सेवा क्षेत्र बना निवेश का सबसे बड़ा इंजन
यूएनसीटीएडी के मुताबिक, एफडीआई में इस तेज वृद्धि की सबसे बड़ी वजह सेवा क्षेत्र में हुआ भारी निवेश है। वित्तीय सेवाएं, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) जैसे क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर पूंजी लगाई। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता ने भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए भरोसेमंद बाजार बना दिया।
उत्पादन क्षेत्र को भी मिला वैश्विक समर्थन
सेवा क्षेत्र के साथ-साथ उत्पादन क्षेत्र में भी विदेशी निवेश बढ़ा है। सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और वैश्विक आपूर्ति शृंखला से भारत को जोड़ने वाली नीतियों ने इस क्षेत्र को मजबूती दी। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ा, जिससे भारत की औद्योगिक क्षमता को नई गति मिली।
एआई और डाटा सेंटर बने नए आकर्षण
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में एआई और डाटा सेंटर सेक्टर ने विदेशी निवेश को नई दिशा दी। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट ट्रेंड्स मॉनिटर के मुताबिक, पिछले साल की पहली तीन तिमाहियों में भारत में डाटा सेंटर्स में करीब 7 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जिससे भारत इस क्षेत्र में निवेश पाने वाले देशों में सातवें स्थान पर रहा। चौथी तिमाही में इसमें और तेजी आई।
अक्टूबर में गूगल ने आंध्र प्रदेश में एआई हब के लिए 15 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की, जबकि दिसंबर में माइक्रोसॉफ्ट ने एआई, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और डाटा सेंटर्स में 17.5 अरब डॉलर निवेश का ऐलान किया। इसी तरह अमेजन ने भी एआई और अन्य क्षेत्रों में 35 अरब डॉलर निवेश की योजना सामने रखी।
वैश्विक परिदृश्य में भारत बना अपवाद
वैश्विक स्तर पर वर्ष 2025 में एफडीआई 14 प्रतिशत बढ़कर 1.6 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा, लेकिन यह बढ़ोतरी असमान रही। विकसित देशों में निवेश 43 प्रतिशत बढ़ा, जबकि विकासशील देशों में एफडीआई 2 प्रतिशत घट गया। ऐसे माहौल में भारत का 73 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मजबूत प्रदर्शन उसे एक सकारात्मक अपवाद बनाता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि चीन में लगातार तीसरे साल एफडीआई में गिरावट दर्ज की गई, जबकि भारत निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने में सफल रहा।
निवेशकों का भरोसा अभी भी चुनौती
यूएनसीटीएडी ने आगाह किया है कि आंकड़ों में दिख रही बढ़ोतरी पूरी तस्वीर नहीं बताती। अंतरराष्ट्रीय विलय एवं अधिग्रहण में गिरावट और परियोजना वित्त पोषण में कमी निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाती है। ऐसे में नीति निर्माताओं के लिए जरूरी है कि वे केवल पूंजी प्रवाह ही नहीं, बल्कि वास्तविक निवेश और रोजगार सृजन पर भी ध्यान दें।
वर्ष 2025 में भारत में एफडीआई 73% बढ़कर 47 अरब डॉलर पहुंचा, जहां सेवा, उत्पादन, एआई और डाटा सेंटर सेक्टर में बड़े वैश्विक निवेश ने भारत को दुनिया के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में शामिल कर दिया।
