यूपी बना सिनेमा का 'हॉटस्पॉट': वाराणसी की गलियों से मिर्जापुर के स्वैग तक, सिल्वर स्क्रीन पर छा रहा है उत्तर प्रदेश

नई दिल्ली/वाराणसी। आज उत्तर प्रदेश अपना 77वां स्थापना दिवस मना रहा है। जनसंख्या के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य अब केवल राजनीति ही नहीं बल्कि मनोरंजन जगत की धुरी भी बन चुका है। अपनी प्राचीन वास्तुकला गंगा के घाटों और ऐतिहासिक धरोहरों के दम पर यूपी फिल्म मेकर्स के लिए हब बन गया है। साल 2021 में मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का नेशनल अवार्ड जीतने वाला यह राज्य अब दुनिया भर के निर्देशकों को आकर्षित कर रहा है।

बनारस: फिल्मकारों की पहली पसंद वाराणसी की संकरी गलियां और मणिकर्णिका घाट की जीवन-मृत्यु की गाथा ने मसान जैसी संजीदा फिल्मों को जन्म दिया तो वहीं अस्सी घाट की जीवंतता रांझणा और मोहल्ला अस्सी की आत्मा बनी। ब्रह्मास्त्र जैसी बड़े बजट की फिल्मों से लेकर वनवास और भूल चूक माफ जैसी नई कहानियों तक काशी का कैनवास हर रंग में फिट बैठता है।

अपराध और इमोशन का कॉकटेल यूपी की पृष्ठभूमि ने भारतीय डिजिटल स्पेस को मिर्जापुर और असुर जैसी कल्ट वेब सीरीज दी हैं। वहीं गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्मों ने राज्य के देहाती और औद्योगिक परिवेश को वैश्विक पहचान दिलाई। लखनऊ आगरा और कानपुर जैसे शहर अब केवल पर्यटन केंद्र नहीं बल्कि बड़े फिल्म स्टूडियो में तब्दील हो चुके हैं।

सरकार का प्रोत्साहन और भविष्य उत्तर प्रदेश सरकार की फिल्म बंधु एजेंसी और नई फिल्म पॉलिसी ने शूटिंग के नियमों को बेहद सरल बना दिया है। सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए न केवल ऑनलाइन अनुमति मिलती है बल्कि वेब सीरीज और फिल्मों के लिए भारी सब्सिडी का भी प्रावधान है। नोएडा के सेक्टर 21 में बन रही फिल्म सिटी इस क्रांति को नए पंख लगाने के लिए तैयार है।