घटना के बाद स्थानीय प्रशासन, डीडीएमए, दिल्ली फायर सर्विस और दिल्ली पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गईं। अधिकारियों के अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सभी एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधि भी प्रभावित लोगों की मदद में सक्रिय हैं।
कब और क्यों फट सकता है एसी?
विशेषज्ञों के अनुसार एयर कंडीशनर में ब्लास्ट की सबसे बड़ी वजह कंप्रेसर के अंदर अत्यधिक प्रेशर बनना होता है। जब सिस्टम सही तरीके से काम नहीं करता—जैसे ओवरहीटिंग, एयरफ्लो बाधित होना या तकनीकी खराबी—तो यूनिट के भीतर दबाव खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है। यदि यह दबाव समय पर रिलीज न हो, तो विस्फोट का खतरा बढ़ जाता है।
एसी ब्लास्ट से बचाव के 11 जरूरी उपाय
– हर 6 से 12 महीने में एसी की सर्विस जरूर कराएं।
– एक ही पावर लाइन में कई भारी उपकरण न चलाएं।
– आउटडोर यूनिट के आसपास हवा का अच्छा प्रवाह सुनिश्चित करें।
– जलने की गंध, स्पार्क या अजीब आवाज आने पर तुरंत बंद करें।
– लंबे समय तक घर से बाहर रहने पर मेन स्विच या एमसीबी बंद रखें।
– एसी को लगातार 8–10 घंटे से ज्यादा न चलाएं।
– तापमान 24–26 डिग्री सेल्सियस पर रखना सुरक्षित माना जाता है।
– आउटडोर यूनिट को ढके हुए या बंद स्थान में न रखें।
– कमजोर एक्सटेंशन बोर्ड या ढीली वायरिंग से एसी न चलाएं।
– गैस लीकेज को नजरअंदाज न करें, यह ब्लास्ट का बड़ा कारण हो सकता है।
– नियमित सर्विसिंग न कराने से धूल जमकर कंप्रेसर पर दबाव बढ़ाती है।
तकनीकी सावधानी बेहद जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि एसी को समय-समय पर प्रोफेशनल तकनीशियन से जांच कराना जरूरी है। साथ ही हर 4–5 घंटे के उपयोग के बाद 15–20 मिनट का ब्रेक देना कंप्रेसर के लिए सुरक्षित माना जाता है। वोल्टेज स्टेबलाइजर का उपयोग भी जरूरी है ताकि बिजली के उतार-चढ़ाव से नुकसान न हो। अगर एसी से लगातार जलने की गंध, असामान्य आवाज या बार-बार ट्रिपिंग जैसी समस्या दिखे तो तुरंत उसे बंद कर तकनीकी जांच करानी चाहिए।
