दुश्मन की पनडुब्बियों का शिकारी ‘अंजदीप’ नौसेना में शामिल, बढ़ी समुद्री ताकत

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की ताकत में शुक्रवार को बड़ा इजाफा हुआ जब स्वदेशी रूप से निर्मित पनडुब्बी रोधी उथले जल का युद्धपोत ‘अंजदीप’ औपचारिक रूप से बेड़े में शामिल किया गया। चेन्नई के ऐतिहासिक कोरोमंडल तट पर आयोजित समारोह में नौसेना प्रमुख दिनेश के त्रिपाठी ने इसे गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक पोत का शामिल होना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की समुद्री शक्ति का प्रतीक है।

‘डॉल्फिन हंटर’ की खासियत: पनडुब्बी ढूंढे, पीछा करे और करे निष्क्रिय
‘अंजदीप’ को खास तौर पर दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नाकाम करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे ‘डॉल्फिन हंटर’ की भूमिका के लिए तैयार किया गया है। इसमें अत्याधुनिक स्वदेशी पनडुब्बी रोधी हथियार और सेंसर पैकेज लगे हैं। पोत में हल माउंटेड सोनार ‘अभय’ भी लगाया गया है, जो समुद्र की गहराइयों में छिपे खतरों को पहचानने में सक्षम है। इसके अलावा यह हल्के टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेटों से लैस है।

77 मीटर लंबा यह युद्धपोत उच्च गति वाली वाटर-जेट प्रोपल्शन प्रणाली से सुसज्जित है, जो इसे 25 समुद्री मील की अधिकतम गति प्रदान करती है। तेज प्रतिक्रिया और तटीय इलाकों में फुर्तीले संचालन के लिए इसे खास तौर पर तैयार किया गया है। पनडुब्बी रोधी भूमिका के अलावा यह तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान तथा खोज एवं बचाव कार्यों में भी सक्षम है।

2026 तक 15 और पोत, 2035 तक 200+ का लक्ष्य
नौसेना प्रमुख ने बताया कि वर्ष 2026 तक लगभग 15 और युद्धपोत शामिल किए जाने की योजना है, जो अब तक की सर्वाधिक सम्मिलन दर होगी। वर्ष 2035 तक भारतीय नौसेना को 200 से अधिक पोतों वाली ताकत बनाना लक्ष्य है। वर्तमान में 50 से अधिक पोत भारतीय शिपयार्डों में निर्माणाधीन हैं। 2047 तक पूर्णतः आत्मनिर्भर नौसैनिक शक्ति बनने का विजन रखा गया है।

ऐतिहासिक विरासत और रणनीतिक संदेश
‘अंजदीप’ का नाम उस द्वीप पर रखा गया है जिसने 1961 में गोवा मुक्ति अभियान के दौरान निर्णायक भूमिका निभाई थी। यह अपने पूर्ववर्ती पेट्या श्रेणी के युद्धपोत का उत्तराधिकारी है, जिसने 1972 से 2003 तक राष्ट्र की सेवा की। उल्लेखनीय है कि दिनेश के त्रिपाठी स्वयं 1986-87 में इसी श्रेणी के पोत पर सब-लेफ्टिनेंट के रूप में तैनात रह चुके हैं।

नौसेना प्रमुख ने हिंद महासागर क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि प्रतिवर्ष लगभग 1.2 लाख जहाज यहां से गुजरते हैं, जो विश्व के दो-तिहाई तेल परिवहन और आधे कंटेनर यातायात का वहन करते हैं। लाल सागर और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया तनाव ने समुद्री मार्गों की संवेदनशीलता को उजागर किया है। अक्टूबर 2023 से लाल सागर में भारतीय नौसेना की तैनाती ने करीब 400 व्यापारी जहाजों को सुरक्षित पारगमन सुनिश्चित किया, जिनमें 16.5 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक तेल और अन्य माल शामिल था।