नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर से हट सकती है 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद, वक्फ बोर्ड में चिंता की लहर


नई दिल्ली। केंद्रीय सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर में मौजूद 100 साल पुरानी ‘कदीमी मस्जिद’ के भविष्य को लेकर संशय बढ़ गया है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज किए जाने और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा हाल ही में जारी टेंडर के बाद मस्जिद को हटाए जाने की आशंका उठ रही है। इससे पहले केंद्र सरकार ने मस्जिद की सुरक्षा का भरोसा दिया था।

अदालत में पिछली स्थिति
2024 में दिल्ली हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि बोर्ड पुनः तब कोर्ट आ सकता है जब उसे सेंट्रल विस्टा परियोजना में अपनी संपत्ति पर खतरा महसूस हो। याचिका में कृषि भवन परिसर की मस्जिद सहित छह धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की मांग की गई थी। 1 दिसंबर 2021 की सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया था कि सरकार इन स्थलों के साथ कोई बदलाव नहीं कर रही है।

टेंडर ने बढ़ाई अनिश्चितता
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, CPWD ने 19 जनवरी 2026 को कृषि भवन और शास्त्री भवन के पुनर्विकास के लिए नया टेंडर जारी किया। हालांकि मस्जिद का नाम हटाने वाली सूची में नहीं है, लेकिन टेंडर के ड्रॉइंग्स में मस्जिद को नए प्रस्तावित भवन में उसके मौजूदा स्थान पर नहीं दिखाया गया है।

वक्फ बोर्ड और इमाम की प्रतिक्रिया
कदीमी मस्जिद कृषि भवन के खुले प्रांगण में स्थित है और मुख्य रूप से केंद्रीय कर्मचारियों द्वारा नमाज अदा करने के लिए प्रयोग की जाती है। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षित स्मारक नहीं है, लेकिन 1970 के दिल्ली प्रशासन के राजपत्र में वक्फ संपत्तियों की सूची में दर्ज है।

वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अमानतुल्ला खान ने कहा, “सरकार ने अदालत में स्पष्ट कहा था कि मस्जिदों को कोई नुकसान नहीं होगा। अगर इसे हटाने का प्रयास किया गया, तो यह उचित नहीं होगा।”

परियोजना और लागत
CPWD ने कृषि भवन और शास्त्री भवन के स्थान पर ‘कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट’ (CCS) की इमारतों 4 और 5 के निर्माण के लिए 19 जनवरी को टेंडर जारी किया। बोली लगाने की अंतिम तिथि 13 फरवरी है। CCS 4 और 5 परियोजनाओं की अनुमानित लागत 3,006.07 करोड़ रुपये है और इसे 24 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत पहले उपराष्ट्रपति के पूर्व आधिकारिक निवास परिसर में स्थित एक मस्जिद और एक मंदिर को हटाया जा चुका है, जिससे कदीमी मस्जिद के भविष्य को लेकर वक्फ बोर्ड की चिंता और बढ़ गई है।