समीर वानखेड़े की मुश्किलें बढ़ीं: दिल्ली हाई कोर्ट ने कॉर्डेलिया क्रूज केस में अनुशासनात्मक कार्रवाई को दी हरी झंडी


नई दिल्ली। कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स केस के चर्चित और विवादित चेहरा रहे आईआरएस IRS अधिकारी समीर वानखेड़े की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2021 के इस हाई-प्रोफाइल मामले में वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रखने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण कैट के उस पुराने फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसने वानखेड़े को बड़ी राहत दी थी। कोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद अब केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड CBIC द्वारा जारी चार्जशीट के आधार पर जांच का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

समीर वानखेड़े, जो 2008 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं, उस समय वैश्विक सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने मुंबई एनसीबी NCB के जोनल डायरेक्टर रहते हुए अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्य खान को ड्रग्स केस में गिरफ्तार किया था। हालांकि, बाद में उन पर गंभीर आरोप लगे कि उन्होंने आर्यन खान को फंसाने की धमकी दी और मामले को रफा-दफा करने के बदले उनके परिवार से कथित तौर पर 25 करोड़ रुपये की मांग की थी। इसके अलावा, उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने जांच की दिशा मोड़ने की कोशिश की और एनसीबी से कार्यमुक्त होने के बावजूद विभाग के विधिक अनुभाग से गोपनीय जानकारियां हासिल करने का प्रयास किया था।

गौरतलब है कि इससे पहले ‘कैट’ ने 18 अगस्त 2025 को वानखेड़े को जारी किए गए आरोपपत्र चार्जशीट को रद्द कर दिया था, जिसे केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार का तर्क था कि अधिकारी के आचरण की गहन जांच जरूरी है। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए माना कि अनुशासनात्मक कार्यवाही को रोकना उचित नहीं है। इस फैसले से साफ हो गया है कि सरकारी संस्थानों की शुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए किसी भी स्तर के अधिकारी के खिलाफ आरोपों की जांच अनिवार्य है। अब वानखेड़े को इन गंभीर विभागीय आरोपों का सामना करना होगा, जो उनके करियर के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।