सरकार की सख्ती के बाद नरम पड़े शक्कर के थोक भाव….फिर भी फुटकर रेट नहीं हुए कम


नई दिल्ली।
चीनी (Sugar) के थोक भाव (Wholesale Prices) सरकार की सख्ती के बाद काफी नरम हुए, लेकिन रिटेल प्राइस (Retail Prices) में अभी बहुत अधिक नरमी देखने को नही मिल रही है। दिल्ली से गुवाहाटी तक जहां मंडी में चीनी सस्ती हुई है, वहीं खुदरा बाजार (Retail Market) में पिछले दो दिन से भाव स्थिर हैं। चीनीमंडी के मुताबिक मुंबई में 22 अगस्त को 1 क्विंटल चीनी का भाव 6750 रुपये था और अब ये 5200 रुपये पर आ गए हैं। दिल्ली में ऑल टाइम हाई (All-time High) 6600 से 2 सितंबर को चीनी के दाम 5700 रुपये क्विंटल ही रह गए।

इसी तरह कानपुर में थोक चीनी के लेटेस्ट भाव 5650 रुपये, रायपुर, रांची और कोलकाता में 5400 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। गुवाहटी में 5450 रुपये है तो हैदराबाद में 5300 और चेन्नई में 5900 रुपये क्विंटल। इन रेट्स में जीएसटी जुड़ा हुआ है।


रिटेल प्राइस में बदलाव नहीं

दो सितंबर को मुंबई, गुवाहटी में चीनी का रिटेल भाव 62 रुपये प्रति किलो था। रांची, दिल्ली, कानुपर, रायपुर, मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद में 1 किलो चीनी का भाव 61 रुपये पर टिका था। जबकि, चेन्नई में यह 63 रुपये किलो थी। इन शहरों में एक सितंबर को भी खुदरा बाजार में चीनी के रेट यही थे।


कितनी सस्ती हो चुकी है चीनी

सरकार की सख्ती और उपायों के चलते दिल्ली में 12 दिन में चीनी 7 रुपये सस्ती हुई है। कानपुर में चीन के भाव इस अवधि में 9 रुपये, रायपुर में 8 रुपये, मुंबई में 6 रुपये गिरे हैं। रांची में चीनी 70 रुपये से 61 रुपये पर आ गई है। गुवाहटी में 71 से 62 और कोलकाता में 70 से 61 रुपये पर आ गई है चीनी। हैदराबाद और चेन्नई में भी चीनी 22 अगस्त को 70 रुपये पर पहुंच गई थी।


सरकार ने क्या-क्या उठाए हैं कदम

कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं और डीलरों के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय की। सरकार ने चीनी की जमाखोरी और स्टॉक छिपाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी तेज कर दी है।

सरकार ने 21 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी थी। निर्यातक देशों से करीब 70-80 हजार टन चीनी वाली 3-4 खेपें पहले ही रवाना हो चुकी हैं। इसके अलावा भारतीय बंदरगाहों पर ही करीब 3-4 लाख टन चीनी रिफाइन होकर बाजार के लिए उपलब्ध होने की उम्मीद है।

खासकर त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार की कोशिश बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने की है। अगर ये सभी कदम उम्मीद के मुताबिक काम करते हैं, तो आने वाले हफ्तों में चीनी के भाव में और नरमी देखने को मिल सकती है।