इस बीच, पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने शनिवार को आरोप लगाया कि भारत उनके देश में उग्रवादी संगठनों का वित्तपोषण कर रहा है। हालांकि, उन्होंने इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किया। भारत ने पहले ही इस्लामाबाद मस्जिद हमले में किसी भी संलिप्तता के आरोप को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
नकवी ने कहा, “दाएश और तालिबान जैसे समूहों को कहीं से धन और लक्ष्य मिल रहे हैं,” और बिना किसी प्रमाण के भारत की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “मैं फिर से स्पष्ट रूप से कहता हूं कि उनका वित्तपोषण भारत से हो रहा है।”
इस्लामिक स्टेट के आधिकारिक मुखपत्र ‘अमाक’ के माध्यम से जारी बयान में हमलावर की पहचान सैफुल्लाह अंसारी के रूप में की गई है। संगठन ने अंसारी की तस्वीर भी जारी की है जिसमें वह संगठन के प्रति अपनी वफादारी की शपथ लेता दिख रहा है। IS ने दावा किया है कि यह हमला ‘IS इन पाकिस्तान प्रोविंस’ (ISPP) के एक सक्रिय सदस्य द्वारा किया गया है, जो 2019 से क्षेत्र में सक्रिय है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को हमले की निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान को अपनी घरेलू समस्याओं का समाधान करने की बजाय दूसरों को दोष देना बंद करना चाहिए। बयान में कहा गया भारत इस तरह के हर आरोप को खारिज करता है, जो निराधार और निरर्थक है।
मस्जिद हमले के तुरंत बाद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने आधिकारिक बयान जारी कर अपनी किसी भी संलिप्तता से इनकार किया। IS के दावे से यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान में सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने के पीछे अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क का हाथ है। बयान में सीरिया में सक्रिय ‘ज़ैनाबियून ब्रिगेड’ (प्रो-इरान मिलिशिया) में शामिल पाकिस्तानी शियाओं का भी जिक्र किया गया, जो इस हमले के पीछे सांप्रदायिक प्रतिशोध की ओर इशारा करता है।
