एनसीपी मंत्री वीडियो कांड: आरोपी पहुँचा हाईकोर्ट, ट्रांसजेंडर के खिलाफ वसूली और साजिश का लगाया आरोप


नई दिल्ली। राजनैतिक गलियारों में हलचल मचाने वाले एनसीपी मंत्री नरहरी जिरवाल से जुड़े कथित आपत्तिजनक वीडियो मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस मामले में मुख्य आरोपी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने की गुहार लगाई है। यह याचिका मुंबई के कफ परेड पुलिस स्टेशन में दर्ज उस मामले के विरोध में दायर की गई है, जिसमें आरोपी पर वीडियो लीक करने और छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

आरोपी और ट्रांसजेंडर के बीच ‘वसूली’ की जंग
इस पूरे विवाद की जड़ में एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति की शिकायत है, जिसने आरोपी को अपना भाई बताते हुए आरोप लगाया था कि उसने वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उसे धमकाने की कोशिश की। दूसरी ओर, आरोपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए ट्रांसजेंडर पर ही पलटवार किया है। आरोपी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि उसे झूठे मामले में फंसाया जा रहा है और वास्तव में उसे ब्लैकमेल कर वसूली की कोशिश की जा रही थी। उसने अदालत से मांग की है कि ट्रांसजेंडर के खिलाफ आपराधिक साजिश और धमकी देने के आरोप में मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

वीडियो लीक कांड और मंत्री की भूमिका
मामले की गंभीरता तब बढ़ी जब एक ऐसा वीडियो सार्वजनिक हुआ जिसमें कथित तौर पर एनसीपी मंत्री एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह वीडियो वास्तविक है या इसके साथ तकनीकी रूप से छेड़छाड़ की गई है। आरोपी का कहना है कि उसे निशाना बनाया जा रहा है, जबकि शिकायतकर्ता का तर्क है कि उसकी निजता और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हुआ है।

अदालती सुनवाई पर टिकी निगाहें
फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई का इंतजार है, जिसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि एफआईआर रद्द होगी या जांच का दायरा और बढ़ेगा। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर अपनी प्रक्रिया जारी रखी है। यह मामला न केवल एक मंत्री की छवि से जुड़ा है, बल्कि इसमें साइबर अपराध, ब्लैकमेलिंग और आपसी रंजिश के कई पेचीदा पहलू शामिल हो गए हैं। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला इस विवाद की दिशा तय करेगा।