तमिलनाडु के कोयंबटूर से शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने छात्रों के सवालों पर स्टार्टअप पैशन और पढ़ाई के संतुलन विकसित भारत 2047 और अनुशासन के महत्व पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप के लिए उम्र नहीं स्पष्ट सोच और टीमवर्क जरूरी है। पढ़ाई और रुचि को विरोधी न मानते हुए दोनों को साथ साथ आगे बढ़ाने की सलाह दी। विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए उन्होंने नागरिक कर्तव्यों स्वच्छता नियमों का पालन और ‘वोकल फॉर लोकल को अहम बताया।
छात्रों द्वारा पूछे गए एआई और भविष्य के करियर से जुड़े सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक से डरने की जरूरत नहीं बल्कि उसे समझकर अपने काम में वैल्यू एडिशन करना चाहिए। अनुशासन को प्रेरणा से भी अधिक जरूरी बताते हुए उन्होंने कहा कि बिना डिसिप्लिन के इंस्पिरेशन भी बोझ बन जाता है।
इसके बाद चर्चा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंची जहां संवाद के साथ साथ स्थानीय व्यंजनों और संस्कृति का भी रंग देखने को मिला। प्रधानमंत्री ने छात्रों को भारत भ्रमण की सलाह देते हुए कहा कि छात्र जीवन में साधारण साधनों से यात्रा करने से जीवन के वास्तविक अनुभव मिलते हैं। परीक्षा के तनाव पर उन्होंने रिवीजन प्रैक्टिस अच्छी नींद और आत्मविश्वास को सबसे कारगर उपाय बताया। खेल और पढ़ाई के संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा और खेल दोनों जीवन के लिए आवश्यक हैं।
गुजरात के आदिवासी क्षेत्र में पहुंचे प्रधानमंत्री ने शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास की कुंजी बताया। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा संस्थानों के विस्तार से बड़ा बदलाव संभव हुआ। तनाव प्रबंधन पर उन्होंने कहा कि लगातार अभ्यास लिखने की आदत और पर्याप्त नींद तनाव को दूर करती है। करियर चयन पर प्रधानमंत्री ने छात्रों को सपनों के अनुरूप जीवन बनाने और शोर नहीं बल्कि सफलता को बोलने देने की सीख दी।
अंत में असम के गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र के तट पर हुई चर्चा में आत्मविश्वास स्वास्थ्य खान पान और तुलना की मानसिकता पर खुलकर संवाद हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मविश्वास का अर्थ है स्वयं पर विश्वास और अपनी क्षमता को पहचानना। उन्होंने छात्रों को दूसरों से नहीं खुद से प्रतिस्पर्धा करने की सलाह दी।
एपिसोड 2 का सार यही रहा कि परीक्षा केवल अंकों की नहीं बल्कि जीवन को समझने की प्रक्रिया है। अलग अलग स्थान अलग अलग छात्र लेकिन एक ही उद्देश्य छात्रों को सुनना समझना और उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देना।
