उज्जैन सीवरेज प्रोजेक्ट में देरी: काम 12 हिस्सों में बांटा गया, अब टाटा के साथ अन्य कंपनियां भी संभालेंगी जिम्मेदारी


नई दिल्ली।  मध्य प्रदेश के उज्जैन में लंबे समय से चल रहे सीवरेज प्रोजेक्ट में एक बार फिर देरी सामने आई है। शहर की सीवरेज व्यवस्था सुधारने के लिए शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट में अब तक तय समय सीमा के बावजूद हजारों घरों में कनेक्शन नहीं हो सके हैं।

प्रोजेक्ट का काम देख रही टाटा कंपनी को 31 मार्च तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन अब भी करीब 30 हजार से अधिक हाउसहोल्ड कनेक्शन बाकी हैं। धीमी प्रगति को देखते हुए नगर निगम ने अब बड़ा कदम उठाते हुए पूरे काम को 12 हिस्सों में बांट दिया है।

अब इस प्रोजेक्ट में केवल टाटा कंपनी ही नहीं, बल्कि अन्य एजेंसियों को भी शामिल किया जाएगा। इसके लिए नए टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें से तीन कंपनियों के रेट स्वीकृत कर लिए गए हैं, जबकि तीन के रेट अधिक होने के कारण खारिज कर दिए गए हैं।

नगर निगम के अपर आयुक्त पवनकुमार सिंह के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और फिलहाल उनका विश्लेषण किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य है कि इस साल के अंत तक सीवरेज प्रोजेक्ट को पूरा किया जा सके।

यह प्रोजेक्ट वर्ष 2017 में शुरू हुआ था और शुरुआत में इसे 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन कई बार समय सीमा बढ़ाने के बावजूद काम अधूरा रह गया। इससे पहले भी टाटा प्रोजेक्ट्स को 10 से अधिक बार एक्सटेंशन दिया जा चुका है।

प्रशासन ने लापरवाही को देखते हुए कंपनी को पिछले चार महीने पहले आगे के तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट भी कर दिया था, हालांकि मामला अभी अदालत में विचाराधीन है।

वर्तमान स्थिति यह है कि कंपनी प्रतिदिन तय लक्ष्य के अनुसार 300 कनेक्शन भी नहीं कर पा रही है। जबकि यदि रोजाना 1000 कनेक्शन भी किए जाएं, तब भी निर्धारित समय में काम पूरा करना मुश्किल माना जा रहा है।

अब देखना होगा कि नए टेंडर और अन्य कंपनियों की भागीदारी से यह लंबे समय से अटका हुआ प्रोजेक्ट कितनी तेजी से पूरा हो पाता है।