भारत का मछली उत्पादन रिकॉर्ड तोड़कर 106% बढ़ा, FY 2025 में 197.75 लाख टन!


नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का मछली उत्पादन 197.75 लाख टन तक पहुंच गया, जो 2013-14 के 95.79 लाख टन की तुलना में 106 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन गया है और वैश्विक मछली उत्पादन में लगभग 8% योगदान कर रहा है। मत्स्य पालन क्षेत्र ने न केवल उत्पादन में उछाल दिखाया है, बल्कि ग्रामीण रोजगार, आय सृजन और खाद्य सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

केंद्रीय बजट में अब तक का सबसे बड़ा आवंटन

केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए 2,761.80 करोड़ रुपए का आवंटन किया है, जो अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक बजट है। इसमें से 2,500 करोड़ रुपए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत आवंटित किए गए हैं। इस योजना के माध्यम से तालाब, जलाशय पिंजरे, मछली परिवहन इकाइयां और कोल्ड स्टोरेज जैसी बुनियादी ढांचा सुविधाओं का विकास हो रहा है, जिससे मत्स्य पालन क्षेत्र में उत्पादन और निर्यात दोनों को बल मिला है।

रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का मजबूत स्तंभ

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मत्स्य पालन क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2024-25 तक 74.66 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं। इसके अलावा, 33 लाख से अधिक लोगों को बीमा कवरेज और लगभग 7.44 लाख मछुआरा परिवारों को आजीविका सहायता प्रदान की गई है। क्षेत्र में इस वृद्धि ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं।

नीली क्रांति और पीएमएमएसवाई की भूमिका

सरकार ने बताया कि नीली क्रांति और पीएमएमएसवाई ने उत्पादन, मूल्य शृंखला और बुनियादी ढांचे में नई गति दी है। इसके तहत हजारों तालाबों और जलाशयों में पिंजरे लगाए गए हैं, 27,189 मछली परिवहन इकाइयों का निर्माण हुआ है और 12,081 आरएएस इकाइयां एवं 4,205 बायो-फ्लॉक इकाइयों को मंजूरी दी गई है। इन तकनीकी बदलावों ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ मछुआरों को आधुनिक तरीकों से लाभान्वित किया है।

निर्यात और वैश्विक प्रतिस्पर्धा

मत्स्य पालन में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ने से समुद्री खाद्य निर्यात में भी तेजी आई है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 62,408 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। फ्रोजन झींगे (फ्रोजन श्रिम्प) भारत के प्रमुख निर्यात उत्पाद बने हुए हैं, जिनके बड़े बाजार अमेरिका और चीन हैं। सरकार ने बंदरगाह, लैंडिंग सेंटर, कोल्ड चेन और प्रोसेसिंग यूनिट्स के माध्यम से निर्यात नेटवर्क को भी मजबूत किया है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती आई है।

भविष्य की राह

मत्स्य पालन क्षेत्र अब केवल उत्पादन का माध्यम नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बन चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि आगामी वर्षों में उत्पादन, रोजगार और निर्यात में और वृद्धि हो। पीएमएमएसवाई और तकनीकी उन्नयन के माध्यम से भारत विश्व स्तर पर मत्स्य पालन में अग्रणी देश बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।

भारत का मछली उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 में 197.75 लाख टन पहुंचकर 106% बढ़ गया। पीएमएमएसवाई और नीली क्रांति ने उत्पादन, निर्यात और रोजगार में नई गति दी है। मत्स्य पालन क्षेत्र अब ग्रामीण आय, रोजगार और खाद्य सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बन चुका है। सरकार ने बजट 2026-27 में 2,761.80 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं, जिससे आधुनिक तकनीक, आरएएस और बायो-फ्लॉक इकाइयों के माध्यम से उत्पादन और निर्यात दोनों को बल मिला है।