युद्धों ने 44 बार मिटाने की कोशिश की लेकिन हर बार लौट आया ये शहर, 115 जंग झेल चुका है बेलग्रेड का हैरान करने वाला इतिहास


नई दिल्ली । दुनिया के इतिहास में कई ऐसे शहर हैं जिन्होंने युद्धों की आग में अपना सबकुछ खोया लेकिन कुछ शहर ऐसे भी हैं जिन्होंने बार बार तबाह होने के बाद भी खुद को फिर से खड़ा किया। यूरोप का बेलग्रेड ऐसा ही एक शहर है जिसकी कहानी युद्ध तबाही और पुनर्निर्माण के अद्भुत संघर्ष से भरी हुई है। मौजूदा दौर में जब गाजा यूक्रेन और दुनिया के दूसरे हिस्सों में युद्ध की तस्वीरें सामने आ रही हैं तब बेलग्रेड का इतिहास यह याद दिलाता है कि युद्ध किसी शहर की इमारतों को तो गिरा सकता है लेकिन उसकी जिजीविषा को खत्म करना आसान नहीं होता। बेलग्रेड अपने इतिहास में 115 युद्धों का सामना कर चुका है और करीब 44 बार तबाह होने के बावजूद आज भी मजबूती से खड़ा है।

बेलग्रेड की रणनीतिक स्थिति ही उसकी सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ी कमजोरी रही है। यह शहर डेन्यूब और सावा नदियों के संगम पर स्थित है और प्राचीन समय से ही सैन्य और राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहा है। इसी वजह से अलग अलग साम्राज्यों और सेनाओं की नजर इस शहर पर रही। रोमनों से लेकर सर्बों हंगेरियनों ऑटोमन और ऑस्ट्रियाई ताकतों तक ने इस इलाके के लिए संघर्ष किया। शहर का पुराना किला आज भी उन सदियों की लड़ाइयों का गवाह है। किले की दीवारों के आसपास इतिहास की कई परतें दफन हैं और यहां मौजूद सैन्य संग्रहालय में हजारों पुराने हथियार और युद्ध उपकरण इस रक्तरंजित अतीत की कहानी बताते हैं।

बेलग्रेड का इतिहास सिर्फ एक या दो बड़े युद्धों तक सीमित नहीं रहा। अलग अलग दौर में सत्ता बदलती रही और शहर का स्वरूप भी बदलता रहा। इतिहास में इस शहर के कई नाम रहे जिनमें सिंगिदुनम भी शामिल है। रोमन दौर में यह सिंगिदुनम के नाम से जाना गया और बाद के समय में अलग अलग शक्तियों के अधीन आता जाता रहा। 15वीं सदी में ऑटोमन साम्राज्य के विस्तार के दौरान भी बेलग्रेड बड़े संघर्ष का केंद्र बना। शहर पर कब्जे के लिए कई बार लड़ाइयां हुईं और इसका किला लंबे समय तक रणनीतिक महत्व का केंद्र बना रहा।

आधुनिक इतिहास में भी बेलग्रेड को युद्धों से राहत नहीं मिली। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान शहर को भारी बमबारी झेलनी पड़ी। द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी के हमलों ने इसे बुरी तरह प्रभावित किया। युद्ध के बाद शहर ने खुद को दोबारा खड़ा किया और युगोस्लाविया की राजधानी के रूप में विकसित हुआ। लेकिन संघर्ष की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। 1990 के दशक में युगोस्लाविया के विघटन के दौर में बेलग्रेड फिर राजनीतिक उथल पुथल का केंद्र बना और 1999 में NATO की बमबारी ने शहर को एक बार फिर युद्ध का दर्द दिया।

बार बार होने वाली तबाही और पुनर्निर्माण ने बेलग्रेड की पहचान को ही बदल दिया। इसी वजह से इसे White Phoenix यानी सफेद फीनिक्स जैसे उपनाम से भी जोड़ा जाता है। फीनिक्स उस मिथकीय पक्षी को कहा जाता है जो राख से दोबारा जन्म लेता है और बेलग्रेड की कहानी भी कुछ ऐसी ही दिखाई देती है। युद्धों ने इसकी इमारतें गिराईं सीमाएं बदलीं और सत्ता बदलती रही लेकिन शहर हर बार नए रूप में सामने आया।

आज बेलग्रेड आधुनिक यूरोप का एक महत्वपूर्ण शहर है। उसकी सड़कों पर जिंदगी सामान्य दिखाई देती है लेकिन पुराने किले दीवारें और युद्ध संग्रहालय उसके अतीत की गवाही देते हैं। 115 युद्धों और 44 बार की तबाही के बावजूद इसका कायम रहना इस बात का प्रतीक है कि इतिहास में विनाश के साथ पुनर्निर्माण की कहानी भी लिखी जाती है। बेलग्रेड की दास्तान इसी जिद और जिजीविषा की कहानी है।