नई दिल्ली। रीवा में क्षेत्रीय विकास को गति देने के उद्देश्य से गठित विंध्य विकास प्राधिकरण की शुरुआत ही अव्यवस्थाओं के बीच होती नजर आई। हाल ही में नियुक्त हुए अध्यक्ष पंचूलाल प्रजापति के पहले औपचारिक दौरे में यह साफ हो गया कि प्राधिकरण के पास न तो स्थायी कार्यालय है और न ही कामकाज के लिए आवश्यक बुनियादी संसाधन।
इस स्थिति ने न केवल प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि भविष्य में योजनाओं के प्रभावी संचालन को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
पहले ही दिन उठी कार्यालय की मांग, कमिश्नर से की गई अपील
अध्यक्ष पंचूलाल प्रजापति ने स्थिति का जायजा लेने के बाद संभागीय कमिश्नर से औपचारिक रूप से कार्यालय उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बिना स्थायी दफ्तर के किसी भी विकास प्राधिकरण का सुचारू संचालन संभव नहीं है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि योजनाओं की समीक्षा, बैठकों का आयोजन और फील्ड स्तर पर क्रियान्वयन जैसे कार्यों के लिए जरूरी है कि प्राधिकरण के पास एक सुव्यवस्थित कार्यालय हो।
नियुक्तियों के बाद बढ़ी उम्मीदें, लेकिन शुरुआती स्तर पर ही चुनौतियां
राज्य सरकार ने हाल ही में विंध्य विकास प्राधिकरण का गठन करते हुए पूर्व विधायक पंचूलाल प्रजापति को अध्यक्ष नियुक्त किया है। साथ ही डॉ. अजय सिंह पटेल और संजय तीर्थानी को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इन नियुक्तियों के बाद क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर उम्मीदें बढ़ी थीं, लेकिन शुरुआती चरण में ही संसाधनों की कमी ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संसाधन और ढांचे की कमी से रुका कामकाज, फील्ड कार्य भी प्रभावित
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि यदि प्राधिकरण के गठन के साथ ही कार्यालय और संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती, तो कामकाज की शुरुआत बेहतर तरीके से हो सकती थी।
वर्तमान में स्थिति यह है कि कार्यालय के अभाव में न तो बैठकें नियमित रूप से हो पा रही हैं और न ही विकास योजनाओं पर फील्ड स्तर पर कोई ठोस कार्य शुरू हो सका है।
आगे की राह: भवन मिलने के बाद ही शुरू होगा असली काम
प्रशासनिक स्तर पर अब यह उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही प्राधिकरण को स्थायी कार्यालय और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके बाद ही विंध्य क्षेत्र में विकास योजनाओं का वास्तविक क्रियान्वयन शुरू हो सकेगा।
फिलहाल, शुरुआत में ही सामने आई इन चुनौतियों ने प्राधिकरण की तैयारियों और योजना निर्माण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।