सिंधु जल संधि सस्पेंड के बाद बड़ा कदम, चिनाब नदी पर 5129 करोड़ का सावलकोट पावर प्रोजेक्ट शुरू


नई दिल्ली। पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने अब बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में सरकारी कंपनी एनएचपीसी (NHPC) ने जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में चिनाब नदी पर बनने वाले सावलकोट हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया है। इस परियोजना को देश की ऊर्जा जरूरतों और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक बड़ा और रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, इस महत्वाकांक्षी परियोजना को करीब 5129 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जाएगा। एनएचपीसी द्वारा जारी टेंडर के तहत पूरे निर्माण कार्य को एक ही पैकेज में शामिल किया गया है, ताकि काम को तेज गति से पूरा किया जा सके। टेंडर दस्तावेजों के अनुसार, इस पैकेज में डाइवर्जन टनल का निर्माण, एडिट, डीटी और कोफर डैम बनाने जैसे प्रमुख कार्य शामिल हैं।

इसके अलावा मांडिया नाला डीटी का निर्माण, उससे संबंधित सड़क, राइट बैंक स्पाइरल टनल, एक्सेस टनल और डैम से जुड़े सभी सहायक कार्य भी इसी प्रोजेक्ट के अंतर्गत किए जाएंगे। चिनाब नदी पर बनने वाला यह प्रोजेक्ट बिजली उत्पादन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इससे जम्मू-कश्मीर सहित देश के कई हिस्सों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

एनएचपीसी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के लिए बोली प्रक्रिया 12 मार्च से शुरू होगी और 20 मार्च तक चलेगी। बोली की वैधता 180 दिनों के लिए तय की गई है। वहीं, इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए लगभग 3285 दिनों की समयसीमा निर्धारित की गई है, यानी इसे चरणबद्ध तरीके से दीर्घकालिक योजना के तहत तैयार किया जाएगा।

सावलकोट हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के जरिए कुल 1856 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इतना बड़ा उत्पादन देश के पावर ग्रिड को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खासकर जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी इलाकों में बिजली की उपलब्धता बेहतर होगी और औद्योगिक व घरेलू जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से न केवल बिजली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही, यह परियोजना जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और क्षेत्रीय विकास को भी गति देगी।

भारत सरकार ने यह कदम ऐसे समय पर उठाया है जब पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में चिनाब नदी पर इस तरह की बड़ी परियोजना को रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भारत अपने जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेगा और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की दीर्घकालिक ऊर्जा नीति और जल प्रबंधन योजना का भी अहम हिस्सा है। आने वाले वर्षों में इसके पूरा होने पर देश की ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।