राजधानी को दहलाने वाला 'थार रेप केस': आरोपी माज और ओसाफ की मोबाइल लोकेशन ने खोली पोल, सीडीआर से पुख्ता हुई गुनाह की साजिश


भोपाल के खानूगांव में 11वीं कक्षा की एक नाबालिग हिंदू छात्रा के साथ हुई दरिंदगी के मामले में हर दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस सनसनीखेज कांड के मुख्य किरदारों मोहम्मद माज खान और ओसाफ अली खान की घेराबंदी अब एसआईटी SIT ने तेज कर दी है। जांच में तकनीकी साक्ष्यों विशेषकर सीडीआर Call Detail Record से यह पुख्ता हो गया है कि घटना के वक्त दोनों आरोपी एक ही स्थान पर मौजूद थे। पुलिस की तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि जब ओसाफ अली खान लग्जरी थार कार के भीतर नाबालिग से दुष्कर्म कर रहा था तब माज खान बाहर पहरा दे रहा था। इतना ही नहीं माज ने न केवल बाहर से इस कृत्य का वीडियो बनाया बल्कि छात्रा को अश्लील मैसेज भेजकर छेड़छाड़ भी की।

आरोपी माज खान जो खुद को एक प्रतिष्ठित जिम का संचालक और बिल्डर बताता है ने पूछताछ में कबूला है कि उसने पूरी घटना की प्लानिंग पहले ही कर ली थी। उसने चोरी-छिपे बनाए गए वीडियो के जरिए छात्रा को ब्लैकमेल किया और उसकी इज्जत नीलाम करने की धमकी देकर उससे 40 हजार रुपए भी वसूले। पुलिस ने उस थार कार को सीहोर के एक गांव से बरामद कर लिया है जिसका इस्तेमाल इस जघन्य अपराध में किया गया था। इसके अलावा तीन अन्य लग्जरी कारें भी जब्त की गई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ने साक्ष्य मिटाने के लिए उस आईफोन को राजस्थान के जंगलों में तोड़कर फेंकने का दावा किया है जिससे वीडियो शूट किया गया था।

इस मामले के तार पुलिस विभाग के भीतर फैले भ्रष्टाचार से भी जुड़े नजर आ रहे हैं। कोहेफिजा थाने के प्रधान आरक्षक ज्ञानेंद्र दिवेदी को इस मामले में सस्पेंड कर दिया गया है। आरोप है कि उसने महज 50 हजार रुपए की रिश्वत लेकर आरोपी माज को गोपनीय सूचनाएं लीक कीं और उसके साथ होटल में लंच किया जिसकी वजह से उसकी गिरफ्तारी में देरी हुई। अब ज्ञानेंद्र के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो चुकी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी अंकिता खातरकर के नेतृत्व में चार सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है। टीम अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि क्या इन आरोपियों ने अन्य लड़कियों को भी अपना शिकार बनाया है। साथ ही माज और उसके भाई मोनिस के पास महज 8-10 वर्षों में आई करोड़ों की संपत्ति भी जांच के दायरे में है। मोनिस पहले से ही एमडी ड्रग की तस्करी के मामले में जमानत पर है। पुलिस अब धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम पॉस्को और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत आरोपियों के खिलाफ शिकंजा कस रही है ताकि इस संगठित अपराध के सिंडिकेट को जड़ से खत्म किया जा सके।