यूपीआई ने जीता आम लोगों का भरोसा
नारायण मूर्ति ने कहा कि यूपीआई को कम लागत वाला और सभी के लिए आसानी से उपलब्ध बनाकर आरबीआई ने देश के हर वर्ग का भरोसा जीता है। इससे डिजिटल भुगतान प्रणाली सिर्फ शहरी इलाकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांवों, छोटे दुकानदारों और आम नागरिकों तक पहुंच सकी। उन्होंने इसे भारत की डिजिटल सफलता की सबसे बड़ी कहानी बताया।
नेतृत्व की सोच से बदलता है देश
बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए मूर्ति ने कहा कि जब किसी देश में ऐसे नेता होते हैं जिनके लक्ष्य बड़े होते हैं और जिनकी नीयत साफ होती है, तब वही नेतृत्व देश को बदलने की ताकत रखता है। उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थाएं मजबूत मूल्यों से बनती हैं, और यही मूल्य लंबे समय तक विकास की नींव रखते हैं।
कथनी और करनी में समानता जरूरी
आईआईएम बेंगलुरु के सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक गुड्स में हुई बातचीत के दौरान उन्होंने नेतृत्व के मूल सिद्धांतों पर जोर देते हुए कहा कि यदि कोई संगठन मजबूत मूल्यों के साथ आगे बढ़ना चाहता है, तो नेताओं को कथनी और करनी में समानता रखनी होगी।
मूर्ति ने साफ शब्दों में कहा, “मूल्य भाषणों से नहीं, बल्कि कार्यों से बनते हैं।”
संवेदनशील पूंजीवाद का महत्व
उन्होंने कहा कि अनुशासन, सही मूल्य, मजबूत नेतृत्व और संवेदनशील पूंजीवाद समाज और राष्ट्र दोनों को आगे बढ़ाता है। तकनीक की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक तेजी से बदलती है, इसलिए समय के साथ उसे समझना, सुधारना और अनुकूल बनाना बेहद जरूरी है।
संस्थागत यादों को संजोने की जरूरत
नारायण मूर्ति ने इस बात पर चिंता जताई कि भारत में संस्थाओं के विकास को लेकर लिखित दस्तावेज बहुत कम हैं। उन्होंने कहा कि संगठनों के बनने की प्रक्रिया, संघर्ष, नेतृत्व की कमियां, टीमवर्क की जटिलताएं और नई तकनीक पर काम करने के अनुभव—ये सभी संस्थागत यादों का हिस्सा होते हैं, जिन पर भविष्य की प्रगति टिकी होती है।
ओपन और कम लागत वाला मॉडल जरूरी
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सबक यह है कि कोड को सार्वजनिक और कम लागत वाला बनाया जाए। इससे एकाधिकार खत्म होता है और नवाचार को बढ़ावा मिलता है। मजबूत आधार के साथ इनोवेशन को आगे बढ़ाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले नेताओं की जरूरत होती है।
छात्रों को दिया नेतृत्व का मंत्र
छात्रों को संबोधित करते हुए मूर्ति ने कहा कि भविष्य के नेताओं को सादा जीवन जीना चाहिए और दिखावे से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप संवेदनशील पूंजीवाद के संदेशवाहक हैं, जो समाज, देश और उद्यमिता तीनों को आगे ले जाएंगे।”
नारायण मूर्ति ने यूपीआई को पब्लिक गुड बनाने के लिए आरबीआई की सराहना करते हुए कहा कि मजबूत मूल्य, दूरदर्शी नेतृत्व और संवेदनशील पूंजीवाद ही भारत की डिजिटल और आर्थिक प्रगति की असली ताकत हैं।
