जब अक्षय कुमार बने सहारा: डिप्रेशन के अंधेरे से विवेक ओबेरॉय को बाहर खींच लाए खिलाड़ी कुमार


नई दिल्ली। अक्षय कुमार को यूं ही बॉलीवुड का खिलाड़ी नहीं कहा जाता। पर्दे पर एक्शन, कॉमेडी और देशभक्ति से दर्शकों का दिल जीतने वाले अक्षय, असल ज़िंदगी में भी उतने ही संवेदनशील और नेकदिल इंसान हैं। इंडस्ट्री में कई ऐसे किस्से हैं, जो उनके बड़े दिल की गवाही देते हैंऔर उन्हीं में से एक कहानी जुड़ी है अभिनेता विवेक ओबेरॉय से।

विवेक ओबेरॉय, जिन्होंने कभी बॉलीवुड में दमदार एंट्री की थी, समय के साथ करियर के उतार-चढ़ाव से गुजरते रहे। एक दौर ऐसा भी आया जब काम की कमी, मानसिक दबाव और निजी संघर्षों ने उन्हें गहरे डिप्रेशन में धकेल दिया। इसी मुश्किल वक्त में अक्षय कुमार उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आए।

एक फोन कॉल… और आधे घंटे में घर पहुंच गए अक्षय
इस किस्से का खुलासा खुद विवेक ओबेरॉय ने एक इंटरव्यू में किया था। विवेक के मुताबिक, उनका करियर उस वक्त बुरी तरह लड़खड़ा रहा था और मानसिक हालत बेहद खराब थी। तभी एक दिन अक्षय कुमार का फोन आया। अक्षय ने पूछाकहां है?
विवेक ने जवाब दिया“घर पर हूं, बहुत तनाव में हूं।”

इतना सुनते ही अक्षय ने कहा“ठीक है।”
और हैरानी की बात ये कि सिर्फ आधे घंटे के भीतर अक्षय कुमार खुद विवेक के घर पहुंच गए। बिना किसी औपचारिकता के, बिना किसी दिखावे केबस एक इंसान दूसरे इंसान की मदद करने चला आया।

सुपरस्टार नहीं, एक दोस्त की तरह सुनी पूरी बात
विवेक बताते हैं कि अक्षय ने उनके साथ बैठकर पूरी शांति से उनकी बातें सुनीं। करियर, पैसे, मानसिक तनावजो भी दर्द था, विवेक ने सब खुलकर कह दिया।

अक्षय ने न कोई सलाह थोपने की कोशिश की, न उपदेश दिया। बस धैर्य के साथ सब सुना।
फिर अक्षय ने कहा, देख यार, मैं तेरी हर समस्या तो हल नहीं कर सकता, लेकिन तुझे दोबारा पॉजिटिव सोच में लाने में मदद ज़रूर कर सकता हूं।
काम देकर बदली किस्मत
अक्षय कुमार ने विवेक को बताया कि उनके पास कई शोज और इवेंट्स की इनक्वायरी आती रहती है, जिन्हें वह अपनी शूटिंग के चलते नहीं कर पाते। अक्षय ने साफ कहा, अब से मेरे पास जो भी शोज आएंगे, वो मैं तुझे डाइवर्ट कर दूंगा। तू वो काम करना शुरू कर दे।यह कोई छोटी मदद नहीं थी। उस दौर में, जब इंडस्ट्री में लोग अपने मौके खुद तक सीमित रखते हैं, अक्षय कुमार ने खुले दिल से अपना काम किसी और को सौंप दिया।

डिप्रेशन से निकलकर दोबारा खड़े हुए विवेक
इस मदद का असर सिर्फ विवेक की आर्थिक स्थिति पर ही नहीं पड़ा, बल्कि इससे उनका आत्मविश्वास भी लौटा।

काम मिलने लगा, व्यस्तता बढ़ी और सबसे बड़ी बातवो धीरे-धीरे डिप्रेशन से बाहर आने लगे।विवेक खुद कहते हैं कि आज के दौर में ऐसा करना बहुत कम लोग करते हैं। अक्षय कुमार ने न सिर्फ एक एक्टर की मदद की, बल्कि एक इंसान को टूटने से बचा लिया।

खिलाड़ी सिर्फ नाम नहीं
यह कहानी साबित करती है कि अक्षय कुमार सिर्फ स्क्रीन पर हीरो नहीं हैं, बल्कि असल ज़िंदगी में भी वो उन लोगों में से हैं, जो बुरे वक्त में साथ खड़े रहना जानते हैं। बॉलीवुड की चकाचौंध के पीछे छुपी यह इंसानियत ही उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।कभी-कभी एक कॉल, एक मुलाकात और थोड़ी-सी समझदारीकिसी की ज़िंदगी बदल सकती है। और इस कहानी में, वो किरदार निभाया था खिलाड़ी कुमार ने।