महाकाल की नगरी में विजय सिन्हा भक्ति में लीन भस्म आरती के साक्षी बन मांगी देश और बिहार की खुशहाली


उज्जैन । मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन एक बार फिर आध्यात्मिक आस्था का केंद्र बनी जब बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अपने प्रवास के दौरान विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में पहुंचकर बाबा महाकाल के दर्शन किए। कालों के काल कहे जाने वाले भगवान महाकाल की शरण में पहुंचे उपमुख्यमंत्री पूरी तरह भक्ति भाव में डूबे नजर आए और उन्होंने मंदिर परिसर में कुछ समय बिताकर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।

मंदिर पहुंचने के बाद विजय कुमार सिन्हा ने सबसे पहले नंदी हॉल में बैठकर ध्यान लगाया जहां वे कुछ समय तक गहन भक्ति में लीन रहे। इस दौरान उन्होंने मन की शांति और आध्यात्मिक संतुलन का अनुभव किया। इसके बाद उन्होंने विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के दिव्य और अलौकिक दृश्य के दर्शन किए जो उज्जैन की पहचान मानी जाती है। भस्म आरती के साक्षी बनने के बाद उन्होंने गर्भगृह की चौखट से भगवान महाकाल के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य माना।

परंपराओं का पालन करते हुए उपमुख्यमंत्री ने बाबा महाकाल को जल अर्पित किया और पूरे विधि विधान के साथ पूजन अर्चन किया। इस दौरान उन्होंने बिहार राज्य की प्रगति और समृद्धि के साथ साथ पूरे देशवासियों के सुख समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने मां भारती के गौरव को बढ़ाने और राष्ट्र के उज्जवल भविष्य के लिए भी प्रार्थना की।

विजय कुमार सिन्हा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति की जड़ें अत्यंत गहरी हैं और महाकाल की ऊर्जा समाज में सकारात्मकता और संतुलन स्थापित करने का आधार है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आध्यात्मिक स्थलों से व्यक्ति को नई ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है जो उसे समाज और राष्ट्र के लिए बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करती है।

उन्होंने विशेष रूप से महिला शक्ति के सशक्तिकरण और समाज के समग्र विकास के लिए भी प्रार्थना की और कहा कि एक सशक्त समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि यहां की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अनुशासन हर श्रद्धालु को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।

उज्जैन में उपमुख्यमंत्री का यह दौरा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि आस्था और संस्कृति के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा को दर्शाता है। यह यात्रा इस बात का प्रतीक है कि देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले जनप्रतिनिधि भी भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं और समय समय पर इन पवित्र स्थलों पर पहुंचकर राष्ट्र और समाज के कल्याण की कामना करते हैं।