मत्स्य पालन में भारत की बड़ी छलांग: जलीय कृषि क्षेत्र में वैश्विक पहचान, केंद्रीय मंत्री का दावा

नई दिल्ली। भारत ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि के क्षेत्र में बड़ी वैश्विक पहचान बना ली है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी एवं पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा है कि मजबूत सरकारी नीतियों, आधुनिक प्रोसेसिंग क्षमता और बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था के चलते भारत अब दुनिया के प्रमुख मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर देशों में शामिल हो चुका है। बीते 10 वर्षों में भारत के सीफूड निर्यात का मूल्य दोगुना हो गया है, जो इस क्षेत्र में देश की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

नई नीतियों से पारदर्शिता और टिकाऊ विकास पर जोर

मंत्री ललन सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय ट्रेसबिलिटी फ्रेमवर्क-2025, विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) नियम-2025 और अपडेटेड हाई सी फिशिंग गाइडलाइंस-2025 के जरिए नियमों के अनुपालन और पारदर्शिता को और मजबूत किया जा रहा है। इन नीतियों का मकसद टिकाऊ, जिम्मेदार और निर्यात आधारित विकास को बढ़ावा देना है। खासतौर पर अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप जैसे द्वीप क्षेत्रों में मत्स्य संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

आधुनिक तकनीक और निजी भागीदारी के बड़े अवसर

ललन सिंह ने कहा कि भारत में आधुनिक एक्वाकल्चर और मैरीकल्चर तकनीक, प्रोसेसिंग यूनिट्स, कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, मछली पकड़ने वाले जहाजों की आधुनिक डिजाइन, डिजिटल निगरानी प्रणाली और संयुक्त अनुसंधान के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता विकसित करने, टिकाऊ मत्स्य प्रबंधन और तकनीक हस्तांतरण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बड़ी भूमिका हो सकती है। निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी सरकार लगातार प्रोत्साहित कर रही है।

40 देशों के राजनयिकों की मौजूदगी में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा

मंत्री यह बातें एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कह रहे थे, जिसमें 40 देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस सम्मेलन में भारत और अन्य देशों के बीच मत्स्य पालन और सीफूड सेक्टर में बढ़ती साझेदारी को रेखांकित किया गया।
सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन और महासागरों का स्वास्थ्य, टिकाऊ विकास, जिम्मेदार मत्स्य पालन, हरित नवाचार, क्षमता निर्माण और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने जैसे मुद्दों को सहयोग के प्रमुख स्तंभ बताया गया। इसके साथ ही सजावटी मछली पालन और समुद्री शैवाल की खेती जैसे नए क्षेत्रों में भी साझेदारी की संभावनाओं पर जोर दिया गया।

सीफूड से पोषण, रोजगार और अर्थव्यवस्था को मजबूती

केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि सीफूड पोषण का अहम स्रोत है और वैश्विक खाद्य सुरक्षा में इसकी बड़ी भूमिका है। यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करता है और देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है। उन्होंने बताया कि मत्स्य पालन विभाग उत्पादन से लेकर निर्यात तक पूरी वैल्यू-चेन आधारित रणनीति पर काम कर रहा है।

निर्यात को 1 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य

केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने कहा कि भारत में एक्वाकल्चर का तेजी से विस्तार हो रहा है और उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। विभाग का लक्ष्य सीफूड निर्यात को 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का है। उन्होंने बताया कि पिछले सात महीनों में निर्यात मूल्य में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस क्षेत्र की मजबूत प्रगति का संकेत है।

मजबूत नीतियों और आधुनिक तकनीक के सहारे भारत वैश्विक सीफूड हब बनता जा रहा है, जहां पिछले 10 वर्षों में निर्यात दोगुना हुआ और सरकार का लक्ष्य इसे 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का है।