MP में कोचिंग सिस्टम पर बड़ा बदलाव, छात्रों और अभिभावकों को मिलेगा राहत का फायदा


मध्‍य प्रदेश भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार निजी कोचिंग संस्थानों की बढ़ती मनमानी और अनियंत्रित व्यवस्था पर रोक लगाने के लिए ‘कोचिंग संस्थान विनियमन अधिनियम’ लाने की तैयारी कर रही है। इस नए कानून के लागू होने के बाद कोचिंग सेक्टर पूरी तरह एक नियामक ढांचे के दायरे में आ जाएगा।

सरकार द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट के अनुसार, हर कोचिंग संस्थान का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण कोई भी संस्थान संचालित नहीं किया जा सकेगा। साथ ही, पहले से चल रहे सभी कोचिंग सेंटरों को भी तय समय सीमा के भीतर पंजीकरण कराना जरूरी होगा।

नए नियमों के तहत फीस और रिफंड व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। यदि कोई छात्र बीच में कोचिंग छोड़ता है, तो संस्थान को शेष अवधि की फीस ‘प्रो-राटा’ आधार पर 10 दिनों के भीतर वापस करनी होगी। इससे छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा कोचिंग संस्थानों पर भ्रामक विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी है। “100% चयन” या “गारंटीड रैंक” जैसे दावे अब अपराध की श्रेणी में आएंगे। किसी भी सफल छात्र की तस्वीर या नाम का उपयोग उसकी लिखित अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।

कानून में शिक्षकों की योग्यता को भी स्पष्ट किया गया है। केवल स्नातक (ग्रेजुएट) शिक्षक ही पढ़ा सकेंगे और किसी नैतिक अपराध में दोषी व्यक्ति को नियुक्त नहीं किया जाएगा। साथ ही 16 वर्ष से कम उम्र के छात्रों का नामांकन प्रतिबंधित रहेगा और न्यूनतम योग्यता 10वीं पास निर्धारित की गई है।

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कोचिंग संस्थानों को काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध करानी होगी। साथ ही उन्हें वैकल्पिक करियर विकल्पों की जानकारी भी देनी होगी। कक्षाओं के समय को लेकर भी नियम तय किए गए हैं, जिसके अनुसार एक दिन में अधिकतम 5 घंटे की कोचिंग की सलाह दी गई है।

सरकार ने यह भी अनिवार्य किया है कि सभी संस्थान अपनी वेबसाइट पर फीस, कोर्स विवरण, शिक्षक योग्यता और रिफंड नीति जैसी जानकारी सार्वजनिक करें।

इस कानून की जरूरत को हाल के वर्षों में बढ़ते दबाव और छात्रों की आत्महत्या के मामलों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में मध्यप्रदेश में 900 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की है, जिससे कोचिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।

फिलहाल यह ड्राफ्ट अगले विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा, जिसके बाद इसके लागू होने की संभावना है। अगर यह कानून पारित होता है, तो कोचिंग उद्योग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।