'धुरंधर' देख छलक उठा सुनील शेट्टी का दर्द: आदित्य धर की इस महाफिल्म के बंद होने का आज भी है मलाल


नई दिल्ली । इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर निर्देशक आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर’ का जबरदस्त डंका बज रहा है। फिल्म की अपार सफलता के बाद अब इसके दूसरे भाग ‘धुरंधर 2’ का टीजर भी रिलीज हो चुका है जिसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। इसी बीच बॉलीवुड के ‘अन्ना’ यानी सुनील शेट्टी ने आदित्य धर के साथ काम न कर पाने को लेकर अपनी निराशा जाहिर की है। सुनील शेट्टी ने खुलासा किया कि वह आदित्य धर की उस फिल्म का अहम हिस्सा थे जिसका इंतजार पूरी दुनिया को था लेकिन अफसोस कि वह फिल्म कभी बड़े पर्दे तक नहीं पहुंच पाई।

हाथ से निकली ‘द इम्मोर्टल अश्वत्थामा’ हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में सुनील शेट्टी ने बताया कि वह आदित्य धर की मेगा-बजट फिल्म ‘द इम्मोर्टल अश्वत्थामा’ में काम करने वाले थे। इस फिल्म में उनके साथ विक्की कौशल लीड रोल में थे। सुनील ने भारी मन से खुलासा किया कि बजट की सीमाओं और मार्केट बिहेवियर में आए बदलाव के कारण आदित्य धर को इस प्रोजेक्ट को बंद करने का कठिन फैसला लेना पड़ा। सुनील शेट्टी ने कहा कि ‘धुरंधर’ देखने के बाद मुझे महसूस हुआ कि आदित्य एक शानदार विजन वाले निर्देशक हैं और मुझे उनके साथ काम न कर पाने का अफसोस है।

रणवीर सिंह को बताया सबसे बड़ा परफॉर्मर फिल्म ‘धुरंधर’ के कलाकारों की तारीफ करते हुए सुनील शेट्टी ने बेहद बेबाक राय रखी। जहाँ पूरी दुनिया अक्षय खन्ना के अभिनय की मुरीद है वहीं सुनील शेट्टी का मानना है कि रणवीर सिंह और आदित्य धर ने उनसे भी बेहतर काम किया है। उन्होंने तर्क दिया कि अक्षय खन्ना के किरदार को बैकग्राउंड म्यूजिक और शानदार प्रेजेंटेशन की वजह से काफी माइलेज मिला लेकिन रणवीर सिंह के पास ऐसा कोई सहारा नहीं था फिर भी वह पर्दे पर अपनी चमक छोड़ने में कामयाब रहे। सुनील के मुताबिक रणवीर एक जन्मजात परफॉर्मर हैं।

आदित्य धर के विजन के कायल हुए ‘अन्ना’ फिल्म मेकिंग की बारीकियों पर चर्चा करते हुए सुनील ने कहा कि आदित्य धर ने दर्शकों की नब्ज को बखूबी पहचाना है। आज के दौर में जहाँ लोगों का अटेंशन स्पैन कम होता जा रहा है वहाँ आदित्य ने 3 घंटे 40 मिनट की लंबी फिल्म बनाने का जोखिम उठाया और सफल रहे। सुनील शेट्टी ने कहा कि आदित्य जानते थे कि कोरोना काल के बाद लोग लंबी वेब सीरीज देखने के आदी हो चुके हैं और इसी आदत को उन्होंने सिनेमाई अनुभव में तब्दील कर दिया। उनका यह आत्मविश्वास ही उन्हें एक महान निर्देशक बनाता है।