वैशाख मास 2026: पुण्य कमाने का सुनहरा अवसर, क्या करें और क्या न करें


नई दिल्ली । हिंदू धर्म में वैशाख का महीना अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। यह महीना धार्मिक, आध्यात्मिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में वैशाख मास की शुरुआत 3 अप्रैल से हो रही है और यह 1 मई तक रहेगा। वैशाख मास का प्रारंभ चैत्र पूर्णिमा के अगले दिन यानी प्रतिपदा तिथि से होता है।

मान्यता है कि इस पूरे महीने में किए गए स्नान, दान और पूजा-पाठ से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि वैशाख में प्रातःकाल स्नान करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दौरान सूर्य का मेष राशि में प्रवेश भी होता है, जिससे मौसम में गर्मी बढ़ती है और इसी कारण इस माह के नियम स्वास्थ्य से भी जुड़े हुए हैं।

वैशाख माह में क्या करें

वैशाख मास में जल दान का विशेष महत्व है। इस दौरान घड़े में पानी भरकर दान करना या सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ लगवाना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इसके साथ ही अन्न दान भी श्रेष्ठ माना गया है, जिसमें सत्तू, खरबूजा और अन्य खाद्य सामग्री का दान किया जाता है। गर्मी को ध्यान में रखते हुए पंखा, छाता और चप्पल दान करने की भी परंपरा है।

इस महीने भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। प्रतिदिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। साथ ही माता लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

वैशाख में तुलसी की पूजा करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है। इसके अलावा रोजाना सूर्य देव को जल अर्पित करना और संभव हो तो गंगा नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि गंगा स्नान संभव न हो, तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।

वैशाख माह में क्या न करें

इस पवित्र महीने में तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए। मांस, मदिरा और भारी भोजन से दूरी बनाना बेहतर माना जाता है। इसके साथ ही दिन में सोने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे स्वास्थ्य और भाग्य दोनों के लिए अशुभ माना गया है।

जल की बर्बादी से भी विशेष रूप से बचना चाहिए, क्योंकि वैशाख में जल का महत्व और बढ़ जाता है। इसके अलावा इस महीने तेल की मालिश करना भी वर्जित माना गया है।

कुल मिलाकर, वैशाख मास आध्यात्मिक उन्नति, पुण्य अर्जन और आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ समय माना जाता है। इस दौरान किए गए छोटे-छोटे धार्मिक कार्य भी जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।