अधिक मास 2026 की पूरी जानकारी इस अवधि में क्यों नहीं होते शादी गृहप्रवेश और नए काम

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में अधिक मास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है और इसे साल के सबसे पवित्र समयों में से एक माना जाता है। अधिक मास जिसे मल मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है हर तीन वर्ष में एक बार आता है और इस दौरान व्यक्ति को भक्ति साधना और आत्म चिंतन की ओर प्रेरित किया जाता है। वर्ष 2026 में अधिक मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा और इस पूरे समय को आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ माना गया है जबकि मांगलिक कार्यों के लिए यह अवधि वर्जित रहती है।

अधिक मास का आधार हिंदू पंचांग की गणना पद्धति से जुड़ा हुआ है। हिंदू कैलेंडर चंद्रमा की गति पर आधारित होता है जबकि सौर वर्ष सूर्य की गति के अनुसार चलता है। चंद्र वर्ष सौर वर्ष से लगभग 11 दिन छोटा होता है जिससे समय के साथ अंतर बढ़ने लगता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है जिसे अधिक मास कहा जाता है। यह प्रक्रिया समय संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक मानी जाती है और इसी कारण इसका धार्मिक महत्व भी बढ़ जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास को मल मास भी कहा जाता है क्योंकि इस दौरान विवाह गृह प्रवेश नामकरण और जनेऊ जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इन कार्यों को इस अवधि में टाल दिया जाता है ताकि इन्हें अधिक शुभ समय में संपन्न किया जा सके। हालांकि नाम भले ही मल मास हो लेकिन इसका आध्यात्मिक महत्व अत्यंत उच्च माना जाता है और इसे पुण्य अर्जित करने का श्रेष्ठ समय बताया गया है।

अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख समृद्धि और शांति आती है। इस दौरान भक्त व्रत रखते हैं पूजा पाठ करते हैं और धार्मिक ग्रंथों का श्रवण करते हैं जिससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है।

इस पूरे महीने में लोगों को सांसारिक गतिविधियों से थोड़ा विराम लेकर आध्यात्मिक जीवन की ओर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी जाती है। श्रद्धालु इस समय दान पुण्य करते हैं मंदिरों में दर्शन करते हैं और जरूरतमंदों की सहायता करते हैं। इसके अलावा पेड़ पौधे लगाना समाज सेवा करना और धार्मिक कथाओं का आयोजन करना भी इस समय विशेष फलदायी माना जाता है।

अधिक मास व्यक्ति को यह अवसर देता है कि वह अपने जीवन का मूल्यांकन करे अपने कर्मों पर विचार करे और ईश्वर के प्रति अपनी आस्था को मजबूत बनाए। यह समय केवल धार्मिक अनुष्ठानों का ही नहीं बल्कि आत्म सुधार और आंतरिक शांति प्राप्त करने का भी होता है।