नई दिल्ली।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026 और 2027 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर (GDP Growth) का नया अनुमान बुधवार को जारी किया।
वित्त वर्ष 2026
वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.6%, जो पहले 7.4% थी।
बढ़ती वृद्धि के कारण: मजबूत सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग में विस्तार, और घरेलू मांग में मजबूती। दिसंबर तिमाही 2026 में जीडीपी ग्रोथ 7.8%, जबकि पिछली तिमाही में 8.4% थी।
वित्त वर्ष 2027
जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9%, जो बाहरी जोखिम और लागत दबाव के कारण थोड़ी नरमी दर्शाता है।
पहली तिमाही: 6.8% (पहले 6.9%)
दूसरी तिमाही: 6.7% (पहले 7%)
मुख्य कारण: ईरान युद्ध और वैश्विक स्तर पर बढ़ते दबाव।
महंगाई का अनुमान
वित्त वर्ष 2027 के लिए CPI मुद्रास्फीति 4.6% रहने का अनुमान।
पहली तिमाही: 4%
दूसरी तिमाही: 4.4%
तीसरी तिमाही: 5.2%
चौथी तिमाही: 4.7%
जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9%, जो बाहरी जोखिम और लागत दबाव के कारण थोड़ी नरमी दर्शाता है।
पहली तिमाही: 6.8% (पहले 6.9%)
दूसरी तिमाही: 6.7% (पहले 7%)
मुख्य कारण: ईरान युद्ध और वैश्विक स्तर पर बढ़ते दबाव।
महंगाई का अनुमान
वित्त वर्ष 2027 के लिए CPI मुद्रास्फीति 4.6% रहने का अनुमान।
पहली तिमाही: 4%
दूसरी तिमाही: 4.4%
तीसरी तिमाही: 5.2%
चौथी तिमाही: 4.7%
आरबीआई के अन्य संकेत
बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी सुनिश्चित की जाएगी।
निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ने की उम्मीद, क्योंकि उद्योगों में क्षमता उपयोग उच्च स्तर पर।
विदेशी निवेश आकर्षक बना हुआ है; 3 अप्रैल तक विदेशी मुद्रा भंडार 697.1 अरब डॉलर। नेट FDI में सुधार और ग्रीनफील्ड निवेश के लिए भारत को एक आकर्षक गंतव्य माना जा रहा है।
बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी सुनिश्चित की जाएगी।
निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ने की उम्मीद, क्योंकि उद्योगों में क्षमता उपयोग उच्च स्तर पर।
विदेशी निवेश आकर्षक बना हुआ है; 3 अप्रैल तक विदेशी मुद्रा भंडार 697.1 अरब डॉलर। नेट FDI में सुधार और ग्रीनफील्ड निवेश के लिए भारत को एक आकर्षक गंतव्य माना जा रहा है।
आरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra ने चेताया कि ऊर्जा की कीमतों में तेज बढ़ोतरी महंगाई का खतरा बढ़ा सकती है और वैश्विक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
वित्त वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी रहने की उम्मीद है, जबकि 2027 में वैश्विक और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण वृद्धि में थोड़ा नरमी आने का अनुमान है। मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहने की संभावना है और निजी निवेश आर्थिक विकास का समर्थन करेगा।
