Tag: MP News

  • रेवाबाग में आबकारी का छापा, 63 बल्क लीटर अवैध शराब बरामद; तस्कर फरार

    रेवाबाग में आबकारी का छापा, 63 बल्क लीटर अवैध शराब बरामद; तस्कर फरार


    देवास । देवास में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 पेटी देशी शराब जब्त की है। मुखबिर से मिली सूचना पर रेवाबाग क्षेत्र में की गई इस कार्रवाई के दौरान करीब 63 बल्क लीटर अवैध शराब बरामद हुई, जिसकी अनुमानित कीमत 33,400 रुपए बताई जा रही है। हालांकि कार्रवाई के दौरान आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहा। आबकारी विभाग ने उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है।

    आबकारी विभाग को सूचना मिली थी कि रेवाबाग क्षेत्र में एक व्यक्ति अपने घर के पास बड़ी मात्रा में अवैध शराब छिपाकर रखता है और स्कूटर के जरिए शहर की अलग-अलग गलियों में इसकी सप्लाई करता है। सूचना के आधार पर विभाग की टीम ने शुक्रवार को इलाके में दबिश दी।

    छापेमारी के दौरान टीम ने मौके से 4 पेटी देशी मसाला और 3 पेटी देशी प्लेन शराब बरामद की। कुल मिलाकर 63 बल्क लीटर अवैध मदिरा जब्त की गई। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी आबकारी टीम के पहुंचने से पहले ही मौके से भाग निकला।

    आबकारी विभाग ने जब्त शराब को अपने कब्जे में लेकर आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। अब उसके ठिकानों और संभावित संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि जल्द गिरफ्तारी की जा सके।

    कार्रवाई आबकारी उपनिरीक्षक प्रेम यादव के नेतृत्व में की गई। विभाग का कहना है कि जिले में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा तथा ऐसे कारोबार में शामिल लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 44 हजार ऐंठे, इंटरव्यू और GST के बहाने करते रहे वसूली

    नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 44 हजार ऐंठे, इंटरव्यू और GST के बहाने करते रहे वसूली


    इंदौर  इंदौर में ऑनलाइन नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। डेटा एंट्री जॉब का झांसा देकर ठगों ने एक छात्र से अलग-अलग बहानों से करीब 44 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए। नौकरी और रिफंड का भरोसा देते हुए आरोपियों ने कई किस्तों में रकम वसूली, लेकिन न तो नौकरी दी और न ही पैसा लौटाया। शिकायत के बाद एमआईजी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी हैइंदौर 

    पुलिस के अनुसार नेहरू नगर निवासी छात्र राजेश पाटीदार ने शिकायत में बताया कि 17 जून को उसके मोबाइल पर एक युवती का फोन आया। उसने अपना नाम अनुष्का बताया और कहा कि नौकरी के लिए किया गया उसका आवेदन चयनित हो गया है। बातचीत के दौरान उसने व्यक्तिगत जानकारी और कार्य से जुड़ी कुछ जानकारियां लीं तथा बताया कि डेटा एंट्री की नौकरी के लिए उसका चयन किया गया है। साथ ही जल्द ही टेलीफोनिक इंटरव्यू कराने की बात कही गई।

    कुछ देर बाद युवती ने चयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए 1800 रुपए जमा करने को कहा। उसने भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद 50 रुपए काटकर बाकी रकम वापस कर दी जाएगी। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने फोन कर इंटरव्यू की जानकारी दी और मोबाइल पर ही इंटरव्यू लेने की बात कही।

    शिकायत के मुताबिक इंटरव्यू के बाद आरोपियों ने चयन होने का दावा करते हुए फिर 1800 रुपए जमा कराए। इसके बाद सुरक्षा राशि, सर्विस चार्ज और जीएसटी समेत अलग-अलग मदों के नाम पर लगातार पैसे मांगे जाते रहे। हर बार यह आश्वासन दिया गया कि पूरी प्रक्रिया समाप्त होने पर जमा की गई पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।

    आरोपियों ने राजेश से कुल आठ ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कराए और करीब 44 हजार रुपए अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। रकम जमा कराने के बाद भी न तो नियुक्ति पत्र भेजा गया और न ही किसी प्रकार की नौकरी उपलब्ध कराई गई। जब लगातार संपर्क करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला, तब छात्र को ठगी का एहसास हुआ।

    इसके बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर एमआईजी थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस मोबाइल नंबर, बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि नौकरी दिलाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट या जीएसटी जैसी कोई भी रकम मांगने वाले कॉल और मैसेज से सतर्क रहें। किसी भी कंपनी या भर्ती एजेंसी की सत्यता की पुष्टि किए बिना ऑनलाइन भुगतान न करें और संदिग्ध मामलों की तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को सूचना दें।

  • इंदौर के चर्चित हाउसिंग घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज, करोड़ों की अनियमितताओं पर ED का एक्शन

    इंदौर के चर्चित हाउसिंग घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज, करोड़ों की अनियमितताओं पर ED का एक्शन


    इंदौर  इंदौर की चर्चित नवभारत हाउसिंग सोसायटी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच तेज करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। करीब 4.64 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं और जमीन घोटाले से जुड़े मामले में ईडी ने पांच आरोपियों के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय इंदौर में अभियोजन चालान पेश किया है। अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए आरोपियों को नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    ईडी की कार्रवाई उन आरोपों पर आधारित है जिनमें नवभारत गृह निर्माण सहकारी समिति के तत्कालीन पदाधिकारियों पर सोसायटी की संपत्तियों और फंड में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने का आरोप है। इस मामले की शुरुआत इंदौर के एमजी रोड थाना में दर्ज एफआईआर से हुई थी। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू की और वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल की।

    जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी श्रीकांत घंटे सुभाष चंद्र दुबे राकेश जैन अंतिम जोशी और आनंद शाह ने कथित रूप से सोसायटी की संपत्तियों का दुरुपयोग करते हुए योजनाबद्ध तरीके से करोड़ों रुपए की हेराफेरी की। आरोप है कि सोसायटी के फंड से खरीदी गई जमीनों को विभिन्न संस्थाओं और अन्य पक्षों को बेच दिया गया तथा बिक्री से प्राप्त रकम का सही हिसाब सोसायटी के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया। इससे सोसायटी के सदस्यों को आर्थिक नुकसान पहुंचा और फंड का कथित रूप से गबन किया गया।

    ईडी का दावा है कि इस पूरे मामले में सोसायटी के सदस्यों को वास्तविक जानकारी से दूर रखा गया। जांच के दौरान ऐसे संकेत भी मिले कि जमीन बिक्री और वित्तीय लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नष्ट या गायब किया गया ताकि कथित गड़बड़ियों का खुलासा न हो सके। एजेंसी का आरोप है कि गबन की गई राशि को बाद में अलग-अलग माध्यमों से वैध दिखाने का प्रयास किया गया और उससे अचल संपत्तियां भी खरीदी गईं। इसी आधार पर मामले में धनशोधन के प्रावधान लागू किए गए हैं।

    इससे पहले भी ईडी इस मामले में कार्रवाई कर चुकी है। एजेंसी ने 12 फरवरी को पीएमएलए के तहत आरोपी श्रीकांत घंटे और सुभाष चंद्र दुबे से जुड़ी करीब 64 लाख रुपए मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। जांच एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई कथित अवैध आय से अर्जित संपत्तियों के आधार पर की गई थी।

    ईडी के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और वित्तीय लेनदेन की कई अन्य कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे और लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल विशेष अदालत में प्रस्तुत चालान के बाद अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और आरोपों की सुनवाई होगी।

  • पोस्टर राजनीति से लेकर शराबी टीचर तक, मध्य प्रदेश में सियासी तंज और प्रशासनिक चर्चाओं का बड़ा दिन

    पोस्टर राजनीति से लेकर शराबी टीचर तक, मध्य प्रदेश में सियासी तंज और प्रशासनिक चर्चाओं का बड़ा दिन


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में शुक्रवार का दिन राजनीति प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई चर्चित घटनाओं के नाम रहा। कहीं उपचुनाव की तैयारियों के बीच पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की वापसी की अटकलों ने जोर पकड़ा तो कहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर चंदे को लेकर अपने ही अंदाज में सियासी संदेश दे दिया। दूसरी ओर नर्मदापुरम जिले में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक का शराब के नशे में क्लासरूम में सोते हुए वीडियो सामने आने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। इन सबके बीच मंत्रालय के गलियारों में एक महिला मंत्री और उनके विभाग से जुड़ी चर्चाएं भी खूब सुर्खियां बटोरती रहीं।

    दतिया विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के बाद पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गए हैं। उनका पुराना शायराना बयान कि समुद्र का पानी उतरता देख किनारे पर घर मत बना लेना मैं लौटकर आऊंगा एक बार फिर चर्चाओं में है। उपचुनाव को लेकर उनकी सक्रियता लगातार बढ़ रही है। हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने जनता के बीच विनम्रता के साथ स्वीकार किया कि यदि उनसे कोई गलती हुई है तो उसे सुधारेंगे और अपने व्यवहार तथा कार्यशैली में बदलाव लाकर लोगों का विश्वास दोबारा जीतने का प्रयास करेंगे। हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने अब तक उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है लेकिन राजनीतिक हलकों में नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे आगे माना जा रहा है।

    उधर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर अपने भोपाल स्थित निवास के बाहर एक बड़ा पोस्टर लगा दिया। पोस्टर में साफ लिखा गया है कि भगवान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए दिए गए चंदे के चोरों और चढ़ावा चोरों का उनके घर में प्रवेश निषिद्ध है। इसके साथ ही उन्होंने उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने का ऐलान भी किया है। उनका कहना है कि यह यात्रा पूरी तरह गैर राजनीतिक होगी और इसका उद्देश्य केवल चंदे में पारदर्शिता की मांग करना है। राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं।

    राजनीतिक हलचल के बीच नर्मदापुरम जिले के केसला क्षेत्र से आई एक घटना ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यहां एक सरकारी स्कूल का शिक्षक शराब के नशे में धुत होकर कक्षा में ही सोता मिला। ग्रामीणों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया जबकि शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से उसे निलंबित कर दिया। बाद में शिक्षक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए भविष्य में शराब नहीं पीने का वादा किया लेकिन घटना ने सरकारी स्कूलों की निगरानी व्यवस्था पर बहस छेड़ दी।

    इधर मंत्रालय के गलियारों में भी एक महिला मंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि वे अपने विभाग में प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति चाहती हैं ताकि विभागीय कामकाज पर बेहतर नियंत्रण स्थापित हो सके। चर्चा यह भी है कि विभाग में बड़े टेंडर और तबादलों को लेकर मंत्री और विभाग की वरिष्ठ अधिकारी के बीच मतभेद सामने आए हैं। हालांकि इस संबंध में किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन प्रशासनिक हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

    प्रदेश में एक ही दिन सामने आई इन घटनाओं ने साफ कर दिया कि मध्य प्रदेश में राजनीति प्रशासन और व्यवस्था से जुड़े मुद्दे लगातार नए रंग दिखा रहे हैं। आने वाले दिनों में उपचुनाव पदयात्रा और प्रशासनिक फैसलों के साथ इन घटनाओं का असर प्रदेश की सियासत में और अधिक दिखाई दे सकता है।

  • शिवपुरी में दर्दनाक सड़क हादसा पोहरी SDM के रीडर की पत्नी की मौत खड़ी ट्रैक्टर ट्रॉली से टकराई कार

    शिवपुरी में दर्दनाक सड़क हादसा पोहरी SDM के रीडर की पत्नी की मौत खड़ी ट्रैक्टर ट्रॉली से टकराई कार


    शिवपुरी  शिवपुरी में देर रात हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। सड़क किनारे खड़ी ट्रैक्टर ट्रॉली से तेज रफ्तार कार टकरा गई जिससे पोहरी एसडीएम कार्यालय के रीडर श्याम सिंह दोहरे की पत्नी मनीषा दोहरे की मौत हो गई। हादसे में श्याम सिंह दोहरे सहित चार अन्य लोग घायल हुए हैं जिनका मेडिकल कॉलेज शिवपुरी में उपचार जारी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार पोहरी एसडीएम कार्यालय में पदस्थ रीडर श्याम सिंह दोहरे का हाल ही में भिंड तबादला हुआ था। शुक्रवार को जिला मुख्यालय शिवपुरी से कार्यमुक्त होने के बाद वे अपने परिवार और परिचितों के साथ कार से पोहरी लौट रहे थे। कार में उनकी पत्नी मनीषा दोहरे के अलावा एक शिक्षक उनकी पत्नी और उनका बच्चा भी सवार थे।

    बताया जा रहा है कि शिवपुरी पोहरी मुख्य मार्ग की खराब स्थिति के कारण उन्होंने झिरी मार्ग से जाने का फैसला किया। शुक्रवार देर रात करीब साढ़े बारह बजे मुद्गल पेट्रोल पंप के पास उनकी कार सड़क किनारे खड़ी ट्रैक्टर ट्रॉली से पीछे से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार सभी लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को तत्काल मेडिकल कॉलेज शिवपुरी पहुंचाया गया। इलाज के दौरान मनीषा दोहरे ने दम तोड़ दिया जबकि श्याम सिंह दोहरे और अन्य घायलों का इलाज जारी है। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार किया जा रहा है।

    शनिवार को मेडिकल कॉलेज चौकी पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह सड़क किनारे खड़ी ट्रैक्टर ट्रॉली से कार की टक्कर मानी जा रही है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि ट्रैक्टर ट्रॉली सड़क पर किस परिस्थिति में खड़ी थी तथा सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क किनारे बिना पर्याप्त संकेतों के खड़े भारी वाहनों से होने वाले खतरों की ओर इशारा करता है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।

  • सरकारी नौकरी का झांसा, लाखों की वसूली: भोपाल में फर्जी भर्ती रैकेट का बड़ा खुलासा

    सरकारी नौकरी का झांसा, लाखों की वसूली: भोपाल में फर्जी भर्ती रैकेट का बड़ा खुलासा


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मामले का खुलासा उस समय हुआ जब अटल आवास योजना में फ्लैट दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार की गई प्रमिला तिवारी के खिलाफ कई अन्य पीड़ित भी सामने आए। जांच आगे बढ़ी तो एक ऐसे फर्जी भर्ती रैकेट का खुलासा हुआ जिसने सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के भरोसे और सपनों दोनों को निशाना बनाया।

    जानकारी के अनुसार गिरोह बेरोजगार युवाओं को विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देता था। आरोप है कि युवाओं से दो लाख से पांच लाख रुपये तक की रकम वसूली जाती थी और बदले में उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिए जाते थे। इन नियुक्ति पत्रों में एम्स, वन विभाग, रेलवे, बैंक और नगर निगम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में नियुक्ति दर्शाई जाती थी। कई युवाओं को तो भारतीय वन सेवा अधिकारी, बैंक क्लर्क और रेलवे कर्मचारी तक नियुक्त किए जाने का दावा किया गया।

    मामले को और गंभीर बनाता है फर्जी दस्तावेजों का स्वरूप। जांच में ऐसे नियुक्ति पत्र सामने आए हैं जिनमें लोक निर्माण विभाग से संबंधित भर्ती दिखाते हुए मंत्री के कथित फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए हैं। आरोप है कि जालसाजों ने दस्तावेजों को इतना वास्तविक बनाने की कोशिश की कि पीड़ितों को किसी प्रकार का संदेह न हो। यही वजह रही कि कई युवा लंबे समय तक खुद को चयनित कर्मचारी मानते रहे और बाद में ठगी का शिकार होने का पता चला।

    पीड़ितों के अनुसार गिरोह भरोसा जीतने के लिए बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। युवाओं को सरकारी कार्यालयों के आसपास बुलाया जाता था ताकि उन्हें लगे कि पूरी प्रक्रिया वैध है। गिरोह के अन्य सदस्य खुद को पहले से चयनित कर्मचारी बताकर विश्वास पैदा करते थे। वे दावा करते थे कि उनकी नियुक्ति भी इसी माध्यम से हुई है, जिससे नए अभ्यर्थी आसानी से उनके जाल में फंस जाते थे।

    जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। प्रमिला तिवारी और उसके सहयोगियों के पास बेरोजगार युवाओं की शैक्षणिक जानकारी और मोबाइल नंबर पहले से उपलब्ध थे। इससे यह आशंका पैदा हो गई है कि युवाओं का व्यक्तिगत डाटा कहीं से अवैध रूप से प्राप्त किया गया था। अब पुलिस इस पहलू की भी गहन जांच कर रही है कि आखिर यह संवेदनशील जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची।

    टीटी नगर थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी नियुक्ति पत्रों, बैंक लेनदेन और आरोपियों के नेटवर्क की जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा कितने युवाओं को अब तक ठगी का शिकार बनाया गया है।

    यह मामला बेरोजगारी की समस्या का फायदा उठाकर युवाओं के साथ किए जा रहे संगठित अपराध की गंभीर तस्वीर पेश करता है। पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि सरकारी नौकरी से संबंधित किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें और किसी भी व्यक्ति को नौकरी दिलाने के नाम पर रकम न दें।

  • MP में आग का कहर उज्जैन के कालभैरव मंदिर के सामने दुकानों में लगी आग ,इंदौर में मोबाइल शॉप जली

    MP में आग का कहर उज्जैन के कालभैरव मंदिर के सामने दुकानों में लगी आग ,इंदौर में मोबाइल शॉप जली


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में मंगलवार को आगजनी की दो अलग-अलग घटनाओं ने लोगों को दहला दिया। उज्जैन और इंदौर में लगी आग से लाखों रुपये के सामान के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। हालांकि राहत की बात यह रही कि दोनों घटनाओं में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

    पहली घटना धार्मिक नगरी उज्जैन में सामने आई जहां प्रसिद्ध कालभैरव मंदिर के सामने स्थित पूजा सामग्री की दुकानों में अचानक आग लग गई। सुबह करीब साढ़े पांच बजे आग लगने की सूचना फायर कंट्रोल रूम को मिली। मंदिर क्षेत्र में आग की खबर फैलते ही आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

    सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड के कई वाहन मौके पर रवाना किए गए। अधिकारियों के अनुसार आग बुझाने के लिए तीन दमकल वाहनों और एक पानी के टैंकर की मदद ली गई। आग ने दो दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया था जिनमें एक छोटी और एक बड़ी दुकान शामिल थी। दोनों दुकानों में पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग होने वाली सामग्री रखी हुई थी।

    दमकल कर्मियों ने समय रहते आग पर नियंत्रण पा लिया जिससे आग आसपास की अन्य दुकानों तक नहीं फैल सकी। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है लेकिन वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। घटना के बाद व्यापारियों और स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल देखा गया।

    दूसरी घटना इंदौर में सामने आई जहां एयरपोर्ट क्षेत्र के 60 फीट रोड स्थित एक मोबाइल दुकान में देर रात अचानक आग लग गई। आग लगते ही आसपास के लोगों ने धुआं और लपटें देखीं तथा तत्काल इसकी सूचना फायर ब्रिगेड को दी। स्थानीय लोगों ने भी अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की लेकिन आग तेजी से फैलने के कारण सफलता नहीं मिल सकी।

    फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और दुकान का शटर तोड़कर अंदर प्रवेश किया। इसके बाद काफी प्रयासों के बाद आग पर काबू पाया गया। आग की चपेट में आने से दुकान में रखे मोबाइल एसेसरीज और अन्य सामान पूरी तरह जलकर राख हो गए। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है और जांच जारी है।

    दोनों घटनाओं ने एक बार फिर दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा उपायों की आवश्यकता को उजागर किया है। प्रशासन ने लोगों से विद्युत उपकरणों और वायरिंग की नियमित जांच कराने तथा सुरक्षा मानकों का पालन करने की अपील की है। वहीं पुलिस और संबंधित विभाग आग लगने के कारणों की जांच में जुटे हुए हैं।

  • खर्च पर लगाम! अब दिल्ली जाने से पहले लेनी होगी परमिशन, MP सरकार का बड़ा फैसला

    खर्च पर लगाम! अब दिल्ली जाने से पहले लेनी होगी परमिशन, MP सरकार का बड़ा फैसला


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी खर्चों पर नियंत्रण लगाने और संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी आदेशों के अनुसार अब प्रदेश के आईएएस, आईपीएस और सचिव स्तर के अधिकारियों को सरकारी खर्च पर दिल्ली, गुजरात, अन्य राज्यों या विदेश यात्रा करने से पहले मुख्य सचिव की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। वहीं अन्य अधिकारियों को राज्य से बाहर की शासकीय यात्रा के लिए अपने विभागीय सचिव से मंजूरी लेनी होगी।

    सरकार का मानना है कि अनावश्यक यात्राओं और प्रशासनिक खर्चों में कटौती कर राज्य के वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से सभी विभागों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

    ऑनलाइन बैठकों को मिलेगा बढ़ावा
    सरकार ने स्पष्ट किया है कि विभागीय बैठकों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सेमिनारों को अधिकतम डिजिटल माध्यमों के जरिए आयोजित किया जाए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि अधिकारियों की अनावश्यक यात्रा कम हो और समय व धन दोनों की बचत हो सके। इसके अलावा अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यालय आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन, बस सेवा और इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे ईंधन की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

    ऊर्जा बचत पर सरकार का विशेष फोकस
    राज्य सरकार ने सभी सरकारी कार्यालयों में ऊर्जा संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। कार्यालयों में ऊर्जा ऑडिट कराने, बिजली खपत की निगरानी करने तथा शाम 7 बजे के बाद अनावश्यक रूप से चल रहे पंखे, लाइट, कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य उपकरण बंद रखने को कहा गया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर सिस्टम को बढ़ावा देने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में काम करने पर जोर दिया गया है।

    प्राकृतिक खेती और हरित विकास को प्रोत्साहन
    कृषि विभाग को प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं निर्माण एजेंसियों को फ्लाई ऐश, प्लास्टिक वेस्ट बिटुमिन और अन्य पर्यावरण अनुकूल सामग्री का अधिक उपयोग करने के लिए कहा गया है। सरकार का लक्ष्य विकास कार्यों को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ना है।

    PNG और LPG कनेक्शनों की होगी जांच
    सरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क के विस्तार में सहयोग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उज्ज्वला योजना और सामान्य एलपीजी कनेक्शनों में डुप्लीकेट तथा अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर कार्रवाई करने का अभियान भी चलाया जाएगा।

    फूड ऑयल के कम उपयोग पर चलेगा अभियान
    लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को खाद्य तेल के अत्यधिक उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान के प्रति लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए व्यवहार परिवर्तन आधारित अभियान चलाए जाएंगे, जिससे लोगों में स्वस्थ खानपान की आदत विकसित हो सके।

    90 दिन का जन-जागरूकता अभियान
    जनसंपर्क विभाग को ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर 90 दिनों का व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं पर्यटन विभाग को “देखो अपना देश” और “सबसे पहले मध्यप्रदेश” जैसे अभियानों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।

    सरकार ने सभी विभागों को इन निर्देशों के पालन की मासिक रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग को भेजने के लिए भी कहा है। सरकार का दावा है कि इन कदमों से न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी बल्कि ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।

  • सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को मिली रफ्तार: उज्जैन में बन रहे 4 नए सबस्टेशन, 750 मेगावाट बिजली आपूर्ति का लक्ष्य

    सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को मिली रफ्तार: उज्जैन में बन रहे 4 नए सबस्टेशन, 750 मेगावाट बिजली आपूर्ति का लक्ष्य

    मध्यप्रदेश । उज्जैन शुक्रवार को एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर शहर के दौरे पर पहुंचेंगे। दोनों नेता विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के साथ-साथ राज्य की महत्वपूर्ण विकास और जनकल्याण योजनाओं की समीक्षा भी करेंगे।

    जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ओंकारेश्वर दौरे के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद इंदौर एयरपोर्ट पर उन्हें विदाई देंगे। इसके बाद वे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ इंदौर में निर्धारित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और वहां से उज्जैन के लिए रवाना होंगे। दोनों नेताओं के शाम करीब 4:30 बजे उज्जैन पहुंचने की संभावना है।

    उज्जैन पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। कार्यक्रमों में कपिला गौशाला का दौरा भी प्रस्तावित माना जा रहा है। प्रशासन ने दोनों नेताओं के दौरे को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए हैं।

    दौरे का मुख्य केंद्र प्रशासनिक संकुल भवन में आयोजित होने वाली दो महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकें रहेंगी। पहली बैठक शाम 6 बजे आयोजित होगी, जिसमें स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश में चल रहे कार्यों और उपलब्धियों की समीक्षा की जाएगी। बैठक में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स, कचरा प्रबंधन, साफ-सफाई अभियान और जनभागीदारी के प्रयासों पर चर्चा की जाएगी।

    इसके बाद दूसरी बैठक पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) को लेकर होगी। इस बैठक में प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने, बिजली नुकसान कम करने, अधोसंरचना विकास और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने से जुड़े कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा। ऊर्जा क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण योजना की समीक्षा में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

    केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी को देखते हुए इन बैठकों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि दोनों नेता प्रदेश में चल रही प्रमुख योजनाओं की प्रगति का आकलन करने के साथ आगामी कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा करेंगे।

    उज्जैन में होने वाली ये बैठकें न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि प्रदेश में स्वच्छता, शहरी विकास और ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं को गति देने की दिशा में भी अहम मानी जा रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन बैठकों से कई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नई दिशा तय होगी।

  • NEET-UG 2026 के लिए हाई अलर्ट: सेंटरों पर CCTV-जैमर, डॉक्टर और टाइम डिस्प्ले की व्यवस्था, छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेन भी चलेगी

    NEET-UG 2026 के लिए हाई अलर्ट: सेंटरों पर CCTV-जैमर, डॉक्टर और टाइम डिस्प्ले की व्यवस्था, छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेन भी चलेगी


    मध्यप्रदेश । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए मध्य प्रदेश में व्यापक तैयारियां की गई हैं। 21 जून को आयोजित होने वाली इस परीक्षा को लेकर जिला प्रशासन, पुलिस और रेलवे समेत सभी संबंधित विभाग हाई अलर्ट पर हैं। प्रदेश के सभी परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरे और सिग्नल जैमर लगाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी प्रकार की नकल या तकनीकी गड़बड़ी की संभावना को खत्म किया जा सके।

    राजधानी भोपाल में इस बार 13,774 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। इसके लिए 32 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जिला कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने सभी केंद्र प्रभारियों के साथ वन-टू-वन बैठक कर परीक्षा प्रबंधन की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि कई बार एक जैसे नाम वाले केंद्रों के कारण अभ्यर्थी भ्रमित हो जाते हैं, इसलिए केंद्रों के नाम और लोकेशन स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएं। परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के लिए दिशा-सूचक बोर्ड भी लगाए जाएंगे।

    परीक्षार्थियों को समय का सही अंदाजा रहे, इसके लिए प्रत्येक केंद्र के बाहर बड़ी डिजिटल घड़ी लगाई जाएगी। वहीं किसी छात्र की तबीयत खराब होने की स्थिति में तुरंत उपचार उपलब्ध कराने के लिए डॉक्टर और मेडिकल टीम भी तैनात रहेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के दौरान स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    भोपाल के अलावा छिंदवाड़ा में 4,303, गुना में 1,839, विदिशा में 1,709, नर्मदापुरम में 1,283 और अशोकनगर में 865 अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने की संभावना है। ग्वालियर में 25 केंद्रों पर करीब 5 हजार छात्र परीक्षा देंगे। यहां बायोमैट्रिक अटेंडेंस, CCTV निगरानी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दोपहर 1 बजे के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

    परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने इंदौर, भोपाल और रतलाम के बीच विशेष ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन 20 जून को संचालित होगी, जिससे विभिन्न शहरों से आने वाले छात्र समय पर अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंच सकेंगे। ट्रेन में 13 स्लीपर, 2 जनरल और 2 एसएलआर कोच सहित कुल 17 कोच लगाए जाएंगे।

    जबलपुर में पहली बार परीक्षार्थियों के लिए विशेष बस सेवा शुरू की जा रही है। यहां 23 परीक्षा केंद्रों पर 10 हजार से अधिक छात्र परीक्षा देंगे। अभिभावकों के लिए शेड, बैठने की व्यवस्था, कूलर, पंखे और अस्थायी कैंटीन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। सभी केंद्रों पर 20 जून को सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं का ट्रायल भी किया जाएगा।

    प्रशासन का कहना है कि परीक्षा की गोपनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रश्नपत्रों की आवाजाही बेहद सुरक्षित तरीके से होगी। सुरक्षा व्यवस्था में वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी रहेगी और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए विशेष कंट्रोल रूम भी सक्रिय रहेगा। कुल मिलाकर NEET-UG 2026 को लेकर प्रदेश में अभूतपूर्व तैयारियां की गई हैं, ताकि लाखों छात्रों का भविष्य तय करने वाली यह परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष, सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल में संपन्न हो सके।