भोपाल के काटजू अस्पताल में 20 मार्च से शुरू होगा स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर, नि:संतानता और स्त्री रोग की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे


भोपाल । भोपाल के कैलाश नाथ काटजू अस्पताल में 20 मार्च से महिलाओं के लिए हाईटेक स्वास्थ्य सुविधा शुरू होने जा रही है। इस सेंटर का नाम है स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर फॉर प्रिवेंटिव गायनाकोलॉजी एंड इन्फर्टिलिटी । यह प्रदेश का पहला सरकारी इन्फर्टिलिटी सेंटर होगा जहां महिलाओं को नि:संतानता इन्फर्टिलिटी पीसीओएस हार्मोनल असंतुलन मेनोपॉज फाइब्रॉइड अनियमित मासिक धर्म और सर्वाइकल कैंसर जैसी स्त्री रोग संबंधी समस्याओं का इलाज मिलेगा।

करीब दो करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस सेंटर में जांच से लेकर उपचार तक सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। सेंटर की स्टेट नोडल अधिकारी और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रचना दुबे के अनुसार यहां आईयूआई जैसी आधुनिक तकनीक के जरिए इन्फर्टिलिटी का इलाज भी होगा। इसके अलावा सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए वीआईए तकनीक का उपयोग किया जाएगा जिससे समय रहते इलाज संभव हो सके और महिलाओं की जान बचाई जा सके।

सरकारी सेंटर में नि:संतानता का इलाज 40, 000 से 80, 000 रुपए तक में हो सकेगा जबकि प्राइवेट अस्पतालों में यही इलाज 3 लाख रुपए तक का खर्च मांगता है। भारत में महिलाओं में नि:संतानता की दर लगभग 10-14% है जो खराब जीवनशैली और देर से शादी करने के कारण बढ़ रही है।

महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर देश में दूसरा सबसे बड़ा कैंसर है भोपाल इस मामले में 15वें स्थान पर है। ब्रेस्ट कैंसर सबसे अधिक आम है और भोपाल देश में 8वें नंबर पर है। गर्भाशय में गांठ या फाइब्रॉइड महिलाओं के जीवनकाल में 30-50% में विकसित होते हैं और 40 वर्ष के बाद अधिक आम हैं। पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज पीसीओडी से 10-27% महिलाएं प्रभावित हैं जिससे अनियमित पीरियड्स और बांझपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

काटजू अस्पताल में शुरू हो रहे इस स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर के जरिए प्रदेश की महिलाओं को एक ही छत के नीचे सुरक्षित आधुनिक और किफायती स्वास्थ्य सेवा मिलेगी। एम्स में भी जल्द ही आईवीएफ की सुविधा शुरू होने वाली है लेकिन सरकारी सेंटर की तुलना में यहां खर्च अधिक है।