पूंजी-जोखिम-भारित परिसंपत्ति अनुपात मजबूत
आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया गया कि सितंबर 2025 तक एससीबी का पूंजी-जोखिम-भारित परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर) 17.2 प्रतिशत पर मजबूत बना हुआ है। इससे बैंकों की वित्तीय मजबूती और जोखिम सहनशीलता स्पष्ट होती है। सरकारी पहलों के कारण क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के प्रदर्शन में भी सुधार आया है। चार चरणों में आरआरबी के समेकन से उनकी संख्या 1 मई 2025 तक 196 से घटकर 28 रह गई। इससे ग्रामीण बैंकों की वित्तीय स्थिति बेहतर हुई और वे अधिक स्थिर हुए।
ग्रामीण बैंकों और लाभ में सुधार
वित्त वर्ष 2024 में ग्रामीण बैंकों ने 7.6 हजार करोड़ रुपए का रिकॉर्ड समेकित कुल लाभ अर्जित किया। वित्त वर्ष 2025 में यह लाभ 6.8 हजार करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वर्षों के मुकाबले दूसरी सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। आरआरबी के इस सुधार से ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय स्थिरता और भरोसा दोनों बढ़े हैं।
लघु वित्त क्षेत्र में तेजी
आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी उल्लेख किया गया कि लघु वित्त क्षेत्र में पिछले दशक में लगातार वृद्धि हुई है। सक्रिय ऋण प्राप्तकर्ताओं की संख्या वित्त वर्ष 2014 के 330 लाख से बढ़कर 2025 में 627 लाख हो गई। इसी अवधि में एमएफआई के सकल ऋण में लगभग सात गुना वृद्धि हुई, जो वित्त वर्ष 2014 के 33,517 करोड़ रुपए से बढ़कर 2,38,198 करोड़ रुपए हो गया। एमएफआई शाखा नेटवर्क भी 11,687 से बढ़कर 37,380 शाखाओं तक पहुंच गया।
वित्तीय क्षेत्र में सुधार के प्रभाव
एससीबी और आरआरबी के सुधार के साथ-साथ लघु वित्त क्षेत्र की तेजी ने देश में बैंकिंग और वित्तीय स्थिरता को मजबूती दी है। एनपीए में कमी और रिकवरी दर में वृद्धि ने बैंकों के परिसंपत्ति पोर्टफोलियो को स्वस्थ बनाया है। ग्रामीण और लघु वित्त क्षेत्र में विस्तार ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है और छोटे ऋणधारकों को लाभ पहुंचाया है।
इस प्रकार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने यह स्पष्ट किया है कि बैंकिंग क्षेत्र की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार और वित्तीय समावेशन के प्रयास देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।
