बजट के बाद वेबिनार में पीएम का विजन: ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की रफ्तार और तेज करने का आह्वान

नई दिल्ली। केंद्रीय बजट के बाद आयोजित वेबिनार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी, सुधार और वित्त” विषय पर देश को स्पष्ट संदेश दिया-बजट कोई तात्कालिक लाभ का दस्तावेज नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय रोडमैप है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधन में उन्होंने कहा कि बजट के बाद वेबिनार की परंपरा अब मजबूत हो चुकी है और इससे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में गति मिलती है।

शॉर्ट टर्म नहीं, लॉन्ग टर्म विजन का दस्तावेज
प्रधानमंत्री ने कहा कि बजट को शेयर बाजार की चाल या आयकर प्रस्तावों के चश्मे से देखना अधूरा आकलन है। असल मायने में बजट इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, क्रेडिट की सुगमता, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, पारदर्शिता और जीवन को आसान बनाने वाली नीतियों का समग्र खाका होता है। उन्होंने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि हर बजट उसी लंबी यात्रा का एक चरण है।

टेक्नोलॉजी आधारित गवर्नेंस पर जोर
पीएम ने कहा कि बीते दशक में भारत ने जो लचीलापन दिखाया है, वह सुधारों का परिणाम है। प्रक्रियाओं का सरलीकरण, टेक्नोलॉजी आधारित शासन और संस्थागत मजबूती ने अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। उन्होंने एआई, ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से पारदर्शिता, जवाबदेही और गति बढ़ाने की बात कही। साथ ही शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत कर जमीनी असर सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

इंफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश, निजी क्षेत्र को संकेत
प्रधानमंत्री ने बताया कि 11 वर्ष पहले सार्वजनिक पूंजीगत व्यय लगभग 2 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि यह विशाल निवेश निजी क्षेत्र के लिए स्पष्ट संकेत है कि वह भी नई ऊर्जा के साथ आगे आए। परियोजना स्वीकृति, लागत-लाभ विश्लेषण और लाइफ साइकल कॉस्टिंग को मजबूत कर देरी और अपव्यय रोकने की आवश्यकता बताई।

बॉन्ड मार्केट और विदेशी निवेश को बढ़ावा
उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक वित्त को मजबूत करने के लिए बॉन्ड बाजार को अधिक सक्रिय और तरल बनाना जरूरी है। बॉन्ड की खरीद-बिक्री प्रक्रिया को सरल किया जा रहा है और निवेशक-अनुकूल ढांचा तैयार किया जा रहा है। वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाकर वित्तीय तंत्र को अधिक पूर्वानुमेय बनाने पर भी बल दिया गया।

‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री ने सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और अकादमिक जगत के बीच एक स्पष्ट ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि नीति की सफलता घोषणाओं से नहीं, बल्कि उत्कृष्ट क्रियान्वयन से तय होती है। अब चर्चा का समय नहीं, बल्कि बजट को जमीन पर तेजी से लागू करने का समय है।