का उन्हें मलाल है, लेकिन अब पदोन्नति का रास्ता खोल दिया गया है और आगे पात्रता के आधार पर पुलिसकर्मियों को आगे बढ़ने के अवसर मिलते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस विभाग को मजबूत बनाने के लिए नए पदों की स्वीकृति और नियमित भर्ती पर सरकार लगातार काम कर रही है।

    डीजीपी कैलाश मकवाना ने बताया कि दिसंबर 2024 में पदभार संभालने के बाद पुलिस विभाग की विभिन्न शाखाओं की विस्तृत समीक्षा की गई थी। इस दौरान भर्ती एवं चयन शाखा में करीब 20 हजार पद खाली मिले। इनमें सब इंस्पेक्टर, सूबेदार, स्टेनो और एएसआई एम जैसे महत्वपूर्ण पद भी शामिल थे। डीजीपी के मुताबिक इन पदों पर करीब आठ साल से भर्ती नहीं हुई थी। लंबे समय तक रिक्तियां रहने के कारण मौजूदा पुलिसकर्मियों पर काम का दबाव बढ़ रहा था और इसका असर विभाग की कार्यक्षमता पर भी पड़ रहा था।

    सरकार ने अब इस स्थिति को बदलने के लिए भर्ती प्रक्रिया तेज की है। डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2025 में करीब 6,500 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था। इसके बाद विभिन्न पदों पर भर्ती की अनुमति मिली। वर्ष 2026 में भी पुलिस विभाग के अलग-अलग पदों पर 9,662 भर्तियों की अनुमति दी गई है। विभिन्न संवर्गों में 14,704 उम्मीदवारों का चयन हो चुका है, जबकि पुलिस बैंड और एफएसएल से जुड़ी भर्तियां दूसरे चरण में हैं। कुल मिलाकर 9,751 से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

    नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए भी सरकार ने अतिरिक्त पदों को मंजूरी दी है। डीजीपी ने बताया कि मुख्यमंत्री की स्वीकृति से हॉक फोर्स में 325 और विशेष सहयोगी दस्ते में 882 पद स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लगातार उठाए गए कदमों और सुरक्षा बलों को मजबूत करने के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश नक्सल समस्या से मुक्त होने वाला देश का पहला राज्य बना है।

    मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि पुलिस की वर्दी पहनने के बाद व्यक्ति के भीतर जिम्मेदारी और साहस का अलग भाव पैदा होता है। उन्होंने कहा कि पुलिस देशभक्ति और जनसेवा की भावना के साथ अपनी अलग पहचान बनाती है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गृह विभाग की जिम्मेदारी उनके पास होने के कारण वह पुलिस और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान देने का प्रयास करते हैं। कार्यक्रम में गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस विभाग के आला अधिकारियों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया गया और नई भर्तियों तथा पदोन्नतियों के लिए आभार व्यक्त किया गया।

  • राजबाड़ा बाजार में अचानक बिगड़ी तबीयत, देवास से खरीदारी करने आए व्यक्ति ने अस्पताल में तोड़ा दम

    राजबाड़ा बाजार में अचानक बिगड़ी तबीयत, देवास से खरीदारी करने आए व्यक्ति ने अस्पताल में तोड़ा दम


    इंदौर ।  इंदौर के व्यस्त राजबाड़ा बाजार में उस समय अफरा तफरी का माहौल बन गया जब देवास जिले के बागली से खरीदारी करने आए 50 वर्षीय व्यक्ति की अचानक तबीयत बिगड़ गई और कुछ ही देर बाद उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार डॉक्टरों ने हार्ट अटैक की आशंका जताई है जबकि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद होगी। इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि हृदय संबंधी समस्याएं बिना किसी बड़े संकेत के भी अचानक सामने आ सकती हैं।

    मृतक की पहचान विक्रम पुत्र नाथूलाल चौहान निवासी बागली जिला देवास के रूप में हुई है। बताया गया कि वह अपने एक रिश्तेदार के साथ घरेलू खरीदारी के लिए इंदौर आए थे। दोनों राजबाड़ा क्षेत्र में अलग अलग दुकानों पर सामान खरीद रहे थे। इसी दौरान विक्रम एक दुकान पर बैठे हुए थे तभी उन्हें अचानक घबराहट महसूस हुई। आसपास मौजूद लोगों के अनुसार कुछ ही क्षणों में उनकी तबीयत और बिगड़ गई और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े।

    घटना होते ही वहां मौजूद लोगों ने तुरंत मानवता का परिचय दिया और बिना समय गंवाए उन्हें ऑटो की मदद से महाराजा यशवंतराव अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने तत्काल जांच की लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में मौत की वजह हार्ट अटैक मानी जा रही है हालांकि पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक अंतिम कारण पर कुछ भी कहने से इनकार किया है।

    घटना की सूचना मिलते ही सराफा थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी। यदि किसी अन्य चिकित्सकीय कारण का पता चलता है तो उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    परिजनों के अनुसार विक्रम सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए थे और बागली क्षेत्र में एक गैर सरकारी संस्था के साथ काम करते थे। उनका व्यवहार मिलनसार था और समाज सेवा में उनकी सक्रिय भूमिका रही थी। परिवार में पत्नी चार बच्चे और अन्य सदस्य हैं। अचानक हुई इस घटना से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जैसे ही मौत की खबर गांव पहुंची परिवार और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई।

    चिकित्सकों का कहना है कि लगातार बढ़ती भागदौड़ तनाव अनियमित दिनचर्या और हृदय रोगों के प्रति लापरवाही के कारण इस तरह की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। यदि किसी व्यक्ति को अचानक सीने में दर्द घबराहट सांस लेने में तकलीफ अत्यधिक पसीना या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी है। समय पर इलाज मिलने से कई मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।

    यह दुखद घटना एक बार फिर स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की जरूरत को रेखांकित करती है। नियमित स्वास्थ्य जांच संतुलित जीवनशैली और समय पर चिकित्सा सलाह हृदय संबंधी गंभीर जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकती है। वहीं सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद लोगों की तत्परता भी आपातकालीन परिस्थितियों में किसी की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • भोपाल के मिक्स लैंड यूज विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, हजारों भूखंड मालिकों की निगाहें फैसले पर

    भोपाल के मिक्स लैंड यूज विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, हजारों भूखंड मालिकों की निगाहें फैसले पर


    भोपाल । भोपाल में आवासीय भवनों में वर्षों से संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस मामले पर शहर के हजारों व्यापारी और बड़ी संख्या में रहवासी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि अदालत का फैसला आगे की कार्रवाई की दिशा तय कर सकता है। रहवासियों का कहना है कि वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल होंगे और हाल ही में नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई के फोटो और वीडियो भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

    दरअसल राजधानी के अरेरा कॉलोनी रोहित नगर बावड़ियाकलां 10 नंबर 11 नंबर और 12 नंबर मार्केट सहित कई इलाकों में लंबे समय से आवासीय भवनों से व्यवसाय संचालित किए जा रहे हैं। इसको लेकर स्थानीय रहवासियों ने लगातार आपत्ति जताई और हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा जहां से सख्त रुख अपनाए जाने के बाद नगर निगम ने कई प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू की। कुछ दुकानों को सील किया गया जबकि कई व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे।

    हालांकि इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई जिसमें व्यापारियों की समस्याओं पर भी चर्चा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि पूरे मामले की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी। यह समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समिति की रिपोर्ट आने तक व्यापारियों को अनावश्यक घबराने की जरूरत नहीं है। इसी निर्णय के बाद सोमवार को अधिकांश बंद दुकानें दोबारा खुल गईं।

    रहवासी संगठन इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद नगर निगम ने अपेक्षित कार्रवाई पूरी नहीं की और जिन प्रतिष्ठानों को बंद किया गया था उनके दोबारा खुलने से अदालत के आदेशों की भावना प्रभावित हुई है। उनका मानना है कि आवासीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से ट्रैफिक जाम पार्किंग की समस्या शोर प्रदूषण और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बढ़ रही हैं जिससे लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।

    दूसरी ओर व्यापारी संगठन इस पूरे मामले को व्यावहारिक नजरिए से देखने की मांग कर रहे हैं। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज का कहना है कि वर्ष 2005 के बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं होने के कारण शहर में पर्याप्त व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं हो सके। ऐसी स्थिति में हजारों व्यापारियों ने मजबूरी में आवासीय परिसरों से अपना कारोबार शुरू किया। संगठन का कहना है कि व्यापारी नियमित रूप से व्यावसायिक दर पर संपत्ति कर बिजली बिल और अन्य सभी सरकारी शुल्क का भुगतान कर रहे हैं जिससे शासन को करोड़ों रुपए का राजस्व भी प्राप्त हो रहा है।

    व्यापारियों ने गुजरात की तर्ज पर मिक्स लैंड यूज व्यवस्था लागू करने की मांग दोहराई है ताकि आवासीय क्षेत्रों में नियंत्रित और नियमानुसार व्यवसाय संचालित किए जा सकें। उनका कहना है कि इससे व्यापार भी प्रभावित नहीं होगा और आम नागरिकों को आवश्यक सेवाएं भी अपने क्षेत्र में मिलती रहेंगी।

    अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के निर्देश न केवल भोपाल बल्कि प्रदेश के अन्य शहरों में भी आवासीय और व्यावसायिक उपयोग से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण आधार साबित हो सकते हैं। सरकार की समीक्षा समिति की रिपोर्ट और न्यायालय के निर्देशों के बाद ही इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का स्थायी समाधान निकलने की उम्मीद है।

  • उज्जैन में भोर होते ही गूंजा हर हर महादेव पंचामृत अभिषेक के बाद राजाधिराज स्वरूप में सजे बाबा महाकाल ने दिए दिव्य दर्शन

    उज्जैन में भोर होते ही गूंजा हर हर महादेव पंचामृत अभिषेक के बाद राजाधिराज स्वरूप में सजे बाबा महाकाल ने दिए दिव्य दर्शन


    मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती के दौरान आध्यात्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पूरा मंदिर परिसर हर हर महादेव और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। गर्भगृह में विराजमान भगवान महाकाल सहित सभी देवी देवताओं का विधि विधान से पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद बाबा महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया और दूध दही घी शक्कर तथा फलों के रस से तैयार पंचामृत से विशेष स्नान कराया गया। इस दिव्य अनुष्ठान के बाद भगवान महाकाल को राजाधिराज स्वरूप में अलंकृत कर भक्तों को दिव्य दर्शन कराए गए।

    भस्म आरती की शुरुआत प्रथम घंटानाद के साथ हुई। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच भगवान महाकाल का ध्यान कर हरिओम का पवित्र जल अर्पित किया। इसके पश्चात कपूर आरती संपन्न हुई और भगवान के मस्तक पर भांग चंदन तथा त्रिपुंड का तिलक लगाया गया। जटाधारी बाबा महाकाल का श्रृंगार अत्यंत आकर्षक और भव्य स्वरूप में किया गया जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को परंपरा के अनुसार वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से संपन्न इस विशेष अनुष्ठान का सनातन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं और उन पर विशेष कृपा बरसाते हैं।

    भस्म अर्पित करने के बाद बाबा महाकाल को रजत निर्मित शेषनाग का मुकुट रजत की मुंडमाला रुद्राक्ष की मालाएं और आकर्षक आभूषणों से सजाया गया। इसके साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों की मालाओं से भगवान का अलौकिक श्रृंगार किया गया। अंत में फल और मिष्ठान का भोग अर्पित कर विश्व कल्याण और सुख समृद्धि की कामना की गई।

    भस्म आरती के दौरान देश और विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा वातावरण शिव भक्ति में डूबा दिखाई दिया। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर परिवार की सुख समृद्धि उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में मंगल की कामना की।

    महाकाल मंदिर की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सनातन आस्था की जीवंत परंपरा है। प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली यह आरती भगवान शिव के महाकाल स्वरूप की महिमा का अद्भुत प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि इस दिव्य आरती के दर्शन करने के लिए देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती में शामिल होने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उनके जीवन में सुख शांति तथा समृद्धि का वास होता है।

  • सरकारी खजाने पर डाका इंदौर में 8 करोड़ के गबन मामले में नया खुलासा आरोपी के खाते में पहुंचे थे 13.72 लाख रुपए

    सरकारी खजाने पर डाका इंदौर में 8 करोड़ के गबन मामले में नया खुलासा आरोपी के खाते में पहुंचे थे 13.72 लाख रुपए


    इंदौर । इंदौर में करीब 8 करोड़ रुपए के शासकीय धन के गबन से जुड़े बहुचर्चित मामले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। रावजी बाजार थाना पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत से तीन दिन की पुलिस रिमांड हासिल की है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी के बैंक खाते में शासकीय मद से 13 लाख 72 हजार रुपए ट्रांसफर किए गए थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रकम का इस्तेमाल कहां और किस तरह किया गया तथा इस पूरे घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

    यह मामला मार्च 2023 में सामने आया था जब तत्कालीन संयुक्त कलेक्टर मुनीष सिंह सिकरवार की शिकायत के आधार पर रावजी बाजार थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने मिलाप चौहान रंजीत करोड़ मनीषा चौहान राहुल चौहान सहित कई लोगों को आरोपी बनाया था। इसके बाद लगातार जांच का दायरा बढ़ता गया और कई अहम जानकारियां सामने आईं।

    पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के बैंक खातों से जुड़ी जानकारी का दुरुपयोग किया। जिन खातों में तकनीकी कारणों से भुगतान नहीं हो पाया था उन खातों की जानकारी हासिल कर आरोपियों ने फर्जी स्वीकृति आदेश तैयार किए। इसके बाद वास्तविक हितग्राहियों के बैंक खातों की जगह अपने परिजनों दोस्तों और परिचितों के बैंक खातों की जानकारी दर्ज कर दी गई। इसी फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी राशि दोबारा जनरेट कर अलग-अलग निजी खातों में ट्रांसफर की जाती रही।

    जांच एजेंसियों के अनुसार इसी तरीके से लगभग 8 करोड़ रुपए की शासकीय राशि का गबन किया गया। यह मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की थी। अब तक कई आरोपियों की भूमिका सामने आ चुकी है और लगातार नए तथ्य भी उजागर हो रहे हैं।

    इसी कड़ी में पुलिस ने सोमवार को सर्वहारा नगर परदेशीपुरा निवासी मनोज उर्फ हल्लू को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि सह आरोपी रंजीत करोड़ ने सरकारी मद से मनोज के बैंक खाते में 13 लाख 72 हजार रुपए ट्रांसफर किए थे। पुलिस का दावा है कि इस रकम का उपयोग आरोपी और उसके सहयोगियों ने विभिन्न कार्यों में किया। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस राशि का कितना हिस्सा निकाला गया कितना खर्च हुआ और क्या इसे आगे अन्य खातों में भी भेजा गया।

    पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में इस पूरे घोटाले से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि सरकारी धन के गबन की इस साजिश में किसकी क्या भूमिका थी और किन लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा बैंक खातों में राशि ट्रांसफर कराने में मदद की।

    यह मामला सरकारी वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रशासन का कहना है कि पूरे प्रकरण की गहन जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का उद्देश्य केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है बल्कि गबन की पूरी राशि का हिसाब जुटाना और सरकारी धन की रिकवरी सुनिश्चित करना भी है।