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  • सीएम के सामने बदले मंच के समीकरण, रावण के 9 सिर पर सवाल और अफसर को मकान नहीं, एमपी के ये किस्से चर्चा में

    सीएम के सामने बदले मंच के समीकरण, रावण के 9 सिर पर सवाल और अफसर को मकान नहीं, एमपी के ये किस्से चर्चा में


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में दशहरे के आयोजनों के दौरान कुछ ऐसे दिलचस्प नजारे सामने आए जिन्होंने राजनीति से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक को चर्चा में ला दिया। कहीं मुख्यमंत्री के सामने भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ हुई एक घटना ने सियासी गलियारों में तंज का मौका दिया तो कहीं रावण के पुतले में दस की जगह नौ सिर लगाए जाने पर सवाल उठे। वहीं हरदा में पूर्व मंत्री कमल पटेल का भाषण उस समय चर्चा में आ गया जब बीच कार्यक्रम में उनके पास फोन पहुंच गया। इन घटनाओं के बीच नए जिले में पदस्थ एक आईएएस अधिकारी को सरकारी आवास नहीं मिलने का मामला भी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता नजर आया।

    भोपाल में दशहरे के एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंच की ओर जा रहे थे। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा मुख्यमंत्री की अगवानी कर रहे थे और उन्हें आगे लेकर बढ़ रहे थे। इसी दौरान मध्य प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा ने मुख्यमंत्री से हाथ मिलाया। लेकिन मुलाकात ज्यादा देर नहीं चल सकी। रामेश्वर शर्मा मुख्यमंत्री को आगे बढ़ने का इशारा करते दिखाई दिए और इसी दौरान वीडी शर्मा को धक्का लगने के बाद वह एक तरफ हो गए। इस घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने इस पर राजनीतिक अंदाज में टिप्पणियां कीं। हालांकि इस दृश्य से किसी की राजनीतिक हैसियत या इरादे के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा लेकिन घटना चर्चा का विषय जरूर बन गई।

    दूसरा दिलचस्प मामला ग्वालियर जिले के डबरा का है जहां दशहरे पर रावण के पुतले को लेकर चूक सामने आई। रावण को दशानन कहा जाता है और उसके दस सिरों की पहचान धार्मिक कथाओं में खास महत्व रखती है। लेकिन यहां पुतले में दस की जगह नौ सिर ही लगाए गए थे। जब इस गलती पर लोगों का ध्यान गया तो आयोजन से जुड़े लोगों ने दसवां सिर भी लगा दिया। इसके बावजूद मामला पूरी तरह नहीं संभला क्योंकि नए सिर का आकार भी चर्चा का कारण बन गया। इस छोटी सी चूक ने दशहरे के आयोजन को लोगों के बीच हास्य और सवालों का विषय बना दिया।

    हरदा में दशहरा उत्सव के दौरान पूर्व मंत्री कमल पटेल अपने भाषण को लेकर सुर्खियों में रहे। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच उन्होंने जोशीले अंदाज में अपनी बात रखी। भाषण के दौरान उन्होंने भारत माता का अपमान करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान राम का वंशज तथा अवतारी पुरुष बताया। इसी बीच एक युवक उनके पास फोन लेकर पहुंचा। कमल पटेल ने भाषण रोककर फोन पर बात करना शुरू कर दिया। इस घटनाक्रम पर भी लोगों ने चुटकी ली और सवाल उठाया कि आखिर भाषण के बीच फोन आने की वजह क्या थी। हालांकि फोन आने के कारण का स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया।

    इसी बीच प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा एक और मामला सामने आया। बताया गया कि नए जिले में पदस्थ एक आईएएस अधिकारी को रहने के लिए सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हो सका। उन्हें बताया गया कि पहले पदस्थ अधिकारी ने भी करीब दो साल रेस्ट हाउस में रहकर समय बिताया था और परिवार को साथ नहीं रख पाए थे। यह स्थिति नए जिलों में सरकारी कार्यालयों और अधिकारियों की तैनाती के साथ जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की चुनौती को सामने लाती है। कुल मिलाकर दशहरे के इन किस्सों ने प्रदेश में राजनीतिक घटनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर नई चर्चा छेड़ दी।

  • मध्यप्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव का ऐलान, 26 अक्टूबर से नामांकन और 12 नवंबर को वोटिंग, जानिए कब होगी मतगणना

    मध्यप्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव का ऐलान, 26 अक्टूबर से नामांकन और 12 नवंबर को वोटिंग, जानिए कब होगी मतगणना


    भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की एक रिक्त सीट पर उपचुनाव की तारीख घोषित कर दी गई है। केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर 12 नवंबर 2026 को मतदान कराया जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार 22 अक्टूबर को चुनाव कार्यक्रम जारी किया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदान के दिन ही शाम 5 बजे मतगणना भी होगी। इस चुनाव को लेकर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ने की संभावना है। राज्यसभा की यह सीट मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है जबकि उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक निर्धारित था। ऐसे में अब उपचुनाव के जरिए इस सीट पर नए सदस्य का चयन किया जाएगा।

    निर्वाचन आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक चुनाव प्रक्रिया 26 अक्टूबर से शुरू होगी। इसी दिन उपचुनाव की अधिसूचना जारी की जाएगी और उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन जमा करने की अंतिम तारीख 2 नवंबर निर्धारित की गई है। इसके बाद 3 नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी। उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए 5 नवंबर तक का समय दिया जाएगा। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 12 नवंबर को मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना की जाएगी। आयोग के कार्यक्रम के अनुसार चुनाव प्रक्रिया 16 नवंबर तक पूरी की जानी है।

    एल मुरुगन मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य बनने से पहले तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वे सितंबर 2021 में पहली बार तमिलनाडु से राज्यसभा पहुंचे थे। इसके बाद 3 अप्रैल 2024 को वे मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था लेकिन 14 अक्टूबर 2026 से उनकी राज्यसभा सदस्यता समाप्त हो गई। उनके इस्तीफे के बाद मध्यप्रदेश से राज्यसभा की एक सीट रिक्त हो गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद से भी इस्तीफा दिया था जिसे स्वीकार कर लिया गया।

    मध्यप्रदेश में राज्यसभा की कुल 11 सीटें हैं। मुरुगन के इस्तीफे से पहले इनमें से 8 सीटें भाजपा और 3 सीटें कांग्रेस के पास थीं। अब एक सीट खाली होने के कारण प्रदेश से राज्यसभा में भाजपा के 7 सदस्य और कांग्रेस के 3 सदस्य रह गए हैं। उपचुनाव के जरिए रिक्त सीट भरी जाएगी। इस चुनाव में विधानसभा की संख्या और राजनीतिक दलों के विधायकों का समर्थन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्यसभा के लिए होने वाले इस चुनाव में आम जनता सीधे मतदान नहीं करती बल्कि निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं।

    मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं। यदि सभी विधायक मतदान करते हैं और कोई मत अवैध नहीं होता है तो एक राज्यसभा सीट के चुनाव में जीत के लिए आवश्यक मतों का कोटा 116 होगा। ऐसे में चुनाव के दौरान विधायकों का समर्थन निर्णायक माना जाएगा। राजनीतिक दलों को उम्मीदवार के चयन के साथ अपने विधायकों का समर्थन सुनिश्चित करने पर भी ध्यान देना होगा। हालांकि उम्मीदवार कौन होगा और चुनाव में किस तरह की रणनीति अपनाई जाएगी इसे लेकर अंतिम तस्वीर आगे स्पष्ट होगी।

    फिलहाल चुनाव आयोग की घोषणा के बाद राज्यसभा उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। 26 अक्टूबर को अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। 2 नवंबर तक उम्मीदवार अपना पर्चा दाखिल कर सकेंगे और 5 नवंबर तक नाम वापस लेने का मौका रहेगा। इसके बाद 12 नवंबर को मतदान और मतगणना के साथ चुनाव परिणाम सामने आएगा। इस उपचुनाव से मध्यप्रदेश की राज्यसभा में रिक्त प्रतिनिधित्व पूरा होगा।

  • मध्यप्रदेश में घी की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, 50 से ज्यादा नमूने जांच में फेल, 42 उत्पाद वापस मंगाने के निर्देश और 8 पर बिक्री रोक

    मध्यप्रदेश में घी की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, 50 से ज्यादा नमूने जांच में फेल, 42 उत्पाद वापस मंगाने के निर्देश और 8 पर बिक्री रोक


    मध्यप्रदेश:
    में घी की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंता बढ़ गई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में घी के 50 से ज्यादा नमूने निर्धारित गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं। इसके बाद विभाग ने 42 उत्पादों को बाजार से वापस मंगाने के निर्देश दिए हैं, जबकि आठ उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई गई है। उपभोक्ताओं से संबंधित उत्पाद नहीं खरीदने और यदि पहले खरीद चुके हैं तो उन्हें वापस करने की अपील की गई है।

    घी भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख खाद्य पदार्थ है। ऐसे में बड़ी संख्या में नमूनों का जांच में असुरक्षित पाया जाना उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण मामला है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सभी नमूनों के फेल होने के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की गई है। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि प्रत्येक उत्पाद में मिलावट ही पाई गई है। गुणवत्ता संबंधी खामी का वास्तविक कारण विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    जांच में इन ब्रांडों के नाम आए सामने

    जांच में जिन घी उत्पादों के नमूने असुरक्षित बताए गए हैं, उनमें अनिक घी, सात्विक केश देसी घी, श्रीमूल एगमार्क शुद्ध घी और एसआरएमएआई मिल्क क्रीम एगमार्क घी शामिल हैं। इसके अलावा अमृत शुद्ध घी, नंद कृष्ण घी और मधुसूदन देसी घी के नमूने भी जांच में फेल बताए गए हैं।

    सूची में देसी गाय का घी संगठन, जवासी काउ देशी घी, संगठन काउ घी, डेयरी सरस घी और जेबीएस ऑर्गेनिक गाय का घी भी शामिल हैं। खुशबू ब्रांड घी, गसांता प्रीमियम काउ घी, गुमर योर काउ घी, श्री शुद्ध एगमार्क घी और वास्तु एगमार्क घी के नमूने भी असुरक्षित पाए जाने की जानकारी दी गई है।

    जिलों में उत्पादों की बिक्री पर कार्रवाई
    जांच के बाद प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कुछ उत्पादों की बिक्री रोकने के आदेश जारी किए गए हैं। छिंदवाड़ा में पतंजलि काउ घी के पैक की बिक्री पर रोक लगाई गई है। कटनी में अनिक घी और नर्मदापुरम में संगठन काउ घी की बिक्री रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

    धार जिले में चार घी उत्पादों की बिक्री रोकने की जानकारी सामने आई है। इनमें अनिक देसी घी, श्रीमूल घी, एसआरएमएआई मिल्क क्रीम एगमार्क घी और अमृत शुद्ध घी शामिल हैं। वहीं, इंदौर में पीवर इंदौरी लाल मिर्च पाउडर की बिक्री पर रोक लगाई गई है। इससे स्पष्ट होता है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच केवल घी तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य खाद्य उत्पाद भी जांच के दायरे में हैं।

    उपभोक्ता क्या सावधानी बरतें
    ?
    विभाग ने जिन उत्पादों को लेकर निर्देश जारी किए हैं, उन्हें खरीदने से बचने और पहले से खरीदे गए संबंधित उत्पादों को वापस करने की अपील की है। उपभोक्ताओं को पैकेट पर लिखे ब्रांड, उत्पाद का नाम और बैच संबंधी जानकारी ध्यान से देखनी चाहिए। किसी उत्पाद के असुरक्षित पाए जाने की सूचना मिलने पर उसे इस्तेमाल करने के बजाय संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग से मार्गदर्शन लेना उचित है।

    जांच में नमूना फेल होने का अर्थ यह है कि संबंधित उत्पाद निर्धारित जांच मानकों पर खरा नहीं उतरा। हालांकि, इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि उसे खा चुके प्रत्येक व्यक्ति की सेहत को नुकसान हुआ है। उपलब्ध जानकारी में ऐसे उपभोक्ताओं पर स्वास्थ्य प्रभाव को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं दिया गया है।

    तेज जांच और पारदर्शिता की जरूरत
    इस मामले ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच की गति और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों ने जांच प्रक्रिया तेज करने और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया है। समय पर जांच और कार्रवाई होने से असुरक्षित उत्पादों की बिक्री रोकने में मदद मिल सकती है।

    घी के 50 से ज्यादा नमूनों का असुरक्षित पाया जाना उपभोक्ताओं के लिए सतर्क रहने का संकेत है। अब जांच के निष्कर्षों, उत्पादों की वापसी और बिक्री पर लगाई गई रोक के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देना जरूरी होगा।

  • मध्य प्रदेश के विकास को मिलेगी नई दिशा, 55 जिलों के लिए चयनित CM Fellows का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

    मध्य प्रदेश के विकास को मिलेगी नई दिशा, 55 जिलों के लिए चयनित CM Fellows का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में सुशासन और विकास कार्यों को प्रभावी बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की है। बुधवार 14 अक्टूबर 2026 को भोपाल स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत चयनित सीएम फेलोज के पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के 55 जिलों के लिए चयनित सीएम फेलोज शामिल हो रहे हैं। इसका उद्देश्य युवा पेशेवरों को शासन व्यवस्था और विकास से जुड़े कार्यों की बेहतर समझ प्रदान करना है।

    मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत चयनित इन प्रतिभागियों को पांच दिनों तक कार्यक्रम से संबंधित जरूरी जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही उन्हें विकास योजनाओं की प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलेगा। इस पहल के माध्यम से युवा पेशेवरों को प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों से जोड़ने और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया से परिचित कराने पर जोर दिया जा रहा है।

    राज्य सरकार की इस पहल में जिलों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विकास योजनाओं को जमीन पर लागू करने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानीय जरूरतों की समझ जरूरी होती है। ऐसे में सीएम फेलोज के प्रशिक्षण का उद्देश्य उन्हें शासन की प्रक्रियाओं से परिचित कराना और विकास संबंधी कार्यों में उनकी भागीदारी के लिए तैयार करना है। प्रदेश के 55 जिलों के लिए चयनित प्रतिभागियों को एक साथ प्रशिक्षण दिए जाने से उन्हें कार्यक्रम के उद्देश्यों और काम करने के तरीकों को समझने का अवसर मिलेगा।

    भोपाल स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में आयोजित यह कार्यक्रम सुशासन और नीति निर्माण से जुड़े विषयों पर केंद्रित है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम की कार्यप्रणाली और उसके उद्देश्यों की जानकारी दी जाएगी। इसके जरिए युवा पेशेवरों को प्रशासनिक व्यवस्था के साथ समन्वय बनाकर काम करने और विकास योजनाओं की प्रक्रिया को समझने में मदद मिल सकती है।

    सीएम फेलोज कार्यक्रम को युवा प्रतिभाओं और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। विकास कार्यों में प्रभावी भागीदारी के लिए योजनाओं की जानकारी के साथ उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया को समझना भी जरूरी है। पांच दिवसीय प्रशिक्षण इसी दिशा में एक कदम है। इसके माध्यम से चयनित प्रतिभागियों को अपनी जिम्मेदारियों और कार्यक्रम की अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश में विकास और सुशासन से जुड़ी पहल को आगे बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है। अब प्रशिक्षण के दौरान दी जाने वाली जानकारी और उसके बाद जिलों में सीएम फेलोज की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। उम्मीद है कि इस कार्यक्रम से युवा पेशेवरों को प्रशासनिक कामकाज की समझ विकसित करने और विकास संबंधी गतिविधियों में योगदान देने में मदद मिलेगी।

  • रीवा में परमाणु प्लांट के खिलाफ ग्रामसभा का बड़ा फैसला, जमीन सर्वे का विरोध कर ग्रामीणों ने सरकार को दी दो टूक चेतावनी

    रीवा में परमाणु प्लांट के खिलाफ ग्रामसभा का बड़ा फैसला, जमीन सर्वे का विरोध कर ग्रामीणों ने सरकार को दी दो टूक चेतावनी



    रीवा । रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र में प्रस्तावित करीब 28 हजार करोड़ रुपये के परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। परियोजना के लिए जमीन की जांच और सर्वे की प्रक्रिया शुरू होने के बाद गांवों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है और ग्रामीण खुलकर परियोजना के खिलाफ सामने आ रहे हैं। हालात इस कदर बढ़ गए कि जमीन के सर्वे के लिए पहुंची ड्रिलिंग मशीनों को ग्रामीणों ने वापस लौटा दिया। ग्रामीणों का साफ कहना है कि वे सरकार की कई योजनाओं का लाभ छोड़ने के लिए तैयार हैं लेकिन अपने गांव की जमीन पर परमाणु संयंत्र किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेंगे।

    सिरमौर क्षेत्र के सरई कला गांव में हुई ग्रामसभा में भी परमाणु परियोजना के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि उनका विरोध केवल जमीन अधिग्रहण तक सीमित नहीं है बल्कि परमाणु परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को लेकर भी गंभीर चिंता है। ग्रामीणों को आशंका है कि बड़े स्तर पर बनने वाले संयंत्र का असर पानी के स्रोतों पर्यावरण खेती और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ सकता है। इसी वजह से ग्रामीण परियोजना की शुरुआती गतिविधियों का भी विरोध कर रहे हैं।

    ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सरकार चाहे तो लाड़ली बहना योजना की राशि बंद कर दे या राशन जैसी सुविधाएं रोक दे लेकिन गांव की जमीन पर परमाणु प्लांट नहीं लगने दिया जाएगा। ग्रामीणों के इस रुख ने प्रशासन के सामने भी चुनौती बढ़ा दी है क्योंकि परियोजना को लेकर जमीन की स्थिति और स्थानीय लोगों की राय जानने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने कहा है कि परियोजना को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से चर्चा की जाएगी। इसके बाद नियमानुसार आगे का निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीणों की चिंताओं और सुझावों पर विचार किया जाएगा। प्रशासन की ओर से फिलहाल बातचीत के जरिए स्थिति को समझने की कोशिश की जा रही है।

    परमाणु परियोजनाओं के विरोध का यह मध्यप्रदेश में पहला मामला नहीं है। मंडला जिले में लंबे समय से प्रस्तावित चुटका परमाणु परियोजना को लेकर भी ग्रामीणों का विरोध जारी है। यह परियोजना वर्ष 1982 से प्रस्तावित है और वर्ष 2017 में इसे 1400 मेगावाट की मंजूरी मिली थी। इसके बावजूद परियोजना अभी शुरुआती चरण से आगे नहीं बढ़ सकी है। मंडला में 119 परिवार गांव छोड़ चुके हैं जबकि अन्य परिवार मुआवजे और परियोजना के विरोध से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं।

    रीवा में अब ग्रामीणों का विरोध गांव की बैठकों और ग्रामसभा के फैसलों तक पहुंच चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच संवाद इस परियोजना की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। फिलहाल ग्रामीणों के तेवर साफ हैं कि विकास योजनाओं का लाभ भले ही छिन जाए लेकिन उनकी जमीन और गांव में परमाणु संयंत्र को मंजूरी स्वीकार नहीं होगी।

  • भोपाल में अमित शाह का दिनभर कार्यक्रम, 101 करोड़ की गौशाला सहायता और 255 करोड़ के डेयरी प्लांट से लेकर IISER तक कई बड़े आयोजन

    भोपाल में अमित शाह का दिनभर कार्यक्रम, 101 करोड़ की गौशाला सहायता और 255 करोड़ के डेयरी प्लांट से लेकर IISER तक कई बड़े आयोजन


    भोपाल । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल पहुंचे हैं जहां उनका दिन कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से जुड़ा हुआ है। शाह भेल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश के 11 जिलों से करीब 35 हजार गोपालक और किसान पहुंचे हैं। कार्यक्रम के दौरान गोशालाओं के लिए 101 करोड़ रुपए की राशि देने की घोषणा की जाएगी। इसके साथ ही उज्जैन में तैयार किए जा रहे 255 करोड़ रुपए के डेयरी प्लांट का वर्चुअली भूमिपूजन भी किया जाएगा।

    अमित शाह ने अपने दौरे की शुरुआत भेल दशहरा मैदान में मध्य प्रदेश पुलिस की प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ की। इस प्रदर्शनी में नए आपराधिक कानूनों से जुड़े प्रावधानों और पुलिस व्यवस्था से संबंधित जानकारी प्रदर्शित की गई है। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल गृह विभाग के प्रमुख सचिव संजय शुक्ला डीजीपी कैलाश मकवाना और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

    गोपालक सम्मेलन को लेकर प्रदेश के अलग अलग जिलों से किसान और पशुपालक भोपाल पहुंचे हैं। कई किसान बसों के जरिए कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे। सम्मेलन में महिलाओं और युवा किसानों की भी भागीदारी देखने को मिल रही है। किसानों का कहना है कि सरकार की योजनाओं से उन्हें पशुपालन के क्षेत्र में मदद मिली है और कई परिवारों ने गाय और भैंस पालन को आय का माध्यम बनाया है।

    कार्यक्रम में किसानों की अपनी मांगें भी सामने आई हैं। सीहोर से पहुंचे किसानों ने सोयाबीन की खराब फसल को लेकर मुआवजे की मांग उठाई। वहीं बरसिया क्षेत्र से आए एक किसान ने छोटे किसानों को खाद मिलने में हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया। किसान का कहना था कि बड़े किसानों के लिए खाद के स्लॉट आसानी से मिल जाते हैं जबकि छोटे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इससे साफ है कि सम्मेलन में सरकारी योजनाओं के साथ किसानों की जमीनी समस्याओं पर भी चर्चा का माहौल बना हुआ है।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सम्मेलन में दूध उत्पादन को लेकर सरकार की योजना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश में 50 लाख लीटर दूध के कलेक्शन तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा। सांची के माध्यम से दूध को बाजार तक पहुंचाने की बात भी कही गई। सरकार की ओर से इस पहल को पशुपालकों की आय और डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने से जोड़कर देखा जा रहा है।

    अमित शाह के भोपाल दौरे में पुलिस व्यवस्था भी प्रमुख विषय है। वे केंद्र और राज्य के पुलिस अधिकारियों के साथ करीब दो घंटे की बैठक करेंगे। इसके अलावा भौंरी में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान यानी IISER के अत्रि परिसर का शिलान्यास और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण भी प्रस्तावित है।

    शाह के दौरे को देखते हुए भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। एमपी नगर सहित कई इलाकों में बैरिकेडिंग की गई है और यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। सड़क किनारे खड़े वाहनों और रेहड़ी खोमचों को भी हटाया गया है। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने वाले किसानों की जांच के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है।

    इस तरह अमित शाह का भोपाल दौरा गोपालक सम्मेलन पुलिस व्यवस्था और शिक्षा से जुड़े कई कार्यक्रमों से जुड़ा है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि सम्मेलन के दौरान पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को लेकर सरकार की ओर से आगे कौन से ऐलान किए जाते हैं।

  • GBS से जंग जीतकर लौटी थीं पार्वती, डॉक्टरों ने दी थी 3 से 4 फीसदी उम्मीद, 7 महीने बाद जिंदगी ने साथ छोड़ा

    GBS से जंग जीतकर लौटी थीं पार्वती, डॉक्टरों ने दी थी 3 से 4 फीसदी उम्मीद, 7 महीने बाद जिंदगी ने साथ छोड़ा


    इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड के दौरान गंभीर रूप से बीमार हुईं 67 वर्षीय पार्वती कोंडला की बुधवार रात मौत हो गई। पार्वती करीब 72 दिन तक गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती रही थीं। उन्हें गिलियन बैरे सिंड्रोम यानी GBS की पुष्टि हुई थी। इलाज के दौरान उनकी हालत इतनी गंभीर थी कि डॉक्टरों ने उनके बचने की संभावना महज 3 से 4 फीसदी बताई थी। इसके बावजूद लंबे इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार आया और मार्च में उन्हें अस्पताल से घर भेज दिया गया था। हालांकि अब उनकी मौत किस चिकित्सकीय कारण से हुई और इसका भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना से सीधा संबंध है या नहीं इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    पार्वती के बेटे नीलेश के मुताबिक उनकी मां की तबीयत अगस्त में दोबारा बिगड़ने लगी थी। इसके बाद 17 अगस्त से उनका एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। परिवार लगातार उनके स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद कर रहा था लेकिन बुधवार रात उनकी मौत हो गई। इससे परिवार को बड़ा झटका लगा है क्योंकि कुछ महीने पहले ही पार्वती ने बेहद गंभीर स्थिति से बाहर निकलकर जिंदगी की जंग जीती थी।

    पार्वती की तबीयत दिसंबर 2025 में उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद बिगड़ी थी। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन हालत गंभीर होने पर अलग अलग अस्पतालों में इलाज के बाद बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया। जांच में GBS की पुष्टि हुई। इस बीमारी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नसों पर हमला करने लगती है। इसके कारण शरीर में कमजोरी बढ़ सकती है और गंभीर मामलों में मरीज के लिए चलना फिरना और सांस लेना भी मुश्किल हो सकता है।

    पार्वती की हालत बेहद गंभीर होने के कारण उन्हें 16 दिन तक वेंटिलेटर पर रखा गया था जबकि 22 दिन ICU में इलाज चला। फेफड़ों की स्थिति खराब होने पर ट्रेकोस्टोमी भी की गई थी। वे करीब 18 दिन तक बेहोश रहीं। लंबे इलाज के बाद मार्च में उनकी स्थिति में धीरे धीरे सुधार शुरू हुआ। वे परिजनों को पहचानने लगी थीं और जवाब देने का प्रयास भी करने लगी थीं। 9 मार्च को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया था।

    घर लौटने के बाद भी पार्वती की पूरी तरह रिकवरी के लिए लगातार देखभाल की जरूरत थी। परिवार उन्हें नली के जरिए दिन में कई बार लिक्विड डाइट और प्रोटीन देता था। फिजियोथेरेपी और दवाओं के साथ उनकी देखभाल जारी थी। परिजनों के अनुसार घर पर इलाज और देखभाल में हर महीने करीब 60 से 70 हजार रुपए खर्च हो रहे थे।

    भागीरथपुरा दूषित पानी मामले के दौरान पार्वती के इलाज पर शासन स्तर से भी नजर रखी गई थी। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अस्पताल पहुंचकर उनकी तबीयत की जानकारी ली थी। परिवार के अनुसार उस समय करीब 19.50 लाख रुपए के इलाज का खर्च शासन की ओर से उठाने का आश्वासन दिया गया था। अब पार्वती की मौत के बाद उनके परिवार के सामने एक बार फिर इलाज और देखभाल से जुड़े सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि उनकी मृत्यु का वास्तविक चिकित्सकीय कारण सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इसका पहले हुई बीमारी या भागीरथपुरा की दूषित पानी की घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध था या नहीं।

  • पानी में सीवर की मिलावट रोकने रोबोटिक निगरानी: MP के 2.30 लाख डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स पर नजर; ₹40 प्रति मीटर में होगी पाइपलाइन की जांच

    पानी में सीवर की मिलावट रोकने रोबोटिक निगरानी: MP के 2.30 लाख डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स पर नजर; ₹40 प्रति मीटर में होगी पाइपलाइन की जांच


    इंदौर।
    इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने पेयजल और सीवर पाइपलाइनों की निगरानी के लिए तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है। अब प्रदेश के नगरीय निकायों में पानी और सीवर लाइनों की अंदरूनी स्थिति जांचने के लिए रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। खास बात यह है कि इस जांच के लिए सड़कों को खोदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने प्रदेश के नगर निगमों नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को 70 से 900 मिलीमीटर व्यास वाली पेयजल और सीवर पाइपलाइनों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए चेन्नई की पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज को एम्पैनल किया गया है। विभाग ने एजेंसी के साथ एक साल का समझौता किया है और पाइपलाइन जांच की दर 40 रुपए प्रति मीटर तय की गई है।

    इस फैसले की पृष्ठभूमि इंदौर का भागीरथपुरा हादसा है। दिसंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में दूषित पेयजल के कारण यहां 36 लोगों की मौत हुई थी। जांच में पानी में मानव मल से जुड़े बैक्टीरिया पाए गए थे। सामने आया था कि सीवर लाइन में लीकेज के कारण दूषित पानी पेयजल लाइन में मिल गया था। जांच के दौरान अकेले भागीरथपुरा क्षेत्र में ऐसे 260 स्थान मिले थे जहां सीवर का पानी पेयजल लाइन में मिलने की स्थिति बनी हुई थी। इसके बाद सरकार ने पूरे प्रदेश में ऐसी संवेदनशील जगहों की पहचान शुरू की।

    GIS प्लेटफॉर्म गरुड़ के जरिए कराई गई मैपिंग में प्रदेश में 2.30 लाख से अधिक ऐसे पॉइंट्स चिन्हित किए गए जहां सीवर और पेयजल पाइपलाइनें एक दूसरे को क्रॉस कर रही हैं। इनमें इंदौर के करीब 30 हजार और भोपाल के 20 हजार से ज्यादा डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स शामिल हैं। इन जगहों पर पाइपलाइन में लीकेज या दूसरी तकनीकी खराबी होने की स्थिति में सीवर का पानी पेयजल लाइन में पहुंचने का खतरा बना रहता है।

    अब इन पाइपलाइनों के अंदर की वास्तविक स्थिति जानने के लिए CCTV क्रॉलर सिस्टम वाले रोबोट का इस्तेमाल किया जाएगा। रोबोट को मौजूदा मैनहोल एयर रिलीज वाल्व या दूसरे एक्सेस पॉइंट्स से पाइपलाइन के भीतर भेजा जाएगा। इसमें हाई रिजॉल्यूशन कैमरे और सेंसर लगे होंगे। करीब 300 मीटर लंबे केबल से जुड़े इस सिस्टम की मदद से पाइपलाइन के अंदर लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग और तकनीकी डेटा जुटाया जा सकेगा। लीकेज टूट-फूट अवरोध और अवैध कनेक्शन जैसी समस्याओं की पहचान भी की जा सकेगी।

    इस काम के लिए विभाग ने 1.50 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाला टेंडर जारी किया था। इसमें तीन कंपनियों ने बोली लगाई। डिजिटल सर्विलॉन्स ने 440 रुपए प्रति मीटर फॉर्म डील ने 400 रुपए प्रति मीटर और पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज ने 40 रुपए प्रति मीटर की दर पेश की। सबसे कम बोली के आधार पर पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज को एम्पैनल किया गया है। अब नगरीय निकाय अपनी जरूरत के अनुसार एस्टीमेट तैयार कर एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी करेंगे। विभाग के मुताबिक ऐसी रोबोटिक पाइपलाइन जांच तकनीक देश के 15 से अधिक राज्यों में इस्तेमाल की जा रही है। मध्य प्रदेश में इसका इस्तेमाल पहली बार बड़े स्तर पर किया जाएगा।

  • फायर सेफ्टी की अनदेखी पर इंदौर में बड़ा एक्शन, अपोलो टावर की 600 से अधिक दुकानें और ऑफिस सील

    फायर सेफ्टी की अनदेखी पर इंदौर में बड़ा एक्शन, अपोलो टावर की 600 से अधिक दुकानें और ऑफिस सील


    इंदौर । इंदौर के साउथ तुकोगंज स्थित शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र अपोलो टावर पर नगर निगम ने फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरी इमारत को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कार्रवाई का सीधा असर टावर में संचालित 600 से अधिक दुकान और ऑफिस पर पड़ रहा है। नगर निगम की टीम के अचानक पहुंचते ही पूरे परिसर में अफरा तफरी का माहौल बन गया। कार्रवाई की जानकारी मिलते ही दुकानदार और ऑफिस संचालक अपने सामान को सुरक्षित करने में जुट गए और कई लोगों ने निगम की कार्रवाई शुरू होने से पहले ही अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए।

    नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार अपोलो टावर प्रबंधन को करीब तीन महीने पहले फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए नोटिस जारी किया गया था। भवन में सुरक्षा मानकों को लेकर जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए गए थे लेकिन तय समय सीमा के बाद भी व्यवस्थाओं को पूरी तरह दुरुस्त नहीं किया गया। इसके बाद निगम ने सख्त रुख अपनाते हुए बुधवार को पूरी बिल्डिंग पर कार्रवाई शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती और फायर सेफ्टी जैसी गंभीर व्यवस्था में लापरवाही भारी पड़ सकती है।

    अपोलो टावर इंदौर की प्रमुख व्यावसायिक इमारतों में शामिल है और इसे शहर के शुरुआती बड़े व्यावसायिक परिसरों में गिना जाता है। यहां बड़ी संख्या में दुकानें और कार्यालय संचालित होते हैं। ऐसे में एक साथ पूरी बिल्डिंग पर कार्रवाई होने से सैकड़ों कारोबारियों के सामने परेशानी खड़ी हो गई। निगम की टीम के पहुंचने की खबर फैलते ही टावर में काम कर रहे लोगों और व्यापारियों के बीच हलचल तेज हो गई। कई दुकानदार अपने प्रतिष्ठानों के शटर गिराने लगे जबकि कुछ लोग जरूरी सामान को सुरक्षित करने में जुटे दिखाई दिए।

    नगर निगम की इस कार्रवाई को शहर में फायर सेफ्टी नियमों को लेकर कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का साफ कहना है कि बड़े व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है और नोटिस मिलने के बावजूद यदि कमियों को दूर नहीं किया जाता है तो प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। निगम की टीम ने यह भी स्पष्ट किया है कि शहर में अन्य व्यावसायिक इमारतों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी जांच की जा सकती है।

    अपोलो टावर पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर शहर की व्यावसायिक इमारतों में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। आग लगने जैसी किसी आपात स्थिति में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था न होने से बड़े हादसे की आशंका रहती है। ऐसे में नगर निगम अब केवल नोटिस देकर कार्रवाई सीमित रखने के बजाय सीधे सख्त कदम उठाता दिखाई दे रहा है। फिलहाल अपोलो टावर की 600 से अधिक दुकान और ऑफिस प्रभावित होने से व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है जबकि निगम की कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह का सख्त रुख अपनाया जा सकता है।

  • इंटर्न डॉक्टर बोले- लिखित आदेश तक नहीं हटेंगे: भोपाल में सड़क पर डटे डॉक्टर, हमीदिया OPD बंद; इंदौर में भी प्रदर्शन

    इंटर्न डॉक्टर बोले- लिखित आदेश तक नहीं हटेंगे: भोपाल में सड़क पर डटे डॉक्टर, हमीदिया OPD बंद; इंदौर में भी प्रदर्शन


    भोपाल। मध्यप्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन दूसरे दिन भी जारी है। भोपाल में इंटर्न डॉक्टर रातभर कमला पार्क की सड़क पर धरने पर बैठे रहे और मंगलवार को दोबारा सड़क जाम कर दिया। आंदोलन का असर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ओपीडी पूरी तरह बंद रही, जबकि इंदौर के एमवाय अस्पताल में भी इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया। इमरजेंसी सेवाएं हालांकि जारी रखी गई हैं।

    इंटर्न डॉक्टर वर्तमान में मिलने वाले 14 हजार 337 रुपए के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार रुपए करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा स्टाइपेंड दूसरे राज्यों की तुलना में काफी कम है और वे लंबे समय से इसमें बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वे अस्पतालों में लगातार ड्यूटी करते हैं और मरीजों की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके स्टाइपेंड में उचित बढ़ोतरी की जानी चाहिए।

    भोपाल में आंदोलन के कारण हमीदिया अस्पताल की ओपीडी पर सबसे ज्यादा असर पड़ा। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की लंबी कतारें लग गईं। रिपोर्ट के मुताबिक ओपीडी में 1500 से ज्यादा मरीज मौजूद थे। कई मरीज घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन जूनियर डॉक्टरों के काम से हटने के बाद पर्चे बनाने और मरीजों को देखने की व्यवस्था प्रभावित हो गई। फिलहाल वरिष्ठ चिकित्सक और जीएमसी के प्रोफेसर मरीजों को देख रहे हैं। इमरजेंसी सेवाओं को चालू रखा गया है, ताकि गंभीर मरीजों को इलाज मिल सके।

    वहीं कमला पार्क क्षेत्र में प्रदर्शन के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। सीएम हाउस की ओर जाने वाले रास्तों को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया। पुराने शहर की ओर जाने वाले कई रास्तों पर आवाजाही प्रभावित हुई और रोशनपुरा से रॉयल मार्केट तक जाम की स्थिति बनी। पुलिस ने ट्रैफिक को डायवर्ट कर व्यवस्था संभालने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का सड़क पर बैठना जारी रहने से आसपास के इलाकों में भी यातायात दबाव बढ़ गया।

    इससे पहले सोमवार को सीएम हाउस की ओर मार्च कर रहे इंटर्न डॉक्टरों को पुलिस ने रोक दिया था। इस दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। डॉक्टरों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के भी आरोप लगाए। पुलिस का कहना है कि इमरजेंसी गेट की ओर बढ़ने के दौरान धक्कामुक्की की स्थिति बनी जिसके बाद वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।

    मंगलवार को डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने डॉक्टरों के प्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ाने और प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई दोनों मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री के लौटने के बाद स्टाइपेंड के मामले पर फिर बातचीत किए जाने की बात कही गई है।

    हालांकि इंटर्न डॉक्टर लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं। उनकी दूसरी मांग प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की है। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक दोनों मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इंदौर में भी भोपाल की घटना के विरोध में डॉक्टरों ने रैली निकालकर अपना समर्थन जताया है। ऐसे में सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच बातचीत के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं पर आंदोलन का असर फिलहाल जारी है।