Author: bharati

  • अशोकनगर में बिजली कटौती पर फूटा गुस्सा: विधायक संग पावर हाउस पहुंचे ग्रामीण

    अशोकनगर में बिजली कटौती पर फूटा गुस्सा: विधायक संग पावर हाउस पहुंचे ग्रामीण


    मध्य प्रदेश। भीषण गर्मी के बीच Ashoknagar जिले में अघोषित बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। मंगलवार को कई गांवों के लोग कोलवा रोड स्थित पावर हाउस पहुंचे और बिजली विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में स्थानीय विधायक Hari Babu Rai भी शामिल हुए।

    ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय अचानक बिजली काट दी जाती है, जिससे गर्मी में छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि लगातार बिजली जाने से बच्चों की तबीयत खराब हो रही है।

    विधायक हरी बाबू राय ने कहा कि पूरे क्षेत्र में रात के समय लगातार बिजली कटौती की जा रही है। विभाग से पूछने पर “भोपाल से लोड सेटिंग” का हवाला दिया जाता है। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में बिजली कटौती से लोगों की परेशानी बढ़ गई है और अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है।

    ग्रामीणों ने ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद समय पर बदलाव नहीं होने और बिजली बिलों में अनियमितता की शिकायत भी की। उनका कहना है कि महीनों तक ट्रांसफार्मर नहीं बदले जाते, जबकि बिल एक साथ आने से भुगतान करना मुश्किल हो जाता है।

    विधायक ने कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखेंगे और अघोषित बिजली कटौती बंद करने की मांग करेंगे।

  • बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने वालों के लिए बड़ा मौका, SBI में 7,150 पदों पर वैकेंसी

    बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने वालों के लिए बड़ा मौका, SBI में 7,150 पदों पर वैकेंसी

    नई दिल्ली । देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर पेश किया है। बैंक की ओर से अप्रेंटिस के 7,150 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण मौका माना जा रहा है। बड़ी संख्या में निकली इस भर्ती ने नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के बीच उत्साह बढ़ा दिया है।

    एसबीआई की इस भर्ती प्रक्रिया के तहत देशभर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियुक्तियां की जाएंगी। उम्मीदवारों का चयन क्षेत्रीय भाषा और संबंधित राज्य के आधार पर किया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।

    इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री होना जरूरी है। बैंक की ओर से जारी जानकारी के अनुसार चयनित उम्मीदवारों को एक वर्ष की अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसके दौरान उन्हें हर महीने स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाएगा।

    आयु सीमा की बात करें तो आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम उम्र 20 वर्ष और अधिकतम उम्र 28 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट भी दी जाएगी। इससे बड़ी संख्या में युवा इस भर्ती प्रक्रिया का लाभ उठा सकेंगे।

    चयन प्रक्रिया को कई चरणों में पूरा किया जाएगा। उम्मीदवारों को सबसे पहले ऑनलाइन लिखित परीक्षा देनी होगी। इसके बाद स्थानीय भाषा की परीक्षा, मेडिकल टेस्ट और मेरिट सूची के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा। माना जा रहा है कि लिखित परीक्षा जुलाई महीने में आयोजित की जा सकती है।

    आवेदन शुल्क भी श्रेणी के अनुसार तय किया गया है। सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को निर्धारित शुल्क जमा करना होगा, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग वर्ग के उम्मीदवारों को शुल्क में छूट दी गई है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है ताकि देशभर के उम्मीदवार आसानी से इसमें हिस्सा ले सकें।

    भर्ती प्रक्रिया के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले अप्रेंटिस पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। इसके बाद बैंक की आधिकारिक प्रक्रिया के अनुसार आवेदन फॉर्म भरना होगा। फॉर्म भरते समय सभी जरूरी दस्तावेज सही तरीके से अपलोड करना अनिवार्य होगा।

    बैंकिंग सेक्टर में स्थिर और बेहतर करियर की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह भर्ती एक बड़ा अवसर मानी जा रही है। बड़ी संख्या में पद होने के कारण उम्मीदवारों के पास चयन का अच्छा मौका रहेगा। ऐसे में योग्य अभ्यर्थियों को समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी जा रही है।

  • शादी में जाने के लिए गाड़ी मांगने पर हुआ विवाद, बेटे ने ले ली पिता की जान

    शादी में जाने के लिए गाड़ी मांगने पर हुआ विवाद, बेटे ने ले ली पिता की जान


    गुना। गुना जिले के म्याना थाना क्षेत्र में पिता की हत्या के सनसनीखेज मामले में आरोपी बेटे को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। बाइक की चाबी मांगने को लेकर हुए विवाद में अपने ही पिता की गैंती मारकर हत्या करने वाले आरोपी विकास जाटव की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।

    यह दिल दहला देने वाली घटना 24 अप्रैल को सगोरिया गांव में हुई थी। जानकारी के मुताबिक मृतक रमेश जाटव (40) पेशे से मकान निर्माण का ठेका लेने का काम करते थे। परिवार में उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। घटना वाले दिन शाम करीब 6 बजे रमेश अपने छोटे बेटे विवेक के साथ उमरी गांव में एक शादी समारोह में शामिल होने जाने की तैयारी कर रहे थे।

    घर से निकलने से पहले रमेश ने अपने बड़े बेटे विकास जाटव से बाइक की चाबी मांगी और उसे घर पर रुकने के लिए कहा। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। छोटे बेटे विवेक ने पुलिस को बताया कि विकास ने चाबी देने से इनकार करते हुए कहा कि उसने एक दिन पहले ही बाइक में पेट्रोल भरवाया है और पहले वह पेट्रोल निकाल लेगा, उसके बाद ही चाबी देगा।

    पिता रमेश ने बेटे की बात मानते हुए उससे कहा कि वह पेट्रोल निकाल ले और चाबी दे दे। इसके बाद विकास घर के अंदर गया, लेकिन चाबी लेकर लौटने के बजाय वह गैंती लेकर बाहर आया। आरोप है कि उसने अचानक अपने पिता के सिर पर गैंती से जोरदार हमला कर दिया। वार इतना गंभीर था कि रमेश मौके पर ही गिर पड़े और लहूलुहान हो गए।

    घटना के तुरंत बाद आरोपी बेटा मौके से फरार हो गया। परिजन गंभीर हालत में रमेश को लेकर म्याना अस्पताल के लिए निकले। रास्ते में उन्हें डायल-112 वाहन मिला, जिसके पुलिसकर्मियों की सलाह पर एंबुलेंस के जरिए रमेश को सीधे गुना जिला अस्पताल पहुंचाया गया। यहां इलाज के दौरान रात करीब 3 बजे उनकी मौत हो गई।

    पुलिस ने मामले में हत्या का प्रकरण दर्ज कर उसी दिन आरोपी विकास जाटव को गिरफ्तार कर लिया था। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष की ओर से जमानत की मांग की गई, लेकिन कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।

    घटना के बाद गांव और परिवार में शोक का माहौल है। स्थानीय लोग भी इस बात से स्तब्ध हैं कि मामूली विवाद ने पिता-पुत्र के रिश्ते को खून से रंग दिया।

  • पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी को राष्ट्र ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, नेताओं ने बताया जनसेवा का प्रतीक

    पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी को राष्ट्र ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, नेताओं ने बताया जनसेवा का प्रतीक

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ राजनेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी के निधन से देशभर में शोक की लहर फैल गई है। राजनीतिक और सामाजिक जीवन में अपनी सादगी, अनुशासन और ईमानदार छवि के लिए पहचाने जाने वाले खंडूरी के जाने को सार्वजनिक जीवन की बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनके निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सहित देश के कई वरिष्ठ नेताओं ने गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उन्हें राष्ट्रसेवा और सुशासन का प्रतीक बताया।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि भुवन चंद्र खंडूरी ने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, पारदर्शिता और विकास की राजनीति का आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सेना में उत्कृष्ट सेवाएं देने के बाद उन्होंने राजनीति में भी जनहित और सुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। राष्ट्रपति ने उनके योगदान को देश और विशेष रूप से उत्तराखंड के विकास के लिए अविस्मरणीय बताया।

    देश के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी खंडूरी के निधन को अपूरणीय क्षति करार दिया। नेताओं ने कहा कि उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में अनुशासन और राष्ट्रहित को हमेशा सर्वोपरि रखा। उनकी साफ-सुथरी छवि और जनसेवा के प्रति समर्पण उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान दिलाता था। उत्तराखंड में उनके कार्यकाल को सुशासन और विकास के लिए आज भी याद किया जाता है।

    भुवन चंद्र खंडूरी केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक पूर्व सैनिक भी थे जिन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दीं। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और सार्वजनिक जीवन में भी उसी अनुशासन और ईमानदारी को बनाए रखा। उनके नेतृत्व में कई विकास कार्यों को गति मिली और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए।

    राजनीतिक जीवन में उनकी छवि एक सादगीपूर्ण और कर्मठ नेता की रही। उन्होंने हमेशा साफ राजनीति और जनहित को प्राथमिकता दी। यही वजह रही कि अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोग भी उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली का सम्मान करते थे। उनके निधन के बाद देशभर से श्रद्धांजलियों का सिलसिला लगातार जारी है।

    उत्तराखंड की राजनीति में भुवन चंद्र खंडूरी का नाम एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण को अपनी राजनीति का आधार बनाया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा और सार्वजनिक जीवन में उनकी सादगी तथा ईमानदारी हमेशा उदाहरण के रूप में याद की जाएगी।

  • शिवपुरी में देर रात हमला: भैंस चुराने आए आरोपियों ने सरपंच को बनाया निशाना

    शिवपुरी में देर रात हमला: भैंस चुराने आए आरोपियों ने सरपंच को बनाया निशाना


    शिवपुरी। जिले के नरवर थाना क्षेत्र में सोमवार देर रात भैंस चोरी रोकने की कोशिश करना चार लोगों को भारी पड़ गया। हथियारबंद बदमाशों ने ग्राम बीलौनी के सरपंच सहित चार लोगों पर हमला कर बेरहमी से मारपीट की और मोबाइल, सोने की चेन व अंगूठी लूटकर फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, ग्राम बीलौनी के सरपंच बालकिशन जाटव अपने साथियों मुकेश जाटव, राजकुमार जाटव और कार चालक जगभान बघेल के साथ सोमवार रात एक शादी समारोह से लौट रहे थे। रात करीब 1 बजे जब उनकी कार नरवर गैस गोदाम के पास पहुंची, तब उन्होंने कुछ संदिग्ध लोगों को भैंसों को एक लोडिंग वाहन में चढ़ाते देखा। शक होने पर उन्होंने वाहन रोककर पूछताछ की।

    सरपंच बालकिशन जाटव के मुताबिक, जब उन्होंने भैंसों के बारे में सवाल किया तो वहां मौजूद लोगों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। इसी दौरान चालक जगभान बघेल ने भैंस चोरी की आशंका जताई। आरोप है कि यह सुनते ही एक बदमाश ने अपने साथियों से कहा, “पकड़ लो और गोली मार दो।” इसके बाद करीब 10 हथियारबंद बदमाशों ने चारों को घेर लिया।

    पीड़ितों का कहना है कि बदमाशों के पास लाठी, डंडे, सरिए और अवैध कट्टे थे। उन्होंने चारों लोगों के साथ जमकर मारपीट की। हमले में सरपंच बालकिशन जाटव की पीठ में गंभीर चोट आई, जबकि मुकेश जाटव की आंख, हाथ, पीठ और जांघ में चोटें आई हैं। राजकुमार जाटव और जगभान बघेल को भी शरीर के कई हिस्सों में चोट लगी। घटना के बाद सभी घायलों को नरवर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज किया गया।

    मारपीट के दौरान बदमाशों ने चारों लोगों के मोबाइल फोन, सोने की चेन और अंगूठी भी छीन ली। हालांकि हंगामा बढ़ता देख आरोपी भैंसों को मौके पर छोड़कर वाहन सहित फरार हो गए। पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।

    इधर, धवा की बावड़ी क्षेत्र निवासी जवाहर रावत की 9 भैंसें चोरी होने का मामला भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि भैंस चोरी की यह पूरी वारदात आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है। फुटेज में कुछ संदिग्ध लोग भैंसों को वाहन में ले जाते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।

    पुलिस का कहना है कि घटना गंभीर है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। इलाके में लगातार बढ़ रही पशु चोरी की घटनाओं से ग्रामीणों में भी नाराजगी है। ग्रामीणों ने पुलिस गश्त बढ़ाने और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • औरत ही औरत की दुश्मन टिप्पणी से गरमाया विवाद, ट्विशा शर्मा केस में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

    औरत ही औरत की दुश्मन टिप्पणी से गरमाया विवाद, ट्विशा शर्मा केस में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

    भोपाल से जुड़े मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले ने अब एक नया राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है, जहां इस संवेदनशील प्रकरण पर बयानबाजी तेज हो गई है। मामले को लेकर सार्वजनिक मंचों पर उठी टिप्पणियों ने विवाद को और गहरा कर दिया है और विभिन्न पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

    इस पूरे मामले में सबसे ताजा प्रतिक्रिया शिवसेना (यूबीटी) की सांसद Priyanka Chaturvedi की ओर से आई है, जिन्होंने ट्विशा शर्मा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि “औरत ही औरत की दुश्मन होती है” का कोई चेहरा होता, तो वह इस मामले में सामने आए बयान से जुड़ा हो सकता है। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

    यह विवाद तब और बढ़ गया जब गिरिबाला सिंह द्वारा मीडिया से बातचीत में दिए गए बयान सार्वजनिक हुए। उन्होंने दावा किया कि ट्विशा शर्मा गर्भावस्था से जुड़ी स्थिति के कारण मानसिक तनाव में थीं और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी की प्रक्रिया शुरू करने के बाद वह अपने फैसले को लेकर असमंजस में थीं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार ने स्थिति को संभालने की कोशिश की थी, लेकिन परिस्थितियां जटिल थीं। उनके इन बयानों के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    प्रियंका चतुर्वेदी ने इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सार्वजनिक रूप से बयान देना, जो अब इस दुनिया में नहीं है, उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ बयान दिए जाने चाहिए, ताकि पीड़ित पक्ष की छवि पर अनावश्यक प्रभाव न पड़े। उनके अनुसार, एक पूर्व न्यायिक पद पर रह चुकी व्यक्ति से अधिक संतुलित बयान की अपेक्षा की जाती है।

    इस बीच मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा तेज हो गई है, और लोग इस बात पर भी बहस कर रहे हैं कि व्यक्तिगत मामलों को सार्वजनिक मंचों पर किस हद तक लाया जाना चाहिए। यह घटना न केवल एक कानूनी और पारिवारिक विवाद बन गई है, बल्कि अब सामाजिक संवेदनशीलता और सार्वजनिक संवाद के स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुकी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में बयानबाजी से स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है, खासकर तब जब मामला पहले से ही न्यायिक या जांच प्रक्रिया के दायरे में हो। सार्वजनिक बयानों का प्रभाव न केवल कानूनी प्रक्रिया पर पड़ सकता है, बल्कि संबंधित परिवारों और व्यक्तियों की सामाजिक छवि पर भी असर डाल सकता है।

    फिलहाल इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, जिससे स्थिति और अधिक उलझती दिख रही है। राजनीतिक प्रतिक्रिया के जुड़ने के बाद यह मुद्दा अब केवल एक निजी विवाद न रहकर व्यापक सामाजिक और राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है।

  • NTA भंग करने की मांग तेज: शिवपुरी में छात्रों और युवाओं का विरोध प्रदर्शन

    NTA भंग करने की मांग तेज: शिवपुरी में छात्रों और युवाओं का विरोध प्रदर्शन


    शिवपुरी। नीट यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और बढ़ती बेरोजगारी के विरोध में मंगलवार को शिवपुरी में युवाओं का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। मूवमेंट अगेंस्ट अनएम्प्लॉयमेंट (एमएयू) की जिला इकाई ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करते हुए केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भंग करने, पेपर लीक मामलों की न्यायिक जांच कराने और प्रदेश में समाप्त किए जा रहे 1.20 लाख सरकारी पदों को बहाल करने की मांग की।

    प्रदर्शन में शामिल युवाओं और संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि नीट यूजी जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक होना देश की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उनका आरोप था कि लगातार हो रहे पेपर लीक से मेहनती और मेधावी छात्रों का भविष्य अंधकार में जा रहा है। संगठन का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी के कारण छात्रों और अभिभावकों में अविश्वास और मानसिक तनाव लगातार बढ़ रहा है।

    एमएयू कार्यकर्ताओं ने मांग उठाई कि नीट सहित सभी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में हुए पेपर लीक मामलों की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए। साथ ही इसमें शामिल अधिकारियों, एजेंसियों और अन्य दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि केवल जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत और स्थायी व्यवस्था बनाना जरूरी है।

    संगठन ने मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में भी बदलाव की मांग करते हुए कहा कि छात्रों को 12वीं कक्षा की मेरिट के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी सरकार के सीधे नियंत्रण में होनी चाहिए और एनटीए जैसी एजेंसी को समाप्त किया जाना चाहिए।

    ज्ञापन में बेरोजगारी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में लाखों सरकारी पद खाली होने के बावजूद स्थायी भर्तियां नहीं की जा रही हैं। उन्होंने प्रदेश में समाप्त किए जा रहे 1.20 लाख सरकारी पदों को बहाल कर सभी विभागों में नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। युवाओं का कहना था कि अस्थायी नियुक्तियों और आउटसोर्स व्यवस्था से रोजगार की स्थिरता खत्म हो रही है।

    प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की। वहीं स्थानीय छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शिवपुरी जिले में नीट परीक्षा केंद्र स्थापित करने की मांग रखी गई, ताकि विद्यार्थियों को दूसरे शहरों में जाकर परीक्षा देने की परेशानी न उठानी पड़े।

    एमएयू ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ठोस कदम नहीं उठाती, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • भारत-पाक बयानबाज़ी तेज: पाकिस्तान की गीदड़भभकी, आर्मी चीफ ने ऑपरेशन को बताया रणनीतिक शक्ति का उदाहरण

    भारत-पाक बयानबाज़ी तेज: पाकिस्तान की गीदड़भभकी, आर्मी चीफ ने ऑपरेशन को बताया रणनीतिक शक्ति का उदाहरण


    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर बयानबाज़ी का तनाव तेज हो गया है, जिसमें दोनों देशों की ओर से तीखी टिप्पणियां सामने आई हैं। हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की ओर से दिए गए बयान ने माहौल को और अधिक गर्म कर दिया, जिसमें भारत के खिलाफ कड़ी भाषा का इस्तेमाल करते हुए चेतावनी दी गई। इस बयान को क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ते तनाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां दोनों देशों के बीच शब्दों की जंग एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।

    पाकिस्तान की ओर से दिए गए बयान में भारत की नीतियों और सैन्य रुख पर सवाल उठाए गए और कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी गई। इस दौरान यह भी दावा किया गया कि पिछले तनावपूर्ण हालात में पाकिस्तान ने भारत को जवाब दिया था और अपनी स्थिति मजबूत दिखाई थी। साथ ही भारत की विदेश नीति और पड़ोसी देशों के साथ उसके संबंधों पर भी टिप्पणी की गई, जिससे कूटनीतिक स्तर पर चर्चा और बढ़ गई है।

    इसके जवाब में भारत की ओर से सैन्य और रणनीतिक नेतृत्व ने अपने दृष्टिकोण को मजबूती से सामने रखा है। भारतीय सेना प्रमुख ने हालिया संदर्भों में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए इसे आधुनिक रणनीति का एक उदाहरण बताया, जिसमें सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ सूचना प्रबंधन, कूटनीतिक संकेत और आर्थिक दबाव जैसे कई पहलुओं का संतुलित उपयोग किया गया। इस दृष्टिकोण को उन्होंने ‘स्मार्ट पावर’ की अवधारणा से जोड़ा, जो यह दर्शाता है कि आज की सुरक्षा रणनीति केवल सैन्य बल पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि बहुआयामी होती है।

    भारतीय सैन्य नेतृत्व का कहना है कि इस तरह की रणनीतियां न केवल सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी जवाब देती हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती हैं कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा व्यापक स्तर पर हो सके। यह दृष्टिकोण आधुनिक युद्ध और कूटनीति के बदलते स्वरूप को दर्शाता है, जहां निर्णय केवल मैदान तक सीमित नहीं रहते बल्कि सूचना और अंतरराष्ट्रीय संदेश भी उतने ही महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम में दोनों देशों की ओर से दिए गए बयानों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्रीय संबंधों में स्थिरता अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। जहां एक ओर तीखे शब्दों का आदान-प्रदान जारी है, वहीं दूसरी ओर रणनीतिक और सैन्य स्तर पर अपने-अपने दृष्टिकोण को मजबूत करने की कोशिश भी दिखाई दे रही है। इस स्थिति ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जहां हर बयान और हर प्रतिक्रिया का व्यापक प्रभाव देखने को मिलता है।

  • कोलकाता में बड़ा मामला: फरार आरोपी सोना पप्पू ईडी दफ्तर पहुंचा, लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार

    कोलकाता में बड़ा मामला: फरार आरोपी सोना पप्पू ईडी दफ्तर पहुंचा, लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार


    नई दिल्ली । कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के तहत एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां पिछले तीन महीनों से फरार चल रहा बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू अचानक सॉल्ट लेक स्थित ईडी कार्यालय पहुंच गया। उसके इस अचानक कदम ने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया, क्योंकि लंबे समय से वह लगातार फरार चल रहा था और कई बार समन जारी होने के बावजूद पेश नहीं हुआ था।

    सूत्रों के अनुसार, सोमवार सुबह सोना पप्पू ईडी कार्यालय पहुंचा और अंदर प्रवेश करते समय उसने खुद को व्यवसायी बताते हुए कहा कि वह कोई अपराधी नहीं है। हालांकि इसके बाद शुरू हुई पूछताछ कई घंटों तक चली, जिसमें जांच अधिकारियों ने उससे विभिन्न मामलों को लेकर सवाल-जवाब किए। करीब नौ घंटे से अधिक चली इस लंबी पूछताछ के बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

    जांच एजेंसियों का कहना है कि सोना पप्पू पर जबरन वसूली, जमीन हड़पने और अवैध वित्तीय लेनदेन से जुड़े गंभीर आरोप हैं। उसके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज होने की बात भी सामने आई है, जिनमें प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों को धमकाकर पैसे वसूलने और संपत्ति पर अवैध कब्जे जैसे आरोप शामिल हैं।

    इस मामले में यह भी जानकारी सामने आई है कि हाल के महीनों में पुलिस और ईडी की संयुक्त कार्रवाई के दौरान उसके कई ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जहां से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद की गई थी। इसके बाद से ही वह लगातार फरार चल रहा था और उसकी तलाश तेज कर दी गई थी।

    जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि फरारी के दौरान भी सोना पप्पू सोशल मीडिया के जरिए अपनी मौजूदगी का संकेत देता रहा और खुद को निर्दोष बताने की कोशिश करता रहा। हालांकि जांच एजेंसियों के पास मौजूद साक्ष्यों के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ती रही।

    ईडी सूत्रों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ यह भी संदेह है कि वह कोलकाता के विभिन्न इलाकों में सक्रिय कई नेटवर्क और सिंडिकेट्स के जरिए अवैध गतिविधियों को संचालित करता था। इन नेटवर्क्स के जरिए कथित रूप से वसूली और संपत्ति से जुड़े मामलों को नियंत्रित किया जाता था, जिससे कई लोगों पर दबाव बनाए जाने की बात सामने आई है।

    फिलहाल गिरफ्तारी के बाद उसे मंगलवार को अदालत में पेश किए जाने की तैयारी है, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने कोलकाता में प्रॉपर्टी और वित्तीय अपराधों से जुड़े नेटवर्क पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित कर दिया है और जांच एजेंसियां अब मामले की गहराई से जांच में जुट गई हैं।

  • पार्सल से 455 ग्राम अफीम बरामद: पूछताछ होते ही भाग निकला युवक

    पार्सल से 455 ग्राम अफीम बरामद: पूछताछ होते ही भाग निकला युवक

    मंदसौर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी के लिए अब तस्कर नए-नए तरीके अपना रहे हैं। मंदसौर में ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां चॉकलेट और कैंडी के रैपर में अफीम छिपाकर कनाडा भेजने की कोशिश की जा रही थी। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (CBN) ने नई आबादी पोस्ट ऑफिस से 455 ग्राम अवैध अफीम बरामद की है। मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम करीब 4 बजे एक युवक नई आबादी स्थित पोस्ट ऑफिस पहुंचा और कनाडा के ओंटारियो में इंटरनेशनल पार्सल भेजने की प्रक्रिया शुरू की। करीब दो किलो वजन के इस पार्सल को लेकर युवक ने दावा किया कि उसमें केवल चॉकलेट और कैंडी आइटम हैं। लेकिन उसकी गतिविधियां पोस्ट ऑफिस कर्मचारियों को संदिग्ध लगीं।

    पोस्टल असिस्टेंट ने जब पार्सल में रखी सामग्री को लेकर युवक से विस्तार से पूछताछ की, तो वह घबराने लगा। कर्मचारियों ने उससे और जानकारी मांगी तो वह अचानक पार्सल काउंटर पर ही छोड़कर मौके से फरार हो गया। युवक के इस व्यवहार से कर्मचारियों का शक और गहरा गया, जिसके बाद तुरंत सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स को सूचना दी गई।

    सूचना मिलते ही सीबीएन मंदसौर सेल की टीम मौके पर पहुंची और पार्सल की जांच शुरू की। करीब दो घंटे तक चली जांच में पार्सल के अंदर ‘लव पैन’ नाम की कैंडी के दो बॉक्स मिले। जब टीम ने कैंडी और चॉकलेट के रैपर खोले तो उनमें छिपाए गए 25 छोटे पाउच बरामद हुए। इन पाउचों में कुल 455 ग्राम अफीम भरी हुई थी। बाकी रैपरों में सामान्य कैंडी रखी गई थी, ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।

    सीबीएन अधिकारियों के मुताबिक, तस्करों ने ड्रग्स को छिपाने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह पार्सल नीमच क्षेत्र से कनाडा भेजा जाना था। एजेंसियों को आशंका है कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

    पोस्ट ऑफिस परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में संदिग्ध युवक की तस्वीर कैद हो गई है। अब जांच एजेंसियां फुटेज के आधार पर उसकी पहचान और गिरफ्तारी की कोशिश कर रही हैं। सीबीएन का कहना है कि एंटी ड्रग ऑपरेशन के तहत पहले से विशेष सूचना मिलने के बाद निगरानी बढ़ाई गई थी।

    पोस्टल असिस्टेंट प्रदीप मेहरा ने बताया कि युवक की घबराहट और संदिग्ध गतिविधियों के चलते उन्हें शक हुआ था। पूछताछ बढ़ाने पर वह सामान छोड़कर भाग गया, जिसके बाद तुरंत नारकोटिक्स टीम को बुलाया गया। फिलहाल जब्त अफीम को कब्जे में लेकर मामले की गहन जांच की जा रही है।